बस्तर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 7 फरवरी । बसंत ऋतु के आगमन के साथ ही पतझड़ शुरू हो जाता है। जगदलपुर आसना से बकावंड जाने के रास्ते के किनारे जंगल में पेड़ों से गिरे पत्तियों में आग लगाया जाता है। वन महकमा इसे फायर लाइन कहता है जो कि एक लंबे सीधे गड्ढे जैसे होता है और गहरा भी। फायर लाइन के आस पास के पास पेड़ों से गिरे सूखे पत्तियों में आग लगा दी जाती है और उसकी निगरानी की जाती है, जब तक आग बुझ न जाए।
विश्वनाथ कश्यप जो कि गांव के ही है और वन विभाग में अनियमित कर्मचारी हैं। वे कई वर्षों से इस काम को कर रहे हैं। वे कहते हैं कि आज नहीं तो कल वे नियमित कर्मचारी हो जायेंगे।
वहीं गांव के बुजुर्ग आशा राम ने बताया कि जंगलों को इन कर्मचारियों ने सुरक्षित रखा है। इनकी देखरेख में जंगलों अगर आग लग भी जाए तो उसे बुझाने का काम किया जाता है। उन्होंने बताया कि लोग सडक़ों पर आते जाते बची जलती बीड़ी,सिगरेट फेंक देते हैं जिसकी वजह से सूखे पत्तियों में आज लग जाती है,लोगों को इस बात को समझना चाहिए और वनों को आग लगने से बचाना चाहिए।


