राजपथ - जनपथ
चर्चा चुना की ही ?
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी.नड्डा शुक्रवार को यहां आए, तो एयरपोर्ट के वीआईपी लाउंज में उन्होंने सीएम विष्णुदेव साय, प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन, और अजय जामवाल व पवन साय के साथ बैठक की, और फिर जाते-जाते कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में प्रमुख नेताओं के साथ मंत्रणा की।
बैठक का निचोड़ यह रहा कि नड्डा ने संगठन चुनाव पर ही बात की है। प्रदेश में संगठन के चुनाव चल रहे हैं। इसके बीच में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव की भी घोषणा होने वाली है। संगठन चुनाव की वजह से निकाय और पंचायत चुनाव में किसी तरह का असर न पड़े, यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है।
दरअसल, मंडल से लेकर जिला अध्यक्षों के चुनाव को लेकर खींचतान चल रही है। चुनाव अधिकारी को किसी एक नाम पर सहमति बनाने में दिक्कत आ रही है। पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर किसी तरह का असंतोष न फैले, इसकी कोशिश हो रही है। जिलाध्यक्षों के चुनाव इस महीने के आखिरी तक होने के संकेत हैं। देखना है कि पार्टी अंदरूनी गुटबाजी पर किस हद तक लगाम लगाती है।
पहेली का हल क्या है?
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी.नड्डा 6 साल छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी रहे हैं। वो यहां के छोटे-बड़े नेताओं से परिचित हैं। और जब वो यहां आए, तो कई छोटे-बड़े नेताओं ने उनसे मेल-मुलाकात की। एक नेता ने मौका पाकर उनसे कह दिया कि भाई साब, हमारा भी ध्यान रखिएगा।
नड्डा ने उन्हें आश्वस्त किया कि जो भी आएंगे, वो आप लोगों के ही हैं। यह कहकर नड्डा आगे बढ़ गए। लेकिन नेताजी, नड्डा के कथन को नहीं समझ पा रहे हैं। दरअसल, राष्ट्रीय अध्यक्ष का भी चुनाव होना है, और नड्डा की जगह नए अध्यक्ष की नियुक्ति होगी। ऐसी चर्चा है कि छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी रहे केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान उनके उत्तराधिकारी हो सकते हैं।
कुछ लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि नड्डा का इशारा धर्मेन्द्र प्रधान की तरफ था। मगर कई लोग नितिन नबीन की जगह होने वाली नियुक्ति से जोडक़र देख रहे हैं। सुनते हैं कि प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन पद मुक्त हो सकते हैं। वजह यह है कि अगले साल बिहार में विधानसभा के चुनाव हैं।
नितिन नबीन बिहार सरकार में मंत्री हैं। वो खुद भी चुनाव लड़ेंगे, ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि नबीन की जगह में नई नियुक्ति हो सकती है, जो कि छत्तीसगढ़ के भाजपा नेताओं के करीबी हो सकते हैं। कुल मिलाकर नड्डा की टिप्पणी एक पहेली बन गई है जिसे बूझने में पार्टी नेताओं को मशक्कत करनी पड़ रही है।
पदोन्नति के लिए लाभ के तरीके
राज्य सरकार की पदोन्नति व्यवस्था और प्रक्रिया पर दो दिन पहले हाईकोर्ट ने एक याचिका पर फैसला सुनाया था कि कोई कर्मचारी, जिस पद पर नियुक्त हुआ है उसी पद पर रिटायर हो यह अनुचित है। और दूसरी ओर अफसरों के लिए शासन प्रशासन सभी नियमों को शिथिल कर देता है।
आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अफसरों के लिए तो राज्य में काम न करें तो भी प्रोफार्मा प्रमोशन की सुविधा है। और राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों के लिए तो पद सुरक्षित रख, निचले क्रम के अफसरों को पदोन्नति दी जाती रही है । यह ऐसे लोगों के लिए भी होती है जिनका सीआर दागी या कोर्ट में मामला लंबित हो। वहीं पदों को रोकने की भी परंपराएं अपनाई गईं हैं। वैसे यह पदोन्नति नियम में भी है, कि अजजा के अभ्यर्थी उपलब्ध न हों तो, उनकी उपलब्धता तक पद रिक्त रखे जाएं। बस ऐसा ही कुछ मंत्रालय संवर्ग के दो पदों के लिए भी किया जा सकता है।
कैबिनेट ने हाल में अपर सचिव के दो पद स्वीकृत किए हैं। इनमें दो संयुक्त सचिव पदोन्नत होने हैं। एक पद 8 साल से रिक्त है तो दूसरा पद इसी माह स्वीकृत किया गया है। लेकिन इनकी उपलब्धता में कुछ समय शेष है। सो अब मांग की जा रही है कि इनके उपलब्ध होने तक अपर सचिव के दोनों पदों को परिवर्तित कर संयुक्त सचिव किए जाएं ताकि बिना व्यय भार के दो संयुक्त सचिव मिल सके।
देखा परखा खरा
रायपुर के नए एसपी लाल उम्मेद सिंह ने काम संभाल लिया है। आईपीएस के 2011 बैच के अफसर लाल उम्मेद सिंह राज्य पुलिस सेवा से आए हैं। वो दो बार रायपुर के एडिशनल एसपी रह चुके हैं। लाल उम्मेद सिंह की रमन सरकार के विश्वास पात्र अफसरों में गिने जाते रहे हैं। कांग्रेस सरकार में भी उनकी हैसियत कम नहीं हुई। कवर्धा जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिले में बेहतर काम किए थे। लाल उम्मेद सिंह रायपुर में अपनी नई भूमिका में कैसा काम करते हैं यह देखना है।


