अंतरराष्ट्रीय

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28-Sep-2021 4:13 PM (15)

सैन फ्रांसिस्को, 28 सितम्बर | अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस ने अंतरिक्ष उद्यम ब्लू ओरिजिन को 12 अक्टूबर को न्यू शेपर्ड से अंतरिक्ष में अपनी दूसरी मानव उड़ान की घोषणा की है। यह न्यू शेपर्ड का 18वां मिशन होगा, और अंतरिक्ष के लिए चालक दल की दूसरी उड़ान होगी।


एनएस-18, 12 अक्टूबर को चार अंतरिक्ष यात्रियों को भेजेगी।

लिफ्टऑफ को वर्तमान में पश्चिम टेक्सास में लॉन्च साइट वन से सुबह 8.30 बजे सीडीटी (शाम 7 बजे भारत समय) के लिए लक्षित किया गया है।

कंपनी ने दो अंतरिक्ष यात्रियों के नामों की भी घोषणा की है: इनमें नासा के पूर्व इंजीनियर और प्लैनेट लैब्स के सह-संस्थापक डॉ. क्रिस बोशुइजेन; और ग्लेन डी व्रीस, वाइस-चेयर, लाइफ साइंसेज एंड हेल्थकेयर, डसॉल्ट सिस्टम्स शामिल हैं।

दो अन्य अंतरिक्ष यात्रियों की घोषणा आने वाले दिनों में की जाएगी।

बोशुइजन ने बयान में कहा,यह मेरे बचपन के सबसे बड़े सपने का पूरा होना है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि, हालांकि, मैं इस उड़ान को छात्रों को एसटीईएम में करियर बनाने के लिए प्रेरित करने और अंतरिक्ष खोजकतार्ओं की अगली पीढ़ी को उत्प्रेरित करने के अवसर के रूप में देखता हूं।

डी व्रीस ने कहा,मैंने अपना पूरा करियर लोगों के जीवन के विस्तार करने के लिए काम किया है। हालांकि, पृथ्वी पर सीमित सामग्री और ऊर्जा के साथ, अंतरिक्ष में हमारी पहुंच बढ़ाने से मानव को आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।

अंतरिक्ष में पहले अमेरिकी एलन शेपर्ड के नाम पर पांच मंजिला लंबा न्यू शेपर्ड रॉकेट, अंतरिक्ष के किनारे की ओर आकाश में लगभग 340, 000 फीट की सीटों के साथ एक क्रू कैप्सूल डिजाइन किया गया है।

बूस्टर के ऊपर एक गमड्रॉप के आकार का क्रू कैप्सूल है, जिसमें अंदर छह यात्रियों के लिए जगह और बड़ी खिड़कियां हैं।

कर्मन रेखा पर पहुंचने के बाद, कैप्सूल बूस्टर से अलग हो जाता है, जिससे अंदर के लोग पृथ्वी की वक्रता को देख सकते हैं और भारहीनता का अनुभव कर सकते हैं। (आईएएनएस)


28-Sep-2021 4:07 PM (12)

लाहौर. पाकिस्तान की एक अदालत ने ईशनिंदा के आरोप में स्कूल की एक प्रधानाध्यापिका को मौत की सजा सुनाई है. लाहौर की जिला एवं सत्र अदालत ने सोमवार को निश्तर कॉलोनी के एक निजी स्कूल की प्रधानाध्यापिका सलमा तनवीर को मौत की सजा सुनाई. उस पर 5000 पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना लगाया.


अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश मंसूर अहमद ने फैसले में कहा कि तनवीर ने पैगंबर मुहम्मद को इस्लाम का अंतिम पैगंबर नहीं मान कर ईशनिंदा की. लाहौर पुलिस ने 2013 में एक स्थानीय मौलवी की शिकायत पर तनवीर के खिलाफ ईशनिंदा का मामला दर्ज किया था. उस पर पैगंबर मुहम्मद को इस्लाम का अंतिम पैगंबर नहीं मानने और खुद को इस्लाम का पैगंबर होने का दावा करने का आरोप लगाया गया था.

तनवीर के वकील मुहम्मद रमजान ने दलील दी थी कि उनके मुवक्किल की ‘मानसिक स्थिति ठीक नहीं है’ और अदालत को इस तथ्य पर गौर करना चाहिए. अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत में सौंपी गयी ‘पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ’ के एक मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया कि ‘संदिग्ध मुकदमा चलाने के लिए फिट है, क्योंकि उसकी मानसिक स्थिति बिल्कुल ठीक है.’

पाकिस्तान के विवादास्पद ईशनिंदा कानून और इसके तहत निर्धारित दंड को बेहद कठोर माना जाता है. पाकिस्तान में 1987 से ईशनिंदा कानून के तहत कम से कम 1472 लोगों पर आरोप लगाए गए हैं. ईशनिंदा के आरोपी आमतौर पर अपनी पसंद का वकील रखने के अधिकार से वंचित रह जाते हैं, क्योंकि ज्यादातर वकील ऐसे संवेदनशील मामलों को लेने से इनकार करते हैं.

ईशनिंदा कानून औपनिवेशिक दौर के कानून हैं, लेकिन पूर्व तानाशाह जनरल जियाउल हक ने इनमें संशोधन किया था जिससे निर्धारित दंड की गंभीरता बढ़ गयी. (एजेंसी इनपुट)

(news18.com)


28-Sep-2021 4:01 PM (11)

वॉशिंगटन. आतंकवाद पर अमेरिका की स्वतंत्र कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की रिपोर्ट में पाकिस्तान को लेकर बड़े खुलासे हुए हैं. रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में 12 खूंखार आतंकी संगठन हैं. इनमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे 5 आंतकी संगठनों के टारगेट पर भारत है. स्वतंत्र ‘कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस’ (सीआरएस) ने रिपोर्ट में कहा कि अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तान की पहचान कई हथियारबंद और राज्येतर आतंकवादी संगठनों के पनाहगाह के तौर पर की है, जहां से वे अपनी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं.

पिछले हफ्ते क्वाड शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिकी कांग्रेस की द्विदलीय शोध शाखा द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान से संचालित हो रहे इन समूहों को मोटे तौर पर पांच श्रेणियों में बांटा जा सकता है. इनमें वैश्विक स्तर के आतंकी संगठन, अफगान केंद्रित, भारत और कश्मीर केंद्रित, घरेलू मामलों तक सीमित रहने वाले संगठन और पंथ केंद्रित (शियाओं के खिलाफ) आतंकी संगठन शामिल हैं. सीआरएस रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से कुछ आतंकी संगठन 1980 के दशक से अस्तित्व में हैं.

1980 के दशक में पाकिस्तान में हुआ था लश्कर का गठन
लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का गठन 1980 के दशक में पाकिस्तान में हुआ था और 2001 में इसे विदेश आतंकी संगठन (एफटीओ) के रूप में चिह्नित किया गया. सीआरएस ने कहा, ‘एलईटी को भारत के मुंबई में 2008 के भीषण आतंकवादी हमले (2008 Terror Attack) के साथ कई अन्य हाई-प्रोफाइल हमलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है.’

2000 में अस्तित्व में आया जैश-ए-मोहम्मद
रिपोर्ट के अनुसार जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) का गठन साल 2000 में आतंकवादी नेता मसूद अजहर ने किया था. 2001 में इसे भी एफटीओ (विदेशी आतंकी संगठन) के तौर पर चिह्नित किया गया. एलईटी के साथ जेईएम भी 2001 में भारतीय संसद पर हमले समेत कई अन्य हमलों के लिए जिम्मेदार है.

तालिबान को लड़ाके भेजता था एचयूजेआई
हरकत-उल जिहाद इस्लामी (एचयूजेआई) की स्थापना 1980 में अफगानिस्तान में सोवियत सेना से लड़ने के लिए हुई थी और 2010 में इसे भी एफटीओ के तौर पर चिह्नित किया गया. 1989 के बाद एचयूजेआई ने अपनी गतिविधियों को भारत केंद्रित कर दिया, साथ ही वह अफगान तालिबान को भी अपने लड़ाके भेजता था.

