राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : नाच-गाने की चकाचौंध में हाशिये पर संघर्ष
13-Jan-2026 6:13 PM
राजपथ-जनपथ : नाच-गाने की चकाचौंध में हाशिये पर संघर्ष

नाच-गाने की चकाचौंध में हाशिये पर संघर्ष

यह तस्वीर गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक की है। उसी दिन की, जब उसी इलाके से प्रशासनिक अफसरों और पुलिसकर्मियों के नर्तकियों के साथ थिरकते, नोट उड़ाते दृश्य सैकड़ों प्लेटफॉर्म पर वायरल हुए। वह तस्वीर हर जगह दिखी, खूब साझा हुई। लेकिन यह तस्वीर, जहां आदिवासी अपने हक के लिए सडक़ पर बैठे हैं, कहीं-कहीं ही जगह बना पाई।

12 जनवरी को आदिवासी बहुल राजापड़ाव और आसपास की 8 पंचायतों के 30 गांवों के ग्रामीणों ने इस साल पहली बार नेशनल हाईवे जाम कर दिया। दोनों ओर सैकड़ों वाहनों की लंबी कतार लग गई। पिछले साल वे चार बार सडक़ जाम कर चुके हैं। मुद्दा तब भी वही था, आज भी वही है बिजली।

ये गांव उदंती-सीता नदी अभयारण्य के अधीन हैं। यहां बिजली लाइन की मंजूरी वर्षों पहले मिल चुकी है। अभयारण्य के कोर एरिया में गांवों के होने के कारण अंडरग्राउंड बिजली लाइन बिछाई जानी है। लेकिन मंजूरी के बावजूद काम ठप पड़ा है। बिजली और वन विभाग के अफसरों से पूछा जाता है तो जवाब मिलता है- बजट नहीं है।

साल 2023 में कुछ सीमित काम जरूर हुआ, दो-तीन गांवों में आंशिक प्रगति दिखी। उसके बाद पिछले दो से ढाई साल से हालात जस के तस हैं। रोशनी पहुंची नहीं, अंधेरे में जिंदगी चल रही है।

जिस इलाके में बजट का अभाव बताकर आदिवासी समुदाय को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है, उसी इलाके के अफसरों के पास नाच-गाने में पैसे लुटाने का वक्त निकल आता है। सूरजपुर से लेकर गरियाबंद तक सिस्टम समस्याओं के समाधान से ज्यादा तमाशे में मशगूल है।

जांच और प्रमोशन

आईएएस के वर्ष-2010 बैच के चार अफसर सारांश मित्तर, पदुम सिंह एलमा, रमेश कुमार शर्मा, और धर्मेश कुमार साहू सचिव के पद पर पदोन्नत हुए। इसी बैच के दो अफसर पति-पत्नी जेपी मौर्य, और रानू साहू पदोन्नति से वंचित  रह गए। दोनों के खिलाफ ईओडब्ल्यू-एसीबी, और ईडी कोयला घोटाला प्रकरण की जांच कर रही है। रानू तो निलंबित है, लेकिन जेपी मौर्य पर कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में मौर्य के पदोन्नति की अटकलें लगाई जा रही थी, मगर उनकी भी पदोन्नति रूक गई। अब आईपीएस अफसरों की पदोन्नति लिस्ट पर निगाहें टिकी हुई है।

दर्जनभर आईपीएस अफसर एक जनवरी से पदोन्नति के पात्र हो गए हैं। इनमें 99 बैच के आईपीएस डॉ. आनंद छाबड़ा भी हैं, जो कि आईजी से एडीजी के पद पर पदोन्नति का प्रस्ताव है। इसी तरह डीआईजी से आईजी के पद पर पारूल माथुर, प्रशांत अग्रवाल, डी श्रवण, और नीथू कमल की पदोन्नति का भी प्रस्ताव है।

बताते हैं कि कुछ अफसर जांच एजेंसियों के घेरे में आए हैं। उनके यहां जांच पड़ताल भी हुई थी। मगर आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब जेपी मौर्य की पदोन्नति रोकी गई है, तो जांच के घेरे में आए पुलिस अफसरों की पदोन्नति भी रूक सकती है। चर्चा है कि  जांच के घेरे में आए पुलिस अफसरों को पदोन्नति के लिए जरूरी विजिलेंस क्लीयरेंस जारी नहीं हो पाया है। ऐसे में पदोन्नति प्रस्ताव अटका पड़ा है। देखना है आगे क्या होता है।

हेलमेट नहीं तो काम नहीं

बढ़ती सडक़ दुर्घटनाओं से जीवन को सुरक्षित रखने हेलमेट नि:संदेह आवश्यक है। जो नहीं पहनते हैं उनके लिए अनिवार्य करने बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं, गाड़ी की डिलीवरी के समय हेलमेट देने जैसी व्यवस्थाएं की गई। इनका भी पालन नहीं हो रहा। अब प्रशासन ने एक नया तरीका अपनाया है।अब बिना हेलमेट कलेक्टोरेट में प्रवेश निषेध कर दिया है। ऐसे लोगों को पकडऩे गेट पर ही सिपाही बिठा दिए गए हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि आम लोग शासकीय कार्यों के लिए भटक रहे हैं।

कलेक्टोरेट परिसर में कोषालय, खाद्य,खनिज, न्यायालय, पंजाब नेशनल बैंक, बाजू में कोर्ट आदि अनेक कार्यालय हैं, जो आम जनता से जुड़े हुए हैं। यहां आने वाले ग्रामीण चालान का शिकार हो रहे हैं। और शहरी आम जन,कर्मचारी, अधिवक्ताओं से ट्रैफिक पुलिस वालों से की बहस होती है। वे कहते हैं कि अब  नेता चुनाव में हेलमेट पहन के आएंगे तभी वोट देंगे। आज एक ऐसे ही अधिवक्ता ने पुलिस कर्मियों को बताया कि यह जनतंत्र के विपरीत है। भारतीय संविधान की उद्देशिका जनता का, जनता के द्वारा,जनता के लिए की नीति अंतिम सांस ले रही है। जितनी दुर्घटनाएं हेलमेट के बिना हुई या मृत्यु हुई उससे अधिक शराब के नशे में हुई। शराबबंदी क्यों नहीं किया जाता। कलेक्टर कार्यालय के अंदर में ही आबकारी विभाग है जहां बिना हेलमेट के प्रवेश वर्जित है, अच्छा होता बिना शराब के प्रवेश वर्जित होता है शराबबंदी होती।

कुछ और खबरें अफसरों की

मंत्रालय में एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी है। आईएएस के तीन अफसर डॉ. प्रियंका शुक्ला, जगदलपुर कलेक्टर एस हरीश, और बलौदाबाजार-भाटापारा कलेक्टर दीपक सोनी केन्द्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जा रहे हैं। तीनों अफसरों की पोस्टिंग भी हो गई है। तीनों अफसरों को एक-दो दिन के भीतर रिलीव किया जा सकता है।

चर्चा है कि कुछ निगम-मंडल अध्यक्षों के अलावा सरकार के एक मंत्री ने अपने विभाग के संचालनालय प्रमुख को बदलने के लिए सीएम से गुहार लगाई है। ये सभी अपने मातहत अफसरों से नाखुश चल रहे हैं। कहा जा रहा है कि फेरबदल की सूची में इन सभी के नाम हो सकते हैं। मंत्री जी का तर्क है कि सरकार बदलने के साथ ही तकरीबन सभी विभागों के प्रमुखों को बदला जा चुका है। मगर उनका विभाग फेरबदल से अछूता रहा है। देखना है कि क्या कुछ बदलाव होता है।


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