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बार अभयारण्य के चार और वनग्राम के ग्रामीण विस्थापन से नाखुश
12-Jan-2026 1:21 PM
 बार अभयारण्य के चार और वनग्राम के ग्रामीण विस्थापन से नाखुश

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
पिथौरा, 12 जनवरी।
नगर सीमा से लगे बार अभयारण्य क्षेत्र में स्थित वन ग्रामों के प्रस्तावित विस्थापन को लेकर अब शेष ग्रामों के ग्रामीणों में असमंजस की स्थिति सामने आ रही है।  विस्थापन से ग्रामीणों में मायूसी है।

ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में विस्थापित किए गए ग्रामों में वन विभाग द्वारा किए गए आश्वासनों के अनुसार व्यवस्थापन नहीं हो पाया, जिससे वे नए विस्थापन प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, हाल ही में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के क्षेत्रीय दौरे के दौरान ग्राम बार, हरदी, बकमा और गुडागढ़ के विस्थापन से संबंधित औपचारिकताओं को पूरा करने के निर्देश दिए गए थे।

ग्रामीणों के अनुसार, लगभग 14 वर्ष पूर्व बार क्षेत्र से विस्थापित किए गए तीन ग्राम—रामपुर, लाटादादर और नयापारा—को क्रमश: साकरा (जोंक) के समीप बिजेमाल, चैनडीपा तथा पटैवा के समीप रामसागर क्षेत्र में बसाया गया था। उस समय परिवारों को आवास, कृषि भूमि और नगद सहायता दी गई थी।

विस्थापित ग्रामीणों की आपत्तियाँ
पूर्व में विस्थापित ग्रामों के ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें राजस्व ग्राम का दर्जा देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन 14 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह दर्जा नहीं मिल पाया। उनके अनुसार, वर्तमान में इन ग्रामों को पंचायत क्षेत्र के टुकड़े के रूप में दर्ज किया गया है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में कठिनाइयाँ आती हैं।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उन्हें जो भूमि दी गई है, उसका एक बड़ा हिस्सा अनुपजाऊ है। पेयजल की समस्या भी बनी हुई है। राजस्व रिकॉर्ड में टुकड़ा दर्ज होने के कारण उन्हें छोटे कार्यों के लिए भी दूर जाना पड़ता है।

कुछ ग्रामीणों ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह भी दावा किया है कि खेती योग्य भूमि की कमी और आर्थिक कठिनाइयों के कारण कुछ परिवारों को अपनी जमीन बेचनी पड़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में विस्थापित गांवों की समस्याओं का समाधान किए बिना नए विस्थापन पर विचार नहीं किया जाना चाहिए।

अभी विस्थापित ग्राम सीधे राजस्व ग्राम होंगे -अधीक्षक
बार अभयारण्य के अधीक्षक कृष्णानु चंद्राकर ने कहा कि प्रस्तावित विस्थापन के अंतर्गत आने वाले वन ग्रामों को सीधे राजस्व ग्राम का दर्जा दिया जाएगा, जिसके लिए केंद्र सरकार से अधिसूचना जारी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि पूर्व में विस्थापित ग्रामों की समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया जारी है। जहां भूमि को अनुपजाऊ बताया गया, वहां वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराई गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछली कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए इस बार कलेक्टर के नेतृत्व में एक विस्थापन समिति गठित की गई है। विस्थापित होने वाले परिवारों को भूमि चयन का विकल्प भी दिया जाएगा, ताकि व्यवस्थापन में कमियां न रहें।


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