राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : डी.एड अभ्यर्थियों की उम्मीद जागी
11-Feb-2026 6:26 PM
राजपथ-जनपथ : डी.एड अभ्यर्थियों की उम्मीद जागी

डी.एड अभ्यर्थियों की उम्मीद जागी

डी.एड प्रशिक्षित अभ्यर्थी 50 से अधिक दिनों से नवा रायपुर के तूता धरनास्थल पर मौजूद हैं। इनमें से अनेक लोग आमरण अनशन भी कर रहे हैं। कई अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को खून से पत्र लिखकर अपनी नियुक्ति की मांग की है। आंदोलनरत कई अभ्यर्थियों की हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। पूर्व में हाईकोर्ट ने रिक्त पदों पर दो माह के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया था। वह समय सीमा कब से खत्म हो चुकी है। इस समय 2300 पद ऐसे हैं जिन पर डी. एड प्रशिक्षित बेरोजगारों को नियुक्त किया जा सकता है। खास बात यह है कि यह मुद्दा अब प्रदेश के बाहर भी ध्यान खींच रहा है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। मुंडा ने एक आदिवासी बी.एड पात्र युवती के पत्र का हवाला देते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के निर्णय के अनुपालन में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के अंतर्गत योग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति लंबित है। मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने की कृपा करें। मुंडा केंद्र में मंत्री रह चुके हैं, झारखंड की कमान संभाल चुके हैं। पूर्व कहलाने के दौरान इस तरह का पत्र लिखना आसान हो जाता है, फिर भी आंदोलनरत युवाओं में समाधान की एक उम्मीद तो पैदा हो ही गई है। वैसे, आश्वासन छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से भी मिल चुका है। आंदोलन शुरू होने के करीब एक सप्ताह बाद उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा था कि सरकार के संज्ञान में हर एक विषय है, समय के साथ हर मामले में निर्णय लेकर समाधान किया जा रहा है। मगर, वह समय अभी तक आया नहीं है और आंदोलन जारी है। आश्वासन तो था लेकिन कुछ भी ठोस नहीं था। इसीलिए अभ्यर्थियों ने पिछले दिनों शिक्षा मंत्री के बंगले का घेराव भी किया और आंदोलन अभी जारी है।

तनाव मुक्ति के लिए प्रशिक्षण

सरकार गुड गवर्नेंस के लिए आर्ट ऑफ लिविंग संस्थान का सहयोग लेने जा रही है। संस्थान के शिक्षक राज्य सरकार के अधिकारियों-कर्मचारियों को तनावमुक्त रहने और कार्यक्षमता बढ़ाने का प्रशिक्षण देंगे।

आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर जब यहां आए थे, तब सरकार से जुड़े लोगों के साथ प्रारंभिक चर्चा हुई थी। बस्तर के आदिवासी इलाकों के साथ-साथ नवा रायपुर में खडग़वां जलाशय के पास संस्थान का भव्य आश्रम बनाने की भी तैयारी है। इसके लिए संस्थान को 40 एकड़ जमीन आबंटित की गई है।

पहले चरण में आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षकों ने सभी जिलों में जाकर कैदियों को योग आदि का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है। अब प्रदेश के सभी जिलों में धीरे-धीरे अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए आर्ट ऑफ लिविंग की कक्षाएं शुरू करने की योजना है। निमोरा ग्रामीण विकास संस्थान में आर्ट ऑफ लिविंग की नियमित कक्षाएं शुरू करने पर भी विचार चल रहा है, ताकि नवनियुक्त अधिकारी-कर्मचारियों को तनावमुक्त रहने का प्रशिक्षण दिया जा सके।

संस्थान ने कुछ राज्यों में जल-संरक्षण और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाए हैं। इसी तरह की कुछ योजनाएं छत्तीसगढ़ में भी प्रस्तावित हैं।

106 साल पुराना सरकारी अखबार

अंडमान के दौरे पर गए रायपुर के पत्रकारों का एक दल पोर्ट ब्लेयर में एक ऐसे अखबार के दफ्तर पहुंचा, जो बड़े निजी मीडिया समूहों के दबदबे वाले भारत में भी सरकार द्वारा मुद्रित, प्रकाशित और प्रसारित होता है। यह अखबार 3.50 लाख आबादी वाले द्वीप अंडमान के पोर्ट ब्लेयर से निकलता है — और यह आज से नहीं, बल्कि अपनी स्थापना के समय से ही ऐसा हो रहा है।

‘द टेलीग्राम’ नाम के इस अखबार की शुरुआत अंग्रेजों ने 1920 में की थी और तब से आज तक इसका प्रकाशन एक दिन भी नहीं रुका। अंग्रेजों के जाने के बाद तीन साल तक यहां काबिज रहे जापानियों ने भी इसका प्रकाशन जारी रखा, हालांकि उन्होंने इसका नाम बदलकर ‘सिंह भूम’ कर दिया था। जापानियों के जाने के बाद से लेकर आज तक केंद्र शासित अंडमान-निकोबार प्रशासन ही इसका मुद्रक और प्रकाशक है।

इस अंग्रेजी अखबार का एक हिंदी संस्करण भी है — ‘द्वीप समाचार’, जिसका प्रकाशन 46 वर्षों से हो रहा है। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि यह अखबार आज भी उसी भवन से प्रकाशित होता है, जहां अंग्रेजों ने इसकी शुरुआत की थी। ब्लैक-एंड-व्हाइट से रंगीन छपाई, 8 पेज के टैब्लॉयड से 20 पेज के ब्रॉडशीट तक का सफर भी इसी भवन में तय हुआ।

इस अखबार में पहले अंग्रेजी शासन की खबरें प्रमुख होती थीं, जबकि आज लेफ्टिनेंट गवर्नर, केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन की गतिविधियों के साथ समुद्री हलचल से जुड़ी खबरें अनिवार्य रूप से प्रकाशित होती हैं। कहा जाए तो समुद्री गतिविधियों की जानकारी देना इस सरकारी अखबार की मुख्य आवश्यकता है। इसमें ज्वार-भाटा, तूफानों के अलर्ट और अन्य जरूरी समुद्री सूचनाएं नियमित रूप से दी जाती हैं।

संपादकीय विभाग में संपादक के साथ केवल एक सहयोगी है, जो समाचार लेखन के साथ पेज सज्जा की जिम्मेदारी भी कंप्यूटर ऑपरेटर और डिजाइनरों की मदद से निभाता है। दिन भर इसी ऑफसेट प्रिंटिंग मशीन पर अंडमान-निकोबार प्रशासन के राजपत्र, गजट, बिल, सरकारी नोटशीट, रसीदें और अन्य स्टेशनरी छपती हैं — और उसके बाद सरकारी अखबार का मुद्रण होता है। इसमें विज्ञापन भी निजी कंपनियों के नहीं, बल्कि सरकारी होते हैं।

पोर्ट ब्लेयर की बहुभाषी आबादी को देखते हुए बंगाली पाठकों के लिए ‘सन्मार्ग’, तमिल पाठकों के लिए ‘थांती’ और ‘दिनमान तमिल’, तथा अंग्रेजी के लिए ‘द हिंदू’ जैसे अखबार चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद से हवाई मार्ग द्वारा यहां पहुंचाए जाते हैं।


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