महासमुन्द

संग्रहण केन्द्रों में 19 करोड़ का धान सूखा, 2024-25 के धान का निराकरण 11 महीने तक चला-कोसरिया
12-Jan-2026 4:24 PM
संग्रहण केन्द्रों  में 19 करोड़ का धान सूखा, 2024-25 के धान का निराकरण 11 महीने तक चला-कोसरिया

जिले के पांच संग्रहण केंद्रों में 23 लाख क्विंटल सूखत

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद,12 जनवरी। कल ‘छत्तीसगढ़’ में प्रकाशित खबर का खंडन करते हुए जिला विपणन अधिकारी आशुतोष कोसरिया ने कहा है कि साल 2024-25 के दौरान जिले के सभी पांचों धान संग्रहण केन्द्रों में कुल 81620.54 क्विंटल सूखत विभिन्न कारणों से आई है। इसकी कीमत एमएसपी के हिसाब से 18.77 करोड़ रुपए आती है। सर्वाधिक 3.79 प्रतिशत सूखत बसना और सबसे कम 2.67 प्रतिशत पिथौरा संग्रहण में आई है। सूखत के लिये सबसे बड़ा कारण 11 माह में धान का निराकरण होना माना जा रहा है।

उनका कहना है कि वर्ष 2024-25 में उपार्जित धान का उठाव अक्टूबर 2025 तक चला है। मिलरों द्वारा कस्टम मिलिंग के लिये उठाव के बाद अतिशेष धान की नीलामी के जरिये बिक्री की गई थी। जिले में कुल 22लाख,88 हजार 875 क्विंटल धान का भंडारण संग्रहण केन्द्रों में हुआ था और 22लाख,07 हजार 255 क्विंटल का निराकरण किया गया है। जिला विपणन अधिकारी आशुतोष कोसरिया ने इस संबंध में बताया कि यह सूखत वास्तविक रूप से उपार्जक केंद्रों से धान के संग्रहण केंद्रों में भंडारण पश्चात कस्टम मिलिंग के तहत मिलरों को प्रदाय किए गए धान के वजन में आई स्वाभाविक कमी की मात्रा है। धान का भंडारण दिसंबर 2024 से किया गया था। जिसका अंतिम रूप से निराकरण अक्टूबर 2025 में हुआ। तब तक खुले में भंडारण के कारण धान की प्रकृति में परिवर्तन आना स्वाभाविक है। परिणामस्वरूप धान सूखत की स्थिति उत्पन्न होती है। यह एक सामान्य एवं निमित प्रक्रिया है जो पूर्ववर्ती वर्षों में भी देखी गई है।

 

उन्होंने बताया कि जिले के अन्य संग्रहण केंद्रों में 12 महिनों में 3 माह बारिश और 5-6 माह गर्मी की मार झेली है। नमी आने से अंकुरण के कारण भी धान खराब होता है। कड़ी धूप में धान की गुणवता जरूर अच्छी होती है। किंतु सूखने के कारण वजन कम हो जाता है। ये सब सूखत के कारण माने जाते हैं। सभी संग्रहण केन्द्रों में सूखत आती ही है। इसकी क्षतिपूर्ति के लिये केन्द्र सरकार से मांग की गई है। उन्होंने बताया कि जिले में सूखत का औसत 3.57 प्रतिशत रहा है। बागबाहरा संग्रहण केन्द्र में सूखत को लेकर सवाल उठाये जाने के बाद विभाग की ओर से वहां के प्रभारी दीपेश पांडे को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

 मार्कफेड से जुड़े सूत्रों ने बताया कि स्टेक के निचली सतह के से बारिश, नमी के चलते खराब काला हो बोरों में रखा धान ज्यादा समय तक रखा होने जाता है। संग्रहण में इस बार धान ने औसत सूखत की स्थिति लगभग इसी स्तर की रही है तथा राज्य के संग्रहण केंद्रों में सूखत का औसत प्रतिशत लगभग इसी मात्रा में रहता है।


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