अंतरराष्ट्रीय

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08-Mar-2021 9:57 PM 13

म्यांमार में सैनिक तख्तापलट के खिलाफ विरोध बढ़ता जा रहा है. उधर सेना के कथित उत्पीड़न के खिलाफ भारत के पूर्वोत्तर राज्यों मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड में विरोध के स्वर लगातार तेज होने लगे हैं.

        डॉयचे वैले पर प्रभाकर मणि तिवारी की रिपोर्ट- 

म्यांमार में सैनिक शासन के खिलाफ प्रदर्शन जारी है और सेना का दमन भी. आज वहां ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आम हड़ताल हो रही है. म्यांमार में सैनिक दमन के खिलाफ भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में कई संगठन आवाज उठा रहे हैं. पिछले दिनों म्यांमार से आठ पुलिस वालों समेत 20 से ज्यादा लोगों के मिजोरम में शरण लेने और म्यांमारी सेना की ओर से उनको वापस भेजने की अपील के बाद केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ रोकने के लिए कड़ा कदम उठाने का निर्देश दिया है.

भारत-म्यांमार सीमा पर मुक्त आवाजाही का समझौता है जिसके तहत सीमावर्ती इलाकों में रहने वाली जनजातियों के आदिवासी बिना किसी वीजा के महज एक परमिट के आधार पर एक-दूसरे देश की सीमा में 16 किमी तक भीतर आ जा सकते हैं. इस सीमा के दस किमी के दायरे में 250 से ज्यादा गांव हैं जिनमें तीन लाख से ज्यादा की आबादी रहती है. ये लोग अक्सर डेढ़ सौ प्रवेश चौकियों से होकर सीमा के आर-पार आवाजाही करते रहे हैं. बीते महीने म्यांमार में सेना की ओर से तख्तापलट के बाद सीमा पार से इसी समझौते का लाभ उठा कर कई लोग मिजोरम के सीमावर्ती इलाकों में आए हैं. अब पुलिस वाले भी यहां आ रहे हैं. गैर-सरकारी सूत्रों के मुताबिक, म्यांमार से कम से कम तीस पुलिसवालों और उनके परिजनों ने मिजोरम में शरण ली है.

भारत के लिए संतुलन की मुश्किल
भारत सरकार उहापोह में है. म्यांमार के साथ उसके अच्छे संबंध हैं, लेकिन म्यांमार की सेना भारत के साथ संबंधों में चीन का तुरुप चलती रही है. सीमा पार से शरणार्थियों के भाग कर भारत आने की खबरों और इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच संभावित तनाव को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने असम राइफल्स को सीमा पार से लोगों के आने पर अंकुश लगाने को कहा है. पूर्वोत्तर में म्यांमार सीमा पर असम राइफल्स ही तैनात है. इस निर्देश में साफ कहा गया है कि बिना वैध पासपोर्ट और वीजा के म्यांमार से किसी को भारतीय सीमा में प्रवेश नहीं करने देना चाहिए.

म्यांमार सेना के खिलाफ बढ़ता विरोध
म्यांमार से पलायन कर मिजोरम पहुंचने वाले पुलिसवालों का कहना है कि उन्होंने सेना का आदेश मानने से इंकार कर दिया था. इससे उनकी जान को खतरा था. इसलिए मजबूरन उनको सपरिवार भारत आना पड़ा. मिजोरम के गृह मंत्रालय ने इन पुलिसवालों समेत कम के कम 16 म्यांमारी नागरिकों के राज्य में आने की पुष्टि की है. मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथंगा ने शुक्रवार को कहा था, "म्यांमार में हमारे भाइयों और बहनों को सेना के तख्तापलट की वजह से समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. हम उन लोगों का स्वागत करते हैं, जो अपनी जान बचाने के लिए मिजोरम आने पर मजबूर हैं. सरकार इस बात का ध्यान रख रही है कि वे भुखमरी का सामना न करें और इसलिए उसी के अनुरूप व्यवस्था की जा रही है.”

म्यांमार सेना के खिलाफ बनता माहौल
इस बीच, म्यांमार में सेना के कथित अत्याचारों और उत्पीड़न के खिलाफ वहां जारी नागरिक अवज्ञा आंदोलन (सीडीएम) को अब मिजोरम के अलावा मणिपुर और नागालैंड के मानवाधिकार संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा है. आल मणिपुर ट्राइबल यूनियन (एएमटीयू) के कार्यकारी अध्यक्ष रोमियो बंगडोन कहते हैं, "अंतरराष्ट्रीय समुदाय को म्यांमार में शीघ्र हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि आम लोगों को सेना के उत्पीड़न से बचाया जा सके.” एएमटीयू के साथ नागालैंड के टेनयिमी स्टूडेंट्स यूनियन ने भी म्यांमार के आम लोगों का समर्थन किया है. इस यूनियन में दस नागा जनजातियों के प्रतिनिधि शामिल हैं.

पूर्वोत्तर के चार राज्यों, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश की 1,643 किमी लंबी सीमा म्यामांर से लगी है. सीमावर्ती इलाकों में आबादी, बोली, रहन-सहन और संस्कृति में भी काफी समानताएं है. वहां रहने वाली जनजातियों में आपस में रोटी-बेटी का रिश्ता चलता है. म्यांमार में होने वाली किसी भी उथल-पुथल का खासकर मिजोरम पर सीधा असर पड़ता है. मिजोरम की 510 किलोमीटर लंबी सीमा म्यांमार से लगी है. राज्य की सबसे बड़ी मिजो जनजाति जातीय रूप से सीमा पार चिन राज्य की चिन जनजाति से जुड़ी है. चिन तबका मणिपुर के कूकी-जोमी समुदाय से भी जुड़ा है. म्यांमार में नागा जनजाति के लोग भी काफी तादाद में हैं. उनके संबंध मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में रहने वाले नागा जनजाति के लोगों से हैं.

म्यांमार से भागे पुलिसकर्मियों पर नजर
दूसरी ओर, म्यांमार ने भारत से अपने उन पुलिसकर्मियों को वापस लौटाने के लिए कहा है जो कुछ दिन पहले सीमा पार कर मिजोरम में शरण लेने पहुंचे थे. सीमावर्ती चंपाई की उपायुक्त मारिया सी टी जुआली ने इस बात की पुष्टि की कि म्यांमार के फलाम जिले के उपायुक्त ने मिजोरम आने वाले आठ पुलिसकर्मियों को सौंपने की मांग की है. जुआली ने पत्रकारों से कहा, "मुझे म्यांमार के फलाम जिले के उपायुक्त का एक पत्र मिला है जिसमें दोनों देशों के आपसी रिश्तों को ध्यान में रखते हुए आठ पुलिसकर्मियों को हिरासत में लेने और म्यांमार को सौंपने का अनुरोध किया गया है.” वे फिलहाल केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रही हैं.

नई दिल्ली स्थित संगठन नेशनल कैंपेन अगेंस्ट टार्चर (एनसीएटी) ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से अपील की है कि तख्तापलट के बाद म्यांमार से भाग कर भारत पहुंचने वाले लोगों को शरणार्थी का दर्जा देने की कार्रवाई शीघ्र शुरू की जानी चाहिए. संगठन के संयोजक सुहास चकमा कहते हैं, "भारत सरकार के पास शरण मांगने वालों के आवेदनों के निपटारे का कोई तंत्र नहीं होने की वजह से कई बार संवैधानिक दायित्वों का पालन नहीं हो पाता. सरकार ऐसे मामलों में अपनी मर्जी के मुताबिक फैसले लेती है. इसे रोकने के लिए इस मामले में मानवाधिकार आयोग का हस्तक्षेप जरूरी है.” (dw.com)


08-Mar-2021 9:51 PM 15

दुबई एयरपोर्ट पर अब यात्रियों की आंखें उनके पासपोर्ट का काम करेंगी. देश में आने या फिर वहां से जाने वालों की आंखों की पुतलियों से ही उनकी पहचान हो जाएगी और उन्हें अधिकारी के सामने पहचान साबित करने की जरूरत नहीं होगी.

    (dw.com)

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए सबसे ज्यादा व्यस्त दुबई एयरपोर्ट पहले से ही अपनी शानदार ड्यूटी फ्री दुकानों, कृत्रिम ताड़ के पेड़ों, चमचमाते टावरों और अत्यधिक ठंडा रखने वाली एसी के लिए विख्यात है. अब इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक नया आयाम भी जुड़ गया है. कोरोना महामारी के दौर में संयुक्त अरब अमीरात इंसानों के संपर्क को रोकने के लिए तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है. पुतलियों की पहचान करने वाले उपकरण और आइरिस स्कैनर का इस्तेमाल इसी कोशिश की ताजा कड़ी है. सरकार इसके जरिए वायरस के फैलाव को रोकने की कोशिश में है.

हालांकि इन कोशिशों ने सात अमीरातों में बड़े पैमाने पर लोगों की सर्विलांस के सवाल को भी उठाया है. संयुक्त अरब अमीरात प्रति व्यक्ति सर्विलांस कैमरों की संख्या के मामले में पहले से ही दुनिया में सबसे ऊपर है. दुबई एयरपोर्ट ने पिछले महीने ही यात्रियों को इस बारे में जानकारी देनी शुरू की. बीते रविवार यात्रियों ने चेक इन करने के बाद आइरिस स्कैनर का सामना किया. पासपोर्ट कंट्रोल की तुलना में यह इस लिहाज से ठीक है कि कुछ सेकंडों के भीतर ही यात्रियों को आगे जाने की अनुमति मिल गई. ऐसा लग रहा है कि कागज पर छपी टिकटों या मोबाइल ऐप के दिन चले गए हैं.

