महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद,12 जनवरी। देशव्यापी एकदिवसीय उपवास के माध्यम से अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी बीजेपी सरकार की नीतियों के विरोध में राष्ट्रव्यापी अभियान मनरेगा बचाओ संग्राम की शुरुआत की। यह विरोध महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम और उद्देश्य में कथित बदलाव, 100 दिन के रोजगार की गारंटी को कमजोर किए जाने तथा राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने के निर्णय के खिलाफ किया गया।
महासमुंद जिला कांग्रेस कमेटी के जिला अध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव के नेतृत्व में आंदोलन की शुरुआत हुई। अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के आह्वान पर कल देश के समस्त जिलों में एक दिवसीय उपवास आयोजित किया गया। कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थक संगठनों ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ कर देश के गरीब, मजदूर और ग्रामीण तबके के अधिकारों पर हमला किया है।
कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा की स्थापना का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को वर्ष में कम से कम 100 दिन का सुनिश्चित रोजगार प्रदान करना था, ताकि उन्हें सम्मानजनक जीवन और आर्थिक सुरक्षा मिल सके। कांगेंंरसं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा योजना का नाम बदलने और उसके उद्देश्य में परिवर्तन करने से यह रोजगार गारंटी धीरे-धीरे समाप्त की जा रही है। जिससे करोड़ों ग्रामीण परिवारों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
उपवास कर रहे नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने योजना के क्रियान्वयन से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए यह शर्त जोड़ दी है कि राज्य सरकारें यदि 40 प्रतिशत अनुदान अपने संसाधनों से नहीं देंगी, तो केंद्र सरकार योजना को प्रभावी रूप से लागू नहीं करेगी। कांग्रेस के अनुसार कई राज्य पहले से ही आर्थिक दबाव में हैं और ऐसी स्थिति में अतिरिक्त धनराशि जुटाना उनके लिए संभव नहीं है। इसका सीधा असर यह होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को रोजगार उपलब्ध नहीं हो पाएगा।
कांग्रेस पार्टी ने इस बात पर भी कड़ा ऐतराज जताया कि योजना से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम को हटाने का प्रयास किया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि महात्मा गांधी का नाम केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, श्रम की गरिमा और गरीबों के अधिकारों का प्रतीक है। उनके नाम को योजना से हटाना देश की संवैधानिक और नैतिक परंपराओं के खिलाफ है।
एकदिवसीय उपवास के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार से मांग की कि मनरेगा के मूल नाम और स्वरूप को बहाल किया जाए, 100 दिन की रोजगार गारंटी को पूरी मजबूती के साथ लागू किया जाए, राज्यों पर डाले गए 40 प्रतिशत अनुदान के बोझ को समाप्त किया जाए तथा योजना के लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने मजदूरी भुगतान में हो रही देरी को तुरंत खत्म करने की भी मांग उठाई।
जिलाध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव विधायक खल्लारी ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो यह आंदोलन आने वाले समय में और तेज किया जाएगा। कल एकदिवसीय उपवास देशव्यापी संघर्ष की शुरुआत है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण गरीबों के रोजगार के अधिकार और महात्मा गांधी के विचारों की रक्षा करना है।
उक्त कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव विधायक खल्लारी, विधायक सरायपाली चातुरीनंद, पूर्व जिलाध्यक्ष जीवजंतु कल्याण बोर्ड उपाध्यक्ष छत्तीसगढ़ शासन आलोक चंद्राकर, पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. रश्मिचंद्राकर, शहर अध्यक्ष एवं पूर्व बोर्ड उपाध्यक्ष छत्तीसगढ़ शासन खिलावन बघेल, ग्रामीण अध्यक्ष खिलावन साहू, प्रदेश सचिव नरेंद सेन, पूर्व प्रभारी महामंत्री संजय शर्मा, जिला उपाध्यक्ष गणेश शर्मा, पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष मनोजकांत साहू, दुर्गा सागर, लक्ष्मी देवांगन, राजू यादव, राजेंद्र चंद्राकर, संतोष पटेल, अमर अरुण चंद्राकर, प्रमोद चंद्राकर, सोमेश दवे, प्रदीप चंद्राकर, गौरव चंद्राकर, अमन चंद्राकर,हरदेव ढिल्लो, जसबीर ढिल्लो, शाहबाज रजवानी, नितेंद्र बैनर्जी, दिव्येश चंद्राकर, हर्षित चंद्राकर, निर्मल जैन समेत सैकडा़ें कांग्रेसी शामिल हुए।