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘एचयूजेआई अज्ञात ताकत के साथ आज अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश और भारत में गतिविधियों को अंजाम दे रहा है और कश्मीर का पाकिस्तान में विलय चाहता है.’

हिज्बुल मुजाहिदीन पाकिस्तान में सबसे पुराना आतंकी संगठन
आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन (एचएम) का गठन 1989 में हुआ, जो कथित तौर पर पाकिस्तान की सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी की आतंकवादी शाखा है और 2017 में इसे एफटीओ की सूची में डाला गया था. यह जम्मू कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल सबसे बड़ा और पुराना आतंकवादी संगठन है. सीआरएस के अनुसार पाकिस्तान से अपनी गतिविधियों को अंजाम देने वाले अन्य आतंकी संगठनों में अलकायदा भी शामिल है, जो मुख्यत: पूर्व संघीय प्रशासित कबायली इलाकों, कराची और अफगानिस्तान से गतिविधियां चलाता है.

आतंकियों को जमीन के इस्तेमाल की मंजूरी
सीआरएस ने कहा है कि अमेरिकी विदेश विभाग की आतंकवाद पर रिपोर्ट ‘कंट्री रिपोर्ट ऑन टेररिज्म 2019’ के अनुसार ‘पाकिस्तान कुछ निश्चित क्षेत्र विशेष को निशाना बनाने वाले आतंकवादी संगठनों के लिए पनाहगाह बना हुआ है और उसने अफगानिस्तान के साथ-साथ… भारत को निशाना बनाने वाले संगठनों को अपनी सरजमीं के इस्तेमाल की इजाजत दी है.’ विभाग ने यह भी कहा कि आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने और जम्मू कश्मीर में 2019 के आतंकवादी हमले से पहले भारत केंद्रित कुछ आतंकवादी संगठनों पर ‘लगाम’ लगाने के लिए पाकिस्तान सरकार ने ‘मामूली कदम’ उठाए हैं.

पाकिस्तान के भीतर सक्रिय हैं ये संगठन
पाकिस्तान के भीतर सक्रिय अन्य आतंकवादी संगठनों में अलकायदा इन द इंडिया सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस), इस्लामिक स्टेट खुरासन प्रोविंस (आईएसकेपी या आई-के), अफगान तालिकान, हक्कानी नेटवर्क, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए), जुंदाल्ला (उर्फ जैश अल-अदल), सिपाह-ए-साहबा पाकिस्तान (एसएसपी) और लश्कर-ए-झांगवी (एलईजे) शामिल हैं. (एजेंसी इनपुट के साथ) (news18.com)


28-Sep-2021 3:44 PM (18)

अमेरिका में 2020 में हत्याओं और इरादतन हत्याओं में तेज वृद्धि दर्ज की गई. तीन-चौथाई से अधिक हत्याओं को बंदूक के सहारे अंजाम दिया गया. यह खुलासा एफबीआई की नई रिपोर्ट से हुआ है.

   (dw.com)

फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) के मुताबिक साल 2020 में 77 प्रतिशत हत्याएं बंदूक से की गईं. एफबीआई ने सोमवार को कहा कि अमेरिका में हत्याओं और अन्य इरादतन हत्याओं की संख्या पिछले साल की तुलना में 2020 में 29.4 प्रतिशत बढ़कर 21,500 हो गई.

यह पिछले साल की तुलना में तेज वृद्धि थी, हालांकि ताजा आंकड़े 1980 और 1990 के दशक की शुरुआत में अमेरिका में नियमित रूप से दर्ज किए गए आंकड़ों की तुलना में बहुत कम हैं.

एफबीआई की यूनिफॉर्म क्राइम रिपोर्ट के मुताबिक 77 प्रतिशत हत्याएं बंदूक के साथ की गईं. साल 2019 में यह 74 प्रतिशत था. कुल मिलाकर हिंसक अपराध 2020 में 5.6 प्रतिशत बढ़ गया, जबकि संपत्ति अपराध में 7.8 प्रितशत की गिरावट दर्ज की गई. एफबीआई के मुताबिक देश में हिंसक हमले 12 प्रतिशत बढ़े हैं.

रिपोर्ट में पाया गया कि हत्या में बढ़ोतरी राष्ट्रीय थी, क्षेत्रीय नहीं. लेकिन दक्षिणी राज्य लुजियाना में हत्या की दर देश में सबसे अधिक है.

बंदूक की बिक्री में उछाल

अपराध विशेषज्ञ और पुलिस अधिकारी 2020 में हत्याओं में अचानक हुई तेज वृद्धि के संभावित स्पष्टीकरणों का विश्लेषण कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कारण नहीं बताया है. हालांकि विशेषज्ञों ने कोरोना वायरस महामारी के अस्थिर प्रभाव और बंदूक की बिक्री में वृद्धि की ओर इशारा किया है.

टेक्सस राज्य के ह्यूस्टन शहर में बंदूक से की जाने वाली हत्याओं में 55 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो 2019 में 221 से बढ़कर 2020 में 343 हो गई. ह्यूस्टन में साल 2020 में 400 से अधिक हत्याएं दर्ज की गईं.

विश्लेषकों ने हत्याओं में वृद्धि के लिए अन्य संभावित कारणों पर भी प्रकाश डाला है, जैसे कि बंदूक साथ लेकर चलने में वृद्धि. जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद पुलिस और नागरिकों के बीच अविश्वास बढ़ा है.

एफबीआई ने कहा कि लगभग 16,000 संघीय, राज्य, शहर, विश्वविद्यालय, कॉलेज और आदिवासी एजेंसियों ने अपराध रिपोर्ट में डेटा जमा कराया है.

विकसित देशों में अमेरिकी हत्या दर बहुत है. जी20 सदस्यों में से केवल दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस में प्रति व्यक्ति हत्या की उच्च दर दर्ज की जाती है, जबकि अर्जेंटीना के आंकड़े मोटे तौर पर समान हैं.

एए/सीके (एएफपी)


28-Sep-2021 3:24 PM (27)

अरुल लुइस 

न्यूयॉर्क , 28 सितम्बर | अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को फोन करने की तत्काल कोई योजना नहीं है, जिन्होंने अफगानिस्तान के तख्तापलट और इस्लामाबाद में इसके नतीजे के लिए वाशिंगटन को जिम्मेदार ठहराया है। इसकी जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रवक्ता जेन साकी ने दी।

एक रिपोर्टर द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या बाइडन खान को जल्द ही बुलाएंगे, साकी ने सोमवार को कहा, "मेरे पास इस समय अनुमान लगाने के लिए कुछ भी नहीं है।"

अमेरिकी सरकार के विभिन्न स्तरों के अधिकारियों ने अपने पाकिस्तानी समकक्षों से बात की है, लेकिन बाइडन ने व्यक्तिगत रूप से खान से संपर्क नहीं किया है।

रिपोर्टर ने कहा कि जब बाइडन 24 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 'मध्य-बैठक' कर रहे थे, तो संयुक्त राष्ट्र में खान ने "अफगानिस्तान में अमेरिका के कार्यों की कुछ तीखी आलोचना की और उन्होंने अपने और राष्ट्रपति बाइडन के बीच सीधे जुड़ाव की कमी पर अफसोस जताया।"

उन्होंने पूछा, "राष्ट्रपति ने इस आक्रामक कूटनीति का इस्तेमाल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के उस आह्वान का जवाब देने के लिए सीधे बातचीत में क्यों नहीं किया?"

