राजपथ - जनपथ
कुछ भूपेश के खिलाफ, कुछ साथ
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम में डॉक्टरों की ड्यूटी लगाने पर सवाल खड़े किए हैं। भागवत पिछले तीन दिनों से रायपुर में हैं, और वे संघ के अनुषांगिक संगठनों की बैठक ले रहे हैं। भूपेश ने सरकार, और प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए डॉक्टरों की ड्यूटी ऑर्डर को निरस्त करने की मांग की है।
कई लोग भूपेश की मांग को राजनीति से प्रेरित करार दे रहे हैं। वजह यह है कि मोहन भागवत को पहले जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी, जिसे बढ़ाकर एडवांस सिक्योरिटी लाइजन (एएसएल) कर दिया है। खुफिया एजेंसी आईबी ने भागवत की सुरक्षा को लेकर अलर्ट किया हुआ है। ऐसे में प्रशासन ने डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई है, तो यह कहीं से कोई गलत नहीं है।
पूर्व सीएम के फेसबुक पेज पर कई लोगों ने उन्हें जमकर उलाहना दी है। द्वारिका निषाद नामक एक यूजर ने नवीन विधानसभा भवन के उद्घाटन कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र साझा करते हुए पूछा कि श्रीमती सोनिया गांधी जी कौन से संवैधानिक पद पर थीं जिसे आपने नवीन विधानसभा भवन छत्तीसगढ़ का उद्घाटन करने का अवसर प्रदान किया? एक अन्य ने लिखा इसमें गलत क्या है जी, सरकार जिसे चाहे उसे राज्य अतिथि का दर्जा दे सकती है। हालांकि कई लोगों ने भूपेश का समर्थन भी किया है। कुल मिलाकर भागवत के दौरे को लेकर काफी हलचल है।
छंटेलों में दो नयों की चर्चा
वन विभाग में शीर्ष अफसरों की भ्रष्टाचार में संलिप्तता जगजाहिर है। जांच एजेंसियों में दर्ज प्रकरण इसकी गवाही भी दे रहे हैं। इन सबके बीच कुछ जूनियर अफसर विपरीत परिस्थितियों में बेहतर काम करते दिख रहे हैं, जिसकी काफी चर्चा भी हो रही है। इन्हीं में से दो आईएफएस अफसर वरुण जैन, और अंबिकापुर डीएफओ तेजस शेखर भी हैं।
आईएफएस के 2017 बैच के अफसर वरुण जैन ने ओडिशा से सटे उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण और शिकार को रोकने के लिए अब तक की सबसे प्रभावी कार्रवाई की है। उन्होंने पूरे इलाके का माहौल ऐसा बना दिया है कि वनग्राम के लोग खुद ब खुद अतिक्रमण करने वालों, और शिकारियों के बारे में सूचना वन अमले को दे रहे हैं। पिछले डेढ़ साल में डेढ़ सौ शिकारियों को हिरासत में लिया गया है।
इसी तरह अंबिकापुर डीएफओ तेजस शेखर भी अपनी ईमानदार कार्यशैली की वजह से स्थानीय लोगों के बीच चर्चा में बने हुए हैं। उन्होंने भी अवैध कटाई को रोकने के लिए ठोस कार्रवाई की है। चर्चा तो यह भी है कि लकड़ी के कारोबार से जुड़े कई लोग उन्हें उपकृत करना चाहते थे, वे पहले भी ऐसा करते आए हैं। मगर तेजस शेखर ने अपना सख्त रवैया दिखा दिया। ये अलग बात है कि स्थानीय कई जनप्रतिनिधि उनसे नाखुश हैं। इससे बेपरवाह तेजस जंगल के संरक्षण में जुटे हुए हैं। विभाग की बहुत सी अप्रिय चर्चाओं के बीच इन जूनियर अफसरों की कार्यशैली से उम्मीद की किरण भी नजर आ रही है।
शिक्षा में डिजिटल क्रांति आ पाएगी?
