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26-Sep-2020 2:36 PM

ढाका, 26 सितम्बर (आईएएनएस)| बांग्लादेश के सिलहट जिले के मुरारी चंद कॉलेज के एक हॉस्टल में एक महिला के साथ पुरुषों के एक समूह ने सामूहिक दुष्कर्म किया।

समाचार पत्र द डेली स्टार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कॉलेज गई महिला और उसके पति को अपराधी हॉस्टल ले गए, जहां उन्होंने पति को बांध दिया और शुक्रवार रात को महिला संग दुष्कर्म किया।

सिलहट मेट्रोपॉलिटन पुलिस (एसएमपी) के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (मीडिया) ज्योतिर्मय सरकार ने कहा, "सूचना पर, पुलिस ने दुष्कर्म पीड़िता और उसके पति को बचाया और देर रात 12.10 बजे के असपास सिलहट एमएजी उस्मानी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में वन-स्टॉप क्राइसिस सेंटर भेज दिया।"

उन्होंने कहा, "पुलिस अपराधियों की पहचान की पुष्टि करने और उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है।"

पुलिस सूत्रों का आरोप है कि अपराधी कॉलेज के छात्र थे।

घटना पर कॉलेज की प्रतिक्रिया आनी बाकी है।


26-Sep-2020 12:06 PM

अरुल लुईस 

संयुक्त राष्ट्र, 26 सितंबर (आईएएनएस)| भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए भाषण पर आईना दिखाते हुए करारा जवाब दिया है। इसमें पाकिस्तान को बांग्लादेश में नरसंहार के रिकॉर्ड को याद दिलाने समेत पाकिस्तानी धरती आतंकवादियों के लिए पनाहगाह बनाने और अल्पसंख्यकों के लिए दमन का अड्डा बनाने की बात कही। दरअसल, खान ने महासभा में पिछले साल के आरोप ही इस साल दोहराए जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर केंद्रित थे और कहा कि भारत अल्पसंख्यकों को सताने पर जोर दे रहा। खान ने संयुक्त राष्ट्र से कश्मीर में शांति सेना भेजने की भी अपील की। 

भारतीय संयुक्त राष्ट्र मिशन के प्रथम सचिव मिजितो विनितो ने शुक्रवार को इस पर जबाव देते हुए कहा, "मैं जोर देकर यह बात कहता हूं कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है। वहां लागू किए गए नियम-कानून भारत का आंतरिक मामला है।"

उन्होंने कहा, कश्मीरी क्षेत्र पर इस्लामाबाद का अवैध कब्जा है, जिसे खाली करना होगा। साथ ही कहा कि खान के भाषण में नयापन बहुत कम था। 

विनितो ने कहा, "पाकिस्तान शांति, संवाद और कूटनीति जैसे आधुनिक सभ्य समाज के सिद्धांत दूर है। उनके पास न दिखाने के लिए कुछ है ना बोलने के लिए कोई उपलब्धि हैऔर ना दुनिया के लिए कोई उचित सुझाव है।"

उन्होंने आगे कहा, "पिछले 70 वर्षो में दुनिया को जो एकमात्र गौरव उन्होंने दिया है, वह है आतंकवाद, नैतिकता का पतन, कट्टरवाद और अवैध परमाणु व्यापार।"

विनीतो ने पाकिस्तान को बांग्लादेश में किए गए नरसंहार का रिकॉर्ड भी याद दिलाया, जिसके लिए उसने आज तक माफी भी नहीं मांगा। 

वहीं आतंकवाद में पाकिस्तान के रिकॉर्ड पर विनितो ने याद दिलाया कि खान ने अल कायदा के प्रमुख आतंकवादी को 'शहीद' कहा था। वहीं पाकिस्तान ने "संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित किए गए आतंकवादियों में से कई की सालों का मेजबानी की।"

विनितो ने कहा, "ये वही नेता हैं जिन्होंने पिछले साल खुद सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि पाकिस्तान के पास 30,000 से 40,000 प्रशिक्षित आतंकवादी हैं। यह वह देश है जिसने अपने ईश निंदा कानूनों का दुरुपयोग कर हिंदुओं, ईसाइयों, सिखों और अन्य अल्पसंख्यकों का धर्मांतरण किया।"

वहीं पाकिस्तान के प्रथम सचिव मुहम्मद जुल्कारनैन छीना ने कहा कि इस साल के शुरू में दिल्ली के शाहीन बाग में हुए दंगों ने हिंदुत्व की विचारधारा को उजागर किया।

उन्होंने कुलभूषण जाधव का भी जिक्र किया जिनके बारे में भारत का कहना है कि उन्हें ईरान से अगवा करके पाकिस्तान ले जाया गया था।


26-Sep-2020 10:38 AM

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की गुरुवार को हुई 19वीं बैठक में भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर और आतंकवाद के मसले पर बहस छिड़ गई.

दोनों देशों में से किसी ने साफतौर पर एक-दूसरे का नाम नहीं लिया लेकिन फिर भी अप्रत्यक्ष तौर पर अपनी बात कह गए.

सार्क देशों के विदेश मंत्रियों की ये वार्षिक अनौपचारिक बैठक वर्चुअली हुई थी. इसमें भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अप्रत्यक्ष तौर पर पाकिस्तान पर निशाना साधा.

बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सार्क के सभी सदस्य देशों से कहा, ''वे सामूहिक रूप से आतंकवाद के संकट को और आंतक व टकराव को पोषित करने, सहायता देने और बढ़ावा देने वाली ताकतों को हराने के लिए प्रतिबद्धता जताएं. ये दक्षिण एशिया में सामूहिक सहयोग और समृद्धि के सार्क के उद्देश्य में रुकावट पैदा करता है.''

हालांकि, इस दौरान एस जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया.

वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने सार्क के मंच से लंबे समय से चलते आ रहे विवादों के समाधान पर एक विस्तृत बयान दिया. हालांकि, उन्होंने इसमें साफतौर पर जम्मू-कश्मीर का नाम नहीं लिया लेकिन परोक्ष तौर पर उनका संदर्भ जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने को लेकर था.

शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा, ''हमें विवादित क्षेत्रों में एकपक्षीय/अवैध तरीके से यथास्थिति बदलने की कोशिशों की निंदा और विरोध ज़रूर करना चाहिए, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन करती हैं.''

क़ुरैशी ने इस दौरान लंबे समय से चले रहे विवादों के कारण लोगों के मानवाधिकारों के व्यवस्थित उल्लंघन का ज़िक्र भी किया.

नेपाल ने की अध्यक्षता

इस बैठक की अध्यक्षता नेपाल कर रहा था. इसमें सार्क के सभी सदस्य देशों अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका के विदेश मंत्री शामिल थे.

