राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धडक़न और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : भाजपा के भीतर भारत-पाक जैसा झगड़ा
03-Sep-2021 5:44 PM (444)
छत्तीसगढ़ की धडक़न और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : भाजपा के भीतर भारत-पाक जैसा झगड़ा

भाजपा के भीतर भारत-पाक जैसा झगड़ा

शदाणी दरबार के प्रमुख युधिष्ठिर लाल के खिलाफ फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना भाजपा के तीन नेताओं को महंगा पड़ गया। सिंधी समाज के दबाव में पुलिस ने शिवजलम दुबे, और राजीव चक्रवर्ती को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। प्रकरण के एक अन्य आरोपी विजय जयसिंघानी फरार हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे प्रकरण को लेकर भाजपा दो गुटों में बंट गई है।

गिरफ्तारी से खफा भाजपा नेता दबी जुबान में यह कहने से नहीं चूक रहे हैं कि शहर जिला भाजपा अध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी के दबाव की वजह से इन तीनों के खिलाफ प्रकरण दर्ज हुआ है। ये तीनों नेता पूर्व अध्यक्ष राजीव अग्रवाल के करीबी माने जाते हैं। हुआ यूं कि युधिष्ठिर लाल का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें पाकिस्तान के राष्ट्रगान के दौरान वो बाकियों के साथ खड़े दिख रहे हैं।

युधिष्ठिर लाल का पाकिस्तान आते-जाते हैं। शदाणी दरबार के अनुयायी पाकिस्तान में भी हैं, और वहां दरबार भी है। मगर उत्साही भाजपा नेताओं ने वीडियो परखे बिना यह टिप्पणी कर दी कि भारत में पाकिस्तान का राष्ट्रगान गाया जा रहा है। इसके बाद युधिष्ठिर लाल को काफी भला बुरा कहा गया। ये सही है कि पाकिस्तान के राष्ट्रगान के दौरान युधिष्ठिर लाल खड़े थे, लेकिन वो उस समय पाकिस्तान के एक कार्यक्रम में थे जहां राष्ट्रगान चल रहा था। ऐसे में वहां के राष्ट्रगान का सम्मान करना उनका, और हर किसी का दायित्व बनता है। मगर पाकिस्तान के विरोध में हमेशा आग उगलने वाले ये भाजपा नेता यहां गलती कर गए।

गिरफ्तार भाजपा नेताओं से जुड़े लोगों का तर्क है कि इस प्रकरण को आपस में बातचीत कर निपटाया जा सकता था। शिवजलम पार्षद चुनाव लड़ चुके हैं, और वे श्रम प्रकोष्ठ के प्रदेश पदाधिकारी भी रहे हैं। राजीव चक्रवर्ती पार्टी के पदाधिकारी हैं। तीनों ने माफी भी मांग ली थी।  मगर श्रीचंद, और उनसे जुड़े लोगों के दबाव की वजह से गिरफ्तारी हुई है। यानी इस पूरे मामले को पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी से जोडक़र देखा जा रहा है। चाहे कुछ भी हो, इन नेताओं की गिरफ्तारी से पार्टी के भीतर झगड़ा बढऩे के आसार हैं।

सांत्वना पुरस्कार

जगदलपुर के एक होटल में भाजपा का दो दिन का चिंतन शिविर खत्म हो गया। कई नेता शिविर में जगह पाने के लिए काफी बेचैन थे। इनमें से बालोद के एक नेता तो जगदलपुर भी पहुंच गए। स्वाभाविक है कि आमंत्रण नहीं था, तो शिविर में अंदर जा नहीं सकते थे। वो होटल के लॉन में बैठे रहे। और जब शिविर खत्म हुआ, तो कुछ प्रमुख नेताओं से मुलाकात कर शिविर में नहीं बुलाए जाने का अपना दर्द बयां किया।

एक पूर्व मंत्री ने नेताजी की मायूसी को दूर करने के लिए तरकीब निकाली, उन्होंने अपना ब्रोशर नेताजी को थमा दिया। और फिर प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी के साथ नेताजी की फोटो खिंचवाई। यह फोटो सोशल मीडिया में वायरल किया गया। कौन-कौन शिविर में थे, इसका नाम सार्वजनिक तो हुआ नहीं है। लेकिन ब्रोशर हाथ में लिए पुरंदेश्वरी के साथ तस्वीर वायरल होने से नेताजी की बालोद में पूछपरख बढ़ गई है।

