महासमुन्द

बगैर मान्यता संचालित स्कूल को बंद करने आदेश जारी
10-Apr-2026 2:52 PM
बगैर मान्यता संचालित स्कूल  को बंद करने आदेश जारी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद,10 अप्रैल। महासमुंद जिले में बगैर मान्यता संचालित निजी स्कूल पर आखिरकार प्रशासन की गाज गिर गई है। जिला शिक्षा अधिकारी विजय लहरे के द्वारा जारी आदेश में ए के स्मार्ट इंग्लिश मिडियम स्कूल बिजेमाल सांकरा को बिना मान्यता संचालन और गंभीर अनियमितताओं के चलते आगामी शिक्षण सत्र 2026-27 से बंद करने के निर्देश दिए गये हंै।

आरटीआई कार्यकर्ता विनोद कुमार दास ने इस स्कूल के द्वारा फर्जी अंकसूची एवं स्थानातंरण प्रमाण पत्र बांटने के सबंध में लिखित शिकायत कलेक्टर सहित जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द को विगत जून 2025 में की थी।

गौरतलब है कि शिकायत के बाद तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पिथौरा ने इस स्कूल भवन निर्माण में अपूर्णता, बच्चों से लिये जा रहे फ ीस, शिक्षकों को दिये जा रहे वेतन, ऑडिट दस्तावेज, संचालित स्कूल संबंधी भूमि विवाद जैसे आरोपों पर निरीक्षण परीक्षण किया और अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रदाय नहीं किया। इससे क्षुब्ध होकर संचालक ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर किया और स्कूल प्रबंधन ने बगैर वैध अनुमति के पहली से 8वीं तक की कक्षाएं चलती रही। 

बगैर मान्यता के निजी स्कूल संचालित करने में वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े होते रहे। इस साल भी यहां के 8वीं कक्षा के बच्चों ने आत्मानंद स्कूल पिरदा में डीईओ के आदेश से परीक्षा दी है। आरोप है कि डीईओ विजय लहरे के संरक्षण में यह अवैध स्कूल लंबे समय तक चलता रहा। इस मामले की साक्ष्य सहित शिकायत 9 मार्च को सिद्धार्थ कोमल परदेशी प्रमुख सचिव छग शासन स्कूल शिक्षा विभाग को की गई।

इस मामले में नाटकीय मोड़ तब आया, जब बिजेमाल निवासी विवेक साहू ने ए के स्मार्ट इंग्लिश मिडियम स्कूल के जैसे बिना मान्यता के स्कूल संचालित और पूर्ण संरक्षण देने की मांग 23 मार्च को कलेक्टर एवं डीईओ महासमुन्द से की। सूत्रों के अनुसार इससे शिक्षा विभाग की जमकर किरकिरी हुई।

इसके बाद जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा पर छात्रहित व पालकों के हित में आगामी शिक्षण सत्र 2026-27 से बगैर मान्यता संचालित एके स्मार्ट इंग्लिश का संचालन बंद करने हेतु संचालक व प्रबंधक को पत्र जारी किया गया है। इसके साथ बीईओ पिथौरा को निर्देशित किया है कि इस बिना मान्यता वाले स्कूल के बारे में विद्यार्थियों एवं पालकों को अवगत कराएं कि वे अपने बच्चों को मान्यता प्राप्त स्कूल में ही प्रवेश दिलाएं।


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