राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : औरत तो पौराणिक कथाओं से ही शक में...
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : औरत तो पौराणिक कथाओं से ही शक में...
05-Jun-2020 5:49 PM

औरत तो पौराणिक कथाओं से ही शक में...

जब कोई महिला किसी आदमी के खिलाफ देह शोषण की रिपोर्ट लिखाती है, तो लोगों की प्रतिक्रिया देखने-सुनने लायक रहती है। अगर वह आदमी किसी ऊंचे ओहदे पर है, पैसे वाला है, मशहूर है, तो पहली आम प्रतिक्रिया होती है कि औरत ने ब्लैकमेल करने के लिए ऐसा किया होगा। दूसरी प्रतिक्रिया यह होती है कि अगर उसका चाल-चलन अच्छा था, तो वह किसी आदमी के कमरे में मरने के लिए गई क्यों थी? एक प्रतिक्रिया यह रहती है कि सब कुछ मर्जी और सहमति से होता है, लेकिन बाद में सौदा नहीं जमता, तो सहमति रेप में बदल दी जाती है, और पुलिस में रिपोर्ट कर दी जाती है।  एक प्रतिक्रिया यह होती है कि रेप के बाद इतने समय इंतजार क्यों कर रही थी, मांग पूरी नहीं हुई होगी इसलिए मामला पुलिस तक ले गई।

हिन्दुस्तान में एक ताकतवर मर्द के मुकाबले एक कमजोर औरत न तो बलात्कार के पहले इंसाफ पा सकती, और न ही बलात्कार के बाद ही। हिन्दुस्तान की पौराणिक कथाओं में सीता जैसी महिला के चरित्र पर भी लांछन लगाने की शर्मनाक परंपरा है, और लोकतंत्र आने के बाद, संविधान बन जाने के बाद भी महिला के चाल-चलन को लेकर हिन्दुस्तान में बहुत ही कम फर्क आया है, और जो सामाजिक-राजनीतिक रूप से जागरूक लोग हैं, वे आबादी के किसी फीसदी में नहीं आते, वे उंगलियों पर गिने जाने वाले लोग हैं जो कि महिला की नीयत पर शक न करें। और तो और अधिकतर महिलाओं का भी ऐसी महिलाओं के बारे में खराब नजरिया रहता है जो किसी ताकतवर पुरूष के खिलाफ देह शोषण की शिकायत लेकर पुलिस तक जाती हैं। लोगों को याद होगा कि जब पंजाब में एक आईएएस महिला ने उस वक्त के देश के सबसे ताकतवर पुलिस अफसर केपीएस गिल के खिलाफ शिकायत की थी, तो देश की एक चर्चित पत्रकार तवलीन सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस के अपने कॉलम में इस महिला की आलोचना करते हुए लिखा था कि जिस अफसर ने पंजाब और देश को आतंक से मुक्ति दिलाई, उसकी जरा सी हरकत इस महिला को बर्दाश्त कर लेनी थी, और उसके खिलाफ शिकायत नहीं करनी थी। आखिर लंबी अदालती लड़ाई के बाद केपीएस गिल को अदालत उठने तक की सजा हुई थी।

छत्तीसगढ़ में अभी एक कलेक्टर ने देश में एक नया रिकॉर्ड कायम किया, कलेक्ट्रेट में अपने दफ्तर में ही एक महिला को धमकाकर, और काम देने का लालच देकर उससे बलात्कार किया। यह एक अलग बात है कि खुद छत्तीसगढ़ में पहले भी ऐसे बलात्कार या देह संबंध सरकारी दफ्तरों में होते आए हैं, और जानकारों को कुछ और जिलों के कलेक्टरों की ऐसी खबर है, लेकिन शिकायत न होने से बात आई-गई हो गई। अभी भी छत्तीसगढ़ के एक जिले में जिला छोड़ चुके कलेक्टर का एक महिला से मोह खत्म नहीं हो रहा है, और वे तबादले के दो दिनों के भीतर ही फिर पिछले जिले में उसी घर पहुंचे जिसके सामने उनकी गाड़ी स्थाई रूप से दिखते आई है।

