सूरजपुर

लक्ष्य से 15 लाख टन पीछे, फिर भी बिश्रामपुर क्षेत्र का प्रदर्शन बेहतर
01-Apr-2026 10:44 PM
लक्ष्य से 15 लाख टन पीछे, फिर भी बिश्रामपुर क्षेत्र का प्रदर्शन बेहतर

 25.63 लाख टन कोयला उत्पादन, 24 लाख टन से अधिक डिस्पैच

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

सूरजपुर, 1 अप्रैल। सूरजपुर जिला के एसईसीएल के बिश्रामपुर क्षेत्र ने वर्ष 2025-26 में कोयला उत्पादन के मामले में गत वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है, हालांकि क्षेत्र निर्धारित लक्ष्य से लगभग 15 लाख टन पीछे रह गया।

क्षेत्र को इस वित्तीय वर्ष में 41.60 लाख टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य मिला था, जिसके विरुद्ध 25.63 लाख टन उत्पादन किया गया। वहीं 24 लाख टन से अधिक कोयले का डिस्पैच किया गया।

पिछले वर्ष क्षेत्र ने 23.47 लाख टन उत्पादन किया था, जिसकी तुलना में इस वर्ष 2.16 लाख टन की वृद्धि दर्ज की गई है। कुल मिलाकर लगभग 10 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई है। हालांकि इन सब के बाबजूद क्षेत्र अभी भी करीब पौने दो सौ करोड़ के घाटे में संचालित है।

खदानवार उत्पादन स्थिति

अमेरा खदान को 12 लाख टन का लक्ष्य मिला था, लेकिन जनवरी से उत्पादन शुरू होने के कारण केवल 4 लाख टन उत्पादन हो सका। पिछले वर्ष यहां 5.41 लाख टन उत्पादन हुआ था।

आमगांव खदान को 12 लाख टन लक्ष्य के विरुद्ध 10 लाख टन उत्पादन का संशोधित लक्ष्य मिला, जिसे खदान ने दो दिन पूर्व ही पूरा कर लिया। गत वर्ष यहां 6.97 लाख टन उत्पादन हुआ था। देश के पहले एमडीओ मोड में संचालित होने वाले केतकी भूमिगत खदान परियोजना  ने 7.76 लाख टन लक्ष्य के विरुद्ध 3.97 लाख टन उत्पादन हुआ, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 1.25 लाख टन था।

गायत्री खदान ने 8.80 लाख टन लक्ष्य के मुकाबले 6.86 लाख टन उत्पादन किया। पिछले वर्ष यही खदान लक्ष्य हासिल करने वाली एकमात्र खदान थी।

रेहर भूमिगत खदान को 1.20 लाख टन लक्ष्य मिला था, जिसके विरुद्ध मात्र 60,750 टन उत्पादन हो सका।वर्तमान में केवल रेहर खदान का संचालन प्रबंधन खुद कर रही है।

कुमदा 7/8 खदान से केवल 1,470 टन और बलरामपुर खदान से 16,860 टन उत्पादन हुआ, जबकि ये खदानें लगभग बंद स्थिति में हैं।

संचालन की स्थिति

क्षेत्र में कुल 7 खदानें हैं, जिनमें 2 ओपनकास्ट और 5 भूमिगत खदानें शामिल हैं। इनमें से कुमदा 7/8 और बलरामपुर खदान पूरी तरह बंद हैं, जहां वर्तमान में केवल पंपिंग का कार्य चल रहा है।

कुल उत्पादन में ओपनकास्ट खदानों का योगदान प्रमुख रहा, जहां से लगभग 24 लाख टन कोयला निकाला गया, जबकि भूमिगत खदानों से 11.62 लाख टन उत्पादन हुआ। निजी ऑपरेटरों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका रही, क्योंकि 5 चालू खदानों में से 4 का संचालन निजी हाथों में है।

बाधाएं भी रहीं

अमेरा और आमगांव खदानों में अधिग्रहित भूमि का समय पर अधिपत्य न मिलना, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के विरोध, भू-वैज्ञानिक समस्याएं और मशीन ब्रेकडाउन जैसी चुनौतियों के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ।

विशेषकर इन समस्याओं के समाधान में आधा वर्ष से अधिक समय लग गया।

प्रबंधन का दावा

क्षेत्र के महाप्रबंधक संजय सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में उत्पादन में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि नए वित्तीय वर्ष 2026-27 में क्षेत्र को 40.50 लाख टन का लक्ष्य मिला है, जिसे हर हाल में हासिल करने का प्रयास किया जाएगा। यह लक्ष्य कंपनी के सीएमडी हरीश दुहन के नेतृत्व में पूरा किया जाएगा।


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