हालांकि, सभी सार्क देशों ने इस बैठक में कोरोना वायरस से लड़ने में सहयोग देने को लेकर प्रतिबद्धता जताई. एस. जयशंकर ने कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ उठाए गए भारत के कदमों का भी ज़िक्र किया.

सार्क दक्षिण एशिया के सात देशों का संगठन है. आठ दिसंबर 1985 को बने इस संगठन का उद्देश्य दक्षिण एशिया में आपसी सहयोग से शांति और प्रगति हासिल करना है.

सीआईसीए में भी विवाद

इस तरह का बयान गुरुवार को हुई कॉन्फ्रेंस ऑन इंटरैक्शन ऐंड कॉन्फिडेंस-बिल्डिंग मेज़र्स इन एशिया (सीआईसीए) की मंत्रीस्तरीय बैठक में भी जारी किया गया.

27 देशों की इस बैठक में पाकिस्तान ने कश्मीर का मुद्दा उठाया. जिसका भारत ने राइट टू रिप्लाई के तहत जवाब दिया.

भारत ने कहा, ''हम पाकिस्तान को सलाह देते हैं कि वो भारत के ख़िलाफ़ आंतकवाद को अपनी स्पॉन्सरशिप और समर्थन देना बंद करे. केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा रहे हैं और रहेंगे. पाकिस्तान को भारत के घरेलू मुद्दों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है. पाकिस्तान का बयान भारत के आंतरिक मुद्दों, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता में दखल है जो सीआईसीए के सदस्यों के बीच 1999 में संबंध मार्गदर्शक सिद्धांतों पर की गई सीआईसीए घोषणा का उल्लंघन है.''

जब बैठक छोड़कर कर गए भारत-पाक

भारत और पाकिस्तान के बीच पहले भी अंतरराष्ट्रीय बैठकों में विवाद होता रहा है.

पिछले हफ़्ते भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल शंघाई सहयोग संगठन की वर्चुअल बैठक को तब छोड़कर चले गए थे जब पाकिस्तान ने भारत के दावे वाले इलाक़ों को अपने नक़्शे में दिखाया था.

पिछले साल सार्क की बैठक में एस. जयशंकर और शाह महमूद क़ुरैशी ने दोनों के भाषणों का बहिष्कार किया था.

सार्क की 19वीं बैठक पहले साल 2016 में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली थी लेकिन उरी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था. कई और देशों ने भी इसमें भारत का साथ दिया था.(bbc)


26-Sep-2020 10:11 AM

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि दुनियाभर में एक कोरोना वायरस वैक्सीन बनने से पहले COVID-19 से वैश्विक मौतों का आंकड़ा 20 लाख को पार कर सकता है. यू.एन. एजेंसी के आपात कार्यक्रम के प्रमुख माइक रयान ने शुक्रवार को एक ब्रीफिंग में कहा जब तक हम यह सब नहीं करते, 20 लाख लोगों के मौत की संभावना है. चीन में कोरोना वायरस के पता चलने के नौ महीने बाद होने वाली मौतों की संख्या 10 लाख के करीब है. रयान ने कहा कि हाल ही में बढ़ती चिंताओं के बावजूद संक्रमण के लिए युवा लोगों को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए क्योंकि वे दुनिया भर में प्रतिबंध और लॉकडाउन के बाद इसका प्रसार बढ़ा रहे हैं.''

WHO चीन के साथ वैक्सीन से वित्त पोषण योजना में अपनी संभावित भागीदारी के बारे में निरंतर बातचीत कर रहा है, जो कि COVID-19 टीकों को वैश्विक स्तर पर तेजी से और समान पहुंच की गारंटी देने के लिए बनाई गई है. COVID -19 के खिलाफ टीके, उपचार और डायग्नोस्टिक्स के लिए WHO के वरिष्ठ सलाहकार ब्रूस आयलवर्ड ने कहा "हम चीन के साथ चर्चा कर रहे हैं, जैसा कि हम आगे बढ़ सकते हैं." उन्होंने पुष्टि की कि ताइवान ने इस योजना पर हस्ताक्षर किए हैं, हालांकि डब्ल्यूएचओ का सदस्य नहीं है.

चीन की एक फार्मास्यूटिकल कंपनी ने दावा किया है कि साल 2021 की शुरुआत से अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस वैक्सीन डिट्रिब्यूशन के लिए तैयार हो जाएगी. SinoVac के सीईओ, यिन वेइदॉन्ग ने कहा कि अगर यह ह्यूमन ट्रायल के तीसरे फेज में सफल होती है तो अमेरिका में CoronaVac को बेचने के लिए यूएस फ़ूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन से जल्द आवेदन किया जायेगा.

यिन ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से इस वैक्सीन प्रायोगिक टीका दिया गया है. उन्होने कहा "शुरुआत में हमारी रणनीति इस वैक्सीन को चीन के लिए और वुहान के लिए डिज़ाइन की थी. इसके तुरंत बाद जून और जुलाई में हमने अपनी रणनीति में बदलाव किया और इसे दुनिया तैयार करने का फैसला किया. शुक्रवार तक भारत में COVID-19 पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या 58,18,571 थी, जिसमें 9,70,116 सक्रिय मामले थे. अब तक 47,56,165 लोगो को रिकवर किया गया है.(catch)


26-Sep-2020 10:00 AM

कीव. यूक्रेन (Ukraine) में एक विमान हादसा (Airforce Plane Crash) का शिकार हो गया. इस हादसे में अबतक 25 लोगों के मारे जाने की खबर है. यह विमान यूक्रेन की वायुसेना का है. सूत्रों के मुताबिक इस दुघर्टन में मिलिट्री कैडेट्स समेत 25 लोग (Twenty Two Military Cadets Died) मारे गए हैं. इसके अलावे दो लोगों के बहुत ही गंभीर रूप से घायल होने की सूचना मिली है. यह हादसा यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में खारकीव इलाके में हुई है. यूक्रेन के एक मंत्री ने इस हादसे की पुष्टि की है. उप गृह मंत्री एंटोन गेराशेंको (Deputy Interior Minister Anton Gerashchenko) ने एफपी को जानकारी देते हुए कहा ​कि हादसे में 25 लोग मारे गए हैं जबकि दो घायल हुए हैं.

विमान में 28 लोग थे सवार, दो अभी भी लापता

एंटोन गेराशेंको ने यह बताया कि दो लोग लापता हैं, जिनकी खोज जारी है. उन्होंने बताया कि ट्रांसपोर्ट प्लेन में 28 लोग सवार थे. इनमें से 21 मिलिट्री स्टूडेंट्स थे जबकि 7 विमान के क्रू के सदस्य थे. मंत्री ने बताया कि हादसे की वजह का पता अभी नहीं चल पाया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि वह आज हादसे के इलाके का दौरा करेंगे. राष्ट्रपति ने फेसबुक पर लिखा है कि हम सभी परिस्थितियों और त्रासदी के कारणों की जांच के लिए तत्काल एक आयोग का गठन कर रहे हैं.

