बस्तर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 31 जनवरी। विक्षिप्त महिला से बलात्कार के आरोपी को आजीवन कारावास और 1000 अर्थ दंड की सजा सुनाते हुए अपर न्यायाधीश (एफटीसी) वंदना वर्मा ने कहा कि ऐसे अपराधों में उदारता पूर्वक विचार किए जाने से समाज का न्याय से विश्वास उठ जाएगा ।
पीडि़ता जिसकी जन्म से मानसिक स्थिति कमजोर थी ,जो उन लोगों के साथ घर में रहती थी एवं उसे अच्छे और बुरे किसी भी चीज का ज्ञान नहीं था । वह कुछ –कुछ बातों को इशारों से बताने का प्रयास करती थी। ऐसी महिला के साथ रिश्ते में मामा लगने वाले आरोपी सोमारु बघेल ने उसके साथ बलात्कार जैसा घृणित अपराध किया और सामाजिक रिश्ते को बदनाम किया।
एक दिन पीडि़ता परिवार वालों को बीमार व सर में दर्द होना बताया तब जाकर परिवार वालों ने उसे उपचार के लिए डॉक्टर के पास लेकर गए तब पीडि़ता के पेट में बच्चा होने की जानकारी परिवार के सदस्यों को डाक्टर ने दी। जिसे मेडिकल कॉलेज डीमरापाल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। उसने प्रीमेच्योर डिलीवरी में सातवां महीने में नवजात शिशु को जन्म दिया ।
उपचार के दौरान 6 दिन बाद नवजात शिशु की मृत्यु हो गई। पीडि़ता ने उसके साथ घटित घटना के संबंध में परिवार वालों को इशारों से और टूटी-फूटी बातों से बताया था कि उसके साथ रिश्ते में मामा लगने वाले सोमारु बघेल ने उसके साथ दुष्कर्म किया है। पीडि़ता एवं आरोपी का डीएनए टेस्ट कराया गया था जिसमें मृत नवजात शिशु को पीडि़ता एवं अभियुक्त सोमारु बघेल का संतान होना पाया गया।
न्यायाधीश ने अपने मत में कहा कि अभियुक्त पीडि़ता का रिश्ते में मामा लगता है और लॉकडाउन की अवधि में पीडि़ता के घर में रहते हुए पीडि़ता के मानसिक रूप से कमजोर होना जानते हुए उसके साथ बलात्कार जैसा घृणित अपराध कार्य करते हुए वैश्विक संबंध को धूमिल किया है ऐसे अपराधों में उदारता पूर्वक विचार किए जाने से समाज का न्याय से विश्वास उठ जाएगा।
उन्होंने आरोपी को आजीवन कारावास और 1000 का अर्थ दंड सुनाया। ?1000 भुगतान नहीं करने पर 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना पड़ेगा। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक एफटीसी प्रीति वानखेड़े ने पैरवी की।


