बस्तर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 3 जनवरी। प्रदेश में बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य व स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए स्वरोजगार एवं रोजग़ार की व्यवस्था बनाने के साथ ही भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र निर्माण की परिकल्पना लेकर अरुण पाण्डेय ने सैकड़ों समर्थकों की उपस्थिति में शनिवार को जनसभा का गठन किया है।
जनसभा की परिकल्पना पंचायत व शहरी वार्ड स्तर पर बेहतर शैक्षणिक व स्वास्थ्य संरचनाओं के निर्माण के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर ही युवाओं को रोजग़ार के अवसर प्राप्त हो सके, इसके लिए संघर्ष करने का लक्ष्य होगा।
अरुण पाण्डेय ने बताया कि कलेक्टर रज़त बंसल को आईएपी योजना के तहत नर्सिंग पाठ्यक्रम पूर्ण कर चुके बस्तर के अतिविशिष्ट चिन्हांकित अभ्यर्थियों को अब तक वादा अनुसार शुल्क की राशि नहीं दी गई है। पढ़ाई पूर्ण करने के लिए उन्होंने बैंकों से कर्ज लिया है। अब प्रत्येक विद्यार्थियों के परिजनों के सर पर लाखों का कर्ज है। जिसके लिए आदिवासी विकास विभाग के आयुक्त, कलेक्टर, संभाग आयुक्त तक जानकारी देने के बावजूद कोई कार्यवाही नही होते देख एक दिवसीय धरना में इस विषय को प्रमुखता से बल दिया गया है।वही स्थानीय दलपत सागर के सौंदर्यीकरण के कार्य के दौरान विस्थापित व्यवसायियों को नगर पालिक निगम प्रशासन द्वारा वादा किया गया था कि उन्हें स्थाई दुकान बनाकर दिया जावेगा लेकिन समय गुजऱ चुका अब तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई।
श्री पाण्डेय् ने कहा कि जब तक इन व्यापारियों को पक्का कॉम्पलेक्स बनाकर एलॉटमेंट नहीं किया जाएगा, संघर्ष जारी रहेगा।
बस्तर अंचल में स्थापित सबसे बड़े इस्पात संयत्र को उत्पादन आरंभ होने से पूर्व ही निजी हाथों में सौंपने की केंद्रीय शक्तियों द्वारा निर्णय के खि़लाफ़ अरुण पाण्डेय् ने कहा कि नगर नार स्टील संयंत्र का निजीकरण होने से बस्तर के युवाओं व कामगारों के साथ छलावा व भेदभावपूर्ण स्थिति में बढ़ोतरी होगी। निजी हाथों में प्लांट जाने के बाद नौकरी इत्यादि में रोस्टर नियम का पालन नहीं होगा, जिस कारण आदिवासी बहुल क्षेत्र में संयंत्र के स्थापित होने के बावजूद यहां के आदिवासी युवाओं को उपेक्षित होना पड़ेगा। स्थानीय कामगारों को प्लांट में बाहरी मज़दूरों के बीच भेदभाव होगा।
किसी भी क़ीमत पर नगरनार स्टील संयत्र का निजीकरण न हो, जनसभा नगरनार स्टील प्लांट निजीकरण के निर्णय के पूर्ण खि़लाफ़ है।
एक दिवसीय धरना में अरुण पाण्डेय् के अध्यक्षता में सम्पन्न धरना में 200 से अधिक लोग सम्मिलित हुए। इसमें छात्र, युवा, बेरोजग़ार, व्यापारी आम नागरिक उपस्थित रहे।
तहसीलदार ने जनसभा के मंच में आकर समस्त मांगों को सुना व ज्ञापन मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन के पास पहुंचाने की बात कही है।


