महासमुन्द
छत्तीसगढ़ संवाददाता
महासमुंद, 11 जनवरी। कबीरधाम जिले के बाद अब महासमुंद के बागबाहरा में चूहे, दीमक और चिडिय़ा संग्रहण केंद्रों का धान चट कर रहे हैं। ऐसा दावा जिले के बागबहरा संग्रहण केंद्र के संचालकों का है। यहां करीब 18433 क्विंटल धान गायब मिला, तो उन्होंने इसके लिए सीधे तौर पर दीपक, चूहों और चिडिय़ों को जिम्मेदार ठहरा दिया। इसका मतलब यह हुआ कि ये जीव 10 महीने तक बिना रुके लगातार हर घंटे करीब 256 किलो धान खा रहे थे। इसी वजह से सरकार को 5.71 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
गौरतलब है कि संग्रहण केंद्रों में धान के उचित रखरखाव के लिए प्रशासन मार्कफेड के जरिए करोड़ों रुपए खर्च करता है। इसमें परिवहन भाड़ा और हमाली के अलावा सुरक्षा के लिए जरूरी उपकरणों का खर्च भी शामिल हैं। इसके अलावा नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से सचिव ने पिछले साल 12 सितंबर को एक पत्र भी जारी किया है। इसके मुताबिक, स्टॉक में 1 फीसदी की कमी आने पर कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात कही गई है, जबकि 1 से 2 प्रतिशत की कमी आने पर विभागीय जांच बिठाने के भी आदेश हैं। वहीं, 2प्रतिशत से ज्यादा कमी आने पर तत्काल निलंबन, विभागीय जांच और एफआईआर के निर्देश हैं।
यहां बागबाहरा केंद्र में 3.65प्रतिशत की कमी के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। न प्रशासन ही इस मामले को लेकर अब तक गंभीर नजर आ रहा है। हाल ही में कवर्धा में भी 7 करोड़ का धान खाने के लिए चूहों को जिम्मेदार बताया गया था। बागबाहरा धान संग्रहण प्रभारी ने कहा, 2024-25 में 12.63 लाख बोरा धान आया था। आवक के वक्त 17 प्रतिशत नमी वाला धान लिया था। जावक के समय 10-11 प्रतिशत नमी रही। संग्रहण केंद्र में दीमक, कीट, पंछी, चूहे धान खा जाते हैं। बारिश के कीचड़ में धान खराब हो गया। संग्रहण केंद्र में 10 माह से धान रुका था। इसके चलते स्टॉक में 3.65 फीसदी का शॉर्टेज आया। महासमुंद कलेक्टर विनय लंगेह का इस मामले में कहना है कि फिलहाल मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। मार्कफेड के डीएमओ से जानकारी लेता हूं। कहीं अगर गड़बड़ी मिलती है या मामला बनता है, तो नियमों के अनुसार निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।


