राजपथ - जनपथ
अगली पीढ़ी की बारी?
प्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर चुनावी गतिविधियां शुरू हो रही हैं। चुनाव सीनियर कांग्रेस का नहीं, बल्कि युवक कांग्रेस के पदाधिकारियों का होना है। इसमें पार्टी के सीनियर नेता भी खास दिलचस्पी दिखा रहे हैं। चर्चा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता युवक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद पर अपनी पसंद के युवा चेहरे को बैठाने के लिए मंथन कर रहे हैं।
युवक कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष आकाश शर्मा और उनकी टीम का कार्यकाल खत्म हो रहा है। जल्द ही चुनाव प्रक्रिया शुरू होने वाली है। आकाश शर्मा भी निर्वाचन के जरिए ही अध्यक्ष बने थे। चर्चा है कि युवक कांग्रेस चुनाव को लेकर देवेन्द्र यादव खास दिलचस्पी ले रहे हैं। आकाश शर्मा को भी उनका करीबी माना जाता है।
सुनत हैं कि देवेंद्र यादव, पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव के भतीजे आदित्येश्वर शरण सिंहदेव (आदी बाबा) को युवक कांग्रेस का चुनाव लड़ाने के लिए प्रयासरत हैं। चर्चा है कि इस सिलसिले में उन्होंने टीएस सिंहदेव से बातचीत भी की है। बताया जाता है कि सिंहदेव ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सहमति होने पर ही आदित्येश्वर शरण सिंहदेव को चुनाव लडऩे की अनुमति दी जाएगी। हालांकि भूपेश बघेल ने अब तक अपने इरादे साफ नहीं किए हैं। युवक कांग्रेस का चुनाव लडऩे के इच्छुक कई नेता उनसे मुलाकात कर रहे हैं।
इसी तरह नेता प्रतिपक्ष डॉ.चरणदास महंत के पुत्र सूरज महंत को भी आगे लाने की कोशिशें चल रही हैं। पूरे घटनाक्रम पर महंत भी फिलहाल खामोश बताए जा रहे हैं। इसके अलावा कई अन्य नेता पुत्र भी चुनाव लडऩे की तैयारी में जुटे हैं। माना जा रहा है कि चुनाव की औपचारिक घोषणा के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।
कमी नहीं फिर भी दिक्कत!
प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कमी का हल्ला है। सरकार और पेट्रोलियम कंपनियों के प्रतिनिधियों ने साफ कर दिया है कि पेट्रोल-डीजल के स्टॉक में कोई कमी नहीं है। बावजूद इसके अफवाह खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। पेट्रोल-डीजल के लिए पंपों में गाडिय़ों की कतार देखी जा सकती है।
पेट्रोलियम कंपनियों का दावा है कि स्टॉक में कोई कमी नहीं है, तो सवाल उठ रहा है कि किल्लत क्यों है? पेट्रोल पंप डीलर्स कंपनियों पर तोहमत लगा रहे हैं। इन सबके बीच रायपुर कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिंह ने गुरुवार को बैठक रखी। बैठक में पेट्रोलियम कंपनियों और डीलर्स को आमने-सामने बिठाकर कमी पर चर्चा की गई। पेट्रोलियम कंपनियों के प्रतिनिधियों ने साफ किया कि स्टॉक में कमी नहीं है, जबकि डीलर्स ने कहा कि उन्हें मांग के अनुरूप पेट्रोल-डीजल उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
कंपनी प्रतिनिधियों की तरफ से यह भी कहा गया कि शहर में दोपहर के समय टैंकर नहीं पहुंच पाते हैं। इस पर कलेक्टर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि अब टैंकर 24 घंटे पहुंचेंगे। इसके लिए उन्होंने यातायात पुलिस को भी निर्देश दिए।
चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आई कि अफवाह के चलते लोग अधिक मात्रा में पेट्रोल-डीजल खरीद रहे हैं और इस वजह से स्टॉक जल्दी खत्म हो रहा है। कलेक्टर ने कंपनियों और डीलर्स को सख्त हिदायत दी कि किसी तरह की किल्लत नहीं होनी चाहिए।
दीपावली भेंट में मानहानि की नोटिस

अब तक अमुमन मानहानि के दावे, केस और वकील की नोटिस दलीय नेताओं, बड़े बिजनेस मैन के बीच होते सुनते और पढ़ते रहे हैं। आज हम सरकारी कर्मचारियों के बीच मानहानि नोटिस और उसके असर की जानकारी दे रहे हैं। राज्य मंत्रालय में खानपान से जुड़े एक विभाग से ऐसी ही खबर गलियारों में सुनी जा रही है। बड़े स्टाफ वाले इस विभाग के कर्मचारी अलग अलग विभागों में तबादले कराने लगे हैं। दरअसल बात कुछ छमाह से चल रही है। दीपावली के समय सौजन्य भेंट का विवाद, इस स्तर तक पहुंच गया है।
विभाग के निगम, और उसके काम में हिस्सेदार ठेकेदारों ने दीपावली पर भेंट दिया था। कर्मचारी कहते हैं कि यह भेंट अकेले एक ही अधिकारी ने रख लिया। इस संदेह के पीछे छिपा संदेश साहब तक पहुंचा। वे परेशान कि उधो का लेना न माधव का देना। बेवजह बदनामी का तनाव अलग। काफी पड़ताल के बाद साहब ने उन कर्मचारियों की फेहरिस्त बनाई जो यह प्रचार कर रहे थे। फिर वकील से संपर्क, सलाह ली। फिर क्या था एक दिन सूचीबद्ध कर्मचारी के हाथ मानहानि की नोटिस पहुंची। ऐसी नोटिस अभी प्रचार में शामिल अन्य के लिए भी स्पीड पोस्ट हो चुकी है। बस इसी से घबराए दुष्प्रचारक विभाग से तबादला कराने में सक्रिय हो गए हैं। इनके तबादले से प्रभावित दूसरे कर्मचारियों ने तहकीकात की तो पूरा खुलासा हुआ। अब वे ही कहने लगे हैं कि प्रचार करो जब पूरे तथ्य हों। वर्ना एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल देना ही बेहतर होगा।
एआई से बनी अखबार की कतरन

सोशल मीडिया पर इन दिनों पुराने अखबारों की ऐसी तस्वीरें खूब साझा की जा रही है, जिनको पहली असली लगती है। तस्वीर में अंग्रेजी अखबार द हिंदू की हेडिंग और 1967 की तारीख दिखाई गई है। इसमें एक बच्चे को मगरमच्छ पकडऩे वाला बहादुर बच्चा बताया गया है, जबकि बाद में उसे छिपकली निकाला जाना दर्शाया गया है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन और उनके पुराने दावों से जोडक़र व्यंग्यात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
यह तस्वीर एआई से तैयार की गई फर्जी सामग्री है। तस्वीर में कई ऐसी कमियां हैं, जिनसे इसकी वास्तविकता आप तुरंत पकड़ सकते हैं। सबसे पहले, अखबार के डिजाइन और फॉन्ट का संतुलन पुराने द हिंदू के वास्तविक संस्करणों से मेल नहीं खाता। हिंदी और अंग्रेजी टेक्स्ट की शैली अलग-अलग और अस्वाभाविक है। कई जगह अक्षरों का आकार असमान है तथा शब्दों के बीच की दूरी भी अनियमित है,
इसके अलावा खबर के भीतर प्रयुक्त भाषा भी कृत्रिम और हास्य-प्रधान है, जबकि उस दौर में समाचार लिखने की शैली अधिक औपचारिक होती थी। तस्वीर में छपी कुछ छोटी हेडिंग और टेक्स्ट धुंधले तथा अर्थहीन नजर आते हैं। फोटो और लेआउट में भी अस्वाभाविक चमक है।


