सिंधी समाज ने प्रस्तुत की विभाजन की पीड़ा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
भिलाई नगर, 16 मार्च। स्वदेशी मेले में रविवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत विविध समाजों द्वारा रंगारंग प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिन्होंने दर्शकों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में सिंधी समाज दुर्ग-भिलाई द्वारा विशेष सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें सिंधी संस्कृति और इतिहास की झलक देखने को मिली। समाज के कलाकारों ने भारत विभाजन के समय सिंध छोडऩे की पीड़ा और संघर्ष को भावनात्मक प्रस्तुति के माध्यम से मंच पर जीवंत किया। इस प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को भावुक कर दिया और इतिहास की उस कठिन घड़ी की याद दिला दी। इसके साथ ही भगवान झूलेलाल साईं की आराधना नृत्य के माध्यम से अत्यंत सुंदर और भक्ति भाव से परिपूर्ण प्रस्तुति दी गई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में उत्कल समाज के कलाकारों ने भी पारंपरिक गीत एवं नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। विभिन्न संस्कृतियों की इन प्रस्तुतियों ने मेले में एकता और विविधता का सुंदर संदेश दिया।
मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ स्वदेशी व्यंजनों का भी विशेष आकर्षण रहा। आज सिंधी समाज द्वारा लगाए गए सिंधी पारंपरिक व्यंजन ‘दाल पकवान’ के स्टॉल पर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली और आगंतुकों ने बड़े चाव से इसका स्वाद लिया।
स्वदेशी मेला न केवल स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि विभिन्न समाजों की संस्कृति, परंपरा और खानपान को भी एक मंच प्रदान कर रहा है, जिससे मेले का वातावरण उत्साह और उल्लास से भर गया है।
आज प्रतियोगिता कार्यक्रम में बेस्ट ऑफ वेस्ट, रंग भरो प्रतियोगिता, चित्रकला प्रतियोगिता व थाली सजाओ प्रतियोगिता का सफल आयोजन हुआ। प्रतियोगी का उत्साह व प्रदर्शन में सनातन का मुख्य पार्ट रहा।
मेले में उमड़ा जनसैलाब, जमकर हुई खरीदी
भिलाई में आयोजित स्वदेशी जागरण मंच के स्वदेशी मेले में आज भारी संख्या में लोगों की उपस्थिति देखने को मिली। मेले में सुबह से ही शहरवासियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। परिवार सहित बड़ी संख्या में लोग मेले में पहुंचे और स्वदेशी उत्पादों की जमकर खरीदी की।
मेले में देशभर से आए लगभग 300 से अधिक स्टॉलों पर स्वदेशी उत्पादों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई है, जहां कपड़े, हस्तशिल्प, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, जैविक उत्पाद, खाद्य सामग्री सहित अनेक स्वदेशी वस्तुएं उपलब्ध हैं। स्थानीय उद्यमियों और कारीगरों को भी अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का अच्छा अवसर मिल रहा है।
मेले में खरीदारी के साथ-साथ मनोरंजन की भी विशेष व्यवस्था की गई है। बच्चों और परिवारों के लिए झूले, विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा फूड जोन आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और परंपरा की झलक भी मेले में देखने को मिल रही है, जिससे आगंतुक विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। स्वदेशी मेले का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना, स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहित करना तथा आत्मनिर्भर भारत की भावना को मजबूत करना है।