राजनांदगांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 14 जून। राजनांदगांव पुलिस ने एक जवान को खुदकुशी के लिए उकसाने के मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया है। विजय गुप्ता नामक व्यक्ति को कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने सुरक्षा प्रदान की थी। पुलिस सुरक्षा का जिम्मा सम्हालने वाले एक आरक्षक अल्वीक तिर्की ने साल 2018 में आत्महत्या कर ली थी। खुदकुशी से पहले लिखे पत्र में जवान ने अपनी मौत के लिए विजय गुप्ता को ही जिम्मेदार ठहराया था। विजय गुप्ता उस समय सुर्खियों में आया जब साल 2014 में गढ़चिरौली के बेदकाठी पुलिस-नक्सल मुठभेड़ के मुखबीर के रूप में उसका पर्दाफाश हुआ था। उस पर नक्सलियों के मूवमेंट की पुलिस को सूचना देने का आरोप था। इस इन्काउंटर में पुलिस ने 7 हार्डकोर नक्सलियों को चीचगढ़ थाना क्षेत्र के बेदकाठी इलाके में ढ़ेर कर दिया था। नक्सलियों को इस वारदात के बाद विजय गुप्ता की तलाश थी। अपनी सुरक्षा के लिए विजय गुप्ता ने कोर्ट से जवान तैनात करने की मांग की थी। इसके बाद राजनांदगांव पुलिस ने उसे सुरक्षा मुहैया कराते अल्वीक तिर्की को जिम्मा सौंपा था।
बताया जा रहा है कि 2018 में आरक्षक तिर्की ने विजय गुप्ता पर प्रताडि़त करने का आरोप लगाते आत्महत्या कर ली। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि विजय गुप्ता अपनी पत्नी के साथ जवान का अवैध संबंध होने पर प्रताडि़त कर रहा था और वह बार-बार नौकरी खा जाने की धमकी देने लगा था। इस बात से तंग आकर जवान ने आत्महत्या कर ली। इस मामले की जांच करते पुलिस ने विजय गुप्ता को दोषी मानते गिरफ्तार कर लिया है। यहां यह बता दें कि विजय गुप्ता लगातार महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ पुलिस पर नक्सल नीतियों में दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाता रहा है। खासतौर पर गढ़चिरौली पुलिस को लेकर वह हमेशा मुखर रहा है। उसका आरोप है कि नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में पुलिस का साथ देकर वह फंस गया। पुलिस ने उसका महज उपयोग किया। वहीं राजनंादगांव जिले के नक्सल पीडि़त परिवारों के हितों को लेकर भी विजय गुप्ता पुलिस के खिलाफ आक्रामक रहा है। नक्सली पुनर्वास के नाम पर अफसरों की कार्यप्रणाली को लेकर भी वह गंभीर सवाल उठाता रहा है। फिलहाल लालबाग पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।


