राजपथ - जनपथ
खेल मैदान बचाने की मुहिम
राजधानी रायपुर में सरकारी और निजी आवासीय-व्यावसायिक परियोजनाओं की बाढ़ सी आ गई है। इसकी वजह से खेल के लिए मैदान कम होते जा रहे हैं। इन सबको लेकर खिलाडिय़ों और जनप्रतिनिधियों में चिंता है। ये सभी खेल मैदान बचाने के लिए आगे आ रहे हैं। इन्हीं में से देवेन्द्र नगर टिंबर मार्केट के पास खाली जमीन को खेल मैदान के लिए सुरक्षित रखने के लिए मुहिम भी छेड़ दी गई है।
देवेन्द्र नगर इलाके की जमीन कृषि उपज मंडी के आधिपत्य में है। आसपास की जमीन अस्पताल और अन्य प्रयोजन के लिए आवंटित हो चुकी हैं। अस्पताल के आसपास करीब 5 एकड़ जमीन पर भी बिल्डरों की नजर है। उक्त जमीन खेल मैदान के रूप में उपयोग में आ रही है। अब इस जमीन को खेल मैदान के रूप में आरक्षित करने के लिए जनप्रतिनिधियों ने गुहार लगाई है। खिलाडिय़ों के साथ इस मुहिम में रायपुर उत्तर के विधायक पुरंदर मिश्रा भी शामिल हैं।
मिश्रा ने पिछले दिनों पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष जयंती पटेल और स्थानीय पार्षद व खेल संघ के पदाधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात की।
मुख्यमंत्री को बताया गया कि रेलवे स्टेशन से आगे देवेन्द्र नगर, शंकर नगर और फाफाडीह के आसपास एक भी खेल मैदान नहीं बचा है। शंकर नगर बीटीआई ग्राउंड में भी आवासीय-व्यावसायिक परियोजना का प्रस्ताव है। ऐसे में पहले से खाली जमीन का किसी अन्य प्रयोजन में उपयोग करना उचित नहीं होगा।
मुख्यमंत्री ने उनकी बातें गंभीरता से सुनीं और भरोसा दिलाया कि मंडी की उक्त खाली जमीन का उपयोग किसी अन्य प्रयोजन के लिए नहीं किया जाएगा। उन्होंने खेल मैदान के लिए जमीन आरक्षित रखने पर मौखिक सहमति दी है। खिलाड़ी अब इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए अन्य संगठनों का सहयोग लेने की कोशिश कर रहे हैं।
केरलम् चुनाव में छत्तीसगढ़ के मुद्दे
जैसा कि राजनीतिक विश्लेषकों ने पहले ही संकेत दिए थे, छत्तीसगढ़ में ननों के साथ कथित दुर्व्यवहार और ईसाई समुदाय पर हुए हमलों के मुद्दे अब केरलम् की चुनावी बहस का हिस्सा बन चुके हैं। केरलम् के मुख्?यमंत्री पी. विजयन ने हाल ही में इन घटनाओं को लेकर कांग्रेस की भूमिका और उसकी ‘राजनीतिक ईमानदारी’ पर सवाल खड़े किए।
शनिवार को सोशल मीडिया के जरिए दिए गए बयान में विजयन ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ननों पर हमले की खबर सामने आते ही राष्ट्रीय व राज्य स्तर के वामपंथी नेताओं ने तुरंत पीडि़तों की मदद के लिए कदम उठाए। केरलम् से कुछ कांग्रेस नेता भी वहां पहुंचे, लेकिन छत्तीसगढ़ कांग्रेस की राज्य इकाई की ओर से अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखी। उनके अनुसार, यह संवेदनशील मुद्दों पर कांग्रेस के अस्पष्ट और विरोधाभासी रवैया है।
दरअसल, यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि केरलम् सरकार छत्तीसगढ़ में ननों पर हमला करने वालों के प्रति नरम रुख अपना रही है। इसके जवाब में विजयन ने 2022-23 के दौरान आदिवासी ईसाइयों को कथित रूप से क्रिसमस और नए साल के समारोहों से बेदखल किए जाने का मुद्दा उठाया और पूछा कि उस समय कांग्रेस नेतृत्व क्या कर रहा था, जबकि राज्य में उसकी सरकार थी।
विजयन ने हाल ही में छत्तीसगढ़ में पारित धार्मिक स्वतंत्रता कानून को लेकर भी कांग्रेस को घेरा। उनका कहना है कि यह कानून मध्यप्रदेश के समान प्रावधानों वाला है, जिसे कांग्रेस ने वहां सत्ता में आने के बावजूद समाप्त नहीं किया। संभवत: वे कमलनाथ सरकार की बात कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सीपीआई(एम) अपने घोषणा पत्र में ऐसे कड़े कानूनों को समाप्त करने की बात कर चुकी है।
