सूरजपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सूरजपुर, 7 जून। एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र में कंपनी के लगभग 3,491 आवास होने के बावजूद करीब 700 कर्मचारियों को आवास भत्ता (एचआरए) देना पड़ रहा है। आवासों की उपलब्धता के बावजूद बड़ी संख्या में क्वार्टरों पर अवैध कब्जे और जर्जर आवासों के कारण कर्मचारियों को कंपनी आवास नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे हर माह कंपनी पर 10 लाख रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार बिश्रामपुर, कुमदा और आरजीके सब एरिया को मिलाकर कुल 3,491 कंपनी आवास हैं। इनमें 288 आवास क्षतिग्रस्त अवस्था में हैं, जबकि लगभग 475 आवासों पर बाहरी व्यक्तियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों का कब्जा बताया जा रहा है। इसी वजह से पात्र कर्मचारियों को आवास उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं और उन्हें एचआरए का भुगतान किया जा रहा है।
स्थिति को गंभीर मानते हुए क्षेत्रीय प्रबंधन ने सभी आवासों का नए सिरे से सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए टीम गठित कर सर्वे कार्य भी शुरू कर दिया गया है।
सख्ती का असर, 27 आवास हुए खाली
प्रबंधन द्वारा नए वित्तीय वर्ष से अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख अपनाए जाने का असर दिखाई देने लगा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार हाल के दिनों में 27 लोगों ने कंपनी को क्वार्टर खाली कर उसकी चाबी सौंप दी है।
इसके अलावा लंबे समय से आवास खाली नहीं करने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अन्य अवैध कब्जाधारियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। प्रबंधन ऐसे मामलों को न्यायालय में ले जाने की तैयारी भी कर रहा है।
फर्जी आवंटन आदेशों
की होगी जांच
कंपनी आवासों के आवंटन में कथित फर्जीवाड़े के मामलों की भी जांच शुरू की जा रही है। बताया जाता है कि पूर्व में फर्जी आवंटन आदेशों के जरिए शिक्षक, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग सहित राज्य शासन के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने कंपनी आवासों पर कब्जा कर लिया था।
सूत्रों के अनुसार कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ रहे एक कथित लिपिक द्वारा अपर कलेक्टर के पदनाम का दुरुपयोग कर कथित रूप से फर्जी आवंटन पत्र जारी किए जाते थे। इसके एवज में 40 से 50 हजार रुपये तक की वसूली की शिकायतें भी सामने आई थीं। ऐसे आदेशों के आधार पर कई लोगों ने खाली पड़े क्वार्टरों में प्रवेश कर कब्जा कर लिया।
प्रबंधन का स्पष्ट कहना है कि कंपनी आवास एसईसीएल की संपत्ति हैं और उनका आवंटन केवल कंपनी के नियमों के अनुसार ही किया जा सकता है। इसलिए अब सभी संदिग्ध आवंटनों का सत्यापन कराया जाएगा। संबंधित आवासों में रहने वालों को नोटिस जारी कर जवाब और दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
न्यायालय जाने की तैयारी
संपदा अधिकारी जी.के. रॉय ने बताया कि अवैध रूप से कंपनी आवासों में रह रहे लोगों को स्वयं क्वार्टर खाली कर देना चाहिए, अन्यथा उन्हें न्यायालयीन कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कई प्रकरण तैयार किए जा चुके हैं और अगले 15 से 20 दिनों में उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।
प्रबंधन की इस कार्रवाई से अवैध कब्जाधारियों में हडक़ंप की स्थिति बताई जा रही है तथा बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन संपदा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर अपना पक्ष रख रहे हैं।