वन नेशन-वन इलेक्शन, वन नेशन- वन टैक्स की तर्ज पर नई शिक्षा नीति में अपार आईडी का प्रावधान किया गया है- जिसे वन स्टूडेंट-वन आईडी नाम दिया गया है। अपार का मतलब है- आटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक एकाउंट रजिस्ट्री। यह नंबर भविष्य की सभी अंक सूचियों में दर्ज होंगे और छात्र इन्हें डिजी लॉकर में रखेंगे। इसी डिजिटल दस्तावेज के जरिये उन्हें अगली कक्षा में प्रवेश मिलेगा। बताया यह गया है कि इससे किसी भी बच्चे का प्रोफाइल एक क्लिक से देखा जा सकेगा। वह देश के किस स्कूल या कॉलेज में पढ़ रहा है- मालूम हो जाएगा। यह पता लग सकेगा कि वह किन विषयों में रुचि रखता है, उसे आगे किस तरह के करियर चुनना चाहिए। इसके अलावा ड्रॉप आउट बच्चों का पता लगाया जा सकता है। यदि उसने कहीं भी दाखिला नहीं लिया है तो उसे आगे पढऩे के लिए स्कूलों में लाया जा सकेगा।
लक्ष्य रखा गया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 तक पूरे देश में सभी निजी व सरकारी स्कूल के छात्र-छात्रा 12 अंकों वाले यूनिक नंबर से पहचाने जाएंगे। पर इस वर्ष जिन राज्यों में इसे प्रायोगिक रूप से शुरू किया गया है, उनमें दिल्ली के अलावा छत्तीसगढ़ को शामिल किया गया है। छत्तीसगढ़ में इसी शैक्षणिक सत्र यानि 2024-25 में सभी छात्रों की अपार आईडी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मगर, यह काम बहुत धीमी गति से चल रहा है। हालत यह है कि प्रदेश में अब तक 40 फीसदी भी अपार आईडी नहीं बन पाए हैं। कुछ जिलों में तो प्रदर्शन बहुत कमजोर है। उदाहरण के लिए जांजगीर जिले में तीन माह के भीतर करीब 50 प्रतिशत छात्रों की आईडी बन पाई है। इस काम में लापरवाही के चलते 18 प्राचार्यों को हटाने का निर्देश कलेक्टर ने दे दिया। प्राइवेट स्कूलों के संचालक अलग समस्या खड़ी कर रहे हैं। इस जिले में 170 से ज्यादा ऐसे स्कूल हैं पर जब डीईओ ने अपार आईडी के लिए बैठक बुलाई तो उनमें से 20 भी नहीं पहुंचे। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में 107 प्राचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनका वेतन रोकने का भी आदेश दिया गया है। इस जिले में तीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी हैं-तीनों को नोटिस जारी किया गया है। सरगुजा जिले में 42 प्रतिशत आईडी ही बन पाए हैं। यहां भी प्राचार्यों और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को नोटिस जारी की गई है। सारंगढ़ और सक्ती जिले में भी यही स्थिति है। बिलासपुर जिले में में कुछ अधिक ही ढिलाई बरती जा रही है। यहां के करीब 4 लाख बच्चों में से केवल 18 हजार के अपार आई डी बन पाए हैं, जो करीब 5 प्रतिशत भी नहीं पहुंचता। कलेक्टर के निर्देश पर सभी सरकारी व निजी स्कूलों- जिनकी संख्या 2500 से अधिक है- को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। निजी स्कूल संचालकों को उनकी मान्यता रद्द करने की चेतावनी भी दी गई है।
अपार आईडी बनने और हर छात्र का यूनिक नंबर तैयार होने के अपने फायदे हैं, पर दिख यह रहा है कि शिक्षकों, प्राचार्यों को इसे तैयार करने में कई व्यवहारिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। एक कारण यह है कि आधार कार्ड और स्कूल के रिकॉर्ड में जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज हैं। स्कूल में जन्मतिथि नहीं बदली जाएगी, आधार कार्ड में संशोधन करना है। आधार कार्ड में जो मोबाइल नंबर दर्ज हैं, बहुतों ने उस सिम को बंद कर दिया है, नए नंबर ले चुके हैं। इसलिए ओटीपी अपडेट नहीं हो रहे हैं। कई अभिभावक अपार को लेकर सशंकित हैं, वे अपनी सहमति नहीं दे रहे हैं, जिसके बिना आईडी बनने वाली नहीं है। फिर शिक्षकों पर इस समय कोर्स पूरा करने और एग्जाम की तैयारी करने का दबाव भी है। जिलों में कलेक्टर बैठकें ले रहे हैं, समीक्षा के दौरान खराब प्रदर्शन को देखकर शिक्षकों, प्राचार्यों पर कार्रवाई कर रहे हैं। मगर, इन दिक्कतों का समाधान कैसे निकले, इस पर विचार नहीं कर रहे हैं।
नया साल, दोस्ती की मिसाल

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें दिख रहा है कि एक झील से मछली बाहर आती है, पपी उसके साथ खेलता है। जब सांस टूटने लगती है तो मछली पानी में गोते लगाने चली जाती है। थोड़ी देर में निकलकर फिर पपी के साथ खेलने लगती है। लोगों ने प्रतिक्रिया दी है, कि नया साल ऐसी ही दोस्ती और प्रेम का पैगाम सबके लिए लेकर आए।