हालांकि, इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच यह भी महत्वपूर्ण है कि जिन घटनाओं का उल्लेख किया जा रहा है, उनके संदर्भ और प्रकृति को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आती रही हैं। कुछ घटनाएं स्थानीय विवादों से जुड़ी थीं, जिन्हें सीधे तौर पर धार्मिक उत्पीडऩ से जोडऩा विवादास्पद माना गया था। कुछ संगठनों ने पिछले नववर्ष और क्रिसमस पर भी हमले किए थे, मगर उनका जिक्र विजयन ने नहीं किया है।
राजनीतिक दृष्टि से यह भी स्पष्ट है कि केरलम् में भारतीय जनता पार्टी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में वामपंथी दल कांग्रेस को मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्थापित करने की रणनीति अपनाते नजर आते हैं। यही कारण है कि कई मुद्दों पर, जहां भाजपा की आलोचना भी संभव है, वहां कांग्रेस को ही केंद्र में रखकर निशाना साधा जा रहा है।
कर्ज की नई योजना, बैंक के दरवाजे बंद
राज्य सरकार ने अपने पांच लाख अधिकारी कर्मचारियों के लिए वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण सुविधा 1 अप्रैल से शुरू कर दी है। इसके साथ ही अब इन्हें 5 लाख या अधिक कर्ज के लिए माडगेज, बीसियों दस्तावेज और उस पर बैंकों के आगे चिरौरी करने की झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। यानी राज्य के अमले से बैंकों को बिजनेस मिलने के दरवाजे बंद हो जाएंगे। इस नई सुविधा में बस अधिकारी कर्मचारियों के पे एकाउंट और सेवावधि का आंकलन वह भी ऑनलाइन चेक करने के बाद मिनटों ही नहीं 30 सेकंड से 1 मिनट में लोन ट्रांसफर हो जाएगा।
बिल्कुल एटीएम कार्ड की तरह की सुविधा का दावा। क्योंकि यह इसका एप सरकार के ई कोष और कर्मचारी के सैलरी अकाउंट से कनेक्ट है। जहां तक ब्याज की दर का सवाल है तो वह भी वित्तीय बाजार दर से एक से सवाल डेढ़ प्रतिशत कम पर। आपका सिबिल स्कोर रेटिंग जितना मजबूत होगा लोन राशि उतनी अधिक होगी। यह स्कोर 7.50 प्वाइंट होने पर यानी कर्मचारी चाहे तो 5 लाख या अधिक तक का लोन ले सकते हैं। लोन अमाउंट , सेवावधि (लेंथ ऑफ सर्विस) पर तय होगी। इस पर ब्याज कुछ अधिक होगा लेकिन बैंकों से सवा डेढ़ प्रतिशत कम ही पड़ेगा। वेतन से किस्त कटौती पर ब्याज जीरो परसेंट अलग।
वैसे बैंक वाले किसी भी पर्सनल लोन 12 प्रतिशत से कम दे नहीं रहे। और बैंक शादी, बिमारी के लिए लोन कहाँ देते हैं। वहीं इस सुविधा में लोन बीमारी के इलाज, कार मकान, शादी जैसी जरूरत के लिए लोन एनी टाइम उपलब्ध है। और आने वाले दिनों में एजुकेशन और होम-लोन को भी शामिल करने की तैयारी की जा रही है। यह व्यवस्था असम, राजस्थान गोवा जैसे राज्यों में सफलता से लागू है। राजस्थान का अमला तो छत्तीसगढ़ से ढाई लाख अधिक है।
यह तो रही गुडी-गुडी बातें। अब इस पर कर्मचारियों के वाट्सएप ग्रुप में उठाए जा रहे सवालों पर। पहला यह कि सर्वाधिक अमले वाले मप्र ने क्यों लागू नहीं किया? किसी ने कहा-इसके लिए आपरेट किए जा रहे रिफाइन ऐप से लोन लेने पर ब्याज प्रतिशत ज्यादा है? एक ने सुझाव दिया कि- शासन इसके साथ व्यक्तिगत/होम लोन लेने पर बैंक को गारंटी दे तो इंटरेस्ट में एक प्रतिशत की कमी हो जाएगी।
एक अन्य ने कहा-एक माह के लिए सैलरी के बदले ठीक है। जरूरत तो यह है कि सरकारों द्वारा 81 माह का डकारा गया डीए दे दे, और अब समय पर महंगाई भत्ता,एरियर ,300 दिन अर्जित अवकाश जैसी सुविधा दे दे, तो किसी भी लोन योजना की जरूरत ही नहीं है। चौथे ने कहा-अरे ये भी सरकार की राजस्व प्राप्ति बढ़ाने की योजना है। ज्यादा खुश होने का नहीं है।
उसे जवाब मिला कि-जो हुआ उसका स्वागत करना चाहिए। बाक़ी के लिए प्रयास करें। जो कर्मचारी केवल वेतन से ही घर चला रहे हैं,उनसे पूछ लो तो अच्छा होगा। क्योंकि सरकारी कर्मचारी का जीवन लोन पे ही चलता है और लोन पे ही चलता रहेगा। अंत में एक सवाल से चर्चा खत्म हुई कि -इस योजना में 300 दिवस का ऋण ले सकते है क्या?


