राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : राज्यसभा एक सीट 21 दावेदार
24-Feb-2026 6:04 PM
राजपथ-जनपथ : राज्यसभा एक सीट 21 दावेदार

राज्यसभा एक सीट 21 दावेदार

प्रदेश से राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव को लेकर राजधानी से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज हो गई है। नामांकन की तारीख नजदीक आते ही राजनीतिक गतिविधियां भी रफ्तार पकड़ रही हैं। भाजपा में चुनाव को लेकर पार्टी रणनीतिकारों की बैठक हो चुकी है और संभावित नामों पर मंथन जारी है। संगठनात्मक संतुलन, सामाजिक समीकरण और केंद्रीय नेतृत्व की पसंद को ध्यान में रखकर अंतिम निर्णय लिए जाने की चर्चा है।

वहीं कांग्रेस खेमे में दावेदारों की लंबी फेहरिस्त ने सरगर्मी और बढ़ा दी है। एक सीट के लिए करीब 21 नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं। इनमें वे नेता भी शामिल हैं जिनकी विधानसभा चुनाव में टिकट कट गई थी और अब वे राज्यसभा के जरिए सक्रिय राजनीति में नई पारी की उम्मीद लगाए हैं। दावेदारों में पूर्व मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पूर्व सलाहकार राजेश तिवारी भी सक्रिय बताए जा रहे हैं। हालांकि भूपेश बघेल स्वयं राज्यसभा जाने की संभावना से इनकार कर चुके हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, शिवकुमार डहरिया, पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव, प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और निवर्तमान राज्यसभा सदस्य फूलोदेवी नेताम का नाम भी चर्चा में है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व अनुभव, निष्ठा, क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन में किसे प्राथमिकता देता है। अगले कुछ दिनों में तस्वीर साफ होने की संभावना है।

आसमान खुला है, पर उड़ान बाकी

लोकसभा में 12 फरवरी को तृणमूल कांग्रेस की सांसद सजदा अहमद ने सरकार से पूछा कि क्या ग्रामीण और दूरदराज इलाकों के विकास के लिए सिविलियन ड्रोन पर कोई राष्ट्रीय रोडमैप है? राज्यवार आंकड़े क्या हैं? स्वास्थ्य, कृषि और आपदा प्रबंधन में इनके उपयोग को कैसे बढ़ाया जा रहा है?

जवाब केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने दिया। उन्होंने बताया कि ड्रोन रूल्स 2021 (25 अगस्त 2021) और उसके बाद 2023-24 के संशोधनों से ड्रोन नीति को बेहद उदार बनाया गया है। 90 फीसदी भारतीय हवाई क्षेत्र को ग्रीन जोन घोषित कर दिया गया है, जहां बिना अनुमति उड़ान संभव है। पंजीकरण, डी-रजिस्ट्रेशन और ट्रांसफर की प्रक्रिया सरल की गई है। हालांकि दुरुपयोग रोकने के लिए टाइप सर्टिफिकेशन, वैध रिमोट पायलट सर्टिफिकेट और हथियार-विस्फोटक पर सख्त प्रतिबंध जैसे प्रावधान लागू हैं।

इसी सवाल के जवाब में बताया गया कि 31 जनवरी 2026 तक देश में 38,475 ड्रोन रजिस्टर्ड हैं। मगर, जब हम राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालते हैं तो अपने प्रदेश की तस्वीर चौंकाती है। महाराष्ट्र में 8210, तमिलनाडु में 5878, तेलंगाना में 3657 और कर्नाटक में 3258 ड्रोन पंजीकृत हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में यह संख्या सिर्फ 161 है। यानी देश के कुल ड्रोन का 0.4 प्रतिशत से भी कम।

यह स्थिति तब है जब हमारे पास सरगुजा और बस्तर जैसे विशाल वन क्षेत्र हैं, खनिज संपदा है, और दूर-दराज आदिवासी अंचल हैं जहां स्वास्थ्य सेवाएं आज भी चुनौती बनी हुई हैं। वनों में अवैध कटाई, शिकार रोकने, अवैध खनन रोकने और दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में दवाएं और वैक्सीन पहुंचाने के लिए इनकी मदद ली जा सकती है। दूसरे राज्य, जहां इसका इस्तेमाल हो रहा है, वहां फर्क दिख रहा है। महाराष्ट्र और तमिलनाडु में ड्रोन से प्रेसिजन फार्मिंग हो रही है। इससे कीटनाशक की 30-40 प्रतिशत और पानी की 90 प्रतिशत तक बचत हो जाती है। गुजरात में औद्योगिक सर्वे और इंफ्रास्ट्रक्चर मैपिंग में उपयोग हो रहा है। तेलंगाना में दवाओं की डिलीवरी और आपदा प्रबंधन में ड्रोन काम आ रहे हैं। इन राज्यों ने ड्रोन को तकनीकी खिलौना नहीं, बल्कि आर्थिक औजार माना है।

