राजनांदगांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 11 जनवरी। गांव की बाड़ी में उगाई गई सब्जियों ने सत्यशीला दीदी के जीवन में आर्थिक खुशहाली ला दी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत लखपति दीदी योजना से जुडक़र उन्होंने यह साबित कर दिया कि सही योजना और मेहनत से ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। लखपति सीआरपी द्वारा आजीविका योजना तैयार करने हेतु सत्यशीला दीदी का आजीविका प्रपत्र भरा गया।
दीदी के घर के पीछे पर्याप्त बाड़ी उपलब्ध होने के कारण ग्राम संगठन से 40 हजार रुपये का ऋण लिया गया। इसके साथ ही जमा पूंजी का उपयोग कर बाड़ी में फेंसिंग कार्य कराया गया। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में दीदी ने व्यवस्थित रूप से सब्जी उत्पादन की गतिविधि प्रारंभ की।
सब्जी खेती में दीदी ने कम लागत एवं जैविक पद्धतियों को अपनाया। जैविक कीटनाशक तथा वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग कर उन्होंने पालक, बैंगन और टमाटर की उन्नत खेती की। इसके परिणामस्वरूप उन्हें प्रथम चरण में ही लगभग 60 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई।
वर्तमान में सत्यशीला दीदी द्वारा मिश्रित सब्जियों का निरंतर उत्पादन किया जा रहा है, जिससे उन्हें 12 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह की नियमित आय हो रही है। चिल्हाटी एवं टाटेकसा बाजार नजदीक होने के कारण उन्हें विक्रय की कोई समस्या नहीं हो रही है। इसके अतिरिक्त दीदी द्वारा संकुल, आंगनबाड़ी केंद्र एवं थाना परिसर में भी ताजी सब्जियों की नियमित आपूर्ति की जा रही है।
सत्यशीला दीदी की यह सफलता न केवल उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है। लखपति दीदी योजना के माध्यम से शासन का यह प्रयास ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी आजीविका को सुदृढ़ करने में मील का पत्थर साबित हो रहा है।


