महासमुन्द

खल्लारी विधायक ने लोगों को मनरेगा के प्रति किया जागरूक
13-Jan-2026 4:15 PM
खल्लारी विधायक ने लोगों को मनरेगा के प्रति किया जागरूक

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बागबाहरा, 13 जनवरी। खल्लारी विधायक व जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव ने सोमवार को ग्रामीण क्षेत्र में जनसंपर्क कर लोगों को मनरेगा के प्रति जागरूक किया। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार पर ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को कमजोर करने और काम का अधिकार छीनने का आरोप लगाया है।

ज्ञात हो कि केंद्र द्वारा मनरेगा की जगह एक नया कानून, विकसित भारत - रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) अधिनियम, लागू करने के बाद कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ संग्राम नाम से तीन चरणों वाला देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। इसी तारतम्य में सोमवार को जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष व विधायक श्री यादव की अगुवाई में मनरेगा बचाओ संग्राम के माध्यम से गांव जाकर केंद्र सरकार की नीतियों की सच्चाई जनता के सामने रखी गई।

 ग्राम बोडराबांधा में आयोजित चौपाल को संबोधित करते हुए विधायक श्री यादव ने कहा कि मनरेगा के तहत ग्रामीण और गरीब लोगों को काम का अधिकार मिलता था लेकिन इस योजना में बदलाव करके केंद्र सरकार राइट टू वर्क यानी काम का अधिकार खत्म कर रही है। नए प्रावधानों में 125 दिन का रोजगार देने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन बीते दो वर्ष में भाजपा सरकार ने किसी भी ग्रामीण मजदूर को 100 दिन का रोजगार भी नहीं दिया तो 125 दिन का रोजगार देने की बात करना बेमानी है। लोगों को 30 से 35 दिन का काम भी मुश्किल से मिल पाएगा।

 विधायक श्री यादव ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रति सम्मान के लिए यूपीए सरकार ने मनरेगा योजना लाया था। आज एनडीए सरकार उसको समाप्त कर बापू के सपने को चकनाचूर कर रही है। केंद्र सरकार की ओर से लाया गया नया वीबी-जीरामजी अधिनियम मनरेगा की मूल भावना पर सीधा हमला है। यह कानून गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण जनता के रोजगार के अधिकार को कमजोर करने वाला है।

 उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों गरीब परिवारों की आजीविका की वैधानिक गारंटी है, जिसे किसी भी कीमत पर खत्म नहीं होने दिया जाएगा। मनरेगा देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए केवल एक योजना नहीं, बल्कि काम के अधिकार और सम्मानजनक आजीविका की गारंटी है। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वीबी-जीरामजी विधेयक मनरेगा की आत्मा को कमजोर करने वाला, संघीय ढांचे पर प्रहार करने वाला और गरीब-मजदूर विरोधी कदम है।


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