साकी ने उत्तर दिया, "राष्ट्रपति ने इस समय सभी विदेशी नेताओं के साथ बात नहीं की है, यह बिल्कुल सच है। लेकिन निश्चित रूप से, उनके पास एक टीम है। एक विशेषज्ञ टीम को ठीक ऐसा करने के लिए तैनात किया गया है।"

खान ने भी ऐसा ही रिएक्शन दिया जब एक इंटरव्यूअर ने उनसे बाइडन की चुप्पी के बारे में पूछा।

इस महीने की शुरूआत में सीएनएन के एक साक्षात्कारकर्ता द्वारा बाइडन के साथ व्यक्तिगत बातचीत नहीं करने के बारे में पूछे जाने पर, खान ने कहा, "मुझे लगता है कि वह बहुत व्यस्त हैं, लेकिन अमेरिका के साथ हमारा रिश्ता सिर्फ एक फोन कॉल पर निर्भर नहीं है, इसमें बहुआयामी संबंध होने की जरूरत है।"

सोमवार की ब्रीफिंग में, साकी ने कहा, "हम पाकिस्तान में विदेश विभाग, रक्षा विभाग और प्रशासन के अन्य प्रमुख घटकों के नेताओं के साथ उच्च स्तर पर संपर्क में हैं।"

विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से मुलाकात की और उनके साथ फोन पर बातचीत की।

रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा से भी कई बार बात कर चुके हैं।

उप विदेश मंत्री वेंडी शेरमेन अगले महीने पाकिस्तान की यात्रा पर जाने वाली हैं फिर वह भारत भी आएंगी।

24 सितंबर को, खान ने मोदी और जापान के प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा और ऑस्ट्रेलिया के स्कॉट मॉरिसन के साथ बाइडन के क्वाड शिखर सम्मेलन के ठीक बाद संयुक्त राष्ट्र में बात की।

पाकिस्तानी नेता ने पूछा, "अमेरिका में दुभाषियों और अमेरिका की मदद करने वाले सभी लोगों की देखभाल करने के बारे में बहुत चिंता है। हमारे बारे में क्या?"

खान ने अपने देश के प्रति अमेरिका की गलतियों की एक लंबी सूची दी और इसे तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा करने के तरीके के लिए जिम्मेदार ठहराया।

"हमारा इतना नुकसान उठाने का एकमात्र कारण यह था कि हम अफगानिस्तान में युद्ध में अमेरिका, गठबंधन के सहयोगी बन गए थे। अफगान धरती से पाकिस्तान में हमले किए जा रहे हैं। कम से कम प्रशंसा का एक शब्द होना चाहिए था। लेकिन प्रशंसा के बजाय, कल्पना करें कि जब हम अफगानिस्तान में घटनाओं के मोड़ के लिए दोषी ठहराए जाते हैं तो हम कैसा महसूस करते हैं।"

उन्होंने याद किया कि अफगान मुजाहिदीन को अमेरिका द्वारा प्रशिक्षित और समर्थित किया गया जब वे सोवियत संघ से लड़ रहे थे।

खान ने कहा कि 2006 में उन्होंने बाइडन से मुलाकात की, जो उस समय एक सीनेटर थे और उनसे कहा कि अफगानिस्तान में एक सैन्य समाधान संभव नहीं है और एक राजनीतिक समाधान का अनुरोध किया। (आईएएनएस)


28-Sep-2021 3:22 PM (30)

मैड्रिड, 28 सितम्बर | स्पेन के कैनरी द्वीपसमूह के ला पाल्मा द्वीप पर स्थित कंब्रे विएजा ज्वालामुखी में भूकंपीय गतिविधि कुछ देर की खामोशी के बाद फिर से सक्रिय हो गई है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, जियोलॉजिकल माइनिंग इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेन (आईजीएमई) ने कहा कि ज्वालामुखी विलुप्त नहीं हुआ, यह उसकी गतिविधि में एक सामान्य ठहराव था।


समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, दो लावा प्रवाह अब समुद्र से लगभग एक किलोमीटर दूर हैं, कैनरी द्वीप ज्वालामुखी संस्थान (ईनवोल्कन) ने चेतावनी दी है कि मैग्मा और पानी के बीच थर्मल शॉक क्षेत्र के लोगों के लिए खतरा बन गया है।

ज्वालामुखी शुरू में 19 सितंबर को फटा था।

साथ ही सोमवार को, प्रधानमंत्री प्रेडो सांचेज ने पुष्टि की कि ला पाल्मा द्वीप के लिए सहायता उपायों के पहले पैकेज को मंगलवार की कैबिनेट बैठक के दौरान मंजूरी दी जाएगी।

सांचेज ने कहा कि ला पाल्मा का पुनर्निर्माण केंद्र सरकार, कैनरी द्वीप क्षेत्रीय सरकार और स्थानीय अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा।

कई प्रभावित नगर पालिकाओं के निवासियों को सलाह दी गई कि लावा के समुद्र में पहुंचने पर निकलने वाली जहरीली गैसों के खतरे के कारण अपने घरों से बाहर न निकलें।

सांताक्रूज डी ला पाल्मा और ब्रेना कस्बों में स्कूलों को अगली सूचना तक बंद कर दिया गया है।

द्वीप की 80,000 से अधिक आबादी के 6,000 से अधिक लोगों को निकाला गया है।

ज्वालामुखी के तीन पिछले रिकॉर्ड किए गए विस्फोट 1971 में 24 दिन, 1949 में 47 दिन और 1712 में 56 दिन के लिए हुए थे। (आईएएनएस)


28-Sep-2021 3:15 PM (20)

महिला सशक्तिकरण की दिशा में सऊदी अरब ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है. हरम प्रेसीडेंसी में 600 सऊदी अरब की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है. सभी महिलाओं को दो मस्जिदों में अलग-अलग कार्य दिए जाएंगे. मीडिया में आई खबर के मुताबिक दो पवित्र मस्जिदों के जनरल प्रेसीडेंसी ने बताया कि अबतक अपनी एजेंसियों या सहायक एजेंसियों की की मदद से 600 महिला कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया है. इन प्रशिक्षित महिलाओं को महिला विकास मामलों के उपाध्यक्ष अल-अनौद अल-अबौद के नेतृत्व में 310 महिलाओं को रोजगार भी दिया जा चुका है. महिला विकास मामलों की एजेंसी ने इन महिलाओं को अलग-अलग कार्यों में लगाया है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि कमेलिया अल-दादी के नेतृत्व में करीब 200 महिलाएं बौद्धिक और मार्गदर्शन मामलों की एजेंसी के लिए काम कर रही हैं जबकि बाकी के प्रशिक्षित महिला प्रशासनिक और सेवा मामलों की एजेंसी में अपनी सेवा दे रही हैं.

बता दें कि इससे पहले इस साल की शुरुआत में, सऊदी में महिला सैनिकों को इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना में पहरा देने के लिए भर्ती किया गया था. सुरक्षा के दौरान सैन्य खाकी वर्दी पहने महिलाओं ने पहली बार मक्का की ग्रैंड मस्जिद में सुरक्षा स्थिति की निगरानी कर रही हैं.

सऊदी अरब की ओर से उठाए गए इस कदम की तारीफ दुनिया भर में हो रही है. मक्का में ग्रैंड मस्जिद-खाना-ए-काबा में इन प्रशिक्षित महिलाओं को महिला तीर्थयात्रियों और आगंतुकों की सेवा के लिए लगाया गया है. सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में देश में लागू की जा रही विजन की दिशा में बहुत बड़ा कदम है. (abplive.com)
 


28-Sep-2021 2:05 PM (20)

तालिबान के लड़ाकों ने अफगानिस्तान के ताखर प्रांत के एक गांव में एक बच्चे को फांसी पर लटकाकर मार डाला. इस क्रूरता की कहानी पंजशीर आर्ब्जवर ने सामने लाई है, जो पंजशीर और अफगानिस्तान के मामलों में एक स्वतंत्र मीडिया समूह है. पंजशीर आर्ब्जवर ने एक ट्वीट में यह जानकारी दी है और तालिबान की इस करतूत को #WarCrimes जैसे हैशटैग के साथ ट्वीट किया है. तालिबान की ऐसी क्रूरता ने यह संदेश दिया है कि उसके खिलाफ आवाज उठाने वालों का क्या हश्र होता है. लेकिन इससे तालिबान के मानवाधिकार के मुद्दे पर सुधार के दावे खोखले साबित हुए हैं.