अमरकंटक से छत्तीसगढ़ का रिश्ता

सन 2000 में जब छत्तीसगढ़ राज्य बना तब केवल अमरकंटक की नहीं बल्कि पूरे शहडोल जिले को छत्तीसगढ़ में शामिल करने की मांग उठी थी। इसके लिए वहां एक संघर्ष समिति बनाकर आंदोलन भी किया गया था। पर एक बार अधिसूचना जारी होने के बाद उसमें बदलाव नहीं हो सका। शहडोल अब संभाग बन चुका है और अमरकंटक के दोनों छोर पर अनूपपुर और डिंडोरी जिले बन चुके हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अमरकंटक प्रवास के दौरान पत्रकारों ने उनसे सवाल किया क्या आप अमरकंटक के विकास से संतुष्ट हैं मुख्यमंत्री ने कहा कि वे आध्यात्मिक यात्रा पर है और राजनीतिक बातें नहीं करेंगे लेकिन इतना जरूर कहना चाहेंगे कि यदि अमरकंटक छत्तीसगढ़ में होता तो हम नर्मदा मैया की ज्यादा अच्छी तरह से सेवा कर पाते। एक तरह से सीएम की यह बात छत्तीसगढ़ के लोगों की ही भावना है।

छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी का शहडोल, खासकर अमरकंटक से विशेष लगाव रहा। वे यहां कलेक्टर भी रहे और बाद में लोकसभा चुनाव भी लड़ा। बाबा कल्याण दास आश्रम के लिए जगह का आवंटन के कलेक्टर रहने के दौरान ही हुआ था। शहडोल चुनाव अजीत जोगी हार गए थे और उसी के बाद छत्तीसगढ़ राज्य का गठन भी हुआ। कई लोग मानते हैं यदि वे शहडोल का चुनाव जीत गए होते तो शायद छत्तीसगढ़ की राजनीति में नहीं आते, न ही मुख्यमंत्री बन पाते। उन्होंने अमरकंटक को छत्तीसगढ़ में शामिल कराने के लिये बहुत प्रयास किये।

अमरकंटक की तराई में सीमा को लेकर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच कई बार विवाद भी उठता रहा है। भाजपा शासनकाल के दौरान तब के पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने घोषणा की थी कि हम छत्तीसगढ़ के हिस्से को अमरकंटक की तरह ही आकर्षक पर्यटन स्थल का रूप देंगे। हालांकि अब भी क्षेत्र विकास की राह देख रहा है। अमरकंटक पहुंचने की दोनों सडक़ें जर्जर हो चुकी हैं। बृजमोहन के कार्यकाल में करोड़ों रुपये खर्च किये गये पर अधिकांश काम अधूरे पड़े हैं। मुख्यमंत्री ने राजमेरगढ़ का दौरा करके इसे विकसित करने की अभी घोषणा की है।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के निर्देश पर अमरकंटक विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण गठन सन् 2016 में किया गया था। इसमें छत्तीसगढ़ के भी कई गांव शामिल किये गये हैं। फिलहाल इसी प्राधिकरण को सक्रिय करके अमरकंटक की तराई के छत्तीसगढ़ वाले हिस्से को संवारा जा सकता है।

टेंडर के लिये फर्जी अखबार...

कुछ लोगों को हैरानी हो सकती है की अखबार भी फर्जी छापे जाते हैं। ऐसा टेंडर के फर्जी प्रकाशन के लिए होता है। दरअसल, किसी भी विभाग को टेंडर कम से कम 2 अखबारों में प्रकाशित कराने की बाध्यता है। अधिकारी चोरी छिपे ठेका न दें, देखते हुए राज्य शासन के जनसंपर्क विभाग को इसका दायित्व दिया गया है। टेंडर निकालने के लिये संबंधित अधिकारी इसी विभाग को पत्र लिखेंगे। प्रकाशन का उद्देश्य यह है कि काम चाहने वाले हरेक व्यक्ति को सूचना मिले और वह स्पर्धा में भाग ले सके। पर ऐसा करने से अधिकारियों को अपनी जेब भरने का मौका नहीं मिलता। वे अपने चहेते ठेकेदारों को काम नहीं दिला पाते। इसके चलते किसी प्रिंटिंग प्रेस को पकडक़र नकली अखबार और उसके भीतर टेंडर के फर्जी विज्ञापन छपवा लिये जाते हैं। ये फर्जी अखबार बांटे नहीं जाते, सिर्फ फाइल में नस्ती करने के काम आता है।

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