राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : बिना विवाद आरक्षण
22-Dec-2024 4:27 PM
राजपथ-जनपथ : बिना विवाद आरक्षण

बिना विवाद आरक्षण 

नगरीय निकायों के वार्डों का आरक्षण हो चुका है। अब महापौर, और अध्यक्षों के आरक्षण की तैयारी चल रही है। रायपुर नगर निगम के वार्डों के आरक्षण को लेकर सर्वाधिक उत्सुकता रही, क्योंकि विधानसभा टिकट से वंचित कई नेता वार्ड चुनाव लडऩे के इच्छुक रहे हैं। कुछ नेताओं को लॉटरी प्रक्रिया में गड़बड़ी का भी अंदेशा था। लिहाजा, वो इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखे हुए थे। 

पिछले दिनों रायपुर नगर निगम के वार्डों का आरक्षण सबसे पहले हुआ। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने लॉटरी प्रक्रिया में किसी को शिकायत का मौका नहीं दिया। जिस किसी ने भी शिकायत की, उसका निराकरण मौके पर ही कर दिया। एक घंटे में सभी 70 वार्डों का आरक्षण बिना किसी विवाद के निपट गया। 

सारी प्रक्रिया होने के बाद मेयर एजाज ढेबर मंच पर चढ़े, और कलेक्टर को यह कहते हुए धन्यवाद दिया कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतने अच्छे से सबकुछ हो जाएगा। ये अलग बात है कि ढेबर का खुद का वार्ड महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो गया है, और यदि वो चुनाव लडऩा चाहेंगे, तो उन्हें कोई दूसरा वार्ड तलाशना पड़ेगा। भाजपा नेता भी आरक्षण को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नजर आए। दिलचस्प बात यह है कि पिछले चुनाव में आरक्षण की प्रक्रिया हुई थी, तब डॉ. गौरव सिंह जिला पंचायत के सीईओ थे। लिहाजा, उनका पुराना अनुभव काम आया। और सब कुछ बेहतर ढंग से निपटाने में सफल रहे। 

समुद्र (सिंह)की फैलाई गंदगी साफ हो रही'

पिछले दो तीन दिनों से सचिव स्तरीय तबादलों की  हलचल के बीच इस बार सेंटर ऑफ अट्रैक्शन आबकारी होने जा रहा है। यहां सचिव बदलने और बनने कई बल्लम लगे हुए हैं। लेकिन मैडम हैं कि बिना डिगे बस अपना काम करती जा रही हैं। बस एक ही लक्ष्य इस धंधे में समुद्र सिंह के जमाने से एपी त्रिपाठी, निरंजन दास तक फैली सरकारी गंदगी पर स्वच्छता अभियान जारी रहे।

बीते दस महीने में गोदाम से लेकर दुकान तक एक-एक पौवा, अध्दी-बॉटल सब कुछ आनलाइन, सीसीटीवी कैमरे की नजर में ला चुकीं हैं। हर प्लेसमेंट कर्मचारी की जेब तक खंगाली जाती है। और तो और होलोग्राम की डुप्लीकेसी खत्म करने नासिक के करेंसी प्रिंटिंग प्रेस से छपवा रही हैं। यहां भी शक की गुंजाइश खत्म करने मैडम खुद नासिक पहुंच गई और सप्ताह भर रहकर छपाई का पूरी प्रक्रिया देख आईं। 

आखिर सालभर में लगने वाले 95 करोड़ नग होलोग्राम का सवाल है। यह सब देखकर विभाग के दो चार अफसर बातें कर रहे थे कि इन दस महीनों में लग रहा है कि हम विभाग के लिए काम कर रहे हैं। भले हमें कुछ नहीं मिल रहा लेकिन विभाग की दबंगई फील्ड में नजर आ रही है। जो बीते 10 वर्षों में साथ खत्म हो गई थी। यह भी दावा किया कि यह सफाई अभियान जारी रहा तो सबसे गंदा कहे जाने वाले इस कारोबार की स्वच्छता के लिए छत्तीसगढ़ जाना जाएगा। अब देखना होगा आने वाले दिनों में बदलाव क्या संदेश लाता है?

और संपन्न हो गया पहला ध्यान दिवस

कल बिना किसी हो हल्ले को विश्वभर में प्रथम अंतरराष्ट्रीय ध्यान योग दिवस मन गया। इसे संयुक्त राष्ट्र संघ ने घोषित किया था। लेकिन इसके आयोजन को लेकर वो प्रचार और हो हल्ला नहीं हो पाया जो अंतरराष्ट्रीय योग दिवस या छत्तीसगढ़ के परिपेक्ष्य में 1 मई को बोरे बासी दिवस का होता रहा है। 

उन आयोजनों में खबरें और तस्वीरें प्रकाशित करने में स्थानाभाव का सामना करना पड़ता रहा है। छपवाने के लिए मंत्री अफसर और नेताओं की होड़ लगती रही है। इससे ठीक विपरीत कल का दिन रहा। यह ध्यान योग दिवस, आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर की पहल पर घोषित किया गया है। वे कल न्यूयॉर्क में पहले आयोजन में शरीक भी हुए। रविशंकर जी की जनसामान्य के साथ-साथ देश की सत्ता के गलियारों में भी खासी पकड़ है। इसके बाद भी दिल्ली से लेकर देश और रायपुर में आयोजन को लेकर कोई बड़ी पहल माहौल नजर नहीं आया। और इक्का-दुक्का कार्यक्रम ही हो पाए। 

