राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : विजयपत सिंघानिया का छत्तीसगढ़ कनेक्शन
29-Mar-2026 6:16 PM
राजपथ-जनपथ : विजयपत सिंघानिया का छत्तीसगढ़ कनेक्शन

विजयपत सिंघानिया का छत्तीसगढ़ कनेक्शन

रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन और पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. विजयपत सिंघानिया के निधन की खबर ने उन लोगों को भी दुखी किया, जो छत्तीसगढ़ से उनके जुड़ाव को जानते हैं।

पुराने बिलासपुर जिले के गोपालपुर में, जो अब जांजगीर-चांपा जिले में शामिल हुआ है, उन्होंने रेमंड सीमेंट संयंत्र की स्थापना की थी। वे उन चुनिंदा उद्योगपतियों में थे, जिन्होंने निवेश के साथ छत्तीसगढ़ के साथ लगाव रखा। उनका हेलीकॉप्टर उतरता था, तो खुद ही कई बार पायलट होते थे। कुछ घंटों का प्रवास होता था, कभी-कभी एक दो दिन के लिए रुकते भी थे। उनके संयंत्र से स्थानीय लोगों को रोजगार मिला और कई व्यवसायियों को भी काम मिला। वे यहां के राजनीतिक और प्रबुद्ध लोगों से भी मिलने के लिए वक्त निकाल लिया करते थे। मजदूरों और संयंत्र के आसपास के जमीन मालिकों के साथ कई बार विवाद भी हुआ। खासकर खेती की जमीन को लाइम स्टोन के खनन से होने के नुकसान के चलते। पर, उन्हें सुलझा लिया गया। प्रशासन तब भी उनके पक्ष में होता था, लेकिन आज की तरह एकतरफा नहीं। तब प्रशासन ग्रामीणों की शिकायतें सुनता भी था और सिंघानिया अथवा फैक्ट्री प्रबंधन को बाध्य भी करता था, समाधान के लिए। हर बार समाधान निकल भी जाता था। रेमंड के कपड़े महंगे होते थे। मगर, अपने कर्मचारियों के लिए वे हर साल एक बार सेल लगवाया करते थे। यह सेल फैक्ट्री एरिया में लगा करती थी। रेमंड के कपड़ों का क्रेज आज भी है, पर उस वक्त ज्यादा ही था। शहर से भी लोग जाकर उस सेल में खरीदारी करते थे। बाद में उन्होंने यह फैक्ट्री लाफार्ज को बेच दी। इसी बीच उन्होंने गौ संवर्धन की एक योजना को हाथ में लिया। ग्रामीणों को अच्छे नस्ल की गायों को वितरित किया गया। एक मॉडल गौशाला भी फैक्ट्री परिसर में तैयार किया गया। पर, धीरे-धीरे विजयपत सिंघानिया का बिलासपुर आना बंद हो गया। बाद में उनका अपने बेटे, बहुओं से विवाद की खबरें यहां पहुंचने लगी। उन्हें परिवार से लगभग बेदखल कर एक फ्लैट में कैद करके रख दिया गया था। जो लोग उनसे मिला-जुला करते थे, उन्हें इन सूचनाओं ने पीड़ा पहुंचाई। आज जब उनके निधन की खबर आई है, छत्तीसगढ़ में जो लोग कभी उनसे मिल चुके हैं या उनकी वजह से नौकरी और व्यापार में सफल हो चुके हैं- उनको भी दुख हुआ है।

एक दिन में आया सिलेंडर

इन दोनों पर्चियों की तारीख पर गौर जरूर करें। 26 फरवरी को बुकिंग और 27 फरवरी को घर पर आ गया सिलेंडर। ग्राहक कह रहे हैं कि कुछ ही गैस कंपनियों की डिलीवरी फास्ट है। लेकिन ऐसा तो हो नहीं सकता कि उनके पास स्टॉक ज्यादा है और बाकी के पास कम। ये दोनों पर्चियां उन लोगों को चिढ़ा रही होंगी जो गैस कंपनी दफ्तरों के बाहर सुबह से कतार में खड़े हो रहे हैं, या तो उनके घर के सिलेंडर खत्म हो गए हैं, या जंग खत्म न होने की आशंका में वे आनन-फानन सिलेंडर लेने पहुंच रहे हैं। लेकिन सवाल ये भी है कि जब घरेलू गैस की बुकिंग 25 दिन के अंतराल में हो रही है तो क्या खपत इतनी बढ़ गई है कि लोगों के सिलेंडर पहले खाली हो रहे हैं, या फिर इसमें भी कहीं कोई गड़बड़झाला है! क्योंकि गैस की किल्लत की खबरों के बीच घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग के खुलासे धड़ल्ले से हो रहे हैं और कार्रवाई भी।