हाल के वर्षों में दुनिया भर के एयरपोर्ट समय बचाने के लिए फेशियल रिकॉग्निशन की तकनीक का इस्तेमाल यात्रियों को उनके विमानों तक पहुंचाने में कर रहे हैं. दुबई में आइरिस स्कैनर इसे एक कदम और आगे ले गया है. अब बात कॉमन एरिया के स्वचालित दरवाजे खुलने से आगे बढ़ गई है. अधिकारियों का कहना है कि फेशियल रिकॉग्निशन डाटाबेस में आइरिस के आंकड़े जोड़ने के बाद यात्रियों को किसी भी पहचान बताने वाले दस्तावेज या बोर्डिंग पास की जरूरत नहीं रहेगी. इसके लिए दुबई के सोवरेन वेल्थ फंड के स्वामित्व वाले एमिरेट्स एयरलाइंस और दुबई के एमिग्रेशन ऑफिस ने डाटा जमा करने के लिए करार हुआ है. इस तरह यात्री चेक इन से विमान तक बड़ी आसानी से पहुंच जाएंगे. निवास और विदेश मामलों के महानिदेशालय में उपनिदेशक मेजर जनरल ओबैद मेहायर बिन सुरूर का कहना है, "भविष्य आ रहा है. अब सारी प्रक्रियाएं स्मार्ट हो गई हैं और पांच से छह सेकंड में हो जाएंगी."

प्राइवेसी में सेंध का डर 
उधर फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक के उलट इस नई व्यवस्था में लोगों की प्राइवेसी में सेंध लगने का डर है. पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए पहले से ही संयुक्त अरब अमीरात की अंतरराष्ट्रीय आलोचना होती रही है.

एमिरेट्स के बायोमेट्रिक प्राइवेसी स्टेटमेंट के मुताबिक एयरलाइन यात्रियों के चेहरे को उनकी पहचान बताने वाले निजी आंकड़ों से जोड़ेगा जिनमें पासपोर्ट और फ्लाइट की जानकारी होगी. एयरलाइन इस जानकारी को, "जिस मकसद से इसे जमा किया गया है उसके लिए जब तक अपने पास रखना उचित रूप से जरूरी होगा, तब तक रखेगा."

इन आंकड़ों का किस तरह इस्तेमाल हो गया या इन्हें कैसे रखा जाएगा, इस बारे में काम ही जानकारी दी गई है. यह भी कहा गया है कि कंपनी यात्रियों के चेहरे की कॉपी नहीं बनाती लेकिन दूसरे आंकड़े एमिरेट्स के सिस्टम में रखे जा सकते हैं. बिन सुरूर ने इस बात पर जोर दिया कि दुबई का एमिग्रेशन ऑफिस यात्रियों के निजी डाटा को पूरी तरह से सुरक्षित रखता है और इसे कोई तीसरा नहीं देख सकता.

हालांकि आंकड़ों का कैसे इस्तेमाल होगा और उन्हें कैसे स्टोर किया जाएगा, इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं होने से इनके दुरूपयोग को लेकर आशंकाएं उठ रही हैं. मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में पीएचडी कर रहे जोनाथान फ्रैंकल का कहना है, "किसी भी तरह की सर्विलांस टेक्नोलॉजी खतरे की घंटी बजाती है, अब वह चाहे किसी तरह का देश हो. लेकिन एक लोकतांत्रिक देश में अगर सर्विलांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है तो वहां कम से कम इस पर सार्वजनिक बहस करने का मौका होता है.

कैसे काम करता है आइरिस स्कैनर
आइरिस स्कैन के लिए लोगों को कैमरे की तरफ उसी तरह देखना होता है जैसे कि वे अपनी उंगलियों से फिंगरप्रिंट देते हैं. बीते सालों में यह पूरी दुनिया में बहुत मशहूर हुआ है. हाल के दिनों में फेशियल रिकॉग्निशन के सटीक होने को लेकर भी सवाल उठे हैं. आइरिस बायोमेट्रिक को सर्विलांस कैमरों की तुलना में ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है. यह लोगों के चेहरे को दूर से ही स्कैन कर लेते हैं और लोगों को ना तो इसका पता चलता है ना ही उनकी अनुमति लेने की जरूरत होती है.

यूएई में अत्यधिक सर्विलांस को लेकर चिंता बढ़ने के बावजूद फेशियल रिकॉग्निशन नेटवर्क का विस्तार बढ़ता जा रहा है. पिछले महीने प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशित दल मक्तूम ने कहा कि नई फेशिलय रिकॉग्निशन तकनीक कागजी कार्रवाइ को निजी क्षेत्र की कई सेवाओं में घटा देगी. 

महामारी के दौर में गगनचुंबी इमारतों से भरा शहर तकनीक हथियार बना कर महामारी से लड़ रहा है. इनमें डिसइंफेक्टैंट फॉगर, थर्मल कैमरा और फेस स्कैन शामिल हैं. ये स्कैन मास्क के बारे में बताने के साथ ही इंसान का तापमान भी बता देते हैं. यह सिस्टम उन्हीं कैमरों का इस्तेमाल करते हैं जो देश के विशाल बायोमेट्रिक सिस्टम के लिए डाटा जमा कर उसे अपलोड करते हैं. एनआर/एके(एपी)


08-Mar-2021 7:37 PM 18

इस्लामाबाद, 8 मार्च | पाकिस्तान में अलग-अलग हमलों में दो पुलिस कर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई और दो अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने इसकी जानकारी सोमवार को दी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद पुलिस के उप महानिरीक्षक अफजल कौसर ने एक बयान में कहा कि कुछ अज्ञात बंदूकधारियों ने रविवार रात इस्लामाबाद के सेक्टर जी-13 इलाके में पुलिस की एक टीम पर स्वचालित हथियारों से गोलियां चलाईं।

कौसर ने कहा कि उप-निरीक्षक और दो कांस्टेबल हमले में घायल हो गए।

स्थानीय मीडिया ने बताया कि पुलिस और बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचे और घायलों को इस्लामाबाद के पाकिस्तान आयुर्विज्ञान संस्थान अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया, जहां पुलिस के एक कांस्टेबल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

अधिकारी ने कहा कि हमले की चपेट में आने पर पुलिसकर्मी अपनी नियमित गश्त ड्यूटी पर थे।

पुलिस अधिकारी ने कहा, "उन्होंने सर्च अभियान के तहत एक मोटरसाइकिल को रोकने की कोशिश की, लेकिन बंदूकधारियों ने पुलिस कर्मियों को गोली मार दी।"

आधिकारिक बयान के अनुसार, इससे पहले दिन में, रावलपिंडी के माल रोड इलाके में एक पुलिस निरीक्षक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। (आईएएनएस)

 


08-Mar-2021 2:48 PM 31

ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ के पोते प्रिंस हैरी और उनकी पत्नी मेगन मर्केल ने जानी-मानी अमेरिकी टीवी होस्ट ओप्रा विनफ्री को दिए इंटरव्यू में कई अहम बातें कही हैं.

अमेरिकी न्यूज़ चैनल सीबीएस पर प्रसारित इस बहुचर्चित इंटरव्यू में ओप्रा विनफ्री से मेगन ने कहा, ''मुझे शाही परिवार के बारे में उतना ही पता था जितना मेरे पति हैरी ने मुझे बताया था. लोगों की धारणा में ये एक परियों की दुनिया है लेकिन सच्चाई इससे काफ़ी अलग है.''

मेगन ने कहा कि शादी के दिन उन्हें पता था कि ये दिन उनके और हैरी के लिए नहीं था बल्कि ये दिन दुनिया के लिए था.

मेगन ने कहा, ''जब मैं महारानी से मिलने पहली बार जा रही थी तो वह विंडसर कैसल में थीं. मुझसे हैरी ने पूछा कि क्या मुझे महारानी से मिलने पर की जाने वाली औपचारिकताओं की जानकारी है? मेरे लिए ये हैरान करने वाला था क्योंकि मुझे नहीं पता था कि किसी प्राइवेट मुलाक़ात में ये औपचाकरिकताएं पूरी की जाती हैं.''

''मैंने पूरी औपचारिकताएं सीखीं और महारानी से मिली.''

मेगन ने ओप्रा विनफ्री को बताया कि उन्होंने प्रिंस हैरी के साथ शादी के सार्वजनिक समारोह से तीन दिन पहले ही शादी कर ली थी.

मेगन ने बताया, ''हमने आर्चबिशप ऑफ़ कैंटबरी से कहा कि ये समारोह दुनिया के लिए होगा लेकिन हम चाहते हैं कि हमारी शादी दुनिया से अलग हमारे लिए होनी चाहिए. ''

ओप्रा ने सवाल किया कि क्या फ्लावर गर्ल के कपड़ों को लेकर केट मिडल्टन और मेगन मार्केल के बीच हुई अनबन ने केट को रूला दिया था.

इसके जवाब में मेगन ने कहा, ''ये सनसनीखेज रिपोर्ट झूठी थी. इसके ठीक उलट हुआ था. केट फ्लावर गर्ल्स के कपड़ों लेकर ख़ुश नहीं थीं और इस बात ने मुझे रुला दिया. हालांकि, इसके बाद केट ने मेरे लिए फूल और एक नोट भेजा और माफ़ी मांगी.''

''मैं ये बात केट को नीचा दिखाने के लिए साझा नहीं कर रही हूँ. केट एक अच्छी इंसान हैं.'' केट मिडल्टन प्रिंस विलियम की पत्नी हैं.

मेगन ने अपने इंटरव्यू में शाही परिवार और 'फर्म' के बीच का अंतर बताते हुए कहा कि फर्म वे लोग हैं जो शाही परिवार के बिज़नेस से जुड़े लोग हैं.

मेगन ने कहा, ''महारानी का व्यवहार हमेशा मेरे साथ बेहतरीन रहा है. उनकी सोहबत में रहना मुझे काफ़ी अच्छा लगता था.''