तालिबान के सत्ता में आने के अभी डेढ़ महीने ही हुए हैं, लेकिन उसकी क्रूरता की दिल दहला देने वाली खबरें सामने आने लगी हैं. तालिबान ने ताखर प्रांत में एक बच्चे को फांसी पर लटका दिया था. बच्चे का कसूर सिर्फ इतना था कि उसके पिता पर तालिबान के विरोधी अफगान रजिस्टेंस फोर्स का सदस्य होने का संदेह था.  

इससे पहले तालिबान कई अपहरणकर्ताओं को सूली पर लटका चुका है, जिन पर लोगों का अपहरण कर फिरौती वसूलने का आरोप है. तालिबान ने कई इलाकों में पुरुषों के दाढ़ी कटवाने या हेयर स्टाइल रखने पर भी पाबंदी लगा दी है. हालांकि तालिबान 15 अगस्त को सत्ता में आने के बाद उदारवादी चेहरा पेश करने की कोशिश की थी. उसने लड़कियों को पढ़ाई करने की इजाजत भी दे दी थी, लेकिन अब इसमें कई शर्तें थोप दी हैं.

लड़कों और लड़कियों की पढ़ाई अलग-अलग स्कूलों में कराने का निर्देश है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विशेषज्ञों का कहना है कि आतंकी समूह अपने पुराने कट्टरपंथी और हिंसक रवैये पर लौट आया है. हिंसा हमेशा से ही तालिबान का सबसे बड़ा हथियार रहा है. बिना किसी रक्तपात के अफगानिस्तान की सत्ता पर नियंत्रण का उसका दावा भी खोखला साबित हुआ है.  (ndtv.in)


28-Sep-2021 1:46 PM (21)

काठमांडूः हवाई जहाज का सफर कभी-कभी दिल की धड़कनें बढ़ा देता है. कुछ ऐसा ही एख मामला सोमवार को नेपाल में देखने को मिला. लैंडिंग गियर में गड़बड़ी के कारण विमान दो घंटे तक आसमान में चक्कर काटता रहा. बाद में बुद्ध एयर के इस विमान को बिराटनगर की जगह काठमांडू में लैंडिंग करवाया गया. इस दौरान विमान में सवार तिहत्तर लोगों की सांसे अटकी रही. आखिरकार दो घंटे की मशक्कत के बाद जब लैंडिंग हुई तो लोगों की जान में जान वापस आई. क्या है पूरा मामला समझिए...

मामला नेपाल की राजधानी काठमांडू के त्रिभुवन एयरपोर्ट की है. विमान जैसे ही लैंड करता है लोग तालियां बजाते हैं. जमीन पर खड़े अधिकारी हरकत में आते हैं. विमान के लैंड करते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ी और एंबुलेंस तेजी से विमान की तरफ भागते है. विमान लैंड करते ही हर कोई खुश नजर आता है.

दरअसल, ये घटना महज आसमान में नाउम्मीदी लिए जिंदगी को जमीन मिलने भर की कहानी नहीं है. बल्कि ये 73 यात्रियों के पुनर्जन्म जैसा है. ये सभी 73 यात्री 120 मिनट यानि दो घंटे तक हर सेकंड मौत के साए में जी रहे थे लेकिन विमान की लैंडिंग के बाद इन सभी यात्रियों की जान में जान आई.

दरअसल, नेपाल की घरेलू विमान सेवा बुद्ध एयर के विमान की सोमवार सुबह बिराटनगर में लैंडिंग होनी थी. काठमांडू से सुबह 8 बजकर 35 मिनट पर उड़ान भरने वाले विमान को बिराटनगर में लैंड करना था. लेकिन, लैंडिंग से ठीक पहले अचानक लैंडिंग गियर यानी पिछले पहिए में तकनीकी खराबी आ गई.

विमान की बिराटनगर में लैंडिग सफल नहीं हो पाई तो विमान के अंदर से लेकर बाहर तक हड़कंप मच गया. विमान ने वापस काठमांडू का रुख किया जहां रनवे पर फोम लगाकर फोर्स लैंडिंग की तैयारी की जा रही थी. दमकल और एंबुलेंस की तैनाती कर दी गई थी. हर बीते लम्हे के साथ लोगों की धड़कनें तेज होती जा रही थीं.   (abplive.com)


28-Sep-2021 1:15 PM (23)

अमेरिकी संस्था कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि विश्व में सक्रिय आतंकी संगठनों में से 12 ऐसे हैं जो पाकिस्तान में शरण लिए हुए है. वहीं इन 12 में से  पांच आतंकी संगठनों का निशाना भारत है. ये एक बड़ा और हैरान कर देने वाला खुलासा अमेरिकी की संस्था सीआरसी की ओर से किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मुहम्मद जैसे संगठन भारत को अपना निशाना बनाने की ताक में हमेशा रहते हैं.

वहीं, अन्य संगठन विदेशी आंतकी बताये जा रहे हैं. सीआरसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के अधिकारियों ने पाकिस्तान के कई आतंकियों ऑपरेशनल बेस समेत मिलिटेंट ग्रुप की पहचान की है जिनमें से कुछ संगठन साल 1980 से सक्रिय हैं.

बता दें, बीते दिनों क्वाड समिट के वक्त अमेरिका की ओर से जारी की गई इस रिपोर्ट में साफ शब्दों में कहा गया कि सभी आतंकी संगठन पाकिस्तान में सक्रिय चल रहे हैं. उन्होंने बताया कि ये संगठन पांच तरह के हैं. इनमें कुछ ऐसे भी हैं जो पूरी दुनिया को टारगेट बनाए हुए हैं तो वहीं कुछ संगठनों के निशाने पर अफगानिस्तान की जमीन है. वहीं, पाकिस्तान में पनाह लिए पांच आतंकी संगठनों के निशाने पर भारत और कश्मीर मुख्य तौर पर हैं.

लश्कर-ए-तैयबा
अमेरिका की जारी इस रिपोर्ट में बताया गया कि, लश्कर-ए-तैयबा साल 1980 में पाकिस्तान में बनाया गया था. वहीं, साल 2001 में इसे वैश्विक आतंकी संगठन के रूप में देखा गया. साल 2008 में इस आतंकी संगठन ने मुंबई में हमला किया. बता दें, ये संगठन विश्वभर में कई बड़े हमले कर चुका है.

जैश-ए-मोहम्मद
जैश-ए-मोहम्मद संगठन की स्थापना साल 2002 में हुई थी जिसके संस्थापक मसूद अजहर था. साल 2001 में इस संगठन को विदेशी आतंकी संगठन के रूप में बनाया गया. बता दें, भारत में हुए हमलों में इस संगठन का हाथ रहा है.

हरकत-उल-जिहाद-इस्लामी
हरकत-उल-जिहाद-इस्लामी अफगानिस्तान में साल 1980 में बना संगठन है. सोवियत सेना से लड़ने के लिए इसकी स्थापना की गई थी हालांकि साल 2010 में इसे वैश्विक आतंकी संगठन के रूप में बदल दिया गया था. जानकारी के मुताबिक साल 1989 के बाद से इस संगठन ने भारत में हमले शुरू किए थे. वहीं, अफगानिस्तान में तालिबान की लड़ाई के लिए इस संगठन के लड़ाकों को भेजा गया था.

