धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कुरुद, 13 जून। धमतरी जिले में कृषि विभाग और किसानों के संयुक्त प्रयासों से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग, नैनो उर्वरकों को बढ़ावा, जैविक खेती के विस्तार तथा फसल विविधीकरण के माध्यम से जिले की कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति पुन: सुदृढ़ हो रही है।
धान का कटोरा कहे जाने वाले धमतरी जिले में अब टिकाऊ और संतुलित कृषि की नई तस्वीर उभरने लगी है। कृषि विभाग ने वर्ष 25-26 में 9 हजार 925 मिट्टी नमूनों की जांच कर 9 हजार 900 किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड वितरित किया। इससे किसानों को अपनी भूमि में उपलब्ध नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, बोरॉन एवं सल्फर जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की सही जानकारी मिली। जिससे किसान वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार ही उर्वरकों का उपयोग करने लगे हैं। जिले में नैनो यूरिया, डीएपी, जैविक खादों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सहकारी समितियों एवं कृषि आदान विक्रेताओं के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ नैनो उर्वरकों की भी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, ताकि किसान आवश्यकता एवं अनुशंसित मात्रा के अनुसार इनका उपयोग कर सकें।
धमतरी जिले के किसान अब गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत एवं अन्य जैविक विकल्पों को अपनाने लगे हैं। जिले में नीलहरित काई के उपयोग को बढ़ावा देने कुरूद के मरौद स्थित बीज प्रसंस्करण केंद्र में नीलहरित काई का उत्पादन किया जा रहा है। यहां से इच्छुक किसान इसे खरीद सकते हैं।
इसके अलावा कृषक उन्नति योजना के तहत दलहन, तिलहन एवं मक्का जैसी कम पानी की फसलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तक की आदान सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसान फसल विविधीकरण अपना रहे हैं, जिससे मिट्टी को प्राकृतिक रूप से पुनस्र्थापित होने का अवसर मिल रहा है तथा कृषि में जैव विविधता भी बढ़ रही है।।