साल 2018 की महारनी के साथ अपनी पहली सार्वजनिक उपस्थिति पर मेगन बताती हैं, ''मुझे महारानी ने मोतियों का सेट उपहार में दिया था.''

शाही परिवार के साथ रहने के अपने अनुभव पर मेगन कहती हैं ''कई दिनों तक बेहद अकेलापन महसूस करती थी. इतना कि मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी नहीं किया. कई तरह के नियमों से बांध दिया गया था. मैं दोस्तों के साथ लंच के लिए बाहर नहीं जा सकती थी.''

उन्होंने बताया, ''मैं हैरी के साथ अकेलापन महसूस नहीं करती थी, लेकिन जब उन्हें किसी काम से बाहर जाना पड़ता था तो कई बार आधी रात को ऐसे पल होते थे, जब मैं बहुत अकेला महसूस करती थीं. मुझे बहुत सी चीज़ें करने की इजाज़त नहीं थी. इसीलिए शायद अकेलापन बढ़ता गया.''

पिछले साल की शुरुआत में ही प्रिंस हैरी ने एलान किया था कि वो और उनकी पत्नी मेगन राजपरिवार के वरिष्ठ सदस्य की भूमिका से ख़ुद को अलग कर रहे हैं और वो अब ख़ुद को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने के लिए काम करेंगे.

ड्यूक और डचेज़ ऑफ़ ससेक्स के बारे में इस एलान से ब्रिटेन का राजपरिवार सकते में आ गया था.

प्रिंस हैरी और मेगन ने एक बयान जारी कर कहा था कि वे दोनों अब ब्रिटेन और उत्तरी अमरीका में अपना समय व्यतीत करेंगे.

बेटे आर्ची को प्रिंस की उपाधि नहीं
ओप्रा विनफ्री ने मेगन और हैरी के बेटे आर्ची को जन्म के समय 'प्रिंस' की उपाधि ना मिलने पर सवाल किया, जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि इस ख़बर से मुझे झटका लगा, इसलिए नहीं क्योंकि ये बस एक उपाधि है बल्कि उसकी सुरक्षा का सवाल अहम है.

''मेरे लिए सबसे बड़ी उपाधि 'माँ' है लेकिन ये कि हमारे बेटे के पास कोई सुरक्षा नहीं है. साथ ही वह शाही परिवार का पहला ग़ैर-गोरा पोता है लेकिन उसे वह जगह नहीं दी गई, जो उस परिवार के बाक़ी नाती-पोतों को दी जाती है.''

मेगन ने कहा कि वो नियम जिसके तहत मेरे बेटे को 'प्रिंस या प्रिंसेज' की उपाधि मिलती वह नियम तब बदले गए, जब मैं प्रेग्नेंट थी.

मेगन ने बताया, '' ये हक़ वो नहीं ले सकते थे. जब मैं प्रेग्नेंट थी तो उन लोगों ने कहा कि ये नियम आर्ची के लिए बदल चुका है, मेरा सवाल है क्यों? ''

ओप्रा ने सवाल किया कि मेगन को क्यों लगता है कि शाही परिवार आर्ची को प्रिंस नहीं बनाना चहता? क्या ऐसा उनके रंग के कराण किया जा रहा है?

इस सवाल के जवाब में मेगन ने कहा, '' मैं इसका ईमानदार जवाब दूंगी.''

''जब मैं प्रेग्नेंट थी तो ये तय हुआ था कि कि उसे सुरक्षा मिलेगी या नहीं, उसे उपाधि नहीं मिलेगी और इसके अलावा इस बात को लेकर चिंताएं और बातचीत होती थीं कि जब वह पैदा होगा तो उसकी त्वचा का रंग कितना काला होगा.''

हालांकि ओप्रा के बार-बार पूछने पर भी मेगन ने ये नहीं बताया कि आख़िर किसने ये चिंताएं ज़ाहिर की थीं.

नाम जानने के सवाल पर मेगन ने कहा, ''मुझे लगता है ये बताना उनकी साख़ को ज्यादा धूमिल कर देगा. मुझे ये बात हैरी ने बताई थी क्योंकि उनसे ऐसी बातें की जाती थीं.''

ओप्रा ने पूछा कि मेगन ने अपने अनुभवों को लेकर जब पहले 'अनसर्वाइवेबल' शब्द का इस्तेमाल किया था तो इसका क्या मतलब था.

मेगन कहती हैं, ''मैं ज़िंदा ही नहीं रहना चाहती थी. मैं ये बात हैरी को बताने में शर्मिंदा महसूस कर रही थीं क्योंकि उसने ज़िंदगी में बहुत कुछ खोया है. ये डराने वाला ख़याल मेरे दिमाग़ में हमेशा चलता रहता था.''

मेगन बताया कि इसके लिए उन्होंने 'संस्था' से मदद के तौर पर इजाज़त मांगी कि क्या वह कहीं जा कर ज़रूरी मदद ले सकती हैं लेकिन उनकी इस मांग को ख़ारिज कर दिया गया.

ओप्रा ने पूछा कि क्या उन्हें आत्महत्या का ख़याल आ रहा था? इसके जवाब में मेगन कहती हैं, ''हाँ, क्योंकि मुझे लग रहा था कि इससे सबके लिए सब कुछ ठीक हो जाएगा.''

'फ़र्म हमारे बारे में झूठी बातें फैला रहा है'
इंटरव्यू पर पैलेस की क्या प्रतिक्रिया होगी इस सवाल के जवाब में मेगन कहती हैं, ''मैं नहीं जानती कि वे कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि इसके बाद हम अब भी चुप रहेंगे जबकि फ़र्म हमारे बारे में झूठ फैलाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है.''

''एक वक़्त आता है जब आप तय करते हैं कि किसी को तो सच बोलना होगा, भले ही बहुत कुछ खो देने का रिस्क हो. हम पहले ही बहुत कुछ खो चुके हैं.''

मेगन दूसरी बार प्रेग्नेंट हैं और इस इंटरव्यू में ही प्रिंस हैरी ने बताया कि उनके घर में बेटी का जन्म होने वाला है.

क्या हैरी ने सीनियर रॉयल का पद छोड़ते हुए अपनी दादी और महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय की 'अनदेखी' की?

इसके जवाब में हैरी कहते हैं, ''मैंने कभी भी अपनी दादी की अनदेखी नहीं की है, उनके लिए मेरे मन में बेहद सम्मान है.''

उन्होंने बताया कि फ़ैसले की घोषणा से पहले महारानी से उन्होंने तीन बार फ़ोन पर बात की थी.

उन्होंने ये भी बताया कि उनके पिता चार्ल्स से भी दो बार फ़ोन पर बात की ''जिसके बाद उन्होंने मेरा फ़ोन ही उठाना बंद कर दिया.''

''मेरे पिता ने मुझसे इसलिए बात करना बंद कर दिया क्योंकि मैंने ये पूरा मामला अपने हाथों में ले लिया.''

'डर था कि इतिहास ख़ुद को दोहराने वाला है'
हम थोड़ा रूक कर 'चैन की सांस' लेना चाहते थे, लागातर एक के बाद एक कई चीज़ों में उलझे हुए थे.

''मेरा सबसे बड़ा डर था कि इतिहास ख़ुद को दोहराता नज़र आ रहा था, जो मुझे दिख रहा था वो यही था.''

उन्होंने कहा कि ''इस बार जो उनकी माँ के साथ हुआ उससे भी ज़्यादा ख़रनाक़ होता दिख रहा था क्योंकि इस बार मामला नस्लीय पहचान से भी जुड़ा था और सोशल मीडिया का प्रभाव भी काफ़ी बड़ा हो चुका है.''

हैरी ने बताया कि ''उन्होंने कई बार कहा कि इस तरह लगातार किसी की आलोचना नहीं होनी चाहिए और इसे रोका जाए लेकिन उन्हें जवाब 'मिला ऐसा ही होता है'.''

मेगन और हैरी ने बताया कि लागातार ओलोचनाओं, प्रतिबंधों की बौछार के कराण वह सीनियर रॉयल के पद से हटना चाहते थे लेकिन शाही परिवार का वो हिस्सा हैं और इस नाते वह शाही बने रहना चाहते थे, लेकिन उनसे सुरक्षा छिन ली गई और इसके पीछे उनके सीनियर रॉयल ना रहने के फ़ैसले का तर्क दिया गया.

'मैं दुखी हूं कि मेरे परिवार में नस्लीय भेदभाव का विरोध नहीं किया'
ओप्रा ने हैरी से पूछा कि मेगन के खु़दकुशी वाले ख़यालों से वो कैसे निपट सके? इस पर हैरी ने कहा, ''मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं? मैं इसके लिए तैयार नहीं था. मैं ख़ुद एक अंधेरी जगह पर पहुंच गया था.''

हैरी ने कहा कि उन्होंने शाही परिवार में किसी को ये नहीं बताया क्योंकि ''ये ऐसी बात नहीं थी जिसके बारे हम बात नहीं कर सकते थे.''

''उन लोगों को बताने में शायद मैं शर्मिंदा था. मेरे पास ऐसा कोई नहीं था जिसके पास मैं मदद के लिए जा सकता था. परिवार में लोगों की मानसिकता कुछ ऐसी है कि- जो है ऐसे ही होता है...इसे बदला नहीं जा सकता...हम सभी के साथ ये हुआ है. ''

''मेरे लिए लोगो के मुक़ाबले सबसे अलग मेगन की नस्लीय पहचान थी और ये नस्लीय पहचान सिर्फ़ उसकी नहीं थी बल्कि ये इस बारे में थी कि वह उस पहचान का प्रतिनिधित्व करती है.''