हिजबुल मुजाहिदीन
हिजबुल मुजाहिदीन की अगर बात करें तो साल 1989 में पाकिस्तान की सबसे बड़ी इस्लामिक राजनीतिक पार्टी के रूप में की इसकी स्थापना हुई थी. हालांकि इस संगठन की तरफ से कई आतंकी हमले किए गए. साल 2017 में इस संगठन को वैश्विक संगठन के रूप में जाना गया.

(abplive.com)
 


28-Sep-2021 12:54 PM (19)

जर्मनी की ग्रीन्स पार्टी की दो ट्रांसजेंडर महिलाओं ने हाल ही में हुए संसदीय चुनावों में जीत हासिल की है. वो दोनों देश के इतिहास में पहली ट्रांसजेंडर महिला सांसद होंगी.

  (dw.com)

टेस्सा गैंसरर और नाइके स्लाविक दोनों ग्रीन्स पार्टी की सदस्य हैं. पार्टी ने चुनावों में तीसरा स्थान हासिल किया है और 2017 में हुए पिछले चुनावों में 8.9 प्रतिशत मतों के मुकाबले इस बार 14.8 प्रतिशत मत हासिल किए हैं.

पार्टी अब एक नई गठबंधन सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका अदा करने वाली है. 44 वर्षीय गैंसरर कहती हैं, "ये ग्रीन्स के लिए एक ऐतिहासिक जीत तो है ही, साथ ही ट्रांस लोगों के उद्धार से संबंधित आंदोलन और पूरे क्वीर समाज के लिए भी ऐतिहासिक जीत है."

अविश्वसनीय नतीजे

गैंसरर ने यह भी कहा कि ये नतीजे एक खुले और उदार समाज का प्रतीक भी हैं. वो इसके पहले 2013 में बवेरिया की प्रांतीय संसद की सदस्य भी रह चुकी हैं. बतौर सांसद उनकी प्राथमिकताओं की सूची में पहचान पत्रों पर लिंग के बदलाव को प्रमाणित करने की प्रक्रिया को सरल बनाना सबसे ऊपर है.

गैंसरर दो बेटों की मां भी हैं. वो कानून में ऐसे बदलाव भी चाहती हैं जिनकी मदद से समलैंगिक माताओं को बच्चे गोद लेने की अनुमति मिल सके. 27 साल की स्लाविक कहती हैं कि चुनावों के नतीजे अविश्वसनीय थे. उन्होंने नार्थ राइन-वेस्टफेलिया राज्य से संसदीय चुनाव जीता.

उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा,"मैडनेस! मैं अभी भी इस पर विश्वास नहीं कर पा रही हूं, लेकिन इस ऐतिहासिक चुनावी नतीजे के साथ मैं निश्चित ही बुंडेसटाग की सदस्य बन जाऊंगी."

बढ़ता होमोफोबिया

स्लाविक ने समलैंगिक और ट्रांस लोगों के विरोध के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी कार्य योजना, आत्म-निर्णय के अधिकार का एक कानून और भेदभाव की रोकथाम करने वाले केंद्रीय कानून में सुधार की मांग की है.

जर्मनी में समलैंगिकता को 1969 में ही अपराध माने जाने से मुक्त कर दिया गया था और समलैंगिक विवाह को 2017 में कानूनी मान्यता मिल गई थी. लेकिन पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक एलजीबीटी प्लस लोगों के लिए खिलाफ नफरत के अपराधों में पिछले साल 36 प्रतिशत उछाल आया.

ये जर्मन समाज के कुछ हिस्सों में होमोफोबिया के प्रचलन में हो रहे इजाफे को चिन्हांकित करता है.

सीके/एए (रॉयटर्स)


28-Sep-2021 12:52 PM (22)

अपदस्थ अफगान सरकार और कार्यकर्ता समूहों ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार संगठन से तालिबान द्वारा योजनाबद्ध हत्याओं की जांच की मांग की है.

   (dw.com)

अधिकार कार्यकर्ता समूहों ने यूएन की मानवाधिकार एजेंसी से अफगानिस्तान में लक्षित हत्याओं, महिलाओं पर प्रतिबंध और अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक जैसी रिपोर्ट की जांच की मांग की है. यह अपील ऐसे समय में आई है जब यूरोपीय संघ अफगानिस्तान पर मसौदा प्रस्ताव पेश करने की तैयारी कर रहा है. इस अपील को अफगानिस्तान के स्वतंत्र मानवाधिकार आयोग का समर्थन हासिल है. आयोग के प्रमुख का कहना है कि देश में उनकी कई गतिविधियों को निलंबित कर दिया गया है.

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने एक आपातकालीन सत्र आयोजित किया था, लेकिन कार्यकर्ताओं ने कहा कि पाकिस्तान के नेतृत्व वाला प्रस्ताव जो अपनाया गया था वह बहुत कमजोर था. उसके बाद संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बैचलेट को कुछ शक्तियों के साथ दोबारा रिपोर्ट करने को कहा गया था.

बैचलेट ने 13 सितंबर को मंच को बताया कि तालिबान ने महिलाओं को घर पर रहने का आदेश देकर और अपने पूर्व दुश्मनों की घर-घर तलाशी लेकर वादों को तोड़ा है.

इस सत्र में प्रसारित यूरोपीय संघ का मसौदा प्रस्ताव जिसे रॉयटर्स ने देखा है उसमें प्रदर्शनकारियों और मीडिया के खिलाफ हिंसा की निंदा की गई है. अगर यह मसौदा अपना लिया जाता है तो प्रतिवेदक नियुक्त किया जाएगा लेकिन घटनाओं की पूर्ण जांच नहीं की जाएगी.

जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि नासिर अहमद अंदीशा के मुताबिक, "हम परिषद के सदस्यों से परिषद के जनादेश के अनुरूप अफगानिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति की निगरानी के लिए एक समर्पित और प्रभावी तंत्र की स्थापना के लिए एक प्रस्ताव को अपनाने का आग्रह करते हैं जो जवाबदेही और रोकथाम के लिए जरूरी है."

कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक विशेष प्रतिवेदक- स्वतंत्र विशेषज्ञ जिनके पास आमतौर पर पूर्णकालिक नौकरी होती है, काफी नहीं होगा.

ह्यूमन राइट्स वॉच के कार्यकारी निदेशक केन रॉथ के मुताबिक, "संयुक्त राष्ट्र से कुछ सहायता के साथ मात्र एक विशेष प्रतिवेदक पर्याप्त नहीं है."

वे आगे कहते हैं, "देश की जटिलता को देखते हुए एक जांच तंत्र को समर्पित संसाधनों और स्पष्ट जनादेश के साथ एक पूर्ण टीम की जरूरत होती है."

इस बीच एक स्थानीय सरकारी अधिकारी ने शनिवार को कहा कि पश्चिमी अफगान शहर हेरात में तालिबान ने चार कथित अपहरणकर्ताओं को मार डाला और दूसरों को रोकने के लिए उनके शवों को सार्वजनिक रूप से लटका दिया.

