राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : सावधानी, निगरानी, या जासूसी?
07-Apr-2026 6:14 PM
राजपथ-जनपथ : सावधानी, निगरानी, या जासूसी?

सावधानी, निगरानी, या जासूसी?

प्रदेश के तकरीबन सभी जिलों में सर्वसुविधायुक्त भाजपा कार्यालय बन चुके हैं। यहां लाइब्रेरी के साथ-साथ बाहर से आने वाले कार्यकर्ताओं के ठहरने की भी व्यवस्था है। आम तौर पर ये कार्यालय संगठन की गतिविधियों से गुलजार रहते हैं, लेकिन सरगुजा के एक जिले का कार्यालय इन दिनों वीरान नजर आने लगा है।

हालत यह है कि केवल किसी बड़े पदाधिकारी के आने पर ही वहां रौनक लौटती है। बताते हैं कि जिलाध्यक्ष बदलते ही नए जिलाध्यक्ष ने कार्यालय में निगरानी के लिए वॉइस रिकॉर्डिंग वाला सीसीटीवी कैमरा लगवा दिया। इसके बाद से माहौल बदल गया है।

अब स्थिति यह बन गई है कि कार्यकर्ता कार्यालय जाने से कतराने लगे हैं। सीसीटीवी कैमरा तक तो ठीक माना जा रहा था, लेकिन वॉइस रिकॉर्डिंग से असहजता बढ़ गई है और इसे लेकर जासूसी जैसी चर्चा होने लगी है।

हालांकि, राजनीति में आस्था और गुट बदलते रहने की प्रवृत्ति भी आम मानी जाती है, ऐसे में कौन किसके साथ है, यह समझना भी संगठन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

अब विलुप्त प्राणी नहीं रहे काले हिरण

बरनावापारा में मिली सफलता से उत्साहित होकर वन विभाग अब गोमर्धा वन्यजीव अभ्यारण्य में काले हिरणों का एक और समूह लाने जा रहा है। दरअसल, ऐसा सौ साल बाद कहा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ में काले हिरण अब विलुप्तप्राय वन्यजीव नहीं है। 1927 में अंतिम बार आधिकारिक तौर पर इसे देखा गया था। मगर, एक सदी बाद, अब राज्य में लगभग 130 काले हिरण स्वतंत्र रूप से बारनवापारा के जंगल में घूम रहे हैं और लगभग 80 काले हिरणों को छोड़े जाने की तैयारी हो रही है।

77 काले हिरणों का पहला जत्था यहां सन् 2018 में लाया गया। कोविड-19 महामारी के दौरान लगभग 15 जानवरों की मृत्यु हो गई। मगर अब यहां 130 काले हिरण हैं और खुले में छोड़े गए हैं। बाड़ों में भी 60 हिरणों को संरक्षित करके रखा गया है।

ब्लैकबक केवल देखने में आकर्षक जानवर नहीं हैं बल्कि वे पारिस्थितिकी संतुलन में भी विशेष भूमिका भी निभाते हैं। उनकी उपस्थिति अवांछित घास प्रजातियों के प्रसार को रोकते हैं और घास के मैदानों की उत्पादकता बढ़ाते हैं, जो अन्य वन्यजीवों के लिए भी अनुकूल होता है। वैसे काले हिरण गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु आदि राज्यों में विचरण करते हैं, पर छत्तीसगढ़ से यह लगभग 100 साल से लुप्त था। दिल्ली और कुछ अन्य चिडिय़ाघरों से 8 साल पहले लाए गए काले हिरणों की आबादी में विस्तार हुआ है। अभयारण्यों में भी इन्हें खुला छोड़ दिया गया है।

ख़ाली विमान निराशा से भरा होता है!

पिछले दिनों अंबिकापुर से दिल्ली के लिए बहुप्रतीक्षित विमान सेवा पूरे तामझाम के साथ शुरू की गई। सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज ने खुद यात्रियों का स्वागत कर मिठाई खिलाई, जिससे माहौल उत्साहपूर्ण बन गया। लेकिन शुरुआत के कुछ ही दिनों बाद इस सेवा के भविष्य पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

सोमवार को अचानक फ्लाइट रद्द होने से यात्रियों को निराशा झेलनी पड़ी। यही नहीं,अंबिकापुर-कोलकाता विमान सेवा, जो बिलासपुर होकर संचालित हो रही है, उसमें यात्रियों की संख्या बेहद कम दिखी। अंबिकापुर से महज तीन यात्री ही रवाना हुए।

दोनों सेवाएं बिलासपुर के रास्ते संचालित हो रही हैं, लेकिन अंबिकापुर से अपेक्षित यात्री नहीं मिल पाने के कारण इनके संचालन को लेकर संशय गहराता जा रहा है। इससे पहले फ्लाईबिग की अंबिकापुर-बिलासपुर-रायपुर सेवा भी महज एक महीने में बंद हो चुकी है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और राज्य सरकार के प्रयासों से एलायंस एयर की यह नई पहल शुरू तो हुई, लेकिन कम यात्री संख्या इसे फिर से बंद होने की कगार पर ला सकती है। अब देखना है कि यह उड़ान लंबे जारी समय जारी रहती है या नहीं।


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