खबरों के मुताबिक कि एंटोनोव -26 परिवहन विमान यूक्रेन के समयानुसार रात 8:50 बजे चुहिव एयरफोर्सह वाई अड्डे से दो किलोमीटर की दूरी पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. दुर्घटना के बाद विमान में आग लग गई. आग पर काबू पाने में एक घंटे लगे लेकिन तब तक विमान के अंदर सवार लोग बुरी तरह झुलस चुके थे.(news18)


26-Sep-2020 9:47 AM

वाशिंगटन, 26 सितम्बर (आईएएनएस)| दुनियाभर में कोरोनोवायरस मामलों की 3.24 करोड़ के पार पहुंच गई हैं जबकि 987,000 से अधिक लोग इस बीमारी से जान गंवा चुके हैं। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी ने यह जानकारी दी।

यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर सिस्टम्स साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसएसई) ने अपने नवीनतम अपडेट में खुलासा किया कि शनिवार सुबह तक कोरोना के कुल मामलों की संख्या 32,471,119 रही जबकि मरने वालों की संख्या बढ़कर 987,593 हो गई।

सीएसएसई के अनुसार, 7,032,524 मामलों और 203,657 मौतों के साथ अमेरिका दुनिया में सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शीर्ष पर है।

वहीं, 5,818,570 मामलों के साथ भारत दूसरे स्थान पर है, जबकि देश में 92,290 लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है।

सीएसएसई के आंकड़ों ने दर्शाया कि अधिकतम कोरोना मामले वाले अन्य शीर्ष 15 देशों में ब्राजील (4,689,613), रूस (1,131,088), कोलंबिया (798,317), पेरू (794,584), मेक्सिको (720,858), स्पेन (716,481), अर्जेटीना (691,235), दक्षिण अफ्रीका (668,529), फ्रांस (552,421), चिली (453,868), ईरान (439,882), ब्रिटेन (425,766), बांग्लादेश (356,767), इराक (341,699) और सऊदी अरब (332,329) हैं।

वर्तमान में कोरोना से मौतों के मामले में ब्राजील दूसरे स्थान पर है। देश में 140,537 लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है।

10,000 से ज्यादा मौतों वाले अन्य देश मेक्सिको (75,844), ब्रिटेन (42,025), इटली (35,801), पेरू (32,037), फ्रांस (31,675), स्पेन (31,232), ईरान (25,222), कोलंबिया (25,103), रूस (19,973), दक्षिण अफ्रीका (16,312), अर्जेटीना (15,208), चिली (12,527), इक्वाडोर (11,236) और इंडोनेशिया (10,218) हैं।


26-Sep-2020 9:45 AM

संयुक्त राष्ट्र, 26 सितंबर (आईएएनएस)| संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र में दिए अपने भाषण में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने सुरक्षा परिषद से अपील की है कि वो कश्मीर में संयुक्त राष्ट्र की सेना भेज कर हस्तक्षेप करे। शुक्रवार को हुए इस सत्र से भारत ने शुरुआत में ही वॉकआउट कर दिया था।

शुक्रवार को खान ने कहा, "सुरक्षा परिषद को कश्मीर में संघर्ष को रोकना चाहिए और अपने प्रस्तावों का कार्यान्वयन करना चाहिए, जैसा कि पूर्वी तिमोर में किया गया था।"

पूर्वी तिमोर मॉडल में इंडोनेशिया द्वारा आक्रमण करने के बाद सुरक्षा परिषद ने अपने प्रस्तावों को लागू करने और 1999 में तिमोर की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और चुनावों की देखरेख करने के लिए ऑस्ट्रेलिया के तहत एक अंतर्राष्ट्रीय बल को अधिकृत किया था। फिर इसके अगले साल संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों ने तिमोर-लेस्ते में कमान संभाली थी।

2006 में तिमोर में असफल तख्तापलट होने और बड़े पैमाने पर फैली अशांति के बाद फिर से शांति सैनिकों में भेजा था।

1948 में पारित हुए प्रमुख सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 47 मांग करता है कि पाकिस्तान पहले कश्मीर से अपने सैनिकों और नागरिकों को वापस ले। जवाहरलाल नेहरू इस मामले में जनमत संग्रह कराने तैयार हो गए थे लेकिन पाकिस्तान द्वारा प्रस्ताव की शर्त का पालन नहीं करने के कारण जनमत नहीं हो सका था।

इसके बाद भारत ने कश्मीर में चुनाव कराए और बकौल नई दिल्ली यह भारत में इसके शामिल होने की पुष्टि करता है।

वहीं, पुर्तगाली उपनिवेश पूर्वी तिमोर (फ्रेटिलिन) की स्वतंत्रता के लिए एक क्रांतिकारी मोर्चा लड़ रहा था। जब तख्तापलट ने पुर्तगाल में सलाजार शासन को उखाड़ फेंका तो 1975 में फ्रेटिलिन ने स्वतंत्रता की घोषणा की। लेकिन इसके तुरंत बाद ही इंडोनेशिया ने इस पर आक्रमण किया और 1999 तक शासन किया क्योंकि विद्रोहियों ने इंडोनेशिया का समर्थन किया था।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा किए गए जनमत संग्रह के बाद 2006 में परेशानी तब पैदा हुई जब संयुक्त राष्ट्र ने अपने शांति सैनिकों को फिर से वहां भेजा।

ऐसे में तिमोर की तरह कश्मीर में वह मॉडल लागू करें तो सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 47 का पालन करने के लिए कश्मीर से पाकिस्तानियों को हटाना होगा।


26-Sep-2020 9:40 AM

वाशिंगटन, 26 सितम्बर (आईएएनएस)| प्रसिद्ध सोशल कंजर्वेटिव एमी कोनी बैरेट को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सुप्रीम कोर्ट की नई जस्टिस के रूप में नामित करने की संभावना है।

इंटरनेशनल मीडिया ने बताया कि बैरेट लिबरल जस्टिस रूथ बेडर जिन्सबर्ग का स्थान लेंगी, जिनका पिछले शुक्रवार को निधन हो गया था। इस फैसले का एलान व्हाइट हाउस में शनिवार को होने की संभावना है।

उनके नाम पर मुहर लगने को लेकर सीनेट में टकराव देखने को मिल सकती है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव भी नजदीक है।

अगर सबकुछ ठीक रहा तो 48 वर्षीय एमी कोनी बैरेट, रिपब्लिकन राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 2017 में नील गोरसच और 2018 में नील गोरसच औेर 2018 में ब्रेट कवाना के बाद नियुक्त तीसरी जस्टिस होंगी।


