‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 17 सितंबर। शासकीय गुण्डाधूर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोण्डागांव में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में संस्था के प्राचार्य डॉ. सरला आत्राम के मार्गदर्शन में व्याख्यान कार्यक्रम, निबंध, सुलेख एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक विनय कुमार देवांगन ने हिंदी दिवस के आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 14 सितंबर, 1949 को भारतीय संविधान में हिंदी भाषा को राजभाषा के रूप में अपनाया गया था तथा हिंदी भाषा के प्रचार- प्रसार के उद्देश्य से प्रतिवर्ष हिंदी दिवस का आयोजन किया जाता है। आज हिंदी भाषा राजभाषा और राष्ट्रभाषा के दर्जा से भी ऊपर उठकर वैश्विक भाषा बनने की ओर अग्रसर है।
कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. किरण नुरुटी ने हिंदी भाषा को जन-मन की भाषा बताते हुए कहा कि भले ही हम आज हिंदी दिवस मना रहे हैं, किंतु हमारे कंठ में अंग्रेजी भाषा समा चुकी है। इस मानसिकता में हमें बदलाव लाना होगा, तभी हिंदी को जीवंत बनाए रखा जा सकता है।
इस अवसर पर इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ.पुरोहित कुमार सोरी ने कहा कि हिंदी हमारी अस्मिता, हमारी पहचान और हमारे अस्तित्व का प्रतीक है। भूगोल विभाग के सहायक प्राध्यापक समलेश पोटाई ने ‘सृजन धारा’ पुस्तक में प्रकाशित स्वरचित कविता ‘मॉं भारती’का पाठ करके श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंग्रेजी विभाग के सहायक प्राध्यापक रूपा सोरी और गृह विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक नेहा बंजारे ने भी हिंदी भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर वर्ष 2022, 2023 एवं 2024 में विश्वविद्यालय के प्रावीण्य सूची में स्थान बनाने वाले हिंदी विभाग के भूतपूर्व विद्यार्थियों- सोमनाथ,सौम्या सृष्टि दुबे, सुमेंद्र कुमार, हेमबती, शिवलाल, मंगलवाती, हेमलता, वर्षा केमरो, देवेंद्र, महेश्वरी, रश्मि, सुशीला, सनमती, शारदा, देवकी देवांगन और रामशीला को भी स्मृति चिन्ह और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
लक्ष्मीदास मानिकपुरी ने राज्यस्तर पर स्वयं की पुरस्कृत कविता का पाठ करने के साथ ही कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन भी किया।
इस मौके पर ‘सोशल मीडिया के युग में हिंदी का बदलता स्वरूप और बढ़ती लोकप्रियता’ विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में सुलोन्तीन ने प्रथम स्थान, पूर्वी ध्रुव ने द्वितीय स्थान और राखी विश्वास ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
इसी तरह ‘ हिंदी वैश्विक भाषा बनने की ओर अग्रसर : अवसर एवं चुनौतियां ’विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्रशीष कुमार, द्वितीय स्थान अंजू बोस और तृतीय स्थान वंदना साहू ने प्राप्त किया।
सुलेख प्रतियोगिता में प्रथम स्थान अंजू बोस, द्वितीय स्थान सत्यवती वड्डे एवं तृतीय स्थान बिंदेश कुमार ने प्राप्त किया। हिंदी दिवस के इस अवसर पर डॉ. किरण नुरुटी को भी उनके सुदीर्घ लेखन-कार्यों के लिए सम्मान चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं गुण्डाधूर हिंदी साहित्य परिषद के पदाधिकारी और विद्यार्थियों में से प्रीति राय, बलराम, जाहिद खान, दिव्या, रामप्रसाद, शशिप्रभा, दशोबाई, महिमा, कुसुमदास, राजूराम, हेमलता बघेल, अमृता, रानी पाठक, हर्षिका, सुषमा, जमुना, कली शर्मा, लीलिमा, वंदना, प्रमिला मरकाम,चंदूलाल सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।