महासमुन्द

काम की सिफारिश नहीं कर पाएंगी पंचायतें, काम तय करेगी मोदी सरकार-महंत
11-Jan-2026 3:34 PM
काम की सिफारिश नहीं कर पाएंगी पंचायतें, काम तय करेगी मोदी सरकार-महंत

कहा-सरकारी योजना से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाने की पहली घटना

कांग्रेस का ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ का आगाज

छत्तीसगढ़ संवाददाता

 महासमुंद, 11जनवरी। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने कल महासमुंद कांग्रेस भवन में कहा कि मनरेगा में मोदी सरकार द्वारा किए गए बदलाव ग्रामीण मजदूरों के काम के अधिकार पर बड़ा हमला है।

 उन्होंने कहा कि जिस तरह 3 काले कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए मोदी सरकार को मजबूर होना पड़ा था। उसी तरह मनरेगा में बदलाव को भी वापस लेना होगा। इसके लिए सडक़ से संसद तक की लड़ाई लड़ी जाएगी। डॉ. महंत ने कहा कि सरकारी योजनाओं से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाने की देश की यह पहली घटना है।

यहां कांग्रेस भवन में दोपहर में वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. महंत एआईसीसी समन्वय समिति द्वारा देश भर में शुरू की गयी ‘मनरेगा बचाव संग्राम’ आंदोलन के तहत पहले दिन पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने मनरेगा के तहत मजदूरों को मिलने वाले लाभ और मोदी सरकार द्वारा इसमें किए गए बदलाव से नुकसान पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. महंत ने कहा कि पहले देशभर के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को काम की कानूनी गारंटी प्राप्त थी। किसी भी पंचायत में किसी भी परिवार द्वारा काम मांगने पर 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध होता था।

डॉ. महंत ने कहा कि मनरेगा में बदलाव करके राज्य सरकारों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया गया है। पहले पूरा 100 फीसदी राशि केंद्र सरकार देती थी। अब 40 फीसदी राज्य को देना होगा। आज लगभग सभी राज्य आर्थिक दृष्टि से कमजोर कर दिए गए हैं। सिर्फ छत्तीसगढ़ पर 20 हजार करोड़ का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बदलाव से पड़ेगा। इतना धन कहां से लाएंगे। जबकि, विकास कार्य पहले ही ठप पड़े हैं। जनपदों, पालिकाओं, पंचायताओं को आबंटन नहीं मिल रहा है। वीबी-जी राम जी (नये मनरेगा) के तहत कितने दिन रोजगार दे सकेगी, यह संदेह के दायरे में है।

कहा कि मोदी सरकार के बदलावों के बाद काम का अधिकार नहीं रहेगा, बल्कि सरकार की मर्जी से बांटी जाने वाली एक रेवड़ी बन जाएगा यह कानून। मोदी सरकार चुनेगी कि कौन सी पंचायतों को काम मिलेगा और किसे नहीं। उन्होंने कहा कि मजदूरी पाने का अधिकार छीना जा रहा है। पहले मनरेगा के तहत काम तय न्यूनयतम मजदूरी पर दिया जाता था। जिसमें हर साल बढ़ोत्तरी की जाती थी। साल के 365 दिन काम उपलब्ध रहता था। ताकि, जरूरत पडऩे पर परिवारों के पास कमाई का विकल्प हमेशा मौजूद रहे। अब मोदी सरकार के अन बदलावों के तहत मजदूरी मनमाने ढंग से तय की जाएगी। न तो न्यूनतम मजदूरी की कोई गारंटी होगी और न ही हर साल बढ़ोत्तरी का कोई गारंटी। फसल कटाई के मौसम में काम की अनुमति नहीं होगी, जिससे मजदूरों की अन्य काम देने वालों से बेहतर मजदूरी की मांग करने की ताकत कमजोर होगी और उन्हें बिना न्यूनतम मजदूरी के जो भी काम मिलेगा उसे स्वीकार करने को मजबूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बदलाव कर ग्राम पंचायत की शक्तियां ठेकेदारों को सौंपी जा रही है। पहले मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों को अपने गांव के विकास के लिए विभिन्न कार्यों में मजदूरोंको नियोजित करने का अधिकार था। विकास कार्यों की योजना और सिफारिश ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं द्वारा की जाती थी। ठेकेदारों पर  प्रतिबंध था। मनरेगा का काम गांव के विकास के लिए होता था। मजदूरों को स्थानीय मनरेगा मेट्स का सहयोग मिलता था। पर अब मोदी सरकार के इन बदलावों के बाद सभी फैसले दिल्ली से रिमोट के जरिये लिए जाएंगे। विकास परियोजनाएं कुछ  सीमित श्रेणियों तक सिमट जाएंगी और योजना से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय मोदी सरकार लेगी। पंचायत अपना अधिकार ही खो देगी और केवल मोदी सरकार के आदेशों को लागू करने वाली एजेंसी बनकर रह जाएगी। ठेकेदारों को लाया जाएगा और मजदूरों को ठेकेदारों की परियोजनाओं के लिए लेबर सप्लाई में बदल दिया जाएगा।

कहा कि इसी तरह राज्य सरकार को कमजोर किया जा रहा है. और उस पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। पहले मनरेगा के तहत आपकी मजदूरी का 100 प्रतिशत भुगतान केंद्र सरकार करती थी। इसलिए राज्य सरकारें बिना किसी कठिनाई के काम उपलब्ध करा पाती थी। अब राज्य सरकारों को आपकी मजदूरी का 40 प्रतिशत हिस्सा स्वयं ये वहन करना होगा। खर्च बचाने के लिए संभी है कि वे काम पन बिल्कुल भी न दें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मनरेगा बचाओ संग्राम क तहत काम की गारंटी, मजदूरी की गारंटी,  जवाबदेही की गारंटी, मनरेगा में किए गए बदलावों की तत्काल वापसी, काम के संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली, न्यूनतम वेतन 400 रूपए करने की मांग कर रही है। इस दौरान मंच पर विधायक एवं कांग्रेस जिलाध्यक्ष य द्वारिकाधीश यादव, सरायपाली विधायक चातुरी नंद, पूर्व मंत्री देवेन्द्र बहादुर, प्रदेश महामंत्री अमरजीत चावला, महेन्द्र चंद्राकर, पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. रश्मि चंद्राकर, पालिका अध्यक्ष निखिलकांत साहू, बागबाहरा नपा अध्यक्ष खिलेश्वरी बघेल, बागबाहरा जनपद अध्यक्ष केशव चंद्राकर, महिला कांग्रेस हो जिलाध्यक्ष दुर्गा सागर, खिलावन बघेल, खिलावन साहू, ढेलू निषाद, लक्ष्मण पटेल, अमर चंद्राकर, अमन चंद्राकर उपस्थित थे।


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