26-Sep-2020 9:36 AM

वाशिंगटन, 26 सितंबर (स्पूतनिक) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने श्वेत लोगों का समूह कू क्लक्स क्लान (केकेके) को एक आतंकवादी समूह के रूप में घोषित करने की योजना बनाई है। व्हाइट हाउस की एक पूल रिपोर्ट में श्री ट्रम्प के चुनावी अभियान का हवाला देते हुए इसका जिक्र किया गया है।   

रिपोर्ट में श्री ट्रम्प के चुनावी अभियान की प्लेटिनम योजना के बारे में बताया कि केकेके के अलावा दक्षिणपंथी संगठन एंटीफा को भी आतंकवादी समूह नामित करने के अलावा, अश्वेत समुदायों को लगभग 500 अरब डॉलर की पूंजी तक पहुंच बढ़ाना, जूनतींथ को एक संघीय अवकाश घोषित करना और अश्वेत समुदाय के लिए तीस लाख नए रोजगार पैदा करना शामिल है।   
श्री ट्रम्प ने अटलांटा, जॉर्जिया में अपने अभियान के दौरान प्लेटिनम योजना के बारे में बात की, लेकिन केकेके को आतंकवादी समूह घोषित करने या जूनतींथ को एक संघीय अवकाश घोषित करने का जिक्र नहीं किया।

व्हाइट हाउस ने इस मुद्दे पर कोई त्वरित प्रतिक्रिया नहीं दी है।


26-Sep-2020 9:15 AM

वाशिंगटन, 26 सितम्बर (आईएएनएस)| अमेरिका में ओरेगन सीफूड प्लॉट के 77 कर्मचारी कोरोनावायरस जांच रिपोर्ट में पॉजिटिव पाए गए हैं। समाचार एजेंसी सिंहुआ के रिपोर्ट के मुताबिक, पॉजिटिव कर्मचारी क्लैटसॉप काउंटी में सीफूड प्लांट से हैं।

काउंटी के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को कहा कि प्राइवेट लैब द्वारा इस सप्ताह से नाइट शिफ्ट के 159 कर्मचारियों का जांच किया गया, जिसमें 77 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं।

ओरेगन हेल्थ अथॉरिटी ने पॉजिटिव कर्मचारियों के लिए क्वारंटीन सुविधा की व्यवस्था की है, वहीं अन्य संपर्को का भी पता लगाया जा रहा है।

अधिकारियों ने कहा कि एजेंसी डे शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के भी जांच कर रही है।

पॉजिटिव मामलों में से कोई भी अस्पताल में भर्ती नहीं है।


25-Sep-2020 4:30 PM

हमजा अमीर 
इस्लामाबाद, 25 सितम्बर (आईएएनएस)|
पाकिस्तान ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वह इस्लामाबाद हाईकोर्ट (आईएचसी) में सुनी जा रही समीक्षा और पुनर्विचार मामले में कुलभूषण जाधव का प्रतिनिधित्व करने के लिए विदेशी वकील रखने की भारत की मांग को स्वीकार नहीं करेगा और जाधव की किस्मत पाकिस्तानी अदालतों के हाथों में छोड़ दिया है।

जाधव को फांसी होगी या नहीं, इस सवाल का जवाब देते हुए, विदेश कार्यालय के प्रवक्ता जाहिद हफीज चौधरी ने एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, "अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का एक जिम्मेदार सदस्य होने के नाते पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के न्यायाधीश के फैसले के अनुपालन के अपने दायित्व का पूरी तरह से संज्ञान लेता है।"

उन्होंने कहा, "मैं यह अनुमान नहीं लगा सकता कि मामले में निर्णय क्या होगा, लेकिन मामले में प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार केवल पाकिस्तानी न्यायालयों द्वारा प्रदान किया जा सकता है।"

चौधरी ने कहा कि जाधव ने पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने की बात स्वीकार की थी।

उन्होंने कहा, "जब कमांडर जाधव को पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था, तो उन्होंने जांच के दौरान पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने की बात कबूल की। भारत ने आईसीजे में कमांडर जाधव को कांसुलर एक्सेस देने के मुद्दे को उठाया।

फैसले में, आईसीजे ने वियना कन्वेंशन के तहत कमांडर जाधव को उनके अधिकारों से अवगत कराने, भारतीय कांसुलर अधिकारी के माध्यम से उन्हें कांसुलर एक्सेस प्रदान करने, उनकी कनविक्शन के संबंध में प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार प्रदान करने और एक प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार उपलब्ध कराने तक उनकी फांसी पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे।

प्रवक्ता ने कहा, "पाकिस्तान इन सभी का अनुपालन कर रहा है।"

चौधरी ने भारत पर आईसीजे के फैसले को लागू करने के पाकिस्तान के प्रयासों को विफल करने और जाधव के मामले को पाकिस्तान के खिलाफ प्रचार के उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

जाधव का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक भारतीय या एक विदेशी वकील उपलब्ध कराने की नई दिल्ली की मांग के बारे में बात करते हुए, चौधरी ने कहा कि यह भारत को बार-बार बताया गया है कि केवल वही वकील कोर्ट में कमांडर जाधव का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, जिनके पास पाकिस्तान में वकालत करने का लाइसेंस है।

उन्होंने कहा, यह आदेश क्षेत्राधिकार के अनुसार है। भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक निर्णय में यह भी फैसला सुनाया है कि विदेशी वकील देश के भीतर वकालत नहीं कर सकते हैं।

प्रवक्ता ने आईसीजे के फैसले को प्रभावी बनाने के लिए भारत सरकार को आगे आने और पाकिस्तान में न्यायालयों के साथ सहयोग करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान सरकार ही है जिसने जाधव के मामले में इस्लामाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।


25-Sep-2020 11:29 AM

न्यूयॉर्क. अमेरिका में न्यूयॉर्क के एक टाउन का नाम 'स्वस्तिक' (Swastika) रखा गया है. हालांकि, यह नाम शहर के संस्थापकों, पुरखों ने संस्कृत (Sanskrit) शब्द के नाम पर स्वस्तिक रखा था, मगर बाद में इसका विरोध होने लगा. इस नाम को विरोधी खेमे के लोगों ने नाजियों के चिन्ह से जोड़ा. इसके बाद इस शहर के नाम को स्वस्तिक ही रखे जाने को लेकर वोटिंग हुई, जिसमें इस नाम के खिलाफ में एक भी वोट नहीं पड़ा और इस तरह से शहर का नाम फिर स्वस्तिक ही रहा. शहर के लोगों का कहना है कि इसके नाम का नाजी के प्रतीक चिन्ह से कोई लेना देना नहीं है. सीएनएन के मुताबिक, शहर के ब्लैक ब्रुक टाउ बोर्ड ने सर्वसम्मति से स्वस्तिक नाम नहीं बदलने के लिए वोट दिया. शहर के संचालन का जिम्मा इसी बोर्ड पर है. ब्लैक ब्रुक के पर्यवेक्षक जॉन डगलस ने इस बात की जानकारी दी.

