राजपथ - जनपथ
निलंबन के पीछे की कहानी
आईएफएस के वर्ष-2015 बैच के अफसर मनीष कश्यप को सरकार ने सस्पेंड कर दिया है। कश्यप पर वन सचिव से फोन पर अभद्रता-गाली गलौज का आरोप है। यह पहला प्रकरण है जब किसी ऑल इंडिया सर्विस के अफसर को अपने सीनियर से बदसलूकी करने पर सस्पेंड किया गया है। कश्यप चार साल में दूसरी बार सस्पेंड हुए हैं।
पिछली बार जून-2022 में तत्कालीन सीएम भूपेश बघेल ने सूरजपुर प्रवास के दौरान गौठान योजना को लेकर गलत जानकारी देने पर सस्पेंड किया था। कुछ समय बाद वो बहाल भी हो गए थे। बताते हैं कि डीएफओ मनीष कश्यप पहले भी अपने सीनियर अफसरों से भिड़ते रहे हैं, और इसकी शिकायत अलग-अलग स्तरों पर हुई थी।
कश्यप कांकेर जिले में पदस्थ थे, तब भी उनकी एक एपीसीसीएफ स्तर के अफसर से कहासुनी हुई थी। मामला वन मुख्यालय तक पहुंचा था। तब उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पिछली सरकार में कोरिया में पोस्टिंग के दौरान उनके व्यवहार-कार्यप्रणाली को लेकर जिले के दो विधायक अंबिका सिंहदेव, और गुलाब कमरो ने तत्कालीन वन मंत्री मो.अकबर से शिकायत की थी। इसके बाद कश्यप को हटाया गया और उन्हें मुख्यालय में अटैच किया गया था।
ताजा मामला एपीसीसीएफ स्तर के अफसर से जुड़ा हुआ है, जो कि वन सचिव के पद पर हैं। गत 23 जनवरी को भारत सरकार की प्रस्तावित बैठक से जुड़ी जानकारी के लिए उन्हें फोन किया तो उन्होंने कुछ बातों को लेकर अपने सीनियर अफसर पर बरस पड़े। आरोप है कि मनीष कश्यप ने उन्हें गाली-गलौज भी की है। वन सचिव ने इसकी जानकारी एसीएस (वन) श्रीमती ऋचा शर्मा को दी। सीएस विकासशील ने मामले को गंभीरता से लिया। इससे जुड़ी जानकारी भी जुटाई गई। इसके बाद सीएम ने कश्यप के सस्पेंशन प्रस्ताव पर मुहर लगा दी।
अंडमान में खुर्सीपार, रविवि की यादें
देश के लिए बंगाल की खाड़ी का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले अंडमान निकोबार में कोई छत्तीसगढिय़ा मिल जाए और उससे बातों के बाद यही कहा जा सकता है कि सबले बढिय़ा छत्तीसगढिय़ा। यहां तो छत्तीसगढ़ से ताल्लुक रखने वाले चार लोग मिले। रायपुर से पहुंचे हम 9 पत्रकारों से मिल बहुत गदगद हो गए। एक तेजेश्वर राव तो पोर्ट ब्लेयर के मूल निवासी हैं और कांग्रेस की दांडी यात्रा के समय रायपुर के कांग्रेस नेता संजय सिंह ठाकुर के संपर्क में आया। बदले हुए राजधानी रायपुर की तारीफ करते नहीं थका। फिर हमारी मुलाकात एनडीआरएफ बटालियन के सब इंस्पेक्टर नरसिंह मूर्ति से हुई। वह तो रविशंकर विश्वविद्यालय के पास आउट हैं। उन्होंने रविवि में गुजारे दिनों का एक किस्सा भी बताया। कहा जब मैंने एडमिशन लिया तो सहपाठियों में मुझसे मिलने की होड़ लग गई। मेरे अंडमान से आने की खबर पर वो देखने आते। वे मुझे कोई समुद्री आदिवासी समझ, पहनावा शारीरिक डील डौल देखना चाहते थे। कतार लग गई और जब 15 वें ने देखा तो बोल पड़ा यह तो कपड़े पहनता है। तीसरे व्यक्ति रहे आर्मी अफसर सुनील ओझा। भिलाई के खुर्सीपार में बचपना गुजरा। चर्चा में एक एक गली और वहां की गंदगी में बता उसी खुर्सीपार को खोज रहे थे। वे कहते वैसी ही चाकूबाजी, छीना झपटी आज भी होती होगी। क्राइम रेट बहुत था। हमारे दुर्ग भिलाई के दो साथियों का हामी भरना स्वाभाविक है चौथे रहे एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट आर श्रीधर के चेहरे पर बस्तर खासकर सुकमा से नक्सलियों के खात्मे की खबरों से बड़ी खुशी झलक रही थी। वो 2018-22 के बीच चिंतलनार में पोस्टेड थे।