ये एक मौक़ा था कि वह (शाही परिवार) सार्वजनिक समर्थन दिखा सकते थे लेकिन सबसे दुखी करने वाली बात ये है कि किसी ने भी शाही परिवार से तीन सालों में इस पर कुछ भी नहीं कहा. (bbc.com)


08-Mar-2021 2:11 PM 23

काबुल, 8 मार्च | देश भर में हुई हिंसा की घटनाओं (झड़पों, हवाई हमलों) के बीच पिछले 24 घंटों के अंदर कम से कम 32 आतंकवादी मारे गए और 23 घायल हुए हैं। रविवार को डिफेंस मिनिस्ट्री ने बयान जारी कर कहा कि कंधार प्रांत में अफगान नेशनल डिफेंस एंड सिक्योरिटी फोर्सेस (एएनडीएसएफ) ने अरघंदब, पंजवई और जेरई जिलों में सैन्य अभियान चलाया।

इसमें कांधार जिले में 13 तालिबान आतंकवादी मारे गए और 7 घायल हुए। इस ऑपरेशन के दौरान अफगान एयर फोर्स (एएएफ) ने जमीनी बलों की मदद की। इसके अलावा एएनडीएसएफ ने हैवी मशीन गन और बड़ी मात्रा में हथियार ले जा रहे एक वाहन को भी नष्ट कर दिया है।

बयान के मुताबिक सेना की इंजीनियरिंग टीमों को कंधार के अरघंदब में 50 राउंड बारूदी सुरंग और इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) मिले, जिन्हें डिफ्यूज कर दिया गया।

वहीं मियांशिन जिले में तालिबान के 7 आतंकवादियों को मार गिराया गया और 3 घायल हुए। यहां शनिवार को एएएफ द्वारा हवाई हमले करके आतंकियों के हथियार और गोला-बारूद भी नष्ट किए थे।

सेना के एक सूत्र ने सिन्हुआ को बताया, "एएनडीएसएफ ने ओबे में आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाया। इसके अलावा पश्चिमी हेरात प्रांत के पश्तून जरगोन जिलों में, 4 आतंकवादियों को मार गिराया। साथ ही 7 आतंकी घायल हुए।"

इसके अलावा बल्ख प्रांत में पांच तालीबानी आतंकवादी मारे गए। वहीं कपीसा प्रांत के नीजरेब जिले में एक आईईडी समय से पूर्व ही फट गया, जिसकी चपेट में आकर तीन तालिबानी आतंकवादी मारे गए।

बता दें कि अफगानिस्तान के सरकारी प्रतिनिधिमंडल और तालिबान के प्रतिनिधियों के बीच कतर के दोहा में सितंबर 2020 से शांति वार्ता चल रही है लेकिन मामले में अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।  (आईएएनएस)
 


08-Mar-2021 1:13 PM 20

दमिश्क, 8 मार्च | सीरिया के केंद्रीय हामा प्रांत में बारुदी सुरंग विस्फोट की दो घटनाओं में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। समाचार एजेंसी सना ने यह जानकारी दी।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने रिपोर्ट के आधार पर कहा, सलामियाह क्षेत्र में दो वाहन बारुदी सुरंग की चपेट में आ गए।

क्षेत्र में रहने वाले आतंकवादियों ने इस जघन्य घटना को अंजाम दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, घायल लोगों की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

इससे पहले 27 फरवरी को हुए विस्फोट में पाचं लोगों की मौत हो गई थी और 13 अन्य घायल हो गए थे। (आईएएनएस)
 


08-Mar-2021 12:27 PM 16

स्विट्जरलैंड की जनता ने सार्वजनिक स्थलों पर चेहरे को ढंकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध के पक्ष में मतदान किया है. निर्णय के समर्थक इसे कट्टरपंथी इस्लाम से बचाव का एक कदम मान रहे हैं और विरोधी एक भेद-भाव भरा कदम.

   (dw.com)

आधिकारिक नतीजों के मुताबिक 51.2 प्रतिशत मतदाताओं ने प्रस्ताव का समर्थन किया, यानी प्रस्ताव के पास होने और नामंजूर होने के बीच का अंतर काफी कम रहा. कैंटन कहे जाने वाले देश के प्रांतों ने स्पष्ट बहुमत से प्रस्ताव का समर्थन किया. मतदान में 50.8 प्रतिशत मतदाताओं ने ही हिस्सा लिया. उनमें से कुल 14,26,992 मतदाताओं ने प्रस्ताव के समर्थन में मत डाला, जबकि 13,59,621 मतदाताओं ने विरोध में. 

स्विट्जरलैंड की सड़कों पर यूं भी बुर्का पहने महिलाएं बहुत कम ही नजर आती हैं, लेकिन यूरोप के कई दूसरे देशों में इस तरह के प्रतिबंध लागू होने के बाद इस देश में भी इस पर सालों से बहस चल रही थी. प्रस्ताव "चेहरे को पूरी तरह से ढंकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध को हां" कहने का था, लेकिन इसमें स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया कि बात बुर्के की हो रही है या नकाब की.

शहरों में अभियान से संबंधित जो पोस्टर लगाए गए थे उनमें एक काला नकाब पहने एक महिला को दिखाया गया था और उन पर लिखा था "कट्टरपंथी इस्लाम को रोको" और "चरमपंथ को रोको". अभियान के विरोधी पोस्टरों पर लिखा था, "एक बेतुके, व्यर्थ और इस्लाम के प्रति डर फैलाने वाले बुर्का-विरोधी कानून को ना." प्रतिबंध के लागू होने का मतलब है कि अब से सार्वजनिक जगहों पर कोई भी अपना चेहरा पूरी तरह से ढंक नहीं पाएगा, चाहे वो दुकान के अंदर को या बाहर खुले में.

पंथ-निरपेक्षता, महिलावादी कारणों से समर्थन
हालांकि प्रार्थना स्थलों, स्वास्थ्य कारणों और सुरक्षा कारणों से चेहरे को ढंकने की अनुमति मिलेगी. यह मतदान ऐसे समय पर आया है जब कोरोना वायरस महामारी की वजह से दुकानों में और सार्वजनिक यातायात पर चेहरे पर मास्क पहनना अनिवार्य बना दिया गया है.

दक्षिणपंथी स्विस पीपल्स पार्टी (एसवीपी) ने इस प्रस्ताव पर मतदान के अभियान का नेतृत्व किया था. पार्टी के प्रमुख मार्को चीजा ने मतदान के नतीजे पर राहत व्यक्त की. उन्होंने ब्लिक टीवी पर कहा, "हमें खुशी है. हमें अपने देश में कट्टरपंथी इस्लाम बिल्कुल नहीं चाहिए."

एसवीपी का कहना था कि मतदान से स्विट्जरलैंड की एकजुटता सुरक्षित रहेगी और राजनीतिक इस्लाम के खिलाफ लड़ाई को बल मिलेगा. पार्टी का कहना है कि राजनीतिक इस्लाम से देश के उदारवादी समाज को खतरा है. संसद में समाजवादी सांसदों के मुखिया रॉजर नॉर्डमैन ने अनुमान लगाया कि वामपंथी मतदाताओं में से एक-चौथाई ने पंथ-निरपेक्षता और महिलावादी कारणों से इस पहल का समर्थन किया होगा.

मुसलमानों के खिलाफ?
उन्होंने एटीएस समाचार एजेंसी को बताया, "कोई भी समस्या हल नहीं हुई है और महिलाओं को पहले से ज्यादा अधिकार भी नहीं मिले हैं. मुझे नहीं लगता कि कैंटनों में भी कोई बुर्का-विरोधी ब्रिगेड बनाए जाएंगे." देश की संसद के बाहर करीब 150 प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंध का विरोध जताया. स्विट्जरलैंड से पहले यूरोप में उसके पड़ोसी देश फ्रांस और ऑस्ट्रिया और उनके अलावा बेल्जियम, बुल्गारिया और डेनमार्क इस तरह के परिधानों पर पहले ही प्रतिबंध लगा चुके हैं.

कई दूसरे यूरोपीय देशों में सीमित रूप से इस तरह ले प्रतिबंध लागू हैं, जैसे स्कूलों और कॉलेजों में. स्विट्जरलैंड की सरकार और संसद ने राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध का विरोध किया था. न्याय मंत्री कैरिन केलर-सूटर ने एक समाचार वार्ता में कहा कि मतदान का नतीजा मुसलमानों के खिलाफ नहीं था और इससे देश की मुस्लिम आबादी का बस एक छोटा सा हिस्सा प्रभावित होगा.

2019 में हुए एक सरकारी सर्वेक्षण में पाया गया था कि देश की आबादी में 5.5 प्रतिशत मुसलमान हैं, जिनमें से अधिकतर की जड़ें पूर्व युगोस्लाविया में हैं. प्रतिबंध के विरोधियों का कहना है कि देश में जो चंद महिलाएं इस तरह के परिधान पहनती हैं वो या तो पर्यटक होती हैं या धर्म बदल कर इस्लाम ग्रहण करने वाली.

सीके/एए (एएफपी)


08-Mar-2021 12:21 PM 18

यमन के एक शरणार्थी हिरासत केंद्र में भीषण आग की वजह से खाड़ी देशों में नौकरी चाहने वाले कई लोगों की मौत हो गई. हादसे में 170 से अधिक लोग जख्मी हुए हैं.

   (dw.com)

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने कहा कि यमन की राजधानी सना में एक शरणार्थी हिरासत केंद्र में आग लगने से कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई और 170 से अधिक लोग घायल हो गए. शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की प्रवासी एजेंसी आईओएम की निदेशक कार्मेला गुडियो ने ट्विटर पर लिखा, "हम सना में हिरासत केंद्र में आग लगने के कारण शरणार्थियों और सुरक्षाकर्मियों की मौत से बेहद दुखी हैं." उन्होंने कहा कि आठ मौतों की पुष्टि हो गई थी, हालांकि "मौत का वास्तविक आंकड़ा बहुत अधिक हो सकता है."

संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि आग एक हैंगर से शुरू हुई जिसके पास 700 से अधिक शरणार्थी मौजूद थे. अधिकारी ने बताया कि अधिकतर प्रवासियों को सऊदी अरब में दाखिल होने की कोशिश के दौरान सादा के उत्तरी प्रांत में गिरफ्तार किया गया था. यमन में जारी संघर्ष के बावजूद लाखों शरणार्थी घरेलू कामगारों, निर्माण श्रमिकों और नौकरों के रूप में काम की तलाश में अफ्रीकी देशों से कठिन यात्रा और नदियों को पार करके तेल समृद्ध खाड़ी देशों तक पहुंचने का प्रयास जारी रखते हैं.

गुडियो ने लिखा कि रविवार की आग "पिछले छह सालों में यमन में शरणार्थियों के लिए कई खतरों में से एक था. हमें शरणार्थियों समेत सभी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत है."

बेहतर जीवन की तलाश

2019 में लगभग 1,38,000 लोगों ने यमन की यात्रा की. कोरोना वायरस महामारी के कारण 2020 में संख्या घटकर 37,000 रह गई. शरणार्थी अक्सर मानव तस्कर गिरोह के शिकार होते हैं. इनमें से कई गिरोहों को क्षेत्रीय संघर्ष में शामिल सशस्त्र समूहों का समर्थन और सहयोग प्राप्त है. मार्च की शुरुआत में कम से कम 20 शरणार्थी मारे गए थे, जब जिबूती से यमन के लिए एक भीड़भाड़ वाली नाव पर सवार 80 शरणार्थियों को तस्करों ने नदी में फेंक दिया था. यमन में 2014 से ईरानी समर्थित हूथी विद्रोहियों और सऊदी समर्थित सरकार के बीच संघर्ष जारी है.

इस बीच यमन के सरकारी बलों और देश के विभिन्न क्षेत्रों में हूथी विद्रोहियों के बीच पिछले 24 घंटों में हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई. सेना के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. अधिकारी ने समाचार एपी को बताया कि देश के दक्षिणी-पश्चिमी प्रांत ताइज के कई क्षेत्रों में और तेल समृद्ध मारिब प्रांत में हिंसक झड़पें देखने को मिली. अधिकारी ने कहा, "हूथी विद्रोहियों ने नई सैन्य प्रगति हासिल करने के प्रयास में मारिब और ताइज में सरकार द्वारा नियंत्रित क्षेत्रों के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन को अंजाम दिया."

उन्होंने कहा कि मारिब में लड़ाई में पिछले 24 घंटों के भीतर हूथी विद्रोहियों के लगभग 60 लड़ाके और सरकारी बलों के 36 सैनिक मारे गए. हूथी समूह ने ऐलान किया कि सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 26 से अधिक हवाई हमले किए, लेकिन हताहतों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी.  एए/सीके (एपी, डीपीए)


08-Mar-2021 11:54 AM 27

लंदन.  प्रिंस हैरी की पत्नी मेगन मार्कल ने ब्रिटेन के शाही परिवार पर भेदभाव के आरोप लगाए हैं. उन्होंने ये भी कहा है कि वो जिंदा नहीं रहना चाहती थी और आत्महत्या के बारे में सोच रही थीं. मार्कल ने ये खुलासे जानी-मानी अमेरिकी टीवी होस्ट ओपरा विनफ्री के साथ एक इंटरव्यू में कही है. उन्होंने इस इंटरव्यू में कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं. अमेरिकी न्यूज़ चैनल सीबीएस पर इस इंटरव्यू का टेलीकास्ट रविवार को किया गया.

मेगन मार्कल ने कहा कि जब वो मेंटल हेल्थ की समस्या से जूझ रही थी तो उनकी मदद नहीं की गई. इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि उनके बच्चे के रंग पर भी शाही परिवार की तरफ से चिंता जताई गई थी. बता दें कि मेगन के पिता गोरे हैं जबकि उनकी माता अश्वेत है. उन्होंने कहा, 'मैं जिंदा रहना नहीं चाहती थी. मेरे दिमाग में ये बातें लगातार चल रही थी.'

आत्महत्या करना चाहती थी
ओपरा विनफ्री ने मेगन मार्कल से पूछा कि क्या वो मुश्किल हालात में आत्महत्या के बारे में सोच रही थीं तो उन्होंने कहा, 'जी ये मेरे दिमाग में था. मैं इसके बारे में सोच रही थी. मैं उन दिनों बेहद डरी हुई थी'. बता दें कि महारानी एलिजाबेथ के दूसरे पोते हैरी और मेगन ने पिछले साल मार्च में फ्रंटलाइन रॉयल ड्यूटी छोड़ दी थी और अब कैलिफोर्निया में रहते हैं.

बच्चे के रंग पर सवाल
मार्कल ने ओपरा को बताया, 'उन महीनों में जब मैं गर्भवती थी तो तरह-तरह की बातें की जा रही थीं. कहा जा रहा था कि मेरे बच्चे को सुरक्षा नहीं दी जाएगी. उन्हें कोई टाइटल भी नहीं दिया जाएगा. साथ ही उसकी त्वचा कितनी काली हो सकती है. इस पर भी बात की जा रही थी.'

'काफी अकेली थी'
मेगन ने इंटरव्यू में भी खुलासा किया कि शाही परिवार से जुड़ने के बाद उनकी आजादी काफी कम हो गई थी. मेगन ने कहा कि रॉयल परिवार में जिंदगी काफी अकेली थी. उन्होंने कहा, 'कई दिनों तक बेहद अकेलापन महसूस करती थी. इतना कि मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी नहीं किया. कई तरह के नियमों से बांध दिया गया था. मैं दोस्तों के साथ लंच के लिए बाहर नहीं जा सकती थी.'  (news18.com)


08-Mar-2021 11:27 AM 21

-निखिला नटराजन 

न्यूयॉर्क, 8 मार्च| गूगल के पूर्व सीईओ एरिक श्मिट ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से 5जी के काम में तेजी लाने का अनुरोध किया है और इस बात की भी चेतावनी दी है कि चीन इस मामले में अमेरिका से करीब दस कदम आगे है और यह गंभीर स्थिति किसी आपातकाल से कम नहीं है।

श्मिट ने रविवार को सीएनएन को दिए साक्षात्कार में बताया, "मेरा अनुमान है कि 5जी के क्षेत्र में चीन हमसे लगभग 10 गुना आगे है। यह एक राष्ट्रीय आपातकाल है। संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए आवश्यक बैंडविड्थ और धन प्राप्त करने की आवश्यकता है ताकि इसमें आगे बढ़ा जा सके। हम पहले ही काफी पीछे चल रहे हैं और यह एक गंभीर स्थिति है।"

श्मिट की यह टिप्पणी चीन के हुवावे को लेकर है, जो कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में 5जी तकनीक में अग्रणी बनकर उभरी है।

ट्रंप प्रशासन ने साल 2020 में चीन में 5जी तकनीक के विक्रेताओं हुवावे और जेडटीई के खिलाफ एक अभियान की अगुवाई की थी। अमेरिका ने कहा था कि विदेशी बाजारों में अपनी पैठ जमाने के लिए हुवावे चीन का एक पिछला दरवाजा है और साथ ही यह राष्ट्रीय सुरक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, गोपनीयता और मानवाधिकारों के लिए किसी खतरे से कम नहीं है।

श्मिट ने एक ऐसे वक्त पर अपना यह बयान दिया है, जब हुवावे ने भारत में अपने नए करार पर मुहर लगा दी है।

द इकोनॉमिक टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारती एयरटेल ने हुवावे को लगभग 300 करोड़ रुपये का एक अनुबंध सौंपा है, जो बुनियादी ढांचे में विस्तार से संबंधित है। (आईएएनएस)


08-Mar-2021 8:48 AM 21

नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) और पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' की अगुवाई वाली नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के विलय को रद्द कर दिया.

साल 2017 के आम चुनाव में उनके गठबंधन की जीत के बाद 2018 में दोनों पार्टियों ने विलय कर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी बनाई थी.

हालांकि ऋषि राम कात्याल ने इस विलय के फै़सले के खि़लाफ एक याचिका दायर की जिसमें कहा गया था उन्होंने इस नाम से पहले ही एक पार्टी रजिस्टर करवा रखी है.

कत्याल ने मई 2018 में ओली और प्रचंड की नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) को पंजीकृत करने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फ़ैसला
जस्टिस वम कुमार श्रेष्ठ और कुमार रेगमी की संयुक्त पीठ ने रविवार को दो साल पुराने इस मामले में फैसला सुनाया. पीठ ने कहा कि पहले से पंजीकृत नाम से एक नई पार्टी का पंजीकरण नहीं किया जा सकता.

अदालत ने कहा कि अब नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकजुट मार्क्सवादी-लेनिनवादी) और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) विलय के पूर्व की स्थिति में लौट आएंगे.

इस फैसले के साथ ही संसद में अब की संख्या को दोनों पार्टियों की जीती गई सीटों के आधार पर बांट दिया जाएगा.

साल 2017 के चुनावों में, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकजुट मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने 121 सीटें जीती थीं और पाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने 53 .

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर उन्हें विलय करना है तो उन्हें चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार आवेदन करना होगा.

संयुक्त पीठ ने 69 वर्षीय ओली और 66 वर्षीय प्रचंड को एक बार फिर चुनाव आयोग के समक्ष एक अलग नाम का प्रस्ताव देते हुए आवेदन दायर करने का अवसर दिया है.

प्रचंड ने जब अपनी बेटी से कहा, तुम क्रांति के लिए शादी भी नहीं कर सकती?