डगलस के मुताबिक, इस शहर का नाम स्वस्तिक शहर के मूल निवासियों द्वारा 1800 के दशक में रखा गया था और यह संस्कृत के शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ कल्याण होता है. उन्होंने कहा कि हमें इस क्षेत्र के बाहर के उन लोगों के पर तरस आता है, जो हमारे समुदाय के इतिहास के बारे में नहीं जानते और यह नाम देखकर ऑफेंड हो जाते हैं और इसका विरोध करते हैं। मगर हमारे समुदाय के सदस्यों के लिए यह वह नाम है जिसे हमारे पूर्वजों ने चुना था. दरअसल, अप्रैल 2019 में डेनवर शहर के बाहर कोलोराडो शहर के लोगों ने इसका नाम स्वस्तिक से ओल्ड चेरी हिल्स में बदलने के लिए मतदान किया था. यह क्षेत्र कभी डेनवर लैंड स्वस्तिक कंपनी का घर था, यह एक कंपनी थी, जिसने नाजियों द्वारा स्वास्तिक चिन्ह को अपनाने से पहले यह नाम चुना था.

संस्कृत का शब्द स्वस्तिक

संयुक्त राज्य स्मारक मेमोकॉस्ट संग्रहालय के अनुसार, स्वस्तिक शब्द संस्कृत के शब्द स्वस्तिक से लिया गया है, जिसका प्रयोग सौभाग्य या मंगल प्रतीक के संदर्भ में किया जाता है. यह प्रतीक लगभग 7,000 साल पहले दिखाई दिया था और इसे हिंदू, बौद्ध, जैन और अन्य धर्मों में एक पवित्र प्रतीक माना जाता है. यह घरों या मंदिरों की दीवारों को लगा होता है, क्योंकि इसे शुभ माना जाता है. यूरोपीय लोगों ने पुरातात्विक खुदाई के काम के माध्यम से प्राचीन सभ्यताओं के बारे में जब सीखना शुरू किया तब 19 वीं शताब्दी के अंत और 20 वीं शताब्दी के प्रारंभ में यूरोप में यह प्रतीक लोकप्रिय हो गया. नाजी पार्टी ने 1920 में इसे अपने प्रतीक के तौर पर अपनाया था. हालांकि, स्वस्तिक के मूल चिन्ह से अलग है.(news18)


25-Sep-2020 11:27 AM

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने गुरुवार को उम्मीद जताई कि भारत और चीन (India China Clash) अपने मौजूदा सीमा विवादों को हल करने में सक्षम होंगे, क्योंकि उन्होंने इस संबंध में दो एशियाई दिग्गजों की मदद करने के अपने प्रस्ताव को दोहराया है. ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, 'मुझे पता है कि अब चीन और भारत को कठिनाई हो रही है और बहुत ही कठिन कठिनाई हो रही है. उम्मीद है कि वे इसका हल निकाल पाएंगे. अगर हम मदद कर सकते हैं, तो हम मदद करना पसंद करेंगे.'

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का यह बयान उस समय आया है, जब भारतीय और चीनी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने लद्दाख में LAC विवाद को सुलझाने के लिए बैठक की. दोनों देशों ने LAC पर और ज्यादा सैनिक न भेजने पर सहमति जताई. अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प चीन के साथ एक निष्पक्ष और संतुलित संबंध चाहते हैं, जहां एक देश दूसरे देश के लिए अथवा अन्य देशों की आजीविका के लिए खतरा नहीं बने.

ट्रम्प ने संयुक्त राष्ट्र में कहा-‘चीनी वायरस' को दुनिया में फैलाने के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने 2018 में चीन के साथ व्यापार युद्ध शुरू किया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच संबंध बिगड़ गए थे. ट्रम्प ने चीन से व्यापार घाटे को कम करने के लिए कहा था जो कि 2017 में 375.6 अरब अमेरिकी डॉलर था. COVID-19 महामारी के बाद से चीन और अमेरिका के संबंध और भी बिगड़ गए. ट्रम्प बार-बार कोरोनावायरस (Coronavirus) को 'चीनी वायरस' बता रहे हैं और उनका कहना है कि चीन इस महामारी से सही तरह से नहीं निपट पाया, हालांकि चीन इस आरोप से इनकार करता रहा है.(ndtv)


25-Sep-2020 11:15 AM

वाशिंगटन, 25 सितंबर (आईएएनएस)| वैश्विक स्तर पर कोरोनावायरस मामलों की कुल संख्या 3.21 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है, जबकि इस संक्रमण से होने वाली मौतों की संख्या बढ़कर 981,000 से अधिक हो गई है। यह जानकारी जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को दी। विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सिस्टम साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसएसई) ने अपने नवीनतम अपडेट में खुलासा किया कि शुक्रवार की सुबह तक संक्रमण के मामलों की कुल संख्या 32,135,220 हो गई थी और मौतों की संख्या बढ़कर 981,754 हो गई थी।

सीएसएसई के अनुसार, अमेरिका दुनिया में सबसे अधिक संक्रमण के मामलों (6,976,215) और इससे हुई मौतों (202,762) के साथ सबसे खराब स्थिति वाला देश है।

वहीं भारत 5,732,518 मामलों के साथ वर्तमान में दूसरे स्थान पर है, जबकि देश में होने वाली मौतों की संख्या 91,149 है।

सीएसएसई के आंकड़ों के अनुसार, संक्रमण के अधिक मामलों वाले अन्य 15 देश ब्राजील (4,657,702), रूस (1,123,976), कोलंबिया (790,823), पेरू (782,695), मेक्सिको (715,457), स्पेन (704,209), अर्जेंटीना (678,266), दक्षिण अफ्रीका (667,049), फ्रांस (536,289), चिली (451,634), ईरान (436,319), ब्रिटेन (418,889), बांग्लादेश (355,384), इराक (337,106) और सऊदी अरब (331,857) है।

वर्तमान में ब्राजील संक्रमण से होने वाली मौतों के मामले में 139,808 आंकड़ों के साथ दूसरे स्थान पर है।

वहीं 10,000 से ऊपर मौत वाले देशों में मेक्सिको (75,439), ब्रिटेन (41,991), इटली (35,781), पेरु (31,870), फ्रांस (31,524), स्पेन (31,118), ईरान (25,015), कोलंबिया (24,746), रूस (19,876), दक्षिण अफ्रीका (16,283), अर्जेंटीना (14,766), चिली (12,469), इक्वाडोर (11,213) और इंडोनेशिया (10,105) शामिल हैं।


