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सागौन कटाई मामला: 100 पेड़ों की कटाई की पुष्टि, पुन: जांच के आदेश पर सवाल
29-Apr-2026 3:57 PM
सागौन कटाई मामला: 100 पेड़ों की कटाई की पुष्टि, पुन: जांच के आदेश पर सवाल

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

पिथौरा, 29 अप्रैल। पिथौरा वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 242, ग्राम जम्हर के जंगल में सागौन पेड़ों की कटाई के मामले में राज्य स्तर पर जांच के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। रिपोर्ट में पेड़ों की कटाई की पुष्टि की गई है। इसके बाद वन विभाग द्वारा पुन: जांच की प्रक्रिया शुरू किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, जनवरी माह में ग्राम जम्हर के जंगल में सागौन वृक्षों की कटाई की सूचना सामने आई थी। प्रारंभिक स्तर पर वन विभाग द्वारा पेड़ों की संख्या को लेकर प्रतिवेदन तैयार किया गया था। इस संबंध में ग्राम कैलाशपुर निवासी ललित मुखर्जी ने 28 जनवरी को अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वी. श्रीनिवास राव और मुख्य वन संरक्षक मनिवासगन को लिखित शिकायत देकर जांच की मांग की थी।

शिकायत के आधार पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (अनुसंधान एवं मूल्यांकन) कौशलेंद्र कुमार के निर्देश पर 17 फरवरी 2026 को विषय विशेषज्ञ के.आर. ऊके ने स्थल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान शिकायतकर्ता और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी मौजूद थे।

जांच रिपोर्ट में 1961 से 1965 के बीच लगाए गए 100 सागौन वृक्षों की कटाई का उल्लेख किया गया है। इन पेड़ों का कुल आयतन 52.17 घनमीटर बताया गया है।

सूत्रों के अनुसार, जांच रिपोर्ट में क्षेत्र के कुछ वन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी प्रश्न उठाए गए हैं और उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। मामला वर्तमान में अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक शालिनी रैना के समक्ष विचाराधीन बताया गया है।

पुन: जांच पर आपत्ति

वन विभाग द्वारा पुन: जांच के लिए सरायपाली के वन एसडीओ उदेराम बसंत को जांच अधिकारी नियुक्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस निर्णय पर शिकायतकर्ता ललित मुखर्जी ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि जब विषय विशेषज्ञ द्वारा जांच पूरी हो चुकी है और उसमें कटाई की पुष्टि हुई है, तो पुन: जांच की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने पूर्व जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक शालिनी रैना ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विषय विशेषज्ञ द्वारा जांच पहले ही की जा चुकी है। उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। दोबारा जांच की आवश्यकता नहीं है।

फिलहाल, इस मामले में विभागीय कार्रवाई को लेकर निर्णय लंबित है।


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