महासमुन्द

कोडार बांध से भरे जा रहे 40 गांवों के तालाब
14-Apr-2026 2:37 PM
कोडार बांध से भरे जा रहे 40 गांवों के तालाब

रबी फसल-निस्तारी के लिए लगातार आ रही थी मांग

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद,14अप्रैल। गर्मी की शुरुआत के साथ ही ग्रामीण इलाकों में जल संकट गहराने लगा है। बढ़ते तापमान के कारण पारंपरिक जल स्त्रोत तेजी से सूख रहे हैं। जिससे निस्तारी और मवेशियों के लिए पानी की भारी किल्लत हो रही है। इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासन ने कोड़ार बांध से पानी छोडऩा शुरू कर दिया है। वर्तमान में एलबीसी नहर से प्रतिदिन 165 क्यूसेक और आरबीसी नहर से 75 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। ताकि क्षेत्र के 40 से अधिक गांवों के तालाबों को लबालब भरा जा सके।

मालूम हो कि पिछले मानसून में हुई अच्छी बारिश के चलते कैचमेंट एरिया से कोड़ार बांध में इस साल बेहतर जलभराव हुआ है। इसी का लाभ किसानों और ग्रामीणों को मिल रहा है। विभाग द्वारा एलबीसी गेट से रबी फसल की सिंचाई के लिए बीते 7 जनवरी 2026 से ही पानी दिया जा रहा है। जिससे बंजारी, घोंघीबाहरा, बनसिवनी, कौंदकेरा, सोरिद,नयापारा और बेलसोंडा सहित 22 गांवों को सीधे तौर पर लाभ मिल रहा है।

जिन गांवों के तालाबों को भरने के लिए 27 मार्च से विशेष रूप से पानी छोडऩे की प्रक्रिया शुरू की गई गै उनमें  भोरिंग, खैरझिटी, पिरदा और तुमगांव जैसे 18 गांवों के तालाबों के तालाब शामिल हैं। इसके लिए 31 मार्च 2026 से लगातार जलापूर्ति की जा रही है। जल संसाधन विभाग के आंकड़े अनुासर इस बार अप्रैल माह में बांध की स्थिति बताते हैं कि पिछले चार सालों की तुलना में इस्ख काफी मजबूत है। यहां 13 अप्रैल 2026 की स्थिति में बांध में 15.80 फीट पानी मौजूद है। वहीं पिछले साल यानी 2025 में इसी समय केवल 8.80 फीट पानी ही शेष था।

इससे पहले के वर्षों पर नजर डालें तो अप्रैल 2024 में 12.40 फीट, 2023 में 14.20 फीट, 2022 में 9.70 फीट और 2021 में 16.90 फीट जलभराव दर्ज किया गया था। इस साल पर्याप्त पानी होने के कारण विभाग को उम्मीद है कि निस्तारी और सिंचाई की जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सकेगा।

अत: पानी की हर बूंद का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने नहरों में वर्षों से जमी गंदगी और गाद की विशेष सफाई कराई है। किनारों पर उगी झाडय़िों को हटाया गया है। ताकि बहाव में कोई अवरोध न आए। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि नहरों में कहीं भी रिसाव सीपेज नहीं है। इससे पानी की बर्बादी कम हो रही है और पानी सीधे अंतिम छोर तक पहुंच पा रहा है।


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