25-Sep-2020 9:09 AM

कोलंबो, 25 सितंबर (आईएएनएस)| श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने लाइट रेलवे ट्रांजिट (एलआरटी) प्रोजेक्ट को खत्म करने का आदेश दिया है। इसका निर्माण राजधानी कोलंबो में किया जाना था। यह जानकारी स्थानीय इकॉनोमीनेक्स्ट की रिपोर्ट से मिली।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की गुरुवार की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अधिकारियों ने बताया कि एलआरटी प्रोजेक्ट जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) द्वारा वित्त पोषित परियोजना थी और इसके प्रभावी परिवहन समाधान नहीं होने के कारण राष्ट्रपति ने इसके तत्काल निलंबन का आदेश दिया।

इकोनॉमीनेक्स्ट ने राष्ट्रपति के सचिव पी.बी. जयसुंदर द्वारा परिवहन मंत्रालय के सचिव को लिखे पत्र के हवाले से बताया कि यह परियोजना बहुत महंगी थी और शहरी कोलंबो परिवहन बुनियादी ढांचे के लिए उचित प्रभावी परिवहन समाधान नहीं था।

इस परियोजना पर अनुमानित 150 करोड़ अमेरिकी डॉलर लागत आने की संभावना थी।

राष्ट्रपति द्वारा परियोजना कार्यालय को तत्काल बंद करने का आदेश देने की भी जानकारी देते हुए जयसुंदर ने लिखा, "शहरी विकास और आवास मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के राष्ट्रीय योजना विभाग के परामर्श से एक उपयुक्त परिवहन समाधान पर काम किया जा सकता है।"

श्रीलंका ने परियोजनाओं के लिए मार्च 2020 में जापान सरकार के साथ 3000 करोड़ येन (28.457 करोड़ अमेरिकी डॉलर) रियायती ऋण पर हस्ताक्षर किए। साथ ही सरकार ने उन इमारतों के बारे में भी चिंता व्यक्त की जो एलआरटी से प्रभावित हो सकती हैं।


25-Sep-2020 9:04 AM

लंदन, 25 सितम्बर (आईएएनएस)| सात टोरी सांसदों के एक समूह ने 'द कंजर्वेटिव फ्रेंड्स ऑफ कश्मीर' नाम के एक समूह को रिलॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य कश्मीर की 'स्वाधानीता' के लिए अभियान चलाना है। इससे टोरी समर्थक ब्रिटिश भारतीयों में नाराजगी पैदी हो गई है। समूह ने हाल ही में ट्वीट किया, "हमने कंजर्वेटिव फ्रेंड्स ऑफ कश्मीर को रि-लॉन्च कर दिया है। हम कश्मीर और जम्मू में मानवाधिकारों के हनन और स्वाधीनता के लिए अभियान चला रहे हैं। कंजर्वेटिव सांसदों और कार्यकर्ताओं के बीच हमारे कारण से समर्थन बढ़ रहा है। हमें और हमारे काम को फॉलो करें।"

इस कदम ने भारत के कंजर्वेटिव फ्रेंड्स ऑफ इंडिया (सीएफआई) को हतोत्साहित कर दिया है, जो ब्रिटिश भारतीयों के बीच पार्टी को बढ़ावा देता है।

इस सप्ताह की शुरूआत में समूह ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के राष्ट्रपति मसूद खान के ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट को रीट्वीट किया था, जिसमें कहा गया था, "हम कश्मीर के कंजर्वेटिव फ्रेंड्स को फिर से लॉन्च करने के लिए आपके बहुत आभारी हैं। आपकी आवाज कश्मीर के आहत लोगों के लिए आशा की एक किरण की तरह चमकती है। बेसहारा, पस्त, मताधिकारहीन - वे न्याय के लिए आपकी और आपके सहयोगियों की ओर देखते हैं।"

समूह में टोरी के सांसदों में पॉल ब्रिस्टो (पीटरबरो), जेम्स डेली (ब्यूरी नॉर्थ), जैक ब्रेरेटन (स्टोक ओन ट्रेंट साउथ) और स्टीव बेकर (व्योमबे) शामिल हैं, जो सभी पाकिस्तानी आबादी वाले निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

ब्रेरेटन, डेली और ब्रिस्टो ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप ऑन कश्मीर (एपीपीजीके) में भी शामिल रहे हैं, जिसकी अध्यक्षता लेबर सांसद डेबी अब्राहम्स ने की थी, जिन्हें 17 फरवरी को दिल्ली एयरपोर्ट पर यह सूचित किए जाने के बाद दुबई भेजा गया था कि उनका ई-वीजा वैध नहीं था। अगले दिन वह पाकिस्तान चली गई और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से मिली थी। बड़ी बात यह है कि इसका सारा खर्चा इस्लामाबाद द्वारा वहन किया गया।

बाद में पता चला कि एपीपीजीके को 18 फरवरी से 22 फरवरी 2020 के बीच पीओके की यात्रा के लिए 31,501 पाउंड (29.7 लाख रुपये) और 33,000 पाउंड (31.2 लाख रुपये) के बीच लाभ भी मिला।

ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी (यूके) के अध्यक्ष कुलदीप शेखावत ने एक मसौदा तैयार करने और उसे कंजर्वेटिव पार्टी के सह-अध्यक्षों को भेजने की योजना बनाई है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि इस पर 200 से अधिक पीआईओ कार्यकर्ता हस्ताक्षर करेंगे।

उन्होंने कहा, "हम कंजर्वेटिव टीम के इस तरह के भारत विरोधी कदम से खुश नहीं हैं। ब्रिटेन को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।"


24-Sep-2020 6:57 PM

बीजिंग, 24 सितम्बर (आईएएनएस)| 75वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तमाम देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के नेताओं के सामने तथ्यों की अनदेखी कर कोविड-19 महामारी, इंटरनेट सुरक्षा और पारिस्थितिकी पर्यावरण आदि मुद्दों पर अकारण चीन पर आरोप लगाया और मनमाने ढ़ंग से राजनीतिक वायरस फैलाया। संयुक्त राष्ट्र महासभा एक गंभीर मंच है, पर ट्रंप ने इस मंच के जरिए चीन के खिलाफ राजनीतिक हमला किया। सभी मौके पर चीन पर कालिख पोतने की कार्रवाई से न सिर्फ संयुक्त राष्ट्र संघ पर लांछन लगाया गया, बल्कि विश्व शांति भी भंग हुई।

तो ट्रंप ने क्यों इस मंच पर तथ्यों की अनदेखी कर झूठ बोला? सबसे बड़ा उद्देश्य आम चुनाव जीतने के लिए चीन पर जिम्मेदारी थोपना है। ट्रंप ने इसलिए कोरोना वायरस को फिर एक बार चीनी वायरस कहकर बुलाया, क्योंकि वे मतदाताओं में अपना समर्थन बढ़ाना चाहते हैं। ट्रंप के विचार में जितने बड़े मंच पर चीन पर लांछन लगाया जाएगा, अमेरिकी मतदाता उतना ही विश्वास करेंगे। वास्तव में ट्रंप संयुक्त राष्ट्र महासभा के जरिए नागरिकों को उत्तेजित करना चाहते हैं।

