राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : निगम-मंडल पदाधिकारियों को नसीहत
22-Feb-2026 6:32 PM
राजपथ-जनपथ : निगम-मंडल पदाधिकारियों को नसीहत

निगम-मंडल पदाधिकारियों को नसीहत

छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार और संगठन इस बात पर गंभीरता से विचार कर रहा है कि मनोनीत निगम, मंडल, आयोग एवं प्राधिकरणों के साथ ही कुछ जिलों में जो उपरोक्त संस्थाओं के अनुरूप अध्यक्ष और उपाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं, उनको वेतन और भत्ते बंद कर दिए जाए। क्योंकि अधिकांश निगम मंडलों, संस्थाओं की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और सरकार भी उन्हें आर्थिक मदद करने की स्थिति में नहीं है। क्योंकि सरकार की मुफ्त की योजनाओं में 37 हजार करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं।

सूत्र बताते हैं कि सरकार और संगठन के नेताओं के बीच प्रारंभिक चर्चा के मुताबिक सभी मनोनीत नेताओं की एक बैठक लेकर यह संदेश दिया जाएगा कि आप लोगों को जन सेवा के हिसाब से पदों पर नियुक्त किया गया है, उसे ईमानदारी से निर्वहन करें। यह भी निर्णय लिया कि अगर किसी को इस विषय पर आपत्ति हो तो वह अपने पद से त्यागपत्र दे सकते हैं।

इसमें यह बात भी सामने आयी कि सिर्फ वाहन पर महीने डीजल पेट्रोल की खपत की भी एक सीमा तक ही अनुमति होगी। यह सरकार या उपरोक्त संस्थाओं से उन्हें प्राप्त होगी, जो जनहित में काम करने के लिए आने-जाने में कहीं कोई परेशानी ना हो।

सरकार और संगठन के बीच इस बात पर भी चर्चा हुई कि कुछ स्थानों पर शिकायतें आ रही है कि अवैध वसूली हो रही है, अगर यह सही है तो इसे नियंत्रित करना होगा या फिर ऐसे चेहरों की पहचान कर उन्हें पद से हटाया जाए, जैसे इन निगम मंडलों में कई पुराने नेताओं को वंचित रखा गया है। इसके पीछे लक्ष्य है कि अगले दो वर्ष में सरकार और संगठन की छवि जनसाधारण के बीच खराब ना हो। दरअसल भाजपा के ये पदाधिकारी कांग्रेस काल के पदाधिकारियों के कमाई के तौर तरीके इन नेताओं ने अफसरों से सुन सीख कर इस्तेमाल कर रखे हैं।

अधिक बोलने से उपजी दिक्कत

रमजान के मौके पर सरकारी मुस्लिम अधिकारी-कर्मचारियों को एक घंटा पहले कार्यालय छोडऩे की अनुमति देने की खबर सोशल मीडिया में छाई रही। कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त राज्य वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डॉ. सलीम राज ने तो बकायदा एक बयान जारी कर सरकार के फैसले की सराहना की, और कहा कि विष्णुदेव साय सरकार हर जाति, धर्म, और पंथ व समाज की आस्था का सम्मान कर रही है, और यह पीएम नरेंद्र मोदी की सोच सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास का ही स्वरूप है। बाद में सरकार ने इसका खंडन किया, और पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम कर्मचारियों को एक घंटे पहले छोडऩे संबंधी कोई आदेश जारी नहीं किया गया।

प्रदेश में सरकारी नौकरियों में वैसे भी मुस्लिम अधिकारी-कर्मचारियों की संख्या काफी कम है। उनकी तरफ से एक घंटा पहले कार्यालय छोडऩे की मांग भी नहीं की गई थी। ये अलग बात है कि राज्य बनने के बाद से मुस्लिम अधिकारी-कर्मचारियों को रमजान के मौके पर एक घंटा पहले कार्यालय छोडऩे की अनुमति मिलती रही है। रमन सिंह सरकार में भी यह अनुमति थी। मगर भूपेश बघेल सरकार ने जब पुराने आदेश को जारी रखा तो कुछ संगठनों की तरफ से आपत्ति आई, और नवरात्र व अन्य हिन्दु त्यौहारों में भी इस तरह की छुट्टी देने की मांग की गई। मगर उस समय भी इस पर कोई ज्यादा विवाद नहीं हुआ। अब परिस्थितियां बदल गई है। और अब जब वक्फ बोर्ड चेयरमैन डॉ. राज ने अपने लेटर हेड से सरकार के आदेश की सूचना दी, तो विवाद खड़ा हो गया। और फिर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। अब डॉ. राज के पास खामोश रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहा।

मटरगश्ती करते बच्चे

तेलीबांधा तालाब के किनारे मटरगस्ती करते बच्चों को देख अचानक बचपन की एक मीठी याद ताजा हो सकती है। बोरा दौड़- मोबाइल और वीडियो गेम के दौर में यह खेल भले ही कम दिखता हो, लेकिन छत्तीसगढ़ की गलियों और गांवों में इसकी धडक़न अब भी जिंदा है। तस्वीर में बच्चे बड़े उत्साह से बोरे में फुदकते दिख रहे हैं। चेहरों की मुस्कान बता रही है कि असली खुशी महंगे खिलौनों में नहीं, ऐसे ही सादे खेलों में छिपी होती है। कभी स्कूल के वार्षिकोत्सव में, तो कभी मोहल्ले की प्रतियोगिता में, बोरा दौड़ सबसे ज्यादा तालियां बटोरती थी। यह खेल संतुलन, हिम्मत और दोस्ती की सीख भी देता है।


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