एए/वीके (रॉयटर्स)


28-Sep-2021 10:29 AM (33)

-अरुल लुइस 

संयुक्त राष्ट्र, 28 सितंबर| पिछले सप्ताह उच्चस्तरीय महासभा सत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच जोरदार आदान-प्रदान के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को उम्मीद है कि उनके बीच बातचीत संभव है।

दैनिक ब्रीफिंग में तीखे बयानों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "हमने टिप्पणियों को सुना, और मुझे लगता है कि टिप्पणियों के स्वर और सामग्री के बावजूद, हम हमेशा आशान्वित रहते हैं कि बातचीत हो सकती है, शायद ऐसी जगह पर जो सुर्खियों में नहीं है।"

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को भारत पर जोरदार हमला करते हुए भाजपा और खासकर आरएसएस पर निशाना साधा।

उनके जवाब में, भारत के संयुक्त राष्ट्र मिशन में पहली सचिव स्नेहा दुबे ने आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान को निशाने पर लेते हुए कहा था, "एक आगजनी करने वाला है, जो खुद को अग्निशामक के रूप में पेश कर सच को छिपाता है।"

उन्होंने कहा था, "यह एक ऐसा देश है, जिसे राज्य की नीति के तहत आतंकवादियों को खुले तौर पर समर्थन, प्रशिक्षण, वित्तपोषण और हथियारों से लैस करने वाले देश के रूप में मान्यता दी गई है। यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों की सबसे बड़ी संख्या की मेजबानी करने का अपमानजनक रिकॉर्ड रखता है।"

उन्होंने बंग मुक्ति संग्राम के दौरान और उससे पहले बांग्लादेश में पाकिस्तान द्वारा किए गए कम से कम 300,000 लोगों के संहार को भी याद किया।

बातचीत के लिए परिदृश्य बताते हुए, स्नेहा दुबे ने कहा था, "हम पाकिस्तान सहित अपने सभी पड़ोसियों के साथ सामान्य संबंध चाहते हैं। हालांकि, यह पाकिस्तान के लिए एक अनुकूल माहौल बनाने की दिशा में ईमानदारी से काम करना है, जिसमें विश्वसनीय, सत्यापन योग्य और अपरिवर्तनीय कार्रवाई करना शामिल है। अपने नियंत्रण वाले किसी भी क्षेत्र को किसी भी तरह से भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दें।"

अगले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के साथ सीधे तौर पर बात नहीं की, लेकिन आतंकवाद के खतरों के बारे में बात की, जो स्पष्ट रूप से इस्लामाबाद के आतंकवाद का संरक्षण होने की ओर इशारा था। (आईएएनएस)


28-Sep-2021 9:44 AM (47)

अगर किसी से पूछा जाए कि दुनिया की सबसे कीमती चीज क्या है तो बेशक वो हीरा या सोना ही कहेगा. लेकिन अगर हम कहें कि हीरा, सोना या किसी भी बहमूल्य रत्न से महंगी एक लकड़ी है तो क्या आप विश्वास करेंगे? इस बात पर तो किसी का भी विश्वास करना मुश्किल है मगर ये सच है कि दुनिया की सबसे दुर्लभ लकड़ी की कीमत हीरे और सोने से भी महंगी है. तो चलिए हम आपको इस लकड़ी के बारे में ज्यादा जानकारी देते हैं.

अकीलारिया के पेड़ से मिलने वाला अगरवुड, ईगलवुड या एलोसवुड के नाम से भी जाना जाता है. ये लकड़ी चीन, जापान, भारत, अरब और साउथ ईस्ट एशियन देशों में पाया जाता है. अगरवुड की लकड़ी दुनिया की सबसे दुर्लभ मगर सबसे महंगी बिकने वाली लकड़ी होती है. इस लकड़ी का दाम हीरे और सोने से कीमती होता है. खबर लिखे जाने तक भारत में एक ग्राम हीरे का दाम 3,25,000 रुपये है जबकि 10 ग्राम सोना 47,695 रुपये का है. लेकिन अगरवुड की सिर्फ 1 ग्राम लकड़ी 10,000 डॉलर यानी 7 लाख रुपये से ज्यादा की बिकती है.

अगरवुड को जापान में क्यानम या क्यारा के नाम से भी जाना जाता है. इस लकड़ी से इत्र और पर्फ्यूम बनाया जाता है. लकड़ी के सड़ जाने के बाद इसे इत्र के प्रोडक्शन में इस्तेमाल किया जाता है. यही नहीं, अगरवुड की लकड़ी के राल से ओड तेल भी निकाला जाता है. आपको बता दें कि इस तेल को ही सेंट में इस्तेमाल किया जाता है और आज के वक्त में इस तेल की कीमत 25 लाख रुपये प्रति किलो है! इतनी कीमती होने के कारण अगरवुड को वुड ऑफ गॉड्स यानी भगवान की लकड़ी भी कहते हैं. आपको बता दें कि हॉन्गकॉन्ग, चीन, जापान के इलाके में अकीलारिया के पेड़ काफी होते हैं मगर इससे निकलने वाला अगरवुड इतना कीमती है कि इसकी कटाई और तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस लकड़ी की इतनी तस्करी हो रही है कि अकिलारिया के पेड़ की नस्ल को ही खत्म कर दिया जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार एशियन प्लांटेशन कैपिटल कंपनी अकीलारिया के पेड़ों से जुड़ी एशिया में सबसे बड़ी कंपनी है. ये पेड़ों की नस्ल को बचाने के काम में जुटी है और इसने हॉन्गकॉन्ग समेत कई देशों में प्लांटेशन का काम किया है. (news18.com)


28-Sep-2021 9:27 AM (35)

काबुल. अगस्त महीने के मध्य में काबुल पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने अपनी छवि चमकाने के लिए कई कदम उठाए थे. इन कदमों में पूर्व अफगान सरकार के सैनिकों, कर्मचारियों के लिए आम माफी की घोषणा भी शामिल थी. लेकिन अब तकरीबन डेढ़ महीने बाद तालिबान के ये कदम महज दिखावटी ही साबित होते दिख रहे हैं. दरअसल बेलगाम तालिबान लड़ाके देश की गलियों में हिंसा और उत्पात मचा रहे हैं. इन लड़ाकों ने अपने प्रतिद्वंद्वियों का जीना मुहाल कर दिया है. बड़ी संख्या में पूर्ववर्ती सरकार के समर्थक लोग मौत के साए में जिंदगी गुजार रहे हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक टोलो न्यूज के संवाददाता अब्दुल हक उमरी देश से बाहर निकलने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. बीते 15 अगस्त के बाद से एक भी रात उन्होंने अपने काबुल स्थित घर नहीं गुजारी है. दरअसल तालिबानी लड़ाकों ने एक के बाद एक कई अपने कई विरोधियों की हत्याएं की हैं. विरोधियों का टॉर्चर आम बात बन चुका है.

मुल्ला मोहम्मद याकूब की चेतावनी, लेकिन कोई असर नहीं
तालिबान लीडरशिप के लिए लड़ाकों का ये अत्याचार अब बड़ा सिरदर्द बन चुका है. लीडरशिप चाहती है कि दुनिया में उन्हें मान्यता मिले लेकिन जमीनी लड़ाके इन सब बातों से नावाकिफ हैं. लड़ाकों के बढ़ते अत्याचार के मद्देनजर हाल ही में देश के रक्षा मंत्री मुल्ला मोहम्मद याकूब ने चेतावनी दी है. याकूब ने कहा है कि आम माफी का ऐलान किया जा चुका है इसलिए विरोधियों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बर्दाश्त नहीं की जाएंगी.

क्यों नहीं टॉप लीडरशिप का कहना मान रहे लड़ाके
कई अफगानी पत्रकारों का कहना है कि तालिबानी लड़ाकों ने आम माफी की बात को गंभीरता से नहीं लिया है. वो बस लड़ना जानते हैं क्योंकि उन्होंने केवल यही एक बात सीखी है. कट्टरपंथी संगठन के लड़ाके व्यवस्थित और अनुशासित नहीं हैं. यही कारण है कि लीडरशिप के कई बार मना करने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है.

दरअसल तालिबान के लिए ये एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है. संगठन के उदारवादी चेहरे माने जाने वाले अब्दुल गनी बरादर को साइडलाइन किए जाने की खबरें पहले भी आ चुकी हैं. बरादर की बजाए सरकार में आतंकी गुट हक्कानी नेटवर्क को ज्यादा वरीयता दी जा रही है. ऐसे में सरकार की छवि पहले से बिगड़ी हुई. इस दौरान तालिबान लड़ाकों के रोज बढ़ते अत्याचारों ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है. (news18.com)


28-Sep-2021 9:26 AM (30)

पेरिस. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को उस वक्त एक प्रदर्शनकारी से मामूली धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ गया, जब वे सोमवार को लियोन शहर में फ्रांसीसी भोजन बनाने की कला को बढ़ावा देने के लिए पहुंचे थे. इस दौरान वह प्रदर्शकारी Vive la Revolution का नारा लगा रहा था, जिसका हिंदी में मतलब होता है ‘इंकलाब जिंदाबाद’.

