कोण्डागांव

राष्ट्रव्यापी स्वर्वेद सन्देश यात्रा पहुंची कोंडागांव
17-Sep-2025 9:44 PM
राष्ट्रव्यापी स्वर्वेद सन्देश यात्रा पहुंची कोंडागांव

हमारी आंतरिक शांति द्वारा ही विश्व-शांति संभव- विज्ञान देव जी महाराज

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कोण्डागांव, 17 सितंबर। विश्व की आदि संस्कृति हमारी भारतीय संस्कृति ही है। भारत में रहकर हम भारत से अलग नहीं हो सकते। कश्मीर से कन्याकुमारी तक कोई जमीन का टुकड़ा नहीं है भारत, यह भूमि मात्र नहीं है अपितु यह हमारी मातृभूमि है। उक्त उद्गार स्वर्वेद कथामृत के प्रवर्तक पूज्य संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने संकल्प यात्रा के क्रम में चिकलपुटी ऑडिटोरियम कोण्डागांव में कहे। स्वर्वेद संदेश यात्रा केवल स्थान से स्थान की यात्रा नहीं है; यह तो अंतर से अंतर की यात्रा है। जो अपने भीतर उतरेगा, वही सत्य और शांति का साक्षात्कार करेगा।

उन्होंने कहा कि - मन को साधें , तो जीवन अपने आप सरल हो जाएगा। बाहर की लड़ाइयाँ भीतर की हार से जन्म लेती हैं। आंतरिक शांति के अभाव से ही आज विश्व में अशांति है।

महाराज जी ने कहा - आध्यात्मिक महापुरुषों के बदौलत ही भारत विश्व गुरु रहा है, विश्वगुरु है और मैं कहता हूं भारत विश्व गुरु रहेगा।  कहा कि विश्वगुरु भारत की आध्यात्मिक संस्कृति पूरे विश्व को प्रेम, शांति एवं आनन्द का संदेश देती रही है। हमारी आंतरिक शांति द्वारा ही विश्व-शांति संभव है।

संत प्रवर जी ने युवाओं को सन्देश देते हुए कहा- ‘युवा’को आप उलट दोगे तो ‘वायु’ हो जाएगा। जिसमें वायु के समान वेग है, उत्साह है, उमंग है, उल्लास है, वह ही युवा है। जो हताश नहीं है, जो निराश नहीं है, जो परिस्थितियों का दास नहीं है, बल्कि उनका स्वामी है, जो लक्ष्य के साथ जीता है, वही युवा है। जो सबके लिए उपयोगी है, जो लक्ष्य से भटकता नहीं है, वही युवा है। युवा देश का भविष्य ही नहीं, वह वर्तमान भी है।

शोभायात्रा की दिव्यता और मंगल स्वागत के बीच संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज जब भक्तों के संग पदयात्रा करते आगे बढ़े, तो पूरा वातावरण श्रद्धा, आनंद और समरसता की आभा से अलौकिक बन उठा।

कार्यक्रम में भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लता उसेंडी, बब्बन सिंह, कोटेश्वर चापड़ी, सत्येंद्र कुमार स्वर्वेदी, सुश्री श्यामा उसेंडी, विमला दहिया, महेश चापड़ी, मनेश्वर नाग, उमेश पांडेय, वीरेंद्र निषाद, महेंद्र साहू,  महेंद्र साहू, योगेश्वरानंद नेताम, निर्मल बघेल, अशोक उसेंडी, जसकेतु उसेंडी के साथ अत्याधिक संख्या में श्रद्धालुगण व जिज्ञासु उपस्थित होकर कथामृत का रस्वादन किए।


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