राजपथ - जनपथ
नाम बड़े दर्शन छोटे
राजधानी रायपुर की एक बड़ी पुरानी रिहायशी कॉलोनी में रिलायंस कंपनी का घरेलू कामकाज की चीजों का बड़ा सा स्टोर खुला। एकदम सुबह से काम शुरू करने वाले इस स्टोर से सुबह जल्दी सामान चाहने वाले लोगों को सहूलियत होने लगी थी। इसके फ्लॉप होकर बंद होने की कोई वजह नहीं दिखती थी। लेकिन कुछ हफ्ते पहले इसे बंद कर दिया गया।
यह पत्रकार वहां कई बार सामान लेने गया। और ऐसे दर्जन भर मौकों में से एक भी ऐसा नहीं था जब काउंटर पर खड़े लोगों ने बदतमीजी से बात न की हो। ब्रांड और कंपनी चाहे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हो जाएं, उन दुकानों पर काम करने वाले लोग अगर बदसलूकी पर उतारू हों, और काउंटर पर लगे कैमरे भी कर्मचारियों का बर्ताव न सुधारें, तो धंधे का मंदा, और फिर बंद होना बहुत लंबा काम नहीं होता। हर किसी को यह याद रखना चाहिए कि जब तक वे किसी एकाधिकार वाले धंधे में न हों, तब तक उनकी बदतमीजी नहीं चल सकती। अब आज रेलगाड़ी में कोई कर्मचारी तमीज से बात करे, या बदतमीजी से, जनता के पास उसका कोई विकल्प नहीं है। लेकिन रसोई और घर के बाकी छोटे-छोटे सामानों के धंधे में कोई मोनोपोली तो है नहीं, शहरों में हर चौथाई किलोमीटर पर दुकानें रहती हैं, इसलिए बड़े ब्रांड को अपनी साख का भी ख्याल रखना चाहिए, वरना स्टोर में लगे कैमरे किस काम के?
बड़े आसामी का नाम नहीं
रायपुर के वीआईपी रोड स्थित शगुन फॉर्म में रविवार को आबकारी अमले ने छापेमारी कर विदेशी शराब बरामद की। फॉर्म में कॉकटेल पार्टी चल रही थी, जिसके लिए मेजबान ने आबकारी लाइसेंस नहीं लिया था, और जब आबकारी अमला पहुंचा, तो वहां अफरा-तफरी मच गई।
बताते हैं कि पार्टी के लिए हरियाणा से शराब आई थी। आबकारी अमले ने कार्रवाई शुरू की, तो प्रभावशाली मेजबान ने एक पूर्व मंत्री से संपर्क कर प्रकरण को रफा-दफा करने की भरसक कोशिश भी की। पूर्व मंत्री ने विभाग के आला अफसरों को फोन भी लगाया, लेकिन आबकारी अमला हड़बड़ी में था। तुरंत प्रकरण दर्ज कर लिया, और सरकारी प्रेस नोट जारी कर दिया।
आबकारी अमले ने मेजबान के भाग दौड़ पर इतनी उदारता दिखाई कि उनका नाम प्रेस नोट में जारी नहीं किया। मगर बरामद किए गए शराब के ब्रांड के नाम सार्वजनिक कर दिए जिससे यह अंदाज जरूर लग गया कि मेजबान बड़ा आसामी है।
शासकीय कार्य बाधा का जुर्म

शासकीय कार्यालय में कार्यावधि यानी सुबह 10 से शाम 5.30 के दौरान अधिकारी कर्मचारियों से मारपीट या विवाद करना अपराध होता है। ऐसा करने पर गिरफ्तारी से लेकर सजा तक का प्रावधान है।
हालांकि व्यक्तिगत रूप से ऐसे मामले कम ही होते हैं और दलीय झुंड ऐसे मामले अधिक करते हैं। लेकिन सजा होने के कम ही मामले हुए हैं। और फिर इन मामलों को सरकार राजनीतिक मामले कहकर रद्द भी करती रही हैं। आजकल हर कोई व्यक्ति जैसे ठेकेदार, तथाकथित नेता, एवं आरटीई कार्यकर्ता सूचना के नाम पर दबाव बनाते हैं। इनमें भी अधिकारी कर्मचारियों की व्यक्तिगत एवं उनके परिवार की जानकारी ले निहितार्थ में ब्लैकमेलिंग करना होता है।
