राजपथ - जनपथ
4 हजार करोड़ और हलचल
जी रामजी विकसित भारत योजना मद में 4 हजार करोड़ रुपए के बजट प्रावधान से हलचल मची है। चर्चा है कि केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को इस मद में अधिकतम राशि खर्च करने और योजना को ज़मीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने का स्पष्ट संदेश दिया गया है।
बताते हैं कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह जी रामजी योजना लागू किए जाने के बाद केंद्र विशेष सतर्कता बरत रहा है। कांग्रेस और इंडी गठबंधन इस बदलाव का लगातार विरोध कर रहे हैं और देशभर में प्रदर्शन किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी सभी जिलों में धरना-प्रदर्शन हो चुके हैं।
मनरेगा को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार की सबसे सफल और लोकप्रिय योजनाओं में गिना जाता रहा है। इससे करोड़ों ग्रामीण मजदूरों को रोजगार की गारंटी मिली थी। ऐसे में केंद्र को आशंका है कि कहीं नई योजना का हश्र कृषि कानूनों जैसा न हो जाए। इसी वजह से जी रामजी विकसित भारत योजना को सफल बनाने के लिए अभियान चल रहा है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ में मनरेगा के तहत अपेक्षाकृत कम काम स्वीकृत हुए थे।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं नियमित समीक्षा कर रहे हैं। वे छत्तीसगढ़ के कई दौरों में अधिकारियों को योजना के क्रियान्वयन को लेकर सख्त हिदायत दे चुके हैं। मजदूरी भुगतान व्यवस्था को पहले से अधिक पारदर्शी और तेज बनाने का दावा भी किया जा रहा है।
राज्य में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद 9 लाख मजदूरों के काम पर लगे हैं, जो कि अब तक का सर्वाधिक है। जिस रफ्तार से जी रामजी योजना पर काम हो रहा है, उससे फिलहाल विपक्ष को कृषि कानूनों जैसी व्यापक राजनीतिक सफलता मिलने की संभावना कम नजर आ रही है। देखना है आगे क्या होता है।
आठवां वेतन आयोग और ठगी
केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारी और पेंशनभोगी सावधान रहें। वें जहां 8वां वेतन आयोग के तहत संभावित वेतन बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे हैं, वहीं साइबर ठगों ने इसके जरिए भी बूढ़े पेंशनर्स की कमाई पर डाका डालने का तरीका निकाल लिया है। ठगों ने हाल ही में 8ह्लद्ध पे कमीशन सैलरी कैलकुलटर नाम का एक फर्जी ऐप तेजी से वायरल कर रखा है। इसे डाउनलोड करने लोगों को मैसेज और व्हाट्सएप के जरिए लिंक भेजे जा रहे हैं। दावा किया जाता है कि इस ऐप से कर्मचारी अपनी संशोधित सैलरी और पेंशनर्स अपने नए पेंशन और एरियर्स का हिसाब लगा सकते हैं। ऐसा कोई एप नहीं बनाया गया है।असल में यह एक बड़ा साइबर फ्रॉड है। एजेंसियों ने चेतावनी जारी की है।
गृह मंत्रालय की साइबर सुरक्षा पहल सायबर दोस्त ने इस मामले को लेकर अलर्ट जारी किया है। बताया गया है कि यह ऐप किसी भी आधिकारिक प्लेटफॉर्म जैसे गुगल प्ले पर उपलब्ध नहीं है। ठग इसे एपीके फाइल के रूप में भेजते हैं और लोगों से कहते हैं कि इसे सीधे फोन में इंस्टॉल कर लें। आमतौर पर अनजान लोग यह समझ नहीं पाते कि ्रक्क्य फाइल को साइडलोड करना कितना खतरनाक हो सकता है। केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि वह कभी भी व्हाट्सएप या किसी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ्रक्क्य फाइल नहीं भेजती।
उड़ान के सपनों को कब पंख लगेंगे?