दरअसल, राष्ट्रपति इमैनुएल कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों का अभिवादन कर रहे थे, तभी एक अंडा उनके बाएं कंधे पर लगा और उछलकर उनके गाल से टकराया, हालांकि वह फूटा नहीं. इस घटना से मैक्रों घबरा गए, तभी एक बॉडीगार्ड ने उन्हें तुरंत ही पीछे खींच लिया और एक अन्य बॉडीगार्ड ने राष्ट्रपति के चेहरे के सामने अपना हाथ लगाया ताकि उनके ऊपर फिर कोई हमला ना हो सके.

इमैनुएल मैक्रों के सीक्रेट सर्विस ने अंडे फेंकने वाले को तुरंत ही अपने कब्जे में ले लिया और उसे घसीटते हुए लेकर जाने लगे. इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति यह कहते हुए सुने गए कि अगर वह प्रदर्शनकारी मुझसे कुछ कहना चाहता है, तो उसे आने दो. मैक्रों ने अपने बॉडीगार्ड्स से कहा, “मैं उसके बाद बात करूंगा. जाओ उसे ले आओ.”

अधिकारियों द्वारा व्यक्ति की पहचान या उसकी मंशा के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है. गौरतलब है कि जून में, मैक्रों को दक्षिण-पूर्वी फ्रांस के एक छोटे से कस्बे में एक व्यक्ति ने उस दौरान थप्पड़ मार दिया था जब वह जनता का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे. (news18.com)


28-Sep-2021 8:11 AM (25)

नई दिल्ली, 27 सितम्बर| अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत (आईसीसी) के नए अभियोजक ने 2003 से अफगानिस्तान में तालिबान और इस्लामिक स्टेट के समर्थकों द्वारा किए गए मानवता के खिलाफ कथित अपराधों की जांच फिर से शुरू करने के लिए अदालत से गुहार लगाई है। द गार्जियन ने अपनी एक रिपोर्ट में यह दावा किया है। करीम खान का यह कदम न केवल अतीत बल्कि मानवता के खिलाफ समकालीन अपराधों की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का उपयोग करने का ²ढ़ संकल्प दिखाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हेग स्थित आईसीसी ने नीदरलैंड में अफगानिस्तान के दूतावास के माध्यम से तालिबान को सूचित किया है कि वह एक जांच फिर से शुरू करना चाहता है।

अशरफ गनी की तत्कालीन अफगान सरकार द्वारा आईसीसी वकीलों के सहयोग से सबूत इकट्ठा करने के लिए समय दिए जाने के अनुरोध के बाद अप्रैल 2020 में एक पिछली आईसीसी जांच को टाल दिया गया था।

एक ब्रिटिश क्यूसी खान ने आईसीसी अभियोजक के तौर पर कहा, घिनौने और आपराधिक कृत्यों को तुरंत बंद कर देना चाहिए और नूर्मबर्ग में 75 साल पहले स्थापित किए गए सिद्धांतों की पुष्टि करने और मानवता की बुनियादी जिम्मेदारी का सम्मान करने के लिए जांच शुरू होनी चाहिए।

उनके निवेदन में कहा गया है कि अफगानिस्तान के भीतर अपराधों की वास्तविक और प्रभावी घरेलू जांच की अब कोई संभावना नहीं है।

द गार्जियन ने बताया, तालिबान द्वारा अफगानिस्तान के क्षेत्र का वर्तमान वास्तविक नियंत्रण, और इसके निहितार्थ (अफगानिस्तान में कानून प्रवर्तन और न्यायिक गतिविधि सहित), वर्तमान आवेदन की आवश्यकता वाली परिस्थितियों में एक मौलिक परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है।

वह बताते हैं कि विश्वसनीय रिपोटरें से पता चलता है कि तालिबान ने बगराम एयरबेस हिरासत सुविधाओं से कथित रूप से अल-कायदा और आईएस आतंकवादी समूहों से जुड़े हजारों कैदियों को रिहा कर दिया है। यह कार्रवाई इस धारणा का समर्थन नहीं करती है कि क्या तालिबान वास्तव में अभी या भविष्य में अनुच्छेद 5 अपराधों की जांच करेगा।

नरसंहार प्रतिक्रिया के लिए गठबंधन ने घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि हाल के महीनों में हजारा समुदाय के खिलाफ नरसंहार सहित अत्याचार अपराधों के गंभीर जोखिम देखे गए हैं।

इसमें कहा गया है कि आईसीसी के उच्च-स्तरीय अपराधियों पर मुकदमा चलाने का जनादेश जहां राज्य असमर्थ या अनिच्छुक रहते हैं, उन्हें लगातार लागू किया जाना चाहिए और इसे बिना किसी डर या पक्षपात के अमल में लाया जाना चाहिए। (आईएएनएस)


28-Sep-2021 8:08 AM (33)

नई दिल्ली, 27 सितम्बर। काबुल में हालिया बदलाव के बाद बलूच राष्ट्रवादियों, टीटीपी और आईएसके-पी वाले पाकिस्तान विरोधी सशस्त्र मिलिशिया समूह पाकिस्तान में भाग गए हैं और इनके बलूचिस्तान में फिर से संगठित होने और भर्ती होने की बात कही गई है। द न्यूज ने अपनी एक रिपोर्ट में पाकिस्तान के सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है।

अधिकारियों का कहना है कि बलूचिस्तान की सीमा से लगे ईरान के सिस्तान प्रांत में कुछ सेकंड टियर और मास्टरमाइंड देखे गए हैं। एक सुरक्षा अधिकारी ने पुष्टि करते हुए कहा, डॉ. अल्लाह नजर, बशीर जेब और गुलजार शंबे जाली ईरानी, अफगान यात्रा दस्तावेजों और तजकारा, सीमा दरें का उपयोग करके बलूचिस्तान की सीमा से लगे ईरानी प्रांत में पहुंच गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न बलूच संगठनों और दाएश/आईएसके-पी प्रकोष्ठों के लगभग 200 एक्टिविस्ट को मस्तुंग की नागो पहाड़ियों और क्वेटा के बाहरी इलाके में मार्गाट में और उसके आसपास देखा गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बीएलए मिलिशिया के सदस्यों ने डॉ. अल्लाह नजर गुट के एक प्रमुख प्रमुख मुल्ला अमीन के आतंकवादियों के साथ सेना में शामिल हो गए होंगे, जो अपने 70-80 सशस्त्र कैडरों के समूह के साथ नागू हिल्स, मस्तुंग में छिपे हुए हैं। बीएलए की तुरबत और आवारन के अलावा खारन, सिबी, बोलन और मच में मजबूत उपस्थिति है और सभी सुरक्षा लेंस के तहत भी हैं।

लेकिन इस समूह का प्रमुख अमीर/मास्टरमाइंड मौलवी अफगान है, जिसके बारे में इलाके में होने की सूचना है और उसका पीछा किया जा रहा है।

मस्तुंग लंबे समय से बीएलए और दाएश दोनों के लिए गुरुत्वाकर्षण का केंद्र रहा है और वास्तव में जून-जुलाई में हाई प्रोफाइल सुरक्षा बलों के ऑपरेशन का गवाह रहा है। पहाड़ी ट्रैक और सुरंगों के अलावा, खानाबदोश आबादी को शिफ्ट करने के अलावा क्षेत्र को मिलिशिया के लिए एक आदर्श मैदान बनाते हैं।