इधर छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध खनन रोकने में सीमित ही सही ड्रोन का उपयोग शुरू किया है। कहीं-कहीं दवाएं भी भेजी गई। कृषि क्षेत्र में भी सीमित स्तर पर फसल मॉनिटरिंग और स्प्रेइंग हो रही है। केंद्र की सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन और नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत 40 से 75 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है। महिलाओं को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। लेकिन सच यह है कि छत्तीसगढ़ ने अभी तक अपनी अलग, स्पष्ट और आक्रामक ड्रोन नीति नहीं बनाई है। ड्रोन सिर्फ उडऩे वाली मशीन नहीं है। यह विकास की नई भाषा है। केंद्र ने नियम आसान कर दिए हैं, आसमान खोल दिया है। अब जिम्मेदारी राज्यों की है कि वे इस अवसर को पकड़ें। समय-समय पर सरकारें विभिन्न विषयों पर नीतियां घोषित करती हैं। लोकसभा में आया जवाब छत्तीसगढ़ को अपनी ड्रोन प्रमोशन पॉलिसी बनाने के बारे में सोचने का मौका देता है।

रतन टाटा, बीवीआर और अंडमान

एनजीटी ने पिछले दिनों 81 हजार करोड़ के ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही हिंद महासागर में भारत की सामरिक ताकत बढ़ाने और मलेशिया, मालदीव, सिंगापुर की तरह इस? द्वीप समूह को पर्यटन स्टेट बनाने की 2021 की योजना जमीन पर उतरने तैयार है। यह कांसेप्ट प्लान आते ही देश के शीर्ष उद्योग एवं हास्पिटैलिटी ग्रुप टाटा का इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड वहां 4 द्वीपों में इको-टूरिज्म रिसॉर्ट विकसित करने आगे आया । यह दिवंगत रत्न टाटा का ड्रीम प्रोजेक्ट भी बताया जाता है।  एनजीटी के पेंच से प्रोजेक्ट आगे बढ़ नहीं पा रहा था।  जुलाई -23 में वीर सावरकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पोर्ट ब्लेयर के उद्घाटन से लौट कर गृह मंत्री अमित शाह ने इस  स्ट्रैटेजिकल और टूरिज्म के ड्रीम, मेगा प्रोजेक्ट की  नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम को जिम्मेदारी दी। बीवीआर, छत्तीसगढ़ कैडर के रिटायर्ड आईएएस  हैं। शाह ने ही उन्हें मोदी 2.0 में जम्मू-कश्मीर का मुख्य सचिव बनाया और धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले राज्य को वर्तमान विभाजित स्वरूप देने में सफल रहे।

 बहरहाल एनजीटी में अंतिम सुनवाई से पहले बीवीआर ने टीम के साथ ग्रेट निकोबार द्वीपसमूह का दौरा किया और हर आपत्ति पर आंसर पेपर पेश किया।संयोग रहा कि इस टीम के दौरे के चंद रोज बाद ही रायपुर और चेन्नई के पत्रकारों का दल भी अंडमान के चार द्वीपों का भ्रमण किया था। वहीं अंडमान वन विभाग के अफसरों ने टीम के दौरे और टाटा के प्रोजेक्ट की जानकारी दी। बीवीआर का नाम सुनते ही हमने कहा- ये मेगा प्रोजेक्ट धरातल पर उतार कर रहेगा।  वन अफसरों ने बताया  टाटा समूह एवीस द्वीप, नील द्वीप, लॉन्ग द्वीप और स्मिथ द्वीप पर इको-रिजॉर्ट्स विकसित करेगा। लॉन्ग आइलैंड के लालाजी-बे में लगभग 391 करोड़ की लागत से 220 कमरे, और नील आइलैंड में 172 करोड़ से 120 कमरों वाला रिसॉर्ट शामिल है। 35 किमी तक विस्तारित, 1500-2000 की आबादी वाले लांग इस आइलैंड में कभी प्लाईवुड फैक्ट्री हुआ करती थी। जो बंद हो गई है। यह द्वीप बहुत खूबसूरत लोकेशन पर है। टाटा समूह का रिजार्ट आने पर रोजग़ार बढ़ेगा। एक और अहम संयोग,इस प्रोजेक्ट का आर्किटेक्चरल प्लान बनाने वाले दिल्ली की फर्म का एक योजनाकार (नाम प्रकाशित करने से मना किया) हमारे रायपुर का है। यहां बता दें कि टाटा समूह का हेवलॉक द्वीप पर पहले से मौजूद ‘ताज एक्जोटिका’ का निर्माण बिना पेड़ काटे किया गया है।


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