नेपाल में ओली बने रहेंगे, प्रचंड आएँगे या फिर नया समीकरण बनेगा

चीन की तरफ़ झुकाव
फ़ैसले के बाद कत्याल ने कहा, "अगर वे अब संविधान के अनुसार जाना चाहते हैं तो मुझे लगता है कि उन्हें एक अलग नाम के साथ आना होगा. लेकिन वर्तमान स्थिति में, दोनों पक्ष सहमत नहीं दिखते हैं. वे अधिक परेशानी में प्रतीत हो रहे हैं."

ओली और प्रतिद्वंद्वी समूह दोनों नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी को नियंत्रित करने का दावा करते हैं. प्रचंड के साथ सत्ता के लिए रस्साकशी के बीच ओली को चीन की तरफ़ झुकाव के लिए जाना जाता है.

केपी शर्मा ओली ने पिछले साल 20 दिसंबर को संसद को भंग कर दिया था. ऐसी ख़बरें सामने आईं कि इस फैसले को लेकर पार्टी एकमत नहीं थी. पिछले महीने नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने संसद को बहाल रखने का फ़ैसला सुनाया था.

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने सुनवाई में प्रधानमंत्री केपी ओली के 20 दिसंबर को संसद भंग करने की सिफ़ारिश को असंवैधानिक करार दिया था. इतना ही नहीं अदालत ने 13 दिनों के भीतर संसद के निचले सदन की बैठक बुलाने के लिए प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और सदन के स्पीकर को आदेश जारी किया था.

नेपाल के सुप्रीम कोर्ट से पीएम ओली को झटका, संसद भंग के फ़ैसले को बताया असंवैधानिक

नेपाल में क्यों बढ़ रही है भारत विरोधी भावना? चीन में बढ़ी दिलचस्पी

ओली और प्रचंड समूह के नेताओं का क्या कहना है?
प्रधानमंत्री केपी शर्मा के निकट सहयोगी खगराज अधिकारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यह निर्णय एक वैध तरीके से किया जाना चाहिए और उन्होंने इसे सकारात्मक रूप से लिया है.

उन्होंने कहा, "अब अगर हम संतुष्ट हैं, तो साथ आ सकते हैं, नहीं तो हम अलग हो सकते हैं. तीन साल के हमारे साथ की समीक्षा के बाद ये फैसला लिया जाएगा कि आगे हमें क्या करना है."

उन्होंने कहा कि अगल पार्टी फिर से एकजुट नहीं होती है, तब भी वो मुद्दो पर साथ आ सकते हैं और साथ मिलकर काम कर सकते हैं.

रविवार को सदन के सदस्यों की बैठक शुरू हुई जिसमें कुछ सांसदों ने विरोध किया और फिर वॉकआउट कर गए. सदन के सदस्यों की बैठक अब बुधवार तक के लिए टाल दी गई है.(bbc.com)


07-Mar-2021 6:38 PM 31

वैसे तो उत्तर कोरिया को दुनिया का सबसे कटा हुआ और चुप्पा देश माना जाता है, जहां सैन्य तानाशाही के चलते कम ही बातें दुनिया तक पहुंचती हैं, लेकिन कई देश इस मामले में आगे हैं. रूस की ही बात करें तो इस देश में तीन खुफिया शहर थे, जो हाल ही में दुनिया के सामने आए. दशकों तक इन शहरों को देश के नक्शे से गायब रखा गया और कोई पता न लगा सके, इसलिए यहां के पोस्ट-कोड भी हटा दिए गए थे.

रूस के तीन शहर- सरोव, इलेक्ट्रोस्टल और देस्नोगॉर्क्स लंबे समय तक रूस के खुफिया अड्डे रहे. तीनों ही शहर एक वक्त पर सोवियत के खुफिया लैब्स का काम करते रहे, जब वो परमाणु हथियार के लिए अमेरिका से होड़ में था. सरोव के साइंटिफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सपेरिमेंटल फिजिक्स में रूस का पहला न्यूक्लियर बम तैयार किया गया था. तब किसी को खबर न हो, इसके लिए तीनों ही शहरों को नक्शे में भी नहीं दिखाया गया था.

साल 1990 में सोवियन यूनियन के बंटने के दौरान पहली बार दुनिया को इन खुफिया शहरों के बारे में पता चला कि ऐसे भी कोई शहर हैं. तब वहां तक ट्रेन या बसें भी नहीं जाती थीं, बल्कि पास के साथ बेहद खास लोग ही वहां पहुंच सकते थे. ये लोग परमाणु हथियारों पर काम कर रहे वैज्ञानिक, उनका परिवार और रूस में बड़े ओहदों पर बैठे लोग थे.

उन जगहों पर काम करते वैज्ञानिकों और कर्मचारियों तक जरूरी चिट्ठियां पहुंच सकें, इसके लिए यहां का खास पोस्टल कोड हुआ करता था, जैसे सरोव का पोस्टल कोड था- Arzamas-16. कोई नहीं जानता था कि वहां कौन रहते हैं और क्या करते हैं.

इन सीक्रेट शहरों में न्यूक्लियर वेपन पर काम कर रहे टॉप साइंटिस्ट और उनके परिवार होते हैं. साथ में उनकी मदद जैसे घरेलू कामों और खरीदारी के लिए स्टाफ रखा जाता. शहरों के भीतर ही स्कूल और मनोरंजन की चीजें मिलतीं. सब कुछ ऐसे बना हुआ है कि किसी को बाहर जाने की जरूरत न पड़े.

न्यूक्लियर हथियारों पर काम लेने से पहले वैज्ञानिकों से कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाया जाता, जिसमें अपनी पहचान जाहिर न करने की शपथ होती. गोपनीयता का ये अनुबंध एक बार दस्तखत के बाद पूरी जिंदगी लागू रहता है, चाहे वैज्ञानिक रिटायर ही हो जाएं. यहां तक कि उन्हें वोट करने का भी अधिकार नहीं रहता है. बदले में सरकार उन्हें और उनके परिवार को काफी सुविधाएं देती.

Sarov, Elektostal और Desnogorsk नामक इन तीन शहरों में अब भी जिंदगी प्रतिबंधित है. यहां रूस के टॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट हैं, जहां किसी न किसी खुफिया अभियान की तैयारी चलती रहती है. सरोव शहर खासतौर पर पूरी तरह से इलेक्ट्रिक बाड़े से घिरा हुआ है और पुलिस की पेट्रोलिंग चलती रहती है. यहां कोई भी बिना पास के भीतर नहीं जा सकता.

नब्बे के वक्त में सोवियत संघ के टूटने के बाद ये खुफिया शहर खाली होने लगे लेकिन प्रेसिडेंट व्लादीमिर पुतिन ने सत्ता संभालते ही इन शहरों पर ध्यान देना शुरू कर दिया. अब यहां पर परमाणु हथियारों के निवेश के लिए दोबारा खूब पैसा लगाया जा रहा है. साल 2019 में यहां की लैब में काम करने वाले 5 वैज्ञानिक मारे गए. किसी को नहीं पता कि असल में क्या हुआ था, हालांकि रूस की सरकार का कहना है कि वे एक रॉकेट इंजन टेस्ट के दौरान मारे गए. हालांकि इसके बाद उस बारे में कुछ पता नहीं लग सका और न ही स्थानीय से लेकर इंटरनेशनल मीडिया में कोई चर्चा हुई. (news18.com)


07-Mar-2021 3:48 PM 18

एलन मस्क अमेरिका के टेक्सास इलाके में स्टारबेस नाम का शहर बसाने की तैयारी में दिख रहे हैं. यह शहर उनकी कंपनी स्पेसएक्स के प्रक्षेपण केंद्र के पास बसाया जा सकता है. मस्क की स्पेसएकस टेक्सास के बोबा चिकागांव को अपने परीक्षण उड़ान केंद्र और प्रक्षेपण गतिविधियों के लिए उपयोग में लाती है. लेकिन अब मस्क इसके पास स्टारबेस नाम का शहर ही बसाने जा रहे हैं.

ट्वीट से मिली इस शहर के जानकारी
मस्क की योजना के बारे में उनके ही एक ट्वीट से पता चला जो उन्होंने हाल ही में किया था. इस ट्वीट में उन्हों ने कहा था कि उनका इरादा टेक्सास में स्टारबेस शहर बसाने का है. साल 2014से स्पेसएक्स का काम बोबाचिका गांव से हो रहा है जिसमें कंपनी अपने स्टारशिप रॉकेट प्रोटोटाइप विकसित करती है और उनका परीक्षण करती आ रही है.

मिल चुकी है मंजूरी
मस्क का कहना है कि उनका नया शहर बोबाचिका गांव से कहीं ज्यादा का इलाका घेरेगा. सूत्रों के मुताबिक कैमरून काउंटी, जहां यह शहर प्रस्तावित है, के जज ने मस्क की योजना को मंजूरी दे दी है. अपने बयान में जज ने कहा है कि स्पेसएक्स ने आधिकारिक रूप से स्टारबेस शहर के विकास के लिए कैमरून काउंटी प्रशासन से संपर्क किया था.

स्थानीय प्रशासन के कानूनों से बंध कर रहना होगा
अब कैमरून काउंटी कमिश्नर कोर्ट को मस्क के स्टारबेस परियोजना की जानकारी हाल ही में दी गई है. कंपनी को सारे नियमों से बंध कर रहना होगा और काउंटी किसी भी कानून के अनुपालन के लिए जरूरी समझे गए कदम उठा सकती है. मस्क को स्टारबेस शहर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले औपचारिक आवेदन करना होगा.

फिलहाल इस कार्यक्रम में है व्यस्तता
स्पेसएक्स फिलहाल स्टारशिप सुपर हैवी कार्यक्रम में व्यस्त है. यह कार्यक्रम चंद्रमा और मंगल पर मानवीय अभियान भेजने के पर काम कर रहा है जिसमें बहुत ही किफायतीऔर तेज स्पेसएक्स शटल उपयोग में लाए जाएंगे जिन्हें बार-बार उपयोग में लाया जा सकेगा. मस्क के स्पेस शटल रॉकेट 120 मीटर लंबा होगा और उसे जल्दी से फिर से उपयोग में लाया जा सकेगा.

