राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : राज्यसभा के लिए जोड़तोड़
20-Feb-2026 6:28 PM
राजपथ-जनपथ : राज्यसभा के लिए जोड़तोड़

राज्यसभा के लिए जोड़तोड़

प्रदेश से राज्यसभा की दो रिक्त सीटों के लिए चुनाव होना है। इसे लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों में हलचल तेज हो गई है। दोनों ही पार्टी को एक-एक सीट मिलना तय है। भाजपा में अब तक परंपरा रही है कि स्थानीय नेता को ही राज्यसभा भेजा जाए, इसलिए इस बार भी कई दावेदार सक्रिय नजर आ रहे हैं।

हालांकि इस बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का नाम भी चर्चा में है। लेकिन उनके गृह राज्य बिहार में  पांच सीटों पर चुनाव हो रहा है, ऐसे में उनके बिहार से राज्यसभा जाने की संभावना अधिक मानी जा रही है।

इधर, प्रदेश में कई पूर्व विधायक अपनी संभावनाएं टटोल रहे हैं। प्रदेश भाजपा महामंत्री (संगठन) पवन साय करीब दो महीने बाद बंगाल से रायपुर पहुंचे तो उनसे मिलने नेताओं में होड़ लगी रही। पवन साय इन दिनों पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में रहकर 50 विधानसभा सीटों पर संगठन मजबूत करने में जुटे हैं।

रायपुर आगमन के बाद वे धमतरी में आरएसएस की बैठक में शामिल हुए। समयाभाव के कारण वे अधिक नेताओं से नहीं मिल पाए, लेकिन गुरुवार शाम को कोलकाता रवाना होते समय एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता उनसे मिलने पहुंचे। इसमें विभिन्न मोर्चा-प्रकोष्ठों के पदाधिकारी भी शामिल थे।

भाजपा हमेशा राज्यसभा प्रत्याशी को लेकर चौंकाने का इतिहास रखती है। उदाहरण के तौर पर, विधानसभा चुनाव में लैलूंगा सीट से टिकट नहीं मिलने के बाद भी देवेन्द्र प्रताप सिंह को बाद में राज्यसभा प्रत्याशी घोषित किया गया था, जिससे पार्टी के भीतर भी आश्चर्य हुआ था। स्वयं उन्हें भी इसकी उम्मीद नहीं थी।

भाजपा हारे हुए नेताओं से परहेज नहीं करती। उनकी राजनीतिक उपयोगिता को देखते हुए राज्यसभा भेजने का फैसला लेती रही है। विधानसभा चुनाव हारने के बाद रामविचार नेताम, और फिर लोकसभा चुनाव हारने के बाद सरोज पांडेय को राज्यसभा भेजा गया था। ऐसे में इस बार भी कई पराजित नेता उम्मीद लगाए बैठे हैं। देखना है आगे क्या कुछ होता है।

नायब तहसीलदार से आईएएस

प्रदेश के 9 अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा का अवार्ड मिला है। इनमें 7 अधिकारी डिप्टी कलेक्टर से प्रमोट होकर आईएएस बने हैं, जबकि दो अधिकारियों का चयन अन्य सेवा संवर्ग से हुआ है। खास बात यह है कि पहली बार एक साथ दो अफसरों को अन्य सेवा से आईएएस अवार्ड हुआ है।

वित्त सेवा से ऋषभ पाराशर और जीएसटी विभाग के अधिकारी तरूण कुमार किरण को आईएएस अवार्ड प्राप्त हुआ है। अन्य सेवा संवर्ग से आईएएस में चयन की प्रक्रिया अलग होती है, जिसमें साक्षात्कार के माध्यम से चयन किया जाता है।

सरकार ने विभिन्न विभागों से 10 अधिकारियों के नाम भेजे थे। इनमें ऋषभ पाराशर, तरूण कुमार किरण के अलावा श्रुति प्रसन्ना नेरकर, पवन कुमार गुप्ता, विनय गुप्ता, पी.एल. साहू, अभिषेक त्रिपाठी, राकेश पुराम, संतोष मौर्या और धीरज नशीने शामिल थे। इनमें से पाराशर और किरण का चयन हुआ।

डिप्टी कलेक्टर से आईएएस बनने वालों में वीरेंद्र पंचभाई का नाम भी उल्लेखनीय है। उन्होंने नायब तहसीलदार के रूप में सेवा की शुरुआत की थी, इसके बाद डिप्टी कलेक्टर बने और अब आईएएस में पहुंचे हैं। राज्य गठन के बाद पंचभाई ऐसे पहले अधिकारी हैं जिन्होंने इतना लंबा सफर तय किया है। आमतौर पर डिप्टी कलेक्टर पद से शुरू करने वाले ही प्रमोशन के बाद आईएएस तक पहुंचते हैं।

कहां है एनईपी की स्वास्थ्य समिति ?

