सूरजपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सूरजपुर, 3 मार्च। सूरजपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत कसकेला के पूर्व सरपंच राम प्रसाद पैकरा के ग्राम जुड़वानी स्थित फार्म हाउस में सोमवार को हुई आगजनी की घटना हुई है। आग क्यों और किसने लगाई है स्पष्ट नहीं हो सका है।
बताया जाता है कि दोपहर की तेज धूप के बीच अचानक उठी आग की लपटों ने करीब एक एकड़ में तैयार खड़ी गन्ने की फसल को कुछ ही मिनटों में राख में तब्दील कर दिया। घटना को अज्ञात असामाजिक तत्वों की करतूत बताया जा रहा है, जिससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है।
जानकारी के मुताबिक खेत में लगी गन्ने की फसल पूरी तरह तैयार थी। कटाई की तैयारी चल रही थी और आने वाले दिनों में उसे मंडी ले जाया जाना था। परिवार को अच्छी आमदनी की उम्मीद थी। लेकिन सोमवार दोपहर अचानक खेत की एक ओर से धुआं उठता दिखाई दिया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और तेज हवा के कारण लपटें पूरे खेत में फैल गईं।
ग्रामीणों का कहना है कि गन्ने की सूखी पत्तियों ने आग को और भडक़ाया, जिससे आग बुझाना बेहद मुश्किल हो गया। कुछ ही समय में हरे-भरे खेत की जगह राख का ढेर नजर आने लगा। बताया जा रहा है कि आग की चपेट में केवल फसल ही नहीं आई, बल्कि खेत में सिंचाई के लिए स्थापित ट्यूबवेल भी क्षतिग्रस्त हो गया। ट्यूबवेल में लगा स्टार्टर, विद्युत केबल, मोटर से जुड़ी तारें और खेत में बिछाई गई पाइप लाइन जलकर राख हो गई है।
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार हजारों रुपए का नुकसान हुआ है, हालांकि वास्तविक आंकलन राजस्व विभाग के सर्वे के बाद सामने आएगा। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। बाल्टियों, मोटर पंप और उपलब्ध संसाधनों से आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कुछ देर और आग भडक़ती रहती तो आसपास के अन्य खेत भी इसकी चपेट में आ सकते थे, जिससे बड़ा नुकसान हो सकता था।
पीडि़त किसान राम प्रसाद पैकरा ने घटना को सुनियोजित शरारत बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि फसल पूरी तरह तैयार थी और ऐसे समय में अचानक आग लगना संदेहास्पद है। उन्होंने लटोरी पुलिस से दोषियों की पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने शासन-प्रशासन से नुकसान का तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की अपील की है, ताकि दोबारा खेती की व्यवस्था की जा सके। उनका कहना है कि एक किसान के लिए पूरी फसल का इस तरह जल जाना आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से बड़ा आघात है।


