राजपथ - जनपथ
सार्वजनिक जगहें, और राजनीतिक फैसले
राजधानी रायपुर में सत्तारूढ़ नेता और अफसर बड़े-बड़े फैसले लेते हैं, और मनमर्जी की वजह से अगली सरकार में वे किनारे धर दिए जाते हैं। रमन सिंह सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूणत ने अपनी निजी प्रतिष्ठा की तरह जो स्काईवॉक बनवाया था, उसे भूपेश सरकार पांच बरस तक न तोड़ पाई, न उसका कोई और इस्तेमाल हुआ, और उसे पूरा तो करना ही नहीं था। अब भाजपा की सरकार आई है, तो उसे पूरा करने का काम शुरू होने को है।
इसी तरह साइंस कॉलेज के मैदान पर भूपेश सरकार के समय मैदान के एक हिस्से पर बिना किसी जरूरत एक बड़ी चौपाटी बना दी गई, और सडक़ की चौड़ाई से लेकर मैदान की चौड़ाई तक सबको खराब किया गया। इस अखबार ने उस समय भी भूपेश बघेल, और उनके मार्गदर्शक, विवेक ढांड को याद दिलाया था कि दोनों इसी साइंस कॉलेज में पढ़े हैं जिसके मैदान को काटकर चौपाटी बनाई जा रही है, और इन्हें इसे रोकना चाहिए। लेकिन जब सरकार सांड पर सवार रहती है, तो उसे दाएं-बाएं कम दिखता है, सही-गलत का फर्क भी नहीं रह जाता।
अब भाजपा सरकार साइंस कॉलेज में बनी हुई चौपाटी को हटाकर कुछ दूरी के एक ओवरब्रिज के नीचे ले जाने की तैयारी कर रही है, और वहां धंधा करने वाले लोग फिक्रमंद हैं कि वहां ग्राहक कहां से आएंगे। फैसले राजनीतिक न होकर तकनीकि विशेषज्ञों और योजनाशास्त्रियों के लिए हुए रहते, तो वे राजनीतिक फेरबदल को झेल भी पाते। एक शहर में इस तरह सैकड़ों करोड़ की बर्बादी महज आर्थिक बर्बादी नहीं है, वह सार्वजनिक जगहों का गैर जिम्मेदार इस्तेमाल भी है।
अफसरों को तेवर दिखाना भारी
सरकार के एक निगम में पेस्टीसाइड्स की सप्लाई को लेकर काफी कुछ चर्चा हो रही है। हुआ यूं कि निगम के लोगों ने हमेशा की तरह तीन-चार फर्मों को ऑर्डर दे दिया। इन फर्मों के लिए सिफारिश आई थी, इसलिए नियम कायदों को भी अनदेखा कर दिया।
फर्मों ने पेस्टीसाइड्स की सप्लाई कर भुगतान के लिए बिल भी लगा दिया। और जब भुगतान में देरी हुई, तो सप्लायरों ने सिफारिश करने वाले का जिक्र कर जल्द से जल्द भुगतान करने पर जोर दिया। फिर क्या था अफसरों ने भुगतान से पहले गुणवत्ता परीक्षण के निर्देश दे दिए।
सुनते हैं कि गुणवत्ता परीक्षण में करीब 100 से अधिक सेम्पल अमानक पाए गए। कुछ किसानों ने भी शिकायत की है। अब सप्लायरों को भुगतान तो दूर, उन पर एफआईआर पर विचार चल रहा है।
सप्लायर हाथ-पांव मार रहे हैं। मगर अब तक मामला सुलझा नहीं है। भुगतान के लिए अफसरों को तेवर दिखाना भारी पड़ गया है। जिन्होंने सिफारिश की थी, वो भी मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। कुल मिलाकर आने वाले दिनों में यह मामला बढ़ सकता है। देखना है आगे क्या होता है।
‘महादेव’ और शिव पुराण

महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के दो डायरेक्टर सौरभ चंद्राकर, और रवि उप्पल दुबई में दो दिन पहले कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का प्रवचन सुनते नजर आए। पंडित मिश्रा की कथा फेसबुक से लेकर आस्था चैनल पर देखी जा सकती है। दुबई में चल रही कथा का सीधा प्रसारण हो रहा था, तब कई लोगों की नजर सौरभ और रवि उप्पल पर पड़ी। कुछ दिन पहले तक पुलिस अफसर सट्टेबाज सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी का दावा कर रहे थे। वो भी सौरभ, और रवि उप्पल को देखकर हक्का-बक्का रह गए। दुबई में प्रदीप मिश्रा का कार्यक्रम ली-मेरिडियन होटल एंड कॉन्फ्रेंस सेंटर गरहौद में हुआ था। चर्चा है कि इस कथा का आयोजन सौरभ चंद्राकर, और उनके परिवार ने किया था।
बताते हैं कि दोनों कुख्यात सट्टेबाज सौरभ, और रवि उप्पल को लाने में कुछ दिन पहले तक छत्तीसगढ़ पुलिस की दिलचस्पी दिख रही थी। दुर्ग पुलिस की एक टीम दिल्ली भी गई थी, और केन्द्रीय गृह मंत्रालय में सौरभ चंद्राकर व रवि उप्पल का डोजियर जमा कर आई थी। ताकि दोनों का जल्द से जल्द प्रत्यर्पण हो सके। मगर अब जब उनके खुले तौर पर सार्वजनिक कार्यक्रम में शरीक होने की बात सामने आई है, तो कई नए खुलासे भी हो रहे हैं। अब यह कहा जा रहा है सौरभ को कभी गिरफ्तार ही नहीं किया गया था। रवि उप्पल जरूर एक हफ्ते दुबई पुलिस की कस्टडी में रहा, लेकिन उसे भी बाद में छोड़ दिया गया। कुछ जानकार बताते हैं कि उनका प्रत्यर्पण आसान नहीं है। दुबई में वो एक कारोबारी के रूप में जाने जाते हैं। कारोबार भी वहां के नियमों के मुताबिक कर रहे हैं।
चर्चा तो यह भी है कि सट्टेबाजों को लाने में किसी की भी कोई दिलचस्पी नहीं है। भूपेश बघेल सरकार में महादेव सट्टा खूब फला फूला, और बढ़ा था। इसके हितग्राहियों में नेता, अफसर, और कारोबारी भी हैं। जिसकी पकड़ सभी दलों में हैं। इसकी वजह से भी दोनों सट्टेबाजों पर कार्रवाई में हील हवाला बरता जा रहा है। ये बात अलग है कि इससे बड़े कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा जरूर घिर सकते हैं। पंडित मिश्रा का रायपुर के सेजबहार में 25 तारीख से शिव महापुराण कथा वाचक करने वाले हैं। वो भले ही दोनों को न जानते हों, लेकिन उनके यहां कथा करने पर जवाब देना पड़ सकता है।
एक सवाल का जवाब न आ पाया

सरकार के एक साल पूरा होने के मौके पर सीएम विष्णुदेव साय अपने मंत्रियों के साथ मीडिया से रूबरू हुए। प्रेस कॉन्फ्रेंस काफी तामझाम से हुई। साय ने सरकार की उपलब्धियों को गिनाया भी, और मीडिया के सवालों के जवाब भी दिए।
तीन-चार सवाल ही हो पाए थे कि डिप्टी सीएम अरुण साव, और विजय शर्मा ने पत्रकारों से आग्रह किया कि सीएम साब को दौरे पर जाना है इसलिए बाकी सवाल बाद में भी कर सकते हैं। फिर भी एक सवाल जोरों से पूछा गया कि क्या इस माह मंत्रिमंडल के खाली पद भरे जाएंगे? तब तक सीएम साब उठ गए थे। अब जवाब नहीं आया, तो चर्चाओं का दौर जारी रहेगा। जब तक इसका स्पष्ट उत्तर नहीं आ जाता।