भारत सरकार ने कहा है कि देश के पास 60 दिनों का गैस भंडार है, लेकिन न तो कोई किल्लत की स्थिति है और न ही लॉकडाउन जैसी। केंद्र के निर्देशों के मुताबिक राज्य सरकार ने भी औपचारिक बैठक में सभी जिले के कलेक्टर्स को गैस सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जनता से कहा है कि गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं है, लोगों को अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए। बता दें कि गैस सिलेंडर की जमाखोरी पर कार्रवाई भी चल रही है, सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पखवाड़े भर में जमाखोरी के मामले में करीब 4 हजार सिलेंडर जब्त हुए, और करीब 100 एफआईआर।

गैस का ब्लैक मार्केट तो छलांगे मार रहा है, सोशल मीडिया पर कमेंट बताते हैं कि लोगों को 4-4 हजार में सिलेंडर मिल रहा है। ये वो लोग हो सकते हैं जिन्होंने कंपनी से कनेक्शन नहीं लिया होगा, या उनके घर पर एक सिलेंडर 25 दिन भी नहीं चलता होगा। हालात कह रहे हैं कि कटौती करनी होगी, जैसे पहले जंग के सबसे मुश्किल शुरुआती दौर में सरकार ने सिलेंडर सप्लाई के कोटे में कटौती की ताकि मारामारी न हो। सरकार को हालात काबू में दिखे तो अब कोटा बढ़ा दिया गया है। लेकिन लोगों को भी जंग के ऐसे मुश्किल हालातों में समझदारी दिखानी जरूरी है, न कि हड़बड़ी।

‘घर’ के बाहर भी जंग

असम चुनाव में छत्तीसगढ़ के नेताओं की भी परीक्षा है। यहां केन्द्रीय मंत्री तोखन साहू के अलावा डिप्टी सीएम अरुण साव, और  वित्त मंत्री  ओपी चौधरी डेरा डाले हुए हैं। जबकि कांग्रेस प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार की कमान पूर्व सीएम भूपेश बघेल संभाल रहे हैं। खास बात ये है कि चुनाव प्रचार के दौरान छत्तीसगढ़ के कांग्रेस-भाजपा नेताओं के बीच जुबानी जंग भी चल  रही है।

भूपेश ने असम के सीएम हिमंता बिस्वा शर्मा को  ‘नकली कांग्रेसी’ बताकर माहौल गरम करने की कोशिश की है। हिमंता कांग्रेस में रह चुके हैं। भूपेश बघेल चुनावी सभाओं में हिमंता पर निशाना साधते हुए कह रहे हैं कि असम में कांग्रेस का मुकाबला  ‘नकली कांग्रेसी’  से है और भाजपा मुकाबले में नहीं है। इस पर भाजपा नेता जवाबी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं।  और जब एक्साइज ड्यूटी घटाने के मामले पर पूर्व सीएम ने जब केंद्र की सरकार को घेरने की कोशिश की, तो वित्त मंत्री ओपी चौधरी जवाब देने के लिए आगे आ गए।

भूपेश ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती तेल कंपनियों के लिए राहत दी गई, और चाटुकारिता के लिए जनता को लाभ मिलने की अफवाह फैला रहे हैं। इस पर ओपी चौधरी ने एक्स पर लिखा कि कोविड जैसी आपदा के समय जब पूरी दुनिया संकट से जूझ रही थी, और लोग आर्थिक मुश्किलों में थे तब आपने पेट्रोल पर वैट बढ़ाकर आपदा को अवसर बनाकर वसूली की थी। उन्होंने आखिरी में लिखा कि साफ है कि आपके समय में आपदा वसूली का अवसर थी, मोदी जी के नेतृत्व में संकट में भी जनता को राहत देने का संकल्प है।

चुनावी माहौल है, तो प्रदेश के नेता बाहर जाकर भी लड़ रहे हैं।

एल्डरमैन की नियुक्ति जल्द

मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने म्युनिसिपलों में एल्डरमैनों की नियुक्ति कर दी है। मप्र के 123 म्युनिसिपल ने 429 एल्डरमैन नियुक्त हुए हैं। मप्र की नियुक्ति के बाद यहां भी हलचल शुरू हो गई है। हालांकि प्रदेश के बड़े  नेता पांच राज्यों के चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, लेकिन पद के इच्छुक नेता मंत्रियों के संपर्क में हैं। कुछ ने तो पार्टी दफ्तर में बायोडाटा भी दे दिया है।

छत्तीसगढ़ में 667 एल्डरमैनों की नियुक्ति होनी है। पहले चर्चा यह भी थी कि एल्डरमैनों की नियुक्ति नहीं होगी। मगर मप्र में नियुक्ति होने के बाद यहां भी नियुक्ति की संभावना जताई जा रही है। साय सरकार आधा कार्यकाल पूरा कर चुकी है। म्युनिसिपलों का भी एक साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसे में जल्द से जल्द नियुक्ति के लिए दबाव बन रहा है। चर्चा है कि सबकुछ ठीक रहा तो मई में एल्डरमैनों की लिस्ट जारी हो सकती है। वजह यह है कि चार मई तक चुनावी व्यस्तता है, और इसके बाद फिर नियुक्तियों पर फैसला होगा। एल्डरमैनों के साथ ही निगम मंडलों के उपाध्यक्ष और सदस्यों की भी नियुक्ति के आसार हैं। देखना है आगे क्या होता है।


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