सभी बेवफा हो गए कोरोना युग में

कोरोना काल में सब कुछ इतना बदल गया है कि शायद ही किसी ने ऐसी स्थिति की कल्पना की होगी। अब देखिए ना नकद या चेक लेते-देते समय लोग ऐसी सावधानी रखते हैं, जैसे वो पैसा नहीं बल्कि कोई वायरस मोल ले रहे हैं। हालांकि इसमें कोई बुराई भी नहीं है। इस समय में सावधानी ही सुरक्षा है। लेकिन एक दौर वो भी था, जब लोग पैसों के साथ-साथ देने वाले को भी हाथों-हाथ लेते थे, पर अब कोरोना ने सब कुछ उलटा-पुलटा कर दिया है। हालांकि पीक समय में कारोबार और लेन-देन बंद होने के कारण उतनी समस्या नहीं हुई और आज के तकनीकी युग में ऑनलाइन ट्रांसफर की भी सुविधा है। जिसके कारण कारोबारियों के धंधे पर असर पड़ा पर लेन-देन में उतना फर्क नहीं पड़ा। इस दौर में कारोबारियों से ज्यादा पब्लिक फिगर और नेता ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। दरअसल, उन्हें कोरोना संक्रमण से निपटने सरकारी खजाने के लिए दान की राशि भी जुटानी पड़ रही है। जाहिर है कि जब सामाजिक संगठन दान पुण्य करते हैं, उनका पूरा कुनबा इसमें शरीक होता है और बकायदा फोटोग्राफी करवाई जाती है। ऐसे समय में न तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो पाता और न ही पैसे या चेक की ट्रैवल हिस्ट्री की जानकारी होती है। फोटोग्राफी करना भी जरुरी होता है, ताकि एक दूसरे को देखकर लोग दान के लिए आगे आएं। ऐसे में चेक या नकद लेन-देन की तस्वीर काफी रोचक होती है। पिछले कई दिनों से हम ऐसी कई सरकारी तस्वीरें देख रहे हैं जिसमें लेने वाले चेक को बड़े बेमन से पकड़ते हैं, जो भले ही स्वाभाविक और सावधानी के लिए जरुरी है, लेकिन देखने में अटपटा लगता है। कुल मिलाकर कोरोना युग में सब कुछ बेवफा जैसे हो गए हैं। जिसको देखकर बीते दिनों का रफी साहब का गाया गीत... क्या से क्या हो गया... बेवफा...तेरे प्यार में...चाहा क्या... क्या मिला...बेवफ़ा...तेरे प्यार में... चलो सुहाना भरम तो टूटा... जाना के हुस्न क्या है...फिट बैठता है।

पुलिस तबादलों पर चर्चा

छत्तीसगढ़ में कलेक्टरों के तबादले के बाद अब एसपी के ट्रांसफर का इंतजार है। सोशल मीडिया में संभावित तबादले की सूची भी तैर रही है। हालांकि उसकी पुष्टि नहीं पाई है, लेकिन फिर भी अफसर अपने-अपने तरीके से उसकी समीक्षा कर रहे हैं। तैरती चर्चा के मुताबिक इस फेरबदल में रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे बड़े जिलों के एसपी भी प्रभावित हो रहे हैं। सोशल मीडिया में वायरल हो रही इस सूची की एक खास बात भी है, क्योंकि इस लिस्ट के साथ बकायदा डिस्क्लेमर भी है, जिसमें लिखा गया है कि अंतिम समय में सूची के कुछ नाम इधर से उधर हो सकते हैं। इस डिस्क्लेमर से वे अफसर तो राहत की सांस ले सकते हैं, जिनका नाम सोशल मीडिया वाली लिस्ट में नहीं है। और जिनका नाम है वे भी उम्मीद रख सकते हैं कि आखिरी समय में उनका नाम कट सकता है। खैर सोशल मीडिया के इस दौर में खबरें भी मिनटों में वायरल हो जाती है, लेकिन उसकी सत्यता पर ज्यादातर संदेह रहता है। ऐसे में इस तरह के डिस्क्लेमर से उसकी विश्वसनीयता तो और खतरे में पड़ सकती है। दूसरी तरफ एसपी के ट्रांसफर तो संभावित है। अब देखना है कि यह सूची सही होती है या नहीं। क्योंकि एक दो नाम ऐसे हैं, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि फिलहाल उनके ट्रांसफर की संभावना कम है, क्योंकि वे फिलहाल सरकार के गुड बुक में है। इसके उलट पुलिस मुख्यालय में इस बात से खलबली है कि फिलहाल कुछ भी कयास नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि पुलिस में अप्रत्याशित तबादले हुए हैं। कई दिग्गज अफसरों की बेरुखी से विदाई हुई है। जबकि उनके बारे में भी कहा जा रहा था कि उनकी कुर्सी पर कोई खतरा नहीं है। पीएचक्यू के बड़े अफसर भी इस वक्त भारी और अप्रत्याशित बदलाव की अटकलों पर हामी भर रहे हैं।

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