राजपथ - जनपथ
हिसाब-किताब चुकता करने का मौका
हरियाणा विधानसभा चुनाव में हार के कारणों का पता लगाने के लिए कांग्रेस ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई है, जिसके मुखिया पूर्व सीएम भूपेश बघेल हैं। इस कमेटी में राजस्थान के पूर्व मंत्री हरीश चौधरी भी हैं, जो कि छत्तीसगढ़ में हार के कारणों का पता लगाने के लिए बनी वीरप्पा मोइली कमेटी के भी सदस्य थे।
हार के कारणों का पता लगाने भूपेश बघेल दिल्ली गए हैं, और वहां से हरियाणा जाएंगे। खास बात यह है कि हरियाणा में हार के कारणों के लिए कई कारण गिनाए जा रहे हैं। उनमें से एक कारण पूर्व केंद्रीय मंत्री सैलजा की नाराजगी भी रही है। उनकी नाराजगी के चलते दलित वोटर कांग्रेस से छिटक गए, जिससे पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा। सैलजा चुनाव प्रचार के दौरान अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर दी थी, और उनके पार्टी छोडऩे की चर्चा भी रही। मगर प्रचार खत्म होने के दो-तीन दिन पहले ही पार्टी नेतृत्व की समझाइश पर सक्रिय हुईं। दिलचस्प बात यह है कि सैलजा छत्तीसगढ़ कांग्रेस की प्रभारी रही हैं, और यहां प्रभारी रहते उनके भूपेश बघेल से संबंध अच्छे नहीं रहे हैं।
कुछ सूत्र बताते हैं कि सैलजा ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की हार के लिए पूर्व सीएम भूपेश बघेल को जिम्मेदार ठहराया था। सैलजा ने एक रिपोर्ट हाईकमान को दी थी। अब पार्टी ने भूपेश बघेल को हरियाणा में हार के कारणों को पता लगाकर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। ऐसे में भूपेश की रिपोर्ट में क्या कुछ आता है, इस पर पार्टी नेताओं की उत्सुकता है।
लॉ इंटर्न और विभागीय घाघ

नवंबर दिसंबर आते ही प्रोफेशनल कॉलेजों के छात्रों के इंटर्नशिप कोर्स का दौर शुरू हो जाता है। विधि के छात्र इन दिनों राज्य मंत्रालय के विभागों में इंटर्न के लिए संलग्न किए गए हैं। नए शहर के ही राष्ट्रीय विधि विवि के करीब 18 छात्र छात्राएं इंटर्नशिप कर रही हैं। एक पूर्व मुख्य सचिव की बनाई व्यवस्थानुसार इनके इंटर्नशिप का यह सिलसिला बीते 10 वर्ष से चल रहा है। वह भी केवल इसी विवि के विद्यार्थियों के लिए। रविवि, कुसुम ताई दाबके, छत्तीसगढ़ कॉलेज के विधि छात्रों के लिए ऐसे अवसर नहीं हैं। पहले इनकी संख्या 40-40 तक होती थी? जो कालांतर में कम होती गई।
साप्रवि की मदद से विधि विभाग इन छात्रों की अलग अलग विभागों में नियुक्त करता है। जो छह से आठ माह तक होती है। इनका काम है, कोर्ट में लंबित विभागीय केस में विभाग की जीत हो,ऐसी विधि-कानूनी सलाह देना। इसके बदले में प्रत्येक इंटर्न को इस बार 1-1 लाख रुपए स्टाइपेंड दिया जाएगा। शुरुआती वर्ष में यह 40 हजार तक दिया गया उसके बाद 75 हजार और अब सीधे एक लाख।
इस वर्ष 18 इंटर्न पर सीधे 18 लाख का पेमेंट होगा। इन दस वर्ष में इनकी बनाई केस डायरी से विभागों की कितनी याचिकाओं में जीत हुई, इनकी संख्या को लेकर दावे प्रतिदावे हो सकते हैं। यह भी है कि विधि विभाग, साप्रवि के घाघ लोगों के बीच इन इंटर्न के कानूनी किंतु, परंतुक कितनी चलती होगी। यही सच भी है, सुबह आकर अपने अपने विभाग में अटेंडेंस साइन कर ये महानदी भवन के गलियारे में घूमने मजबूर हैं। यदि ऐसा है तो सरकार हर वर्ष लाखों रूपए यूं ही स्टाईपेंड में गवां रहीं हैं।
संपन्नता और कुत्ते
रायपुर शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक महंगी कॉलोनी के रहवासी कुत्तों से परेशान हैं। उन्हें इवनिंग वॉक में दिक्कत आ रही है। खास बात यह है कि इस कॉलोनी में प्रभावशाली नेता, अफसर, और बड़े कारोबारी रहते हैं। सर्व सुविधायुक्त इस कॉलोनी की सुरक्षा व्यवस्था हाईटेक है। बावजूद इसके यहां आवारा कुत्ते लोगों की परेशानी का सबब बन गए हैं।
दरअसल, यह समस्या यहां के कुछ लोगों द्वारा पैदा की गई है। यहां के रहवासी कारोबारी परिवार के लोग कुत्तों को रोटी खिलाना पसंद करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भोजन की आखिरी रोटी कुत्तों को देने से धन-धान्य बढ़ता है। इस मान्यता के चलते कुत्तों को रोटी देने के लिए रात में कई परिवार निकल जाते हैं। इसका नतीजा यह हो गया है कि कुत्तों की भरमार हो गई है, और इवनिंग वॉक करने वाले लोग परेशान हो गए हैं। फिलहाल तो इस समस्या का कोई निदान निकलता नहीं दिख रहा है।
पानी है, गिलास नहीं
रायपुर एयरपोर्ट को यात्री सुविधाओं के लिए पहले, कभी देश, कभी एशिया तो कभी राष्ट्रकुल देशों में टॉप थ्री, टॉप टेन जैसे तमगे मिलते रहे हैं। इतना ही नहीं यह फुटफॉल यात्री आवाजाही के मामले में भी रिकॉर्ड बनाते रहा है। एयरपोर्ट प्रबंधन अभी भी यात्रियों की रिकार्ड आवाजाही को हर सप्ताह शेयर करता है। और एयरपोर्ट में यात्री सुविधाओं को रेखांकित करता है। लेकिन यहां तो यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाएं भी नहीं है। यानी यात्री को घर से पानी पीकर निकलना होगा। क्योंकि एयरपोर्ट में नल तो है लेकिन पीने के लिए गिलास नहीं है। इस बेहतरीन एयरपोर्ट पर पूर्व महाधिवक्ता कनक तिवारी का फेसबुक पोस्ट रिलेवेंट है।
उन्होंने लिखा कि यह रायपुर एयरपोर्ट है। हम मुसाफिर हैं। गाय बैल की तरह पानी पी रहे हैं। हजारों लाखों सरकार हमसे लेती है। बेइज्जती करने में देरी नहीं करती। ग्लास तक नहीं रखे हैं। कहां हैं नागरिक उड्डयन मंत्री? बहुत बड़े तीस मार खां तो बनते हैं केंद्रीय निजाम के सरगना। हो सकता है विदेश की नकल हो लेकिन इस तरह भारत में पानी पीना तो अनहाइजीनिक है।