दरअसल, लंबे समय से अमेरिका दुनिया भर में चीन को नुकसान पहुंचाने वाली छवि बनाना चाहता है। इसलिए अमेरिका ने आरोप लगाया कि चीन को कोविड-19 महामारी की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है, चीन इंटरनेट हमला करता है, यहां तक कि चीन पारिस्थितिकी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। अमेरिका दुनिया को बताना चाहता है कि चीन अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरा है, चीन को रोकने पर ही सभी समस्याएं ठीक हो सकेंगी। वास्तव में अमेरिका के कथन का दुनिया विश्वास नहीं करती, लेकिन ट्रंप के विचार में जब तक बात करते करेंगे, देर-सबेर लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा।

इसके अलावा, अमेरिका विश्व मंच पर चीन पर दबाव डालने के लिए बहाना और वैधता ढूंढ़ना चाहता है। आने वाले समय में अमेरिका अवश्य ही लगातार पूरी तरह से चीन पर दबाव डालेगा, लेकिन इससे दुनिया में अमेरिका की प्रतिष्ठा कमजोर हो जाएगी। इसलिए चीन पर कालिख पोतने के जरिए अमेरिका अपने राजनीतिक हमले के लिए बहाना ढूंढ़ना चाहता है।

लेकिन इन बेहूदा दलीलों की अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने पहले से ही अपील की है। द लान्सेट, नेचर आदि प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक पत्रिकाओं ने बारांबार महामारी को राजनीतिक बनाने की कार्रवाई का ²ढ़ विरोध किया, लेकिन कुछ राजनीतिज्ञ अपने गिरेबान में नहीं झांकते। जब ट्रंप संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दे रहे थे, तब अमेरिका में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 2 लाख से अधिक हो गई है। इस घड़ी में अमेरिकी सरकार नागरिकों की जान बचाने के बजाय लोगों का ध्यान चीन की ओर आकर्षित करना चाहती है। वास्तव में यह दुनिया के लोगों के साथ धोखा है।

तथ्य सबसे अच्छा सबूत है। महामारी को राजनीतिक बनाना लोगों की इच्छा के विरुद्ध है, राजनीतिक वायरस फैलाना अमेरिका में महामारी की स्थिति बेहतर नहीं बना सकती। महामारी पर जानकारी बढ़ने के चलते अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने सहमति बनाई है कि वायरस मानव जाति का समान दुश्मन है। एकजुट होकर सहयोग करने पर ही महामारी को पराजित कर सकेंगे। कुछ राजनीतिज्ञों की महामारी के जरिए राजनीतिक लाभ उठाने की कुचेष्टा विफल नहीं होगी।

(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

-- आईएएनएस


24-Sep-2020 9:43 AM

वाशिंगटन, 24 सितंबर (आईएएनएस)| वैश्विक स्तर पर कोरोनावायरस मामलों की कुल संख्या 3.17 करोड़ से अधिक हो गई है, जबकि इस संक्रमण से हुई मौतों की संख्या 975,000 का आंकड़ा पार कर गई है। यह जानकारी जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय ने गुरुवार को दी।

विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सिस्टम साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसएसई) ने अपने नवीनतम अपडेट में खुलासा किया कि गुरुवार की सुबह तक कुल मामलों की संख्या 31,787,190 हो गई और मृत्यु दर बढ़कर 975,038 हो गई थी।

सीएसएसई के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका दुनिया के सबसे अधिक मामलों 6,943,071 और 201,957 मौतों के साथ सबसे अधिक प्रभावित देश है।

वहीं वर्तमान में भारत 5,646,010 मामलों के साथ प्रभावित देशों की सूची में शीर्ष पर दूसरे स्थान पर है, जबकि देश में संक्रमण से 90,020 मौतें दर्ज की गई हैं।

सीएसएसई के आंकड़ों के अनुसार, अधिक मामलों वाले अन्य शीर्ष 15 देशों में ब्राजील (4,591,364), रूस (1,117,487), कोलंबिया (784,268), पेरू (776,546), मेक्सिको (710,049), स्पेन (693,556), दक्षिण अफ्रीका (665,188), अर्जेंटीना (664,799), फ्रांस (508,381), चिली (449,903), ईरान (432,798), ब्रिटेन (412,241), बांग्लादेश (353,844), इराक (332,635) और सऊदी अरब (331,359) शामिल हैं।

ब्राजील 138,105 मौतों के साथ संक्रमण से हुई मृत्यु के मामले में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है।

वहीं 10,000 से अधिक मौतों वाले देश मेक्सिको (74,949), ब्रिटेन (41,951), इटली (35,758), पेरू (31,568), फ्रांस (31,444), स्पेन (31,034), ईरान (24,840), कोलंबिया (24,746), रूस (19,720), दक्षिण अफ्रीका (16,206), अर्जेंटीना (14,376), चिली (12,345) और इक्वाडोर (11,171) हैं।


24-Sep-2020 9:25 AM

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने नवंबर में चुनाव हार जाने के बाद भी शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण से इनकार किया है.

डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि चुनाव के नतीजे अमरीकी सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे क्योंकि उन्हें पोस्टल वोटिंग पर शक है.

कई राज्य मेल के ज़रिए मतदान को बढ़ावा दे रहे हैं जिसके पीछे वो कोरोना वायरस से सुरक्षा को वजह बता रहे हैं.

डोनल्ड ट्रंप से एक पत्रकार ने सवाल किया था कि डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन से चुनाव हारने, जीतने या ड्रॉ होने की स्थिति में क्या वो शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण करेंगे.

इस पर डोनल्ड ट्रंप ने कहा, ''मैं मतपत्रों को लेकर शिकायत करता आया हूं और वो एक मुसीबत हैं.''

जब पत्रकार ने कहा कि लोग हंगामा कर रहे हैं तो डोनल्ड ट्रंप ने उन्हें टोकते हुए कहा, ''मतपत्रों से छुटकारा पाएं और बहुत-बहुत शांतिपूर्ण- सत्ता हस्तांतरण नहीं होगा बल्कि वही सरकार जारी रहेगी.''

साल 2016 में भी डोनल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन से चुनाव लड़ते हुए भी नतीजों को स्वीकार ना करने की बात कही थी. हिलेरी क्लिंटन ने इसे अमरीकी लोकतंत्र पर हमला बताया था.

