बलौदा बाजार

सुहेला क्षेत्र में हजार एकड़ की धान फसल में सिंचाई नहीं हो पा रही
24-Mar-2026 7:03 PM
सुहेला क्षेत्र में हजार एकड़ की धान फसल में सिंचाई नहीं हो पा रही

ट्यूबवेल में 150 फीट की गहराई में भी पानी नहीं

किसानों को 3.20 करोड़ से भी ज्यादा के नुकसान की आशंका

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार,  24 मार्च। सुहेला क्षेत्र के कई गांवों में भूजल स्तर कम होने से धान के रवि फसल बोने वाले किसानों में घोर निराशा के साथ हडक़ंप का माहौल है।  किसानों के अनुसार, ट्यूबवेल और कृषि पंपों से पर्याप्त पानी नहीं मिल पाने के कारण फसल प्रभावित हो रही है।

ट्यूबवेल का पानी सूख जाने अथवा कृषि पंपों से पानी का डिस्चार्ज काम हो जाने के कारण अमेरी, पिंडारी, झीपन लोहड़ी, बिटकुली, नवापारा, बुडग़हन, टेकरी, आमाकोनी सहित अनेक गांवों के धान की फसल मर चुकी हैं अथवा करने की कगार पर हैं वहीं अन्य किसान की फसल भी पाक जाएगी इसकी कोई गारंटी नहीं हैं। पडक़ीडीह, खपरा डीह, रवेली, बासीग, शिकारी, केसली, भट्टभेरा, गांव में भी जलस्तर नीचे चला गया हैं। करीब 1000 एकड़ का लगभग यही हाल हैं।

20 साल पहले तक यहां 60 से 90 फीट में ही पानी आ जाता था। अब किसानों के अनुसार 150 फीट गहरे ट्यूबवेल से भी पानी नहीं आ रहा हैं। 20 साल पहले किसानों ने 100 से 150 फीट तक ही बोर कराया हैं। अब परेशानी हो रही हैं। किसान कह रहे कि एक सप्ताह बाद स्थिति और खराब हो जाएगी।

 अमेरी में किसानों ने फसल पर मवेशी छोड़ दिया हैं। इस बार केवल सुहेला अंचल में ही किसानों को भारी नुकसान हो सकता हैं। यदि प्रति एकड़ 15 क्विंटल उत्पादन और दाम प्रति क्विंटल 2200 रूपए माना जाए तो 1000 एकड़ में नुकसान की राशि 3.20 करोड़ से भी ज्यादा की होगी। पानी की कमी के कारण अमेरी के मकसूदन बधमार और केजू राम वर्मा ने मवेशियों से अपना फसल चरा दिया।

राधेश्याम बंदे, नागेंद्र निषाद, होलसाय, गिरजानंद वर्मा ने बताया कि जिस रफ्तार से पंप का वाटर लेवल डाउट हो रहा है फसल पकने की कोई गारंटी नहीं हैं।

3 एचपी के पंप दिखाते हुए ईश्वर वर्मा ने बताया कि 2 साल पहले इसी पंप से 3 एकड़ का फसल पक जाती थी। इस बार केवल आधा एकड़ में फसल ली फसल पक नहीं पाएगी।

नवापारा के दिलीप वर्मा, भुनेश्वर वर्मा और जैन दास सोनवानी ने सारा खर्च करने के बाद केवल पानी की कमी के कारण अपना फसल छोड़ दिया हैं।

इस बार दो एकड़ की फसल को भी पकाना मुश्किल

बिटकुली के प्रदीप वर्मा ने 9 एकड़ में तथा संदीप वर्मा ने 10 एकड़ में धान की रवि फसल लेना बताते बताए हुए कहा कि कृषि पंप से पानी का डिस्चार्ज कम कमजोर होना चिंता का विषय हैं। अर्जुन वर्मा, रोहित साहू और पुरन वर्मा के पंप पूरी तरह बंद हो गए हैं।

मंगलू और श्रीराम यादव द्वारा नया बोर खनन कराया गया परंतु पानी नहीं निकल पाया। झीपन के दिलीप वर्मा के अनुसार दो एकड़ में बोई गई फसल नहीं पाक पाएगी।

 किसानों का  कहना है कि पिछले साल जो स्थिति अप्रैल के महीने में थी। इस साल वही स्थिति मार्च के महीने में हो चुकी हैं। वाटर लेवल अभी से लगभग डेढ़ सौ फीट नीचे जा चला गया हैं। पानी की कमी के चलते पिछले साल भी फसल पक नहीं पाने के कारण हमें काफी नुकसान उठाना पड़ा था, इसलिए इस बार धान फसल के रखबे में कटौती किए थे।

अब फसल चक्र परिवर्तन करना आवश्यक- वर्मा

भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष दिनेश वर्मा ने कहा कि पानी की समस्या के चलते किसानों से फसल चक्र में परिवर्तन का आग्रह करते हुए कहा कि पिछले साल नुकसान झेल चुके हम किसानों ने स्वयं अपने पैर में कुल्हाड़ी मारी हैं। 2 साल पहले तक मैं स्वयं लगभग 20 एकड़ में धान फसल लेता था परंतु इस बार 3 एकड़ में सरसों की फसल ली थी जिसमें प्रति एकड़ अच्छा फायदा हुआ

रवि के धान उचित नहीं वाटर लेवल तो गिरेगा ही-वैज्ञानिक

केवीके भाटापारा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आनंद सिंह राजपूत ने धान की रवि फसल को प्रकृति के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि उनके द्वारा प्रत्येक किसान मेला, प्रशिक्षण अथवा कार्यक्रमों में किसानों से रवि का धान फसल नहीं लेने का निवेदन किया जाता है क्योंकि गर्मी में टेंपरेचर बढऩे के साथ वाटर लेवल का नीचे जाना स्वाभाविक हैं। उन्होंने कहा कि एक एकड़ धान की फसल में जितना पानी खर्च होता है, इतने पानी से 5 एकड़ में चना, सरसों आदि दलहन तिलहन फसल की फसल ली जा सकती हैं।

जल संरक्षण हर व्यक्ति का दायित्व- एसडीओ

इस संबंध में भाटापारा पीएचई विभाग के एसडीओ कन्हैया कुमार देवांगन ने कहा कि वाटर लेवल अभी तक इतना अधिक डाउन नहीं हुआ है। जल संरक्षण हर व्यक्ति का दायित्व है।


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