धमतरी जिले के दहदहा गांव के सरकारी मिडिल स्कूल में कक्षा 6 से 8 के 14 लड़कियों सहित 35 छात्रों ने बीते पांच महीनों के दौरान अपनी कलाई पर ब्लेड, पिन या दूसरी नुकीली धातु से चोटें पहुंचा ली। जांच में इसे 'पीयर इमिटेशन' बताया गया, बिना किसी मनोवैज्ञानिक विकार या नशे के।

इसे छात्रों में सहपाठी दबाव (पीयर प्रेशर) के खतरा बताया है। इसे युवा होते किशोरों के बीच आत्मविश्वास को तोडऩे और नकारात्मक व्यवहार के रूप में देखा जाता है, जिससे वे खुद को चोट को भी पहुंचा सकते हैं। धमतरी के स्कूल में यह नकल के चलते संक्रामक हो गया, जो शिक्षा संस्थानों में अब तक देखी जा रही समस्या- जैसे मारपीट की घटनाओं से अलग है।

मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल प्रिंसिपल को शो-कॉज नोटिस दी है। शिक्षकों की सतर्क रहना चाहिए, कक्षा के बाहर की गतिविधियों नजर रखनी चाहिए यह बात ठीक है, पर वास्तव में अब तो शिक्षकों का छात्रों के साथ संवाद की ही कड़ी टूटती जा रही है। ऐसे बहुत कम शिक्षा संस्थानों में देखा जा रहा है, जहां बच्चों के साथ भावनात्मक लगाव रखते हुए, घुल-मिलकर उनके लक्ष्यों, प्रयासों पर बात करते हों। निजी स्कूल व्यावसायिक हो चुके हैं, जिनके शिक्षकों के लिए सिर्फ मार्कशीट के नंबर मायने रखते हैं, वहीं सरकारी स्कूलों के शिक्षक नौकरी के स्थायित्व के चलते निश्चिंत होते हैं और बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण को अपना दायित्व मानकर नहीं चलते। 

स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य समिति अनिवार्य करने वाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति ( एनईपी 2020) पर चर्चा इस मौके पर जरूरी है। इसमें विद्यार्थियों के लिए काउंसलिंग पोर्टल और गोपनीय शिकायत तंत्र बनाना शामिल है। यह प्रावधान छात्रों में तनाव, अवसाद रोकने की जरूरत को देखते हुए किया गया।

छत्तीसगढ़ सरकार लगातार दावा करती है कि एनईपी के प्रावधानों को लागू करने वाला वह अग्रणी राज्य है, मगर अब तक स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य समिति का गठन ही नहीं किया गया है। स्कूलों की बात तो तब की जाए, जब ब्लॉक या जिला स्तर पर गठित किया जा चुका हो। राज्य स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य समिति की बैठक जरूर पिछले माह (जनवरी 2026 में) डीपीआई के संचालक ने ली थी। इसमें बड़ी-बड़ी बातें की गई थीं। जैसे- शिक्षा व्यवस्था के भीतर मानसिक स्वास्थ्य को अनिवार्य घटक के रूप में शामिल करने पर जोर दिया गया। समिति ने निष्कर्ष निकाला कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास तभी संभव है जब में मानसिक रूप से स्वस्थ, सशक्त और तनाव मुक्त हों। बैठक में मानसिक स्वास्थ्य को शैक्षणिक वातावरण का अहम हिस्सा बनाने की जरूरत  पर जोर दिया गया था। मगर, धमतरी की घटना से साफ हो गया कि ये बड़े इरादे जमीन पर लागू नहीं हो पाए।

जंगल में एक नई तीसरी आंख

फोटो में दिखाई दे रही यह सौर ऊर्जा से संचालित सीसीटीवी कैमरा अचानकमार टाइगर रिजर्व (एटीआर) की सुरक्षा का नया उपकरण है। अब तक यहां जानवरों की आवाजाही दर्ज करने के लिए ही ट्रैप कैमरे लगे हुए थे अब वाहनों के मूवमेंट पर भी नजर होगी। जहां-जहां बैरियर हैं लगाए जा रहे हैं। यह कैमरा 4जी सिम कार्ड के माध्यम से जुड़ता है, जिससे मोबाइल ऐप के जरिए रिमोट मॉनिटरिंग की जा सकती है। इसमें पीटीजेड (पैन-टिल्ट-जूम) फीचर, ह्यूमन डिटेक्शन, टू-वे ऑडियो और नाइट विजन जैसी उन्नत सुविधाएं हैं। जंगल में यदि कोई बैरियर पार करता है या अनधिकृत वाहन प्रवेश करता है, तो यह तुरंत उसे कैद कर लेता है। पूरे समय सक्रिय रहने वाला यह कैमरा आवाजाही को रिकॉर्ड करता है, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकता है। यदि आप ऐसी जगह पर जहां बिजली नहीं है, इसे इंस्टाल करना चाहें तो समान मॉडल 6,999 से 15,000 रुपये तक मिल जाएंगे। पर सोलर पैनल का अतिरिक्त खर्च करना होगा।


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