हालांकि, चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनल्ड ट्रंप की जीत हुई लेकिन उन्होंने 30 लाख वोट भी खोए जिस पर वो आज भी संदेह जताते हैं.

डेमोक्रेट्स ने क्या कहा

पिछले महीने हिलेरी क्लिंटन ने जो बाइडन से किसी भी स्थिति में हार ना मानने के लिए कहा था.

उन्होंने ऐसी स्थिति का जिक्र किया था जिसमें रिपब्लिकन पार्टी एबसेंटी बैलेट्स (मतदान के दौरान अनुपस्थित मतदाता) को लेकर हंगामा करेगी और नतीजों को चुनौती देने के लिए वकीलों की एक फौज़ इकट्ठा करेगी.

रिपब्लिकन नेताओं ने बुधवार को जो बाइडन पर भी अगस्त में चुनाव से पहले यह कहने को लेकर अशांति फैलाने का आरोप लगाया कि ''क्या किसी का मानना है कि डोनल्ड ट्रंप के जीतने पर अमरीका में कम हिंसा होगी.''

ट्रंप का सुप्रीम कोर्ट को लेकर बयान

इससे पहले बुधवार को, अमरिकी राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश रूथ बेडर गिन्सबर्ग की मृत्यु के बाद खाली हुए पद पर चुनाव से पहले नियुक्ति के अपने फैसले का बचाव किया. साथ ही कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चुनाव अदालत में जाकर ख़त्म होंगे.

जस्टिस रूथ बेडर गिन्सबर्ग की 18 सितंबर को मौत हो गई थी.

ट्रंप ने कहा, ''मुझे लगता है कि ये सुप्रीम कोर्ट में ख़त्म होगा और वहां नौ न्यायाधीशों का होना बहुत ज़रूरी है. ये बेहतर है कि चुनाव से पहले ऐसा कर दिया जाए क्योंकि डेमोक्रेट्स जो घोटाला कर रहे हैं वो अमरीकी सुप्रीम कोर्ट के सामने होगा.''

डोनल्ड ट्रंप ने फिर से इस बात का जिक्र किया कि मेल से होने वाले मतदान में धोखाधड़ी आसान है.

उन्होंने कहा कि वह इस शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के लिए एक महिला उम्मीदवार को नामांकित करेंगे. उनकी जस्टिस रूथ बेडर गिन्सबर्ग की जगह नियुक्ति होगी.

पोस्टल वोटिंग को लेकर हंगामा क्यों

कोरोना वायरस संक्रमण के ख़तरे के चलते इस बार पोस्टल वोटिंग में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है.

पोस्टल वोटिंग में लोग खुद वोट करने नहीं जाते बल्कि डाक के ज़रिए वोट देते हैं.

कमिश्नर ऑफ द फेडरल इलेक्शन कमीशन एलेन वीट्रॉब ने कहा, ''इस साजिश का कोई आधार नहीं है कि मेल से मतदान में धोखाधड़ी होती है.''

पोस्टल बैलेट धोखाधड़ी के अलग-अलग मामले सामने आए हैं, जैसे कि 2018 में नॉर्थ कैरोलाइना प्राइमरी में. जहां एक रिपब्लिकन उम्मीदवार के मतदान पत्रों से छेड़छाड़ के बाद फिर से मतदान किया गया था.

न्यू जर्सी में इस साल एक मामला आया था जिसमें दो डेमोक्रेटिक काउंसलर्स पर पोस्टल वोटिंग में कथित धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था.

ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस के 2017 के एक अध्ययन के मुताबिक अमरीका में मतदान धोखाधड़ी की दर 0.00004% और 0.0009% के बीच है.

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के एक राजनीतिक वैज्ञानिक चार्ल्स स्टीवर्ट के शोध के अनुसार, पोस्टल बैलट के मामले में मतपत्रों के लापता होने की संभावना अधिक होती है.

उन्होंने गणना की है कि 2008 के चुनाव में मेल से किए गए मतदान में खोने वाले मतों की संख्या 76 लाख या उन पांच व्यक्तियों में से एक हो सकती है जिन्होंने अपने मतपत्र पोस्ट किए थे.(bbc)


24-Sep-2020 9:09 AM

नई दिल्ली, 24 सितम्बर (आईएएनएस)| नेपाल सरकार ने भारत और चीन के बीच सैन्य तनाव को देखते हुए अपने सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों को तिब्बती शरणार्थियों की आवाजाही पर करीब से नजर रखने का निर्देश दिया है।

इससे पहले नेपाली सेना ने एक समीक्षा की थी, जहां यह स्पष्ट तौर पर कहा गया कि 'भारत और चीन के बीच 'शत्रुता' की स्थिति में ये शरणार्थी सुरक्षा के लिहाज से खतरा होंगे।'

सूत्रों ने कहा कि चीनी सीमा के पीछे गुप्त संचालनों में भारत के विशेष सीमांत बल(एसएफएफ) में कुछ तिब्बती शामिल हैं, जिसके बाद चीन के दबाव में नेपाल ने तिब्बती शरणार्थियों पर नजर रखने का निर्णय लिया है।

इससे पहले, एक एसएफएफ सुबेदार नेइमी तेनजीन पूर्वी लद्दाख के चुसूल में 30 अगस्त को एक ऊंचाई पर कब्जा जमाने के अभियान में शहीद हो गए थे, जिसके बाद इनका ध्यान तिब्बती शरणार्थियों पर गया।

एसएफएफ की स्थापना 1962 भारत-चीन युद्ध के तुरंत बाद भारत की खुफिया ब्यूरो ने की थी। पहले इसका नाम इस्टेबलिस्मेंट 22 था। बाद में इसका नाम एसएसएफ कर दिया गया, यह अब कैबिनेट सचिवालय के दायरे में आता है।

अब चीन नेपाल में तिब्बती शरणार्थियों पर कड़ी नजर रखना चाहता है।

नेपाल चीन के साथ 1236 किलोमीटर लंबे सीमा को साझा करता है। नेपाल में करीब 20,000 तिब्बती शरणार्थी है। इनमें से कई पूर्व डिटेंशन कैंपों में रहते हैं, जिसे स्थायी सेटलमेंट में बदल दिया गया है।

नेपाल और चीन के बीच 2008 से कई सुरक्षा और खुफिया जानकारी साझा करने वाले समझौते प्रभावी हैं।

चीन के प्रभाव में आकर नेपाल तिब्बती लोक प्रशासनों पर प्रतिबंध लगाने पर सहमत हो गया था। इसके साथ ही वह तिब्बती समुदाय, इसके नेताओं पर कड़ी निगरानी रखता है।

सूत्रों के अनुसार, "नेपाल में अधिकतर तिब्बतियों के पास रेसिडेंट परमिट नहीं है। वे लोग बैंक खाते भी नहीं खोल सकते और अपनी संपत्ति भी नहीं खरीद सकते।"


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