रायपुर
इतने बड़े मुद्दे पर विधानसभा में पक्ष-विपक्ष की चुप्पी हैरान करने वाली: नामदेव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 9 मार्च। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश के अध्यक्ष एवं कर्मचारी नेता वीरेन्द्र नामदेव ने राज्य के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत बजट भाषण (मंगलवार, 24 फरवरी 2026) में पेंशन भुगतान के डिजिटलीकरण संबंधी खुलासे पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि पेंशन भुगतान प्रणाली के डिजिटलीकरण के बाद यह तथ्य सामने आया है कि छत्तीसगढ़ सरकार को मध्यप्रदेश से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये प्राप्त होने हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह राशि प्राप्त होने पर राज्य के पेंशन भार में कमी आएगी।
नामदेव ने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में शब्दों की बाजीगरी के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये के संभावित पेंशन घोटाले को छिपाने का प्रयास किया है।
महासंघ के अनुसार यह मामला अत्यंत गंभीर है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इतने बड़े वित्तीय मुद्दे पर विधानसभा में पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से कोई ठोस चर्चा नहीं हुई। नामदेव ने कहा कि यदि यह मामला स्पष्ट रूप से सामने आया है, तो उस पर विधानसभा में विस्तृत चर्चा होना स्वाभाविक था। लेकिन इस विषय पर मौन रहना कई सवाल खड़े करता है।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49(6) के अनुसार पेंशन संबंधी दायित्वों का विभाजन 74 प्रतिशत मध्यप्रदेश और 26प्रतिशत छत्तीसगढ़ के अनुपात में किया गया था।
प्रावधान के अनुसार छत्तीसगढ़ सरकार अपने हिस्से की 26 प्रतिशत राशि का वहन करती रही है। महासंघ का आरोप है कि यदि मध्यप्रदेश द्वारा अपने हिस्से की 74 प्रतिशत राशि का नियमित भुगतान नहीं किया गया और वह राशि बढ़ते-बढ़ते लगभग 10 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई, तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला है।
महासंघ ने कहा है कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह बकाया राशि कब और किन परिस्थितियों में इतनी बड़ी हो गई, इसकी निगरानी के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए, और इसकी वसूली की ठोस प्रक्रिया क्या होगी।
नामदेव ने कहा कि इतने बड़े वित्तीय दायित्व का वर्षों तक संज्ञान में न आना चिंताजनक है और इसके लिए जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
पेंशनरों के अधिकारों से जुड़ा मामला
महासंघ के अनुसार यह केवल दो राज्यों के बीच वित्तीय समन्वय का विषय नहीं है, बल्कि लाखों वरिष्ठ नागरिकों, पेंशनरों और परिवार पेंशनरों के अधिकारों से जुड़ा हुआ मुद्दा है।
यदि डिजिटलीकरण के माध्यम से यह तथ्य सामने आया है तो यह स्वागतयोग्य है, लेकिन यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अब तक की वित्तीय निगरानी व्यवस्था में ऐसी कमी क्यों रही।


