सूरजपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सूरजपुर, 4 जून। कलेक्टर रेना जमील की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में माइनिंग क्लोजर प्लान की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले की बंद हो चुकी खदानों के सुरक्षित प्रबंधन, पुनर्वास, पर्यावरण संरक्षण, कौशल विकास तथा स्थानीय लोगों की आजीविका से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में एसईसीएल अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्ष 2009 से पूर्व बंद हुई तीन खदानों का कुल क्षेत्रफल लगभग 1103 हेक्टेयर है। वहीं बिश्रामपुर ओपन कास्ट माइन (ओसीएम) में वर्ष 2018 में उत्पादन बंद कर दिया गया था, जिसका कुल क्षेत्रफल 1472 हेक्टेयर है।
कलेक्टर रेना जमील ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि माइनिंग क्लोजर प्लान का क्रियान्वयन पूरी गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि नियमानुसार ग्राम पंचायतों एवं स्थानीय समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए खनन समाप्ति के बाद भूमि के बेहतर उपयोग की कार्ययोजना तैयार की जाए।
बैठक में पुनर्वास और आजीविका के मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने कहा कि खदानों के बंद होने के बाद ‘जस्ट ट्रांजिशन’ की अवधारणा के तहत श्रमिकों के रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास को प्राथमिकता दी जाए, ताकि प्रभावित लोगों को वैकल्पिक रोजगार एवं आय के अवसर उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने स्थानीय युवाओं एवं प्रभावित परिवारों के कौशल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से संबंधित योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश भी दिए। कलेक्टर ने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों का सतत एवं समावेशी विकास प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।


