महासमुन्द

मड़ई मेला सिर्फ मात्र उत्सव नहीं छत्तीसगढ़ी संस्कृति की अनुपम पहचान-सुधा चंद्राकर
11-Jan-2026 2:51 PM
मड़ई मेला सिर्फ  मात्र उत्सव नहीं छत्तीसगढ़ी संस्कृति की अनुपम पहचान-सुधा चंद्राकर

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद,11 जनवरी। पांच साल के लम्बे अंतराल के बाद ग्राम खट्टीडीह के युवाओं की पहल और बुजुर्गों के मार्गदर्शन में खट्टीडीह में मेला मड़ई का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बतौर अतिथि उपस्थित स्थानीय जनपद सदस्य सुधा योगेश्वर चंद्राकर ने आयोजक समिति को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति में मेला मड़ई किसानों के फसल कटाई उपरांत बेटे बेटियों परिवार जनों और ग्रामीणों की आपसी सहभागिता और खुशियों को सामूहिक रूप से साझा करने की अनूठी परम्परा है।

 

कहा कि इससे गांव में आपसी भाई चारा और सौहाद्र बढ़ता हैं। साल भर कृषि कार्यों के श्रम के थकान को मिटने की बेहतरीन आयोजन हैं। आज जहां लोग पाश्चातत्य संस्कृति तडक़ भडक़ और नशा पान में डूब रहे हैं। वहीं हमारे पूर्वज मेला मड़ई और नाचा गम्मत के माध्यम से बच्चों के बीच सामूहिक सहभागिता और संस्कार परोसने का कार्य करते हैं। गांव में लम्बे अंतराल के बाद युवाओं के पहल ने इसे पुनर्जीवन दिया हैं जिसके लिए सभी ग्रामीण जन बधाई के पात्र हैं।

उन्होंने कहा कि हमें इसे आगे भी जीवंत रखना है। उन्होंने स्थानीय महिलाओं को भी गृह एवं कृषि कार्यों के साथ राजनीति, समाज सेवा और प्रशासनिक सेवा में आगे आने का आह्वाहन किया। इस दौरान प्रमुख रूप से ग्राम सरपंच भुनेश्वर ध्रुव, पूर्व जनपद सदस्य योगेश्वर चंद्राकर, महिला पंच सुकबती, देवकी, सरस्वती, पंच ईश्वर, चंद्रशेखर, किसान कांग्रेस जिला अध्यक्ष माणिक साहू शिक्षक सहदेव ध्रुव, ग्रामीण सालिक,डायमंड, द्रोण कंवर,चन्द्रहास साहू, रुपेश साहू, प्रदीप, नरेंद्र,रामसाय, भोजराम एवं स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे।


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