राजनांदगांव

छेरछेरा माई कोठी के धान ला हेर हेरा...
03-Jan-2026 3:08 PM
छेरछेरा माई कोठी के धान ला हेर हेरा...

 घर-घर पहुंचे बच्चों को मिला अन्न-खाद्य सामान
 छेरछेरा पर्व पर बच्चों में दिखा उत्साह
'छत्तीसगढ़'  संवाददाता
राजनांदगांव, 3 जनवरी।
पौष शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर शनिवार को शहर समेत जिलेभर में छेरछेरा पर्व मनाया जा रहा है। पर्व को लेकर शहर समेत अंचल के गली-मोहल्लों में बच्चों से लेकर युवतियां भी छेर-छेरा माई कोठी के धान.... के पारंपरिक लोकगीत में झूमते दान मांगते नजर आए। छेरछेरा पर्व को लेकर शनिवार को बच्चे छेरछेरा गीत के साथ नृत्य करने में मशगूल नजर आ रहे हैं। गीत एवं नृत्य करते युवतियों में उत्साह नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ का खास लोकपर्व छेरछेरा है। यह पौष पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।  

मिली जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ में यह पर्व नई फसल के खलिहान से घर आ जाने के बाद मनाया जाता है। यह उत्सव कृषि प्रधान संस्कृति में दानशीलता की परंपरा को याद दिलाया है। इस दौरान लोग घर-घर जाकर अन्न का दान मांगते हैं। वहीं गांव के युवक घर-घर जाकर डंडा नृत्य करते हैं। इधर छेरछरा पर्व के चलते आज शहर के अलग-अलग इलाकों के गली-मोहल्लों में छोटे बच्चे, युवक-युवतियों द्वारा हाथों में थैला लेकर घर-घर और दुकान-दुकान पहुंचकर छेरछेरा गीत के माध्यम से दान मांगते नजर आ रहे हैं। वहीं बच्चों में इस गीत के माध्यम से उत्साह भी छलक रहा है। इसके अलावा लोगों को छत्तीसगढ़ी पर्व छेरछेरा की झलक से अपनी पुरानी यादें आंखों के सामने नजर आई।

छत्तीसगढ़ प्रदेश का पारंपरिक पर्व छेरछेरा त्यौहार शनिवार को अंचल में मनाया जा रहा है। छेरछेरा पर्व पौष पूर्णिमा के दिन छत्तीसगढ़ में धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इसे छेरछेरा पुन्नी या छेरछेरा तिहार भी कहते हैं। इसे दान लेने-देने का पर्व माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन दान करने से घरों में धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती। इस दिन छत्तीसगढ़ में बच्चे और बड़े, सभी घर-घर जाकर अन्न का दान ग्रहण करते हैं और युवा डंडा नृत्य करते है।

 सभी कहते हैं छेरछेरा... माई कोठी के धान ला हेर हेरा
इस पर्व को मानते हुए बच्चों और बड़े-बुजुर्गों की टोलियां एक अनोखे बोल, बोलकर दान मांगते हैं। दान लेते समय बच्चे छेर छेरा माई कोठी के धान ला हेर हेरा कहते हैं और जब तक घर की महिलाएं अन्न दान नहीं देती, तब तक वे कहते रहेंगे अरन बरन कोदो दरन, जब्भे देबे तब्भे टरन इसका मतलब ये होता है कि बच्चे कह रहे हैं, मां दान दो, जब तक दान नहीं दोगे, तब तक हम नहीं जाएंगे।


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