राजपथ - जनपथ
मुख्य सूचना आयुक्त के लिए दौड़ शुरू
राज्य सरकार ने सूचना आयोग में रिक्त मुख्य आयुक्त की नियुक्ति के लिए राज्य प्रशासन में हलचल शुरू हो गई है। जीएडी ने आवेदन बुलाए हैं।
दूसरी तरफ, यह भी साफ दिख रहा है कि सरकार वर्तमान दोनों आयुक्त में से किसी को भी पदोन्नत नहीं करना चाह रही हालांकि इसके खूब प्रयास जोड़ तोड़ किए जाते रहे हैं। योग्य अर्हताधारी 16 दिसंबर तक जीएडी में आवेदन, आफलाइन रजिस्टर्ड या स्पीड पोस्ट से ही जमा कर सकेंगे। आश्चर्य है कि ऑनलाइन के इस युग में लेटलतीफी के पर्याय कहे जाने वाले डाक विभाग पर इतना भरोसा। जब नौकरियों के लिए आवेदन लेने वाले जीएडी यह निर्णय समझ नहीं आ रहा।
बहरहाल मुख्य सूचना आयुक्त के लिए किसी भी राज्य की विस, विधान परिषद, लोकसभा, राज्यसभा के साथ किसी भी दल का सदस्य नहीं होना चाहिए। न कोई कारोबार, वृत्ति न करता हो। लाभ के पद पर न हो, और हो तो छोडऩा होगा। लॉ, आईटी, समाजसेवा, पत्रकारिता, प्रबंधन, जनसंपर्क या प्रशासन में व्यापक ज्ञान, अनुभव रखता हो। साप्रवि ने यह सब शर्ते रखी हैं लेकिन शैक्षणिक योग्यता नहीं। खैर, यह अनुभव, इन क्षेत्रों की शैक्षणिक योग्यता रखने के बाद ही आता है।
इन आवेदनों की छंटनी और सीएम, नेता प्रतिपक्ष वाली समिति के चयन के बाद नियुक्ति तीन वर्ष के लिए और वेतन 2.25 लाख होगा। बीती फरवरी में दो आयुक्त नियुक्त किए जा चुके हैं। उस वक्त आवेदन 160 से अधिक आए थे। अब देखना होगा कितने आएंगे। या आउट ऑफ द एप्लिकेंट कोई नाम आ जाए।
कुछ माह पहले राज्य वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेन्द्र पाण्डेय ने सीएम विष्णुदेव साय से मिलकर जल्द से जल्द मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति की मांग की थी। उन्होंने सुझाव दिया था कि मुख्य सूचना आयुक्त, किसी रिटायर्ड अफसर के बजाए न्यायिक सेवा अथवा सीनियर वकील को बनाया जाना चाहिए। सूचना आयोग के गठन के बाद से जितने भी मुख्य सूचना आयुक्त बने हैं, वो सभी रिटायर्ड आईएएस ही थे।
पैकरा को कुछ मिलने की चर्चा
पूर्व गृहमंत्री रामसेवक पैकरा को मुख्यधारा में लाया जा सकता है। पैकरा को विधानसभा टिकट नहीं दी गई थी। वो सरगुजा से लोकसभा चुनाव लडऩा चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उनकी जगह चिंतामणि महाराज को प्रत्याशी बना दिया। बावजूद इसके पैकरा शांत रहे, और पार्टी के लिए काम करते रहे।
पैकरा, प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। हल्ला है कि उन्हें पाठ्य पुस्तक निगम का अध्यक्ष बनाया जाएगा। बुधवार को पार्टी दफ्तर में इसकी काफी चर्चा रही। कुछ लोग वस्तु स्थिति की जानकारी लेने के लिए मंत्रालय भी फोन लगाते रहे, लेकिन सूचना गलत निकली। अलबत्ता, कुछ प्रमुख नेताओं ने उन्हें अहम जिम्मेदारी देने के लिए अलग-अलग स्तरों पर बात की है। देखना है कि पैकरा को क्या कुछ मिलता है।
मंत्रियों के तेवर
नारायणपुर के एकलव्य आदर्श विद्यालय छोटेडोंगर का एक वीडियो आम आदमी पार्टी ने सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में दिखाया गया कि टॉयलेट कक्ष को तोप-ढांक क्लासरूम में बदल दिया गया है। इसे लेकर मंत्री केदार कश्यप ने संबंधित अफसरों पर कार्रवाई की बात तो कही, लेकिन उनका मुख्य जोर इस बात पर रहा कि बालिका विद्यालय में प्रशासन की अनुमति के बिना प्रवेश करने और वीडियो बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह बात सही है कि बालिका छात्रावास एक संवेदनशील स्थान है, जहां बाहरी व्यक्तियों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। लेकिन इस घटना ने वास्तव में बालिका आवासीय विद्यालयों में मौजूद खामियों को भी उजागर कर दिया। सवाल उठता है कि ऐसी ढीली सुरक्षा व्यवस्था क्यों है, जहां कोई भी बिना रोक-टोक के पहुंचकर वीडियो बना लेता है? बालिकाओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं हैं?
पिछले महीने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल बलौदाबाजार के दौरे पर थे। मीडियाकर्मियों ने झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई न होने को लेकर मंत्री से पूछा कि क्या अधिकारी इन डॉक्टरों को बचा रहे हैं? मंत्री का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो सबूत लाएं, अन्यथा आप पर मानहानि का केस होगा। सबूत मिलने पर संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
क्या सरकार की आलोचना को दबाने का यह तरीका सही है? मंत्रियों के इस तरह के तेवर अफसरों को तो राहत देते हैं, लेकिन प्रशासन की कमियों को उजागर करने वालों में डर पैदा होता है।
भावी अग्निवीरों से ऐसा व्यवहार?

कल से रायगढ़ में सेना भर्ती रैली शुरू हुई है। फिजिकल टेस्ट के लिए पहुंचे युवाओं को रेलवे स्टेशन से स्टेडियम तक ले जाने के लिए प्रशासन ने फ्री बस सेवा देने का वादा किया था। लेकिन युवाओं की भारी संख्या के मुकाबले बसों की व्यवस्था नहीं की गई। ऐसी स्थिति में नगर निगम की कचरा गाड़ी को युवाओं को ढोने के लिए लगा दिया गया। कई युवाओं ने इस गाड़ी में चढऩे से इनकार कर दिया और निजी साधनों से स्टेडियम पहुंचे। हालांकि, मजबूरी में बाकी युवा कचरा गाड़ी में बैठने को तैयार हो गए। कैमरे के सामने बोलने से बचते हुए उन्होंने ऑफ द रिकॉर्ड बताया कि पैसे बचाने के लिए ऐसा करना पड़ा। यह भर्ती रैली 12 दिसंबर तक चलेगी। लेकिन पहले ही दिन कचरा गाड़ी में युवाओं को ढोने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं, जिससे प्रशासन की बड़ी फजीहत हो रही है। देखना होगा कि प्रशासन आने वाले दिनों में अग्निवीरों के लिए बेहतर परिवहन व्यवस्था करता है या नहीं।