आखिर क्यों फट गया एलन मस्क का स्टारशिप SN10 रॉकेट

बहुत सारे स्टारशिप की जरूरत
मस्क के शटल पृथ्वी से चंद्रमा या पृथ्वी से मंगल तक उपयोग में लाए जा सकते हैं. लेकिन स्टारशिप की उन्हें बहुत ज्यादा संख्या में जरूरत है. मंगल पर किसी यानको भेजना 26 महीने में एक ही बार ही भेजना मुफीद हो सकता है. ऐसे में वे कम से कम एक हजार स्टारशिप की तैयारी कर रह हैं.

बिजनेस कारणों से टेक्सास जा रहे हैं मस्क
स्पेसएक्स का मुख्यालय फिलहाल कैलिफोर्निया के  हॉथोर्न में हैं लेकिन मंगल ग्रह के लिए स्टारशिप का निर्माण कार्य वाणिज्यिक सहूलियत के लिए टेक्सास में किया जा रहा है. मस्क की दूसरी कंपनियां भी टेक्सास में तेजी से जमीन खरीद रही हैं. इतना ही नहीं कंपनी ऑस्टिन में नई फैक्ट्री भी खोलने जा रही है.

पहली बार दिखा ज्वालामुखी गतिविधि वाला बाह्यग्रह, पर अजीब है इसकी एक बात

मस्क ने पिछले साल ही कैलिफोर्निया से अपना काम समेटना शुरू कर दिया था और अपने मंगल की परियोजना के लिए अपनी संपत्ति बेच दी थी. मस्क की इस परियोजना के तहत साल 2026 तक वे मंगल पर सैकड़ों लोगों को भेजना चाहते हैं इसके लिए रीयूजेबल रॉकेट उनकी चरम प्रथामिकता है हाल ही में एसएन10 के परीक्षण के दौरान उनका यान विस्फोटित होने से पहले सफलता पूर्वक लैंड कर गया था.  (news18.com)
 


07-Mar-2021 3:47 PM 24

कहते हैं कि, न हौसलों के आगे न मुश्किलें आड़े आती हैं और न उम्र और न ही आपका जेंडर. इसी हौसले का नाम है आशा मोहम्मद. सोमालिया जैसे दुनिया के सबसे रूढ़िवादी और खतरनाक देशों में से एक जहां महिलाओं को हिजाब से आगे की दुनिया कम ही नजर आती है, वहां ये पुरुषों के लिए मुफीद माने जाने वाले ड्राइविंग के काम में अपने हाथ आजमा रही हैं, हालांकि औरतों के लिए ड्राइविंग बड़ी बात नहीं है, लेकिन सोमालिया में यह काम औरतों के बेखौफ जज्बे की पहचान है.

मकसद है बदले औरतों के लिए नजरियाः  

19 की उम्र में जब टीनएजर सपने बुनते हैं तब आशा अपने परिवार को पालने के लिए सारी रूढ़ियों और बंधनों को धता बताते हुए टैक्सी लेकर सड़क पर उतर आईं हैं.ऐसा नहीं है कि आशा मोहम्मद को यहां तक आने में कोई संघर्ष नहीं करना पड़ा. आशा तलाकशुदा महिला है ऐसे में उनके लिए ये राह और भी मुश्किल थी. वह रोजाना 40 डॉलर कमाती है, जिससे वह अपने परिवार चलाती है. वह एएफफी को कहती है कि वह यह काम केवल गुजारा चलाने के लिए ही नहीं है कर रही बल्कि इसके पीछे उनका मकसद है कि वह अपने देश के लोगों का औरतों के लिए नजरिया बदल पाएं. वह इसमें इतना योगदान दे पाएं कि लोग औरतों की भूमिका को भी अहमियत देना शुरू करें.

रंगीन हिजाब में बहादुरी की मिसालः  

बीते एक साल से सोमालिया की राजधानी मोगादिशु की सड़कों पर वह नकली फर से कवर्ड डैशबोर्ड वाली टैक्सी में कस्टमर्स को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए निकलती हैं.उनकी इस सफेद टैक्सी में जब कस्टमर चढ़ते हैं तो हल्के मेकअप में रंगीन हिजाब पहने इस युवा लड़की को स्टीयरिंग व्हील थामे देख आश्चर्य से भर उठते हैं. सोमालिया में एक लड़की को ऐसे देख कर इस तरह का जेस्चर होना नई बात नहीं है, क्योंकि यह देश महिलाओं के लिए बेहद सख्त नियम-कायदों का देश है.सलाम यूनिवर्सिटी के एक छात्र सादिक दाहिर के मुताबिक, जब वह पहली बार उन्हें पिक करने आईं तो वह हैरान थे, लेकिन आशा को देख उनका नज़रिया बदल गया. वह कहते हैं कि हालिया ही वह रिकाब टैक्सी सर्विस का इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि यह पुरुष-प्रधान काम है, लेकिन महिला टैक्सी ड्राइवरों को पसंद करते हैं, क्योंकि वे सेफ ड्राइव करती हैं और वक्त पर पहुंचती हैं.

ड्राइविंग करना जुनूनः  

आशा मोहम्मद का एक ड्राईवर बनना अचानक नहीं हुआ वह बचपन से ही इसे लेकर संजीदा थी और इसे अपना करियर बनाने की सोच रखती थीं. तलाक के बाद उनका जुनून उनकी जरूरत बन गया था, क्योंकि 16 साल की उम्र में जिस शख्स से उनकी शादी हुई वह उन पर दो छोटे बच्चों और उनकी मां की जिम्मेदारी छोड़ कर चला गया.वह कहती हैं,"बचपन में, एक दिन ड्राइवर बनना मेरा जुनून था, लेकिन मैं यह नहीं सोच रही थी कि मैं टैक्सी ड्राइवर के रूप में काम करूंगी." उनका कहना है कि उन्हें रिकाब टैक्सी नामक एक नई नवेली कंपनी ने यह मौका दिया और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

खतरनाक सड़कों पर दौड़ाती हैं टैक्सीः  

मोगादिशु में टैक्सी ड्राइविंग न केवल आम तौर पर पुरुषों के लिए रिज्वर्ड है, बल्कि खतरनाक भी है जहां सोमालिया के चरमपंथी संगठन अल-शबाब के लोग रोजाना चौराहों और सुरक्षा चौकियों पर कार बम सेट करते रहते हैं. हाल ही में 13 फरवरी को हुए एक विस्फोट में तीन लोग मारे गए थे और आठ घायल हो गए थे, लेकिन फोन पर रेसिंग वीडियो गेम खेलना पंसद करने वाली आशा मोहम्मद इस दौरान भी अपना काम करतीं रहीं. रिकाब टैक्सी सर्विस की महिला वित्त प्रमुख, इल्हाम अब्दुल्ला अली के मुताबिक,यहां सुरक्षा कारणों से महिला टैक्सी ड्राइवर्स की संख्या बेहद कम है, लेकिन धीरे- धीरे अब इनकी संख्या बढ़ने लगी है. हालांकि, अभी भी मोगादिशु में कंपनी की 2,000 टैक्सियों में से केवल तीन महिलाओं चला रही हैं.

प्राथमिकताओं की सूची में महिलाओं के अधिकार कम हैं, और 2012 के सबसे हालिया डेटा में संयुक्त राष्ट्र लिंग समानता सूचकांक में यह देश निचले चार देशों में है.
रिपोर्ट में लैंगिक असमानता को "खतरनाक तौर पर अधिक " बताया गया है, एक ऐसा देश जहां 98 फीसदी महिलाएं और लड़कियां जेनिटल म्यूटिलेशन का शिकार हुई हैं.
महिलाओं ने सूचकांक के सभी आयामों जैसे -सेहत, रोजगार और लेबर मार्केट में भागीदारी में गंभीर बहिष्कार और असमानता को झेला है.
यहां लड़कियों को बहुत कम उम्र में शादी कर दी जाती है और लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ व्यापक तौर पर हिंसा और अपराध होते हैं. (news18.com)


07-Mar-2021 3:46 PM 26

वाशिंगटन. अमेरिकी सीनेट ने कोरोना वायरस की मार से उबरने के लिए शनिवार को 1,900 अरब डॉलर के राहत पैकेज को मंजूरी दे दी. इसे अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और उनके डेमोक्रेटिक सहयोगियों की जीत माना जा रहा है.

बाइडन महामारी से निपटने और आर्थिक मंदी से देश को बाहर निकालने के लिए इस विधेयक को अहम बताते रहे हैं. सीनेट ने 49 के मुकाबले 50 मतों से इस विधेयक को मंजूरी दी.

रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य डैन सुलिवन मतदान में भाग नहीं ले पाए, क्योंकि उन्हें अपने ससुर के अंतिम संस्कार में शामिल होना था. सीनेट में शुक्रवार रात भी संसोधन पेश हुए, जिनमें से अधिकतर संशोधन रिपब्लिकन पार्टी ने पेश किए और सभी संशोधन खारिज कर दिए गए. रात भर जागने के बाद सीनेट ने शनिवार दोपहर को विधेयक को मंजूरी दी.

अब इस विधेयक को अगले सप्ताह मंजूरी के लिए प्रतिनिधि सभा भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे बाइडन के पास उनके हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा.
सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी के 50-50 सदस्य हैं और किसी विधेयक के पक्ष या विपक्ष में बराबर मत पड़ने पर उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के पास निर्णायक वोट देने का अधिकार है. ऐसे में इस विधेयक को पारित कराना बाइडन और डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए एक अहम राजनीतिक उपलब्धि भी है. प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 10 सदस्यों की मामूली बढ़त है.