हमारे प्रथम पेज के सहयोगी ने कल हमसे रायपुर में हुए आयोजन की तस्वीर और विस्तृत खबर मांगी थी लेकिन शाम तक रायपुर में किसी भी तरह के आयोजन की कोई खबर नहीं मिली तो हम न दे सके। फिर रात खबर मिली कि इसका एक कार्यक्रम केंद्रीय जेल में हुआ था। जिसे एक मात्र सरकारी आयोजन कहा जा सकता है। चूंकि इस आयोजन ले प्रधानमंत्री और अन्य सत्ताधीशों ने दूरी बना रखी थी इसलिए शासन-प्रशासन ने भी रुचि नहीं ली। लेकिन आर्ट ऑफ लिविंग के सदस्य अनुयायियों के लिए दिवस की घोषणा ही सबसे अहम है। 

जुर्माने और हादसों के बीच खाई

चौक-चौराहों और हाईवे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के बाद नागरिकों में जवाबदेही का भाव बढ़ा है। पुलिस इसे अपनी बड़ी उपलब्धि मानती है। कोरबा पुलिस द्वारा हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के चलते अब तक 1 करोड़ 48 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है। इनमें सडक़ पर की गई जांच भी शामिल है। इसी तरह, पूरे प्रदेश का आंकड़ा भी जबरदस्त है। वर्ष 2023 में भारी-भरकम, कुल 23 करोड़ 5 लाख 59 हजार रुपये वसूले गए। रायपुर जिले में सबसे अधिक 1 लाख 532 लोगों से 8 करोड़ 27 लाख 80 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया।

हालांकि, यह सोचना गलत होगा कि जुर्माने की इस सख्ती से सडक़ दुर्घटनाओं में कमी आई है। वास्तविकता यह है कि प्रदेश में सडक़ हादसों की संख्या भयावह रूप में लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2022 में प्रदेश में कुल 14 हजार सडक़ दुर्घटनाएं हुई थीं, जो 2023 में नवंबर तक ही 14 हजार 500 तक पहुंच गई थीं। वर्ष 2024 के पूरे आंकड़े अभी सामने नहीं आए हैं, लेकिन दुर्ग जिले में अब तक 1596 दुर्घटनाओं में 989 लोगों की मौत हो चुकी है। रायपुर जिले में 1967 दुर्घटनाओं में 520 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति कम चिंताजनक नहीं है। केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने पिछले दिसंबर तक के जारी आंकड़ों में बताया था कि देशभर में सडक़ दुर्घटनाओं में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

सीसीटीवी कैमरों की वजह से कई स्थानों पर ट्रैफिक पुलिस की उपस्थिति कम हो गई है। उनका उपयोग वीवीआईपी प्रोटोकॉल और अन्य गैर-जरूरी कार्यों में किया जाने लगा है। लेकिन, जुर्माना वसूली के रिकॉर्ड के साथ-साथ अफसरों को यह भी बताना होगा कि ट्रैफिक सिग्नल तोडऩे, रॉन्ग साइड चलने और ओवरस्पीडिंग पर भारी जुर्माने के बावजूद सडक़ हादसे क्यों बढ़ रहे हैं।

कबीरधाम जिले में 20 मई 2024 को तेंदूपत्ता मजदूरों से भरी एक पिकअप खाई में पलट गई थी, जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में मालवाहक वाहनों से यात्रियों को ले जाने पर कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन यह अभियान महज एक महीने बाद ठंडा पड़ गया।

अब कल शनिवार की शाम को जगदलपुर के दरभा थाना क्षेत्र के कोलेंग में हादसा हो गया। एक पिकअप में 35 मजदूरों को भरकर साप्ताहिक बाजार ले जाया जा रहा था। तेज रफ्तार गाड़ी पहाड़ी मोड़ पर बेकाबू होकर 10 फीट नीचे जा गिरी। इस हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई और 30 घायल हो गए। इस दुर्घटना ने एक बार फिर सुरक्षित यात्रा और सार्वजनिक परिवहन की खस्ताहाल स्थिति को उजागर किया है। थोक में हो रही मौतें स्पष्ट करती है कि प्रदेश में सस्ती सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का घोर अभाव है। गरीब मजदूरों को मालवाहक गाडिय़ों में जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है। ड्राइवर ज्यादा कमाने के लालच में उन्हें ठूंस-ठूंसकर भर लेते हैं। इस कमाई को वे शराब में उड़ाते हैं और इसी हाल में गाडिय़ां भी चलाते हैं। ऐसी दुर्घटनाओं में हो रही सामूहिक मौतों की जिम्मेदारी परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को लेनी चाहिए, वह जुर्माने का आंकड़ा देकर नहीं बच सकती।

थाने में गुरु-शिष्य मिलन..

रायपुर पुलिस ने अपराधियों को सुधारने के लिए गंज थाने में ‘मॉडर्न स्कूल’  खोल दी। अपराधियों को मुर्गा बनवाया, उठक-बैठक करवाई, लकड़ी के पट्टे से हथेली और पिछवाड़े को पीटा। ये सब वे ही तरीके हैं, जो किसी समय बच्चों को सबक सिखाने के लिए क्लास में मास्टरजी अपनाया करते थे। (अब ऐसा करने पर शिक्षकों को शिकायत हो जाने का डर सताता है।) सवाल ये है कि हत्या के प्रयास, चाकूबाजी, लूटपाट जैसे गंभीर अपराधों में लिप्त शिष्यों ने गुरु की इस क्लास को मनोरंजन की तरह लिया या फिर सचमुच कोई सबक सीखा।

([email protected])


अन्य पोस्ट