सुरक्षा विशेषज्ञ विश्लेषण कर रहे हैं और उनका कहना है कि मिलिशिया और यहां तक कि उनके परिवारों को भी बिना किसी संदेह के इस क्षेत्र में बसना और घूमना आसान लगता है। 100-150 मीटर ऊंची पहाड़ियों से आसपास के कई किलोमीटर के क्षेत्र पर नजर रखने के लिए स्थलाकृति भी आदर्श है, जिससे सुरक्षा बलों द्वारा किसी भी तरह की आश्चर्यजनक आवाजाही मुश्किल हो जाती है। इस क्षेत्र में अतीत में, बीएलए और दाएश अपने शिविरों और ठिकाने, संसाधनों को साझा करते हुए सह-अस्तित्व में थे और इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि यह पहले से ही एक बार फिर हो रहा है।

पुलिस खुफिया सूत्रों के अनुसार, बलूचिस्तान में टीटीपी का बड़े पैमाने पर पुनरुत्थान हो रहा है जो एक चिंताजनक और बड़ी चुनौती है। वे भर्ती के साथ भी आक्रामक रूप से आगे बढ़ रहे हैं।

अफगानिस्तान के स्पिन बोल्डक से वापस ऐनुजमन अखुंदजादा के नेतृत्व में भागे हुए टीटीपी के लोग, काबुल में 15 अगस्त को तालिबान सरकार की स्थापना से पहले, जोब और लोरलाई में काफी समय से फिर से संगठित और भर्ती कर रहे हैं और प्रतिशोध के साथ हड़ताल करने की तैयारी कर रहे हैं। टीटीपी प्रमुख, नूरवाली महसूद ने अमेरिका से बाहर निकलने और काबुल में अफगान तालिबान के कार्यभार संभालने के बाद तत्कालीन आदिवासी क्षेत्र को फिर से लेने की योजना की घोषणा करके अपनी महत्वाकांक्षाओं को उजागर किया है। महसूद ने कहा, एक मुस्लिम की जीत निश्चित रूप से दूसरे मुस्लिम के लिए मददगार है।

पाक सुरक्षा विशेषज्ञ इस समय टीटीपी नोड्स को सबसे बड़ा खतरा मानते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इंटरसेप्ट्स ने सिंध और बलूचिस्तान में सुरक्षा नेतृत्व को आश्वस्त किया है कि पुनर्गठन समूहों ने सक्रिय और स्लीपर सेल के माध्यम से कराची, लाहौर और इस्लामाबाद और क्वेटा पर नजर रखी है।

सुरक्षा और खुफिया जानकारों का मानना है कि क्वेटा फिलहाल शांत दिख रहा है, लेकिन स्थिति कभी भी बदल भी सकती है।

सिंध एलईए और पुलिस के शीर्ष सूत्रों ने भी सुक्कुर और कराची में मिलिशिया के संबंध में रिपोर्ट की पुष्टि की है। शीर्ष समिति की बैठक में सिंध के मुख्यमंत्री को सूचित किया गया था कि सिंध में परिष्कृत, सैन्य ग्रेड हथियारों से लैस कशमोर, घोटकी, खैरपुर और सुक्कुर के दुर्गम नदी क्षेत्रों में छिपे कुछ डकैत गिरोह बलूचिस्तान से आने वाले मिलिशिया को ठिकाने प्रदान कर सकते हैं। 


28-Sep-2021 8:07 AM (28)

वॉशिंगटन. अमेरिका में कोविड-19 के खिलाफ बूस्टर डोज लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी सोमवार को तीसरी खुराक प्राप्त की. इस दौरान उन्होंने वैक्सीन लेने से इनकार कर रहे नागरिकों को भी फटकार लगाई और कहा कि वे अमेरिका को नुकसान पहुंचा रहे हैं. फिलहाल, अमेरिका में 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को बूस्टर डोज दी जा रही है.

हाल ही में जारी स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों के तहत बाइडन ने व्हाइट हाउस में फाइजर वैक्सीन का तीसरा डोज प्राप्त किया. उन्होंने मजाक में कहा, ‘मुझे पता है, यह वैसा नहीं दिखता है, लेकिन मैं 65 साल से ज्यादा उम्र का हूं.’ आयुवर्ग के अलावा स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परेशानियों से जूझ रहे वयस्कों को भी कोविड के खिलाफ तीसरा डोज दिया जा रहा है.

बाइडन ने कहा कि परेशानी यह है कि काफी अमेरिकी अभी भी वैक्सीन के पहला डोज लेने से इनकार कर रहे हैं, जो डेल्टा वेरिएंट के मामले बढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि 77 फीसदी अमेरिकी नागरिकों ने टीका हासिल कर लिया था, लेकिन यह काफी नहीं है. जबकि, एक चौथाई अभी भी वैक्सीन लेने से इनकार कर रहे हैं. राष्ट्रपति ने सभी से वैक्सीन लेने की अपील की.

उन्होंने कहा, ‘ये अल्पसंख्यक हमें और बाकी देश को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं.’ बाइडन ने कहा, ‘प्लीज, सही काम करें.’ राष्ट्रपति ने फाइजर का पहला डोज बीते दिसंबर और दूसरा जनवरी में हासिल किया था. उन्होंने बीते हफ्ते जानकारी दी थी कि अमेरिका में करीब 6 करोड़ लोग फाइजर बूस्टर डोज के लिए पात्र हैं. उन्होंने कहा था कि जिन लोगों ने मॉडर्ना या जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन प्राप्त की है, वे एक बार स्टडी पूरी होने के बाद बूस्टर डोज ले सकेंगे.

उन्होंने संभावना जताई कि जल्द ही सारे अमेरिकी नागरिक वैक्सीन के लिए पात्र हो जाएंगे. सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने शुक्रवार को कहा कि ‘आने वाले हफ्तों में’ मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन के बूस्टर डोज का आकलन किया जाएगा. (news18.com)


27-Sep-2021 8:28 PM (32)

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी ने सोमवार को कहा कि उनका फेसबुक एकाउंट हैक हो गया है. उनकी तरफ से ऐसा उस वक्त कहा गया है जब कथित तौर पर हैकर्स ने उनके पेज पर कहा कि तालिबान को मान्यता दी जाए. न्यूज़ एजेंसियों के मुताबिक, गनी के फेसबुक एकाउंट से अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह अपील की गई है कि वे सुन्नी पश्तो समुदाय के मूवमेंट का समर्थन करें और अफगानिस्तान की संपत्तियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाएं.

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति, जो 15 अगस्त को काबुल से भाग गए थे, उन्होंने ट्विटर लिखा है कि उनका कल से  आधिकारिक फेसबुक पेज हैक हो गया है और जब तक एकाउंट बहाल नहीं हो जाता है तब तक किसी भी तरह का कंटेंट अवैध है. गनी ने पश्तो में ट्वीट करते हुए कहा- “डॉक्टर मोहम्मद अशरफ गनी का आधिकारिक फेसबुक पेज हैक कर लिया गया है. जब तक यह बहाल नहीं हो जाता है कल से प्रकाशित कंटेंट वैध नहीं है.”

गौरतलब है कि पिछले महीने तालिबान की तरफ से काबुल पर कब्जे के बाद अशरफ गनी संयुक्त अरब अमीरात भाग गए थे.  इसके बाद कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन की तरफ से पूर्व राष्ट्रपति पर आरोप लगाया गया कि वे चार गाड़ी में अपने साथ कैश भरकर ले गए और उसके बाद उसे हेलीकॉप्टर पर लोड किया. तालिबान सरकार ने गनी से उन पैसों को वापस कर देने की मांग की.

हालांकि, गनी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था. 8 सितंबर को जारी एक बयान में अशरफ गनी ने कहा था कि वह और उनकी पत्नी अपने व्यक्तिगत वित्त को लेकर "साफ" रहे हैं और उन्होंने सभी संपत्तियों की घोषणा की है.(abplive)


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