हवाई सेवाओं के विस्तार के लिए बिलासपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर जैसे शहर कभी आसमान की ओर तो कभी सरकार की ओर उम्मीद से देखते हैं। मगर, इस बार राज्य बजट में जब केवल 80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया तो साफ हो गया कि अभी छत्तीसगढ़ के द्वितीय दर्जे के शहरों को विकास का पंख लगाने में काफी समय लगेगा।
देश में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देने के लिए महत्वाकांक्षी योजना उड़ान शुरू की गई। लगभग दस वर्ष हो चुके हैं, तब भी ये तीनों शहर नियमित और भरोसेमंद उड़ानों से नहीं जुड़ पाए हैं। योजना का उद्देश्य ही था कि देश के दूरदराज और उपेक्षित क्षेत्रों को सस्ती हवाई सेवा से जोड़ा जाए। सरकार ने एयरलाइंस को वायबिलिटी गैप फंडिंग देकर जोखिम कम करने की कोशिश की। सैकड़ों रूट शुरू हुए, लाखों यात्रियों ने यात्रा की। लेकिन कई रूट शुरू होकर बंद भी हो गए। सीमित सब्सिडी अवधि, एयरलाइंस की आर्थिक कठिनाइयां और कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी समस्याएं बार-बार सामने आ रही हैं।
इस समय बिलासपुर से दिल्ली और कोलकाता की उड़ानें घटाई जा चुकी है। जगदलपुर से हैदराबाद और रायपुर सेवा बंद हो गई। अंबिकापुर में कभी सेवा शुरू होती है, कभी बंद हो जाती है। 80 करोड़ रुपये का प्रावधान विस्तार और आधुनिक सुविधाओं के लिए अपर्याप्त है। अकेले बिलासपुर को रनवे विस्तार और 4सी श्रेणी के लिए 300 करोड़ रुपये की जरूरत है। यहां नाइट लैंडिंग का ट्रायल हो चुका है, पर तकनीकी स्टाफ की जरूरत के मुताबिक नियुक्ति ही नहीं की गई है।
उड़ानों के संचालन में मुख्य रूप से एलायंस एयर पर निर्भरता बनी हुई है। ओपन टेंडर न होने से निजी एयरलाइंस की भागीदारी नहीं हो पा रही है। छोटे विमान कम होने से एलायंस एयर कभी भी उड़ानों का समय बदल देती है या सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर देती है। यह अनिश्चित स्थिति यात्रियों का भरोसा तोड़ती है, जिसे बाद में पर्याप्त ट्रैफिक नहीं मिलने की बात कह दी जाती है।
दूसरे राज्यों की स्थिति छत्तीसगढ़ से बेहतर है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ने केंद्र के साथ बेहतर तालमेल और निजी निवेश को आकर्षित किया है। वहां यात्री संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उद्योग, खनिज, वन संपदा और पर्यटन की अपार संभावनाओं वाले छत्तीसगढ़ में भी यह मुमकिन है। उद्योगपतियों, छात्रों, मरीजों और पर्यटकों के लिए त्वरित कनेक्टिविटी आवश्यक होती है। हवाई सेवा केवल सुविधा नहीं, निवेश और रोजगार का जरिया भी है।
हाल ही में बिलासपुर एयरपोर्ट को 3सी-आईएफआर लाइसेंस के बाद यहां से ऑल-वेदर ऑपरेशन और नाइट लैंडिंग संभव हो चुका है। यदि ओपन टेंडर जारी कर निजी कंपनियों जैसे इंडिगो, स्पाइसजेट या अकासा को अवसर दिया जाए, तो हैदराबाद, कोलकाता और इंदौर जैसे शहरों से सीधी उड़ानें शुरू हो सकती हैं। मगर, जरूरी है कि राज्य सरकार केंद्र के साथ समन्वय और पहल करे। राज्य की स्थापना से ही छत्तीसगढ़ के दूसरे शहरों के लोग महसूस कर रहे हैं कि विकास का मतलब केवल राजधानी रायपुर रह गया है, वे पिछड़ते जा रहे हैं। हवाई सेवाओं में विस्तार से उनकी शिकायत काफी हद दूर हो सकती है।