इस विधेयक को पारित करना बाइडन की सबसे बड़ी शुरुआती प्राथमिकता है. इस विधेयक के तहत पूरी अमेरिकी अर्थव्यवस्था का करीब 10वां हिस्सा कोरोना वायरस से निपटने और सुस्त अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने पर खर्च किए जाने का प्रावधान है.

बाइडन ने मतदान के बाद व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, 'इस देश ने बहुत देर तक बहुत कुछ सहा है और यह पैकेज इन मुश्किलों को कम करने, देश की अत्यावश्यक जरूरतों को पूरा करने और हमें बेहतर स्थिति में पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है.'

इस विधेयक में अधिकतर अमेरिकी नागरिकों को सीधे 1,400 डॉलर का भुगतान किए जाने और आपात बेरोजगारी लाभ दिए जाने का प्रावधान है. (news18.com)


07-Mar-2021 1:21 PM 19

काहिरा, 7 मार्च | मिस्र के गीजा प्रांत में अल-कुरीमात राजमार्ग पर एक माइक्रोबस और ट्रक की टक्कर में कम से कम 20 लोग मारे गए और पांच अन्य घायल हो गए।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, ट्रक के टायर में विस्फोट होने के बाद शनिवार को यह दुर्घटना हुई, विस्फोट के बाद यह अनियंत्रित होकर माइक्रोबस से जा टकराया।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार मृतकों और घायलों को एंबुलेंस से पास के अस्पतालों में पहुंचाया गया।

पब्लिक प्रॉसिक्यूशन ने एक बयान में कहा गया है कि ट्रक चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

अहराम ऑनलाइन के मुताबिक, प्रॉसीक्यूशन ऑफिस की एक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।

मिस्र में खराब खराब सड़कों और शिथिल रूप से लागू यातायात नियमों के कारण दुर्घटनाएं आम हैं।

पिछले कुछ वर्षों में, मिस्र अपने सड़क नेटवर्क को दुरस्त कर रहा है, नई सड़कों और पुलों को बना रहा है, और यातायात दुर्घटनाओं को कम करने के लिए मौजूदा सड़कों की मरम्मत कर रहा है। (आईएएनएस)


07-Mar-2021 12:51 PM 23

पाकिस्तान में एक बार फिर हिंदुओं की सामूहिक हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है. मुलतान जिले में हुयी इस वारदात में अज्ञात हमलावरों ने एक हिंदू परिवार के 5 लोगों की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी. घटना के बाद से पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं और सिखों में डर पसर गया है. ये हिंदू परिवार मुलतान के पास रहीम यार खान शहर से 15 किलोमीटर दूर अबू धाबी कॉलोनी में रहता था. पुलिस ने मौके से चाकू और कुल्हाड़ी सहित कुछ और हथियार बरामद किए हैं. इस वारदात को अंजाम देने वाले हत्यारों की अब तक पहचान नहीं हो पाई है.

मेघवाल हिंदू का था परिवार 

रहीम यार खान के सामाजिक कार्यकर्ता बीरबल दास के अनुसार, इस परिवार के मुखिया राम चंद की उम्र 35-36 साल थी और वो लंबे समय से अपनी दर्जीं की दुकान चला रहे थे. राम चंद और उनका परिवार बेहद शांतिप्रिय और खुशहाल जीवन जी रहा था. ऐसे में यह घटना सभी के लिए काफी चौंकाने वाली है.

लगातार बढ़ रही हैं हिंदुओं पर अत्याचार की घटना

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं और सिखों पर अत्याचार की घटना लगातार बढ़ रहीं हैं. लगभग 6 महीने पहले कराची में एक हिंदू डॉक्टर का भी अज्ञात लोगों ने चाकू से गला रेतकर बेरहमी से कत्ल कर दिया गया था. डॉक्टर का नाम लाल चंद बागरी था वो सिंध प्रांत के तांदो अल्यहार में प्रैक्टिस करते थे. पाकिस्तान में ही 1947 से अल्पसंख्यक हिंदुओं और सिखों का उत्पीड़न जारी है. वहां पर हिंदू-सिखों की नाबालिग लड़कियों का अपहरण कर उनसे जबरन इस्लाम कबूल करवाना और फिर मुस्लिम युवकों के साथ उनका निकाह करवा देना आम बात है. वहां के हिंदू-सिख इस मामले पर लंबे समय से आवाज उठाते रहे हैं लेकिन आज तक उनकी शिकायत पर कभी ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. (abplive.com)
 


07-Mar-2021 10:32 AM 19

वॉशिंगटन, 7 मार्च| दुनियाभर में कोरोनावायरस मामलों की संख्या 11.64 करोड़ के पार पहुंच चुकी है जबकि 25.8 लाख से अधिक लोग इस बीमारी से अपनी जान गंवा चुके हैं। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी ने यह जानकारी दी है। यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर सिस्टम्स साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसएसई) ने रविवार सुबह अपने नवीनतम अपडेट में खुलासा किया कि वर्तमान वैश्विक मामलों और मौतों की संख्या क्रमश: 116,468,157 और 2,586,872 है।

सीएसएसई के अनुसार, दुनिया में सर्वाधिक 28,949,592 मामलों और 524,262 मौतों के साथ अमेरिका कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देश बना हुआ है।

वहीं, कोरोना के 11,192,088 मामलों के साथ भारत दूसरे स्थान पर है।

सीएसएसई के आंकड़ों ने दर्शाया कि कोरोना के 10 लाख से अधिक मामलों वाले अन्य देश ब्राजील (10,938,836), रूस (4,263,785), यूके (4,225,906), फ्रांस (3,942,243), स्पेन (3,149,012), इटली (3,046,762), तुर्की (2,769,230), जर्मनी (2,502,163), कोलम्बिया (2,273,245), अर्जेंटीना (2,146,714), मेक्सिको (2,119,305), पोलैंड (1,781,345), ईरान (1,681,682), दक्षिण अफ्रीका (1,520,206), यूक्रेन (1,442,457), इंडोनेशिया (1,373,836), पेरू (1,358,294), चेक गणराज्य (1,312,164) और नीदरलैंड (1,130,694) हैं।

वर्तमान में कोरोना से हुई मौतों के मामले में ब्राजील दुनियाभर में दूसरे स्थान पर है। यहां महामारी से 264,325 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बाद तीसरे स्थान पर मेक्सिको (189,578) और चौथे पर भारत (157,656) है।

इस बीच, 50,000 से ज्यादा मौतों वाले देश ब्रिटेन (124,654), इटली (99,578), फ्रांस (88,597), रूस (87,253), जर्मनी (71,899), स्पेन (71,138), ईरान (60,594), कोलम्बिया (60,412), अर्जेंटीना (52,870) और दक्षिण अफ्रीका (50,647) हैं। (आईएएनएस)


07-Mar-2021 10:26 AM 64

न्यूयॉर्क. अमेरिका से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. 23 साल की एक महिला को यौन उत्पीड़न का दोषी पाया गया है. पुलिस के मुताबिक ब्रिटनी ग्रे नाम की महिला ने 14 साल के लड़के के साथ शारीरिक संबंध बनाए. महिला की शिकायत मिलने पर पुलिस ने जांच शुरू की थी. छानबीन के बाद मामला कोर्ट पहुंचा, जहां इस महिला का पूरा राज़ खुल गया.

ये मामला पिछले साल का है. अमेरिका के अरकैंसास में पुलिस को एक बाल शोषण हॉटलाइन से सूचना मिली कि 23 साल की एक महिला के संबंध 14 साल के लड़के के साथ हैं. पुलिस को सबसे पहले इसकी खबर 28 फरवरी को दी गई. इसके बाद 29 सितंबर को इस महिला को लेकर एक और सूचना मिली. कहा गया कि ब्रिटनी उस लड़के का पिछले एक साल से शोषण कर रही है. इसके बाद पुलिस ने एक जासूस की मदद से महिला को रंगे हाथ पकड़ लिया.

वीडियो फुटेज में दिखी महिला
जासूस रॉन्डा थॉमस ने कोर्ट को बताया कि उसके पास उस महिला की मेडिकल रिपोर्ट भी है. इसमें लिखा है कि वो प्रेगनेंट है. कोर्ट के डॉक्यूमेंट में लिखा है कि उस हॉस्पिटल के वीडियो फुटेज भी हैं, जहां ये महिला चेकअप के लिए गई थी. वीडियो में साफ-साफ दिख रहा है कि महिला और 14 साल का लड़का दोनों एक हॉस्पिटल में घुस रहे हैं. 1 मार्च को आरोपी महिला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल उसको क्या सज़ा दी जाएगी इसका फैसला नहीं हुआ है. (news18.com)
 


07-Mar-2021 10:26 AM 21

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने 1995 में लागू किए गए ईरान संबंधी राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति को एक वर्ष तक बढ़ाने की घोषणा की है. 

यह एक प्रकार का कानूनी आधार है जिसके जरिये ईरान पर परमाणु हथियारों तथा आतंकवादी संगठनों का समर्थन करने को लेकर विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लगाए जाते हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति कायार्लय व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. राष्ट्रपति कायार्लय की ओर से जारी वक्तव्य के मुताबिक ईरान के संबंध में राष्ट्रीय आपातकाल अधिनियम की धारा 202 डी के अंतर्गत 15 मार्च 1995 को लागू किए गए राष्ट्रीय आपातकाल को 15 मार्च 2021 से आगे एक वर्ष तक बढ़ाया जाता है. 

बाइडन ने कहा कि ईरान की गतिविधियां और उसकी नीतियां अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति तथा अर्थव्यवस्था के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं. उन्होंने ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने के अलावा आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का भी आरोप लगाया. (news18.com)


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