‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 30 अगस्त। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने बड़ा फैसला लेते हुए देश भर के कालेजों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को मनोविज्ञान, हेल्थकेयर और इससे जुड़े अन्य कोर्स ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग या ऑनलाइन मोड के जरिए कराने पर रोक लगा दी है। यह निर्देश इसी सत्र यानी जुलाई-अगस्त 2025 सशन से प्रभावी कर दिए गए हैं।
यूजीसी के नए निर्देश के तहत मनोविज्ञान, न्यूट्रिशन, माइक्रोबायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, क्लिनिकल न्यूट्रिशन, डाइटेटिक्स और फूड साइंस जैसे कोर्स अब ऑनलाइन या डिस्टेंस मोड में नहीं चलाए जा सकेंगे।इन सभी कोर्सों को नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन एक्ट, 2021 के तहत कवर किया गया है।
यूजीसी ने स्पष्ट किया कि जो संस्थान पहले से 2025-26 सत्र के लिए इन कोर्सों को ऑनलाइन या डिस्टेंस मोड में चलाने की मान्यता प्राप्त कर चुके हैं, उनकी यह मान्यता वापस ले ली जाएगी।
आयोग ने कहा कि जुलाई-अगस्त 2025 और उसके बाद के शैक्षणिक सत्रों में कोई भी उच्च शिक्षण संस्थान एक्ट 2021 के तहत आने वाले एलाइड और हेल्थकेयर कोर्स, जिनमें मनोविज्ञान भी शामिल है, दूरस्थ या ऑनलाइन मोड में नहीं चला सकेगा।
यूजीसी ने स्पष्ट किया कि जहां बीए जैसी डिग्री में मल्टी-स्पेशलाइजेशन की सुविधा है, वहां सिर्फ उन्हीं विषयों की पढ़ाई पर रोक होगी जो एनसीएएचपी एक्ट के अंतर्गत आते हैं। यानी बीए (इकोनॉमिक्स, हिंदी, पॉलिटिकल साइंस, साइकोलॉजी, सोशियोलॉजी आदि) की डिग्री में मनोविज्ञान शामिल है, तो सिर्फ मनोविज्ञान कोर्स ही हटाया जाएगा, बाकी विषयों की पढ़ाई जारी रहेगी।
यह निर्णय अप्रैल 2025 में हुई 24वीं डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो वर्किंग ग्रुप की बैठक की सिफारिशों के आधार पर लिया गया. यूजीसी का कहना है कि ऐसे कोर्स, जिनमें प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और प्रोफेशनल एक्सपोजर जरूरी है, उन्हें ऑनलाइन या डिस्टेंस मोड से प्रभावी ढंग से नहीं पढ़ाया जा सकता। यूजीसी पहले ही कई प्रोफेशनल और प्रैक्टिकल-आधारित कोर्सों पर ह्रष्ठरु और ऑनलाइन मोड में रोक लगा चुकी है। इनमें इंजीनियरिंग मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, फार्मेसी, फिजियोथेरेपी आर्किटेक्चर, होटल मैनेजमेंट, केटरिंग टेक्नोलॉजी विजुअल आर्ट्स, एप्लाइड आर्ट्स, कृषि, हॉर्टिकल्चर, पैरामेडिकल साइंसेज कानून छात्रों पर असर यूजीसी के इस निर्देश से हजारों छात्र प्रभावित होंगे, जो इन कोर्सों में ऑनलाइन या डिस्टेंस मोड के जरिए दाखिला लेने की योजना बना रहे थे। अब विश्वविद्यालयों और संस्थानों को अपने कोर्स ढांचे में बदलाव करना होगा, ताकि नए नियमों के अनुसार शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित किए जा सकें।