महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद,14अप्रैल। महासमुंद नगर में रविवार को वैचारिक समागम का आयोजन किया गया। इस दौरान 58 विभिन्न समाजों के प्रबुद्धजनों ने एक स्वर में सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता की बात कही। इस सामाजिक सद्भाव बैठक के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों और धर्मांतरण जैसी चुनौतियों के विरुद्ध साझा रणनीति तैयार करने और आपसी भाईचारे को प्रगाढ़ करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रांत सामाजिक सद्भाव प्रमुख कौशलेंद्र प्रताप ने पंगत और संगत की अवधारणा पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि पंगत हमें समानता की सीख देती है। जहां ऊंच-नीच का भेद समाप्त हो जाता है और संगत हमें संस्कारवान बनाती है। जब पंगत में प्रेम का स्वाद और संगत में राष्ट्रवाद का विचार मिलता है, तभी वास्तविक सामाजिक सद्भाव का निर्माण होता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज की चुनौतियों का समाधान किसी एक बैठक से संभव नहीं है। बल्कि यह निरंतर संवाद की एक प्रक्रिया है। उन्होंने मिशन सद्भाव को भविष्य में और अधिक गतिमान बनाने का आह्वान किया। नगर संघ चालक भूपेंद्र राठौड़ ने प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए वर्तमान समय में धर्मांतरण और सामाजिक करते हुए वर्तमान समय में धर्मांतरण और सामाजिक बिखराव जैसी स्थितियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने प्राचीन ऋषियों के मंत्र हम साथ चलें, साथ बोलें का स्मरण कराते हुए एकता की आवश्यकता पर जोर दिया।
इसी बीच जैनेंद्र चन्द्राकर ने धरम ध्वजा हाथ में, सब समाज साथ में गीत प्रस्तुत किया। इस मौके पर उमेश भारती गोस्वामी, राजेश डड़सेना,यज्ञराम सिदार, महेश चन्द्राकर, भगोली राम साहू और भारी संख्या में अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
बैठक में क्षत्रिय राजपूत, ब्राह्मण,ध्रुव गोंड़, सतनामी, सिक्ख, जैन, साहू, कुर्मी, निषाद और वाल्मीकि समाज सहित कुल 58 समुदायों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।


