महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
पिथौरा, 13 जनवरी। सरकारी समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की अंतिम तिथि नजदीक आने के बीच पिथौरा क्षेत्र में टोकन जारी नहीं होने को लेकर कुछ किसानों ने चिंता जताई है। किसानों का कहना है कि टोकन नहीं मिलने के कारण उनकी उपज की बिक्री नहीं हो पा रही है।
सहकारी समिति से प्राप्त जानकारी के अनुसार समिति क्षेत्र में कुल 1831 हेक्टेयर रकबे में 1426 किसान पंजीकृत हैं। इनमें से 776 किसानों से लगभग 48,776 क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त 431 किसानों के लिए 31 जनवरी तक लगभग 24,013 क्विंटल धान के टोकन जारी किए गए थे। समिति के आंकड़ों के अनुसार शेष 217 किसानों के लगभग 22 हजार क्विंटल धान के लिए अब तक टोकन जारी नहीं हो पाए हैं।
किसानों ने बताई समस्या
टोकन नहीं मिलने वाले किसानों का कहना है कि वे अपनी उपज समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पा रहे हैं। बरेकल गांव के किसान मुकेश ने बताया कि उनकी तीन एकड़ भूमि का पंजीयन है और उन्होंने धान की फसल ली थी। उनके अनुसार जब वे टोकन के लिए पहुंचे तो बताया गया कि फिलहाल उनके नाम टोकन जारी नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उन्हें धान अन्यत्र कम कीमत पर बेचने की मजबूरी हो सकती है। किसान ने यह भी बताया कि उन्होंने सहकारी बैंक से कृषि ऋण लिया है, जिसकी अदायगी को लेकर उन्हें चिंता है।
कुछ किसानों ने यह भी कहा कि यदि वे धान अन्य स्थान पर ले जाने का प्रयास करते हैं तो प्रशासन द्वारा रोक-टोक की जाती है। इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आवेदन मंगाया गया, परीक्षण क बाद जारी हो सकता हैं टोकन
बैंक एवं सहकारी समिति से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जिन किसानों के टोकन नहीं कट पाए हैं, उन्हें समिति कार्यालय में ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के परीक्षण के बाद पात्र किसानों के लिए टोकन जारी किए जा सकते हैं।
सहकारी बैंक मैनेजर की लगातार अनुपस्थिति से किसान परेशान
बैंक प्रबंधन को लेकर सवाल
किसानों ने यह भी बताया कि भुगतान के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में किसान सहकारी बैंक पहुंच रहे हैं। बैंक में सीमित स्टाफ के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि बैंक मैनेजर नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते। इस संबंध में बैंक प्रबंधन की ओर से कोई लिखित बयान नहीं दिया गया है।
मंगलवार को ‘छत्तीसगढ़’ ने ज़ब पिथौरा सहकारी बैंक पहुंच कर मैनेजर से बात करनी चाही, तब पता चला कि वे प्रतिदिन नहीं आते, क्योंकि वे रायपुर से आना-जाना करते हैं। प्रतिदिन सैकड़ों किसान भुगतान करने के लिए बैंक में आते हंै। सुरक्षा के नाम पर एक निहत्था चौकीदार और एक लिपिक और कैशियर ही मौजूद दिखे। इसके अलावा बैंक के बाहर सैकड़ों किसान अपनी बारी का इंतजार करते बैठे दिखे।
फिलहाल, जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया जारी है। वहीं, टोकन नहीं मिलने वाले किसान अपनी उपज की बिक्री को लेकर समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