इन मामलों के प्रकाश में एक जागरूक कर्मचारी नेता ने ऐसे मामलों पर दर्ज होने वाले अपराधों पर धाराओं के प्रावधानों की एग्जाई जानकारी शेयर की है। बस कर्मचारियों को अपने-अपने दफ्तर से बाहर इन्हें सूचना बोर्ड या फ्लैक्स लगाकर सार्वजनिक करना होगा। इन्हीं नेता ने कुछ वर्ष पहले अभनपुर तहसील के एक बर्खास्त कर्मचारी को ऐसी ही जानकारी देकर बहाल करने में अहम भूमिका निभाई थी। बताया गया है कि इस कर्मचारी ने एक आरटीई कार्यकर्ता के दबाव में अपने साहब की जानकारी दी थी।
राजधानी का फासला कम नहीं हुआ
सरगुजा और बस्तर दो ऐसे इलाके हैं, जिनके लिए राजधानी का फासला लगातार हवाई सेवाओं के विस्तार के बाद भी कम नहीं हो पाया है। अंबिकापुर से रातभर ट्रेन का सफर कर राजधानी रायपुर पहुंचा जा सकता है लेकिन बस्तर के लोगों को केवल बस पर निर्भर रहना होता है। रायपुर और जगदलपुर के बीच हवाई सेवा शुरू होने के बाद बंद की जा चुकी है। इसी तरह यहां के लोगों की मांग विशाखापट्टनम और भुवनेश्वर के लिए भी हवाई सेवाओं की है। अभी हैदराबाद, दिल्ली, कोलकाता के लिए बिलासपुर के रास्ते से हवाई सेवा चल रही है। पर स्थानीय मांग के अनुरूप सेवाओं में विस्तार नहीं हो रहा है।
टॉपर खुलकर इंटरव्यू दे रहे
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के परीक्षा परिणामों पर इस बार कोई सवाल नहीं उठा रहा है। सरकार ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में धांधली को रोकने को चुनावी वादे में मोदी की गारंटी के रूप में शामिल किया था। जब 2021 के नतीजे आए तो तुरंत बाद उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे। सवाल तो अपनी जगह थे, जो टॉपर थे वे भी कहीं छिप गए। वे मीडिया के सामने आ नहीं रहे थे। किस तरह उन्होंने तैयारी की, सफलता कैसे मिली यह बाकी प्रतियोगियों के लिए उदाहरण बन सकता था, पर वे अपने संघर्ष के बारे में बताने के लिए आगे आए ही नहीं। इस बार जिन्होंने अपनी मेहनत से कामयाबी हासिल की है वे खुलकर मीडिया से बात कर रहे हैं। जो रैंकिंग में पिछड़ गए, उनको भी शिकायत नहीं है। वे अगली बार ज्यादा मेहनत करने की बात कर रहे हैं।
सोनकंठी गौरेया

गौरेया तो छत्तीसगढ़ में बहुतायत से मिलते हैं। पर इस गौरेये में एक खास बात है। इसके कंठ का एक हिस्सा पीला है। यह गौरैया है तो भारत की ही, लेकिन इस ठंड के मौसम में छत्तीसगढ़ में बहुतायत में दिखाई देते हैं। प्रख्यात पक्षी विज्ञानी सलीम अली ने अपनी किताब फाल ऑफ ए स्पेरो में जिक्र किया है कि वे शिकारी बनना चाहते थे लेकिन इस पक्षी को देखने के बाद उन्होंने पक्षियों पर